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पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सूरत बदलने वाली और एनसीआर की परिवहन क्रांति का वाहक बन रहे 'रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम' (RRTS) कॉरिडोर के निर्माण के चलते, मेरठ शहर की लाइफलाइन कही जाने वाली 'दिल्ली रोड' पिछले काफी समय से जाम के ग्रहण से जूझ रही है। भूमिगत (अंडरग्राउंड) कॉरिडोर के निर्माण और बैरिकेडिंग के कारण दिल्ली रोड का एक बड़ा हिस्सा 'बोटलनेक' (Bottleneck) बन गया था, जिससे यहां दिनभर रेंगता ट्रैफिक आम जनता और व्यापारियों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ था।READ ALSO:-मेरठ कैंट में सेना का 'बैरियर': टैंक चौराहे से माल रोड का रास्ता सील, बेगमपुल पर रेंगने लगी गाड़ियां; 'सुरक्षा' के नाम पर जनता की 'सुविधा' पर ताला?
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लेकिन अब, जिला प्रशासन और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) ने इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में 'मिशन मोड' में काम शुरू कर दिया है। दिल्ली रोड को दोनों ओर तीन-तीन मीटर चौड़ा करने की महत्वाकांक्षी योजना के लिए सबसे बड़ी बाधा यानी 'भूमि अधिग्रहण' की प्रक्रिया को जिला प्रशासन ने कागजों पर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। प्रशासन ने न केवल जमीन का अधिग्रहण फाइनल किया है, बल्कि प्रभावित होने वाले 70 व्यापारियों और भूमि मालिकों के लिए मुआवजे के अवार्ड भी तैयार कर लिए हैं। राहत की बड़ी खबर यह है कि मुआवजे की राशि का वितरण शुरू हो चुका है।
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हालांकि, विकास की इस तेज रफ़्तार राह में अभी भी कुछ मानवीय और तकनीकी चुनौतियां बाकी हैं। जिन पांच व्यापारियों की दुकानें इस परियोजना में पूरी तरह से जमींदोज होने वाली हैं, उन्होंने मुआवजे के बजाय पुनर्वास यानी 'दुकान के बदले दुकान' की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। वहीं, कुछ तकनीकी खसरा नंबरों के छूटने से प्रशासन को अब नई रणनीति अपनानी पड़ रही है।
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जाम से कराहती दिल्ली रोड को मिलेगी 'सिक्स लेन' जैसी सांस

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मेरठ का दिल्ली रोड केवल एक सड़क नहीं, बल्कि शहर की वाणिज्यिक धुरी (Commercial Hub) है। भैंसाली बस अड्डे से लेकर परतापुर और शताब्दी नगर तक, यह सड़क शहर के सबसे व्यस्ततम इलाकों को जोड़ती है। रैपिड रेल परियोजना के तहत जब यहां भूमिगत कॉरिडोर और स्टेशनों का निर्माण शुरू हुआ, तो जगदीश मंडप, भैंसाली और आसपास के क्षेत्रों में सड़क की चौड़ाई काफी कम हो गई। पीक आवर्स में एम्बुलेंस, स्कूल बसें और हजारों दोपहिया वाहन यहाँ घंटों फंसे रहते थे।
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इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए एनसीईआरटीसी ने एक 'मास्टरप्लान' तैयार किया है।
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    प्लान क्या है: दिल्ली रोड पर मौजूदा नालों को पीछे शिफ्ट किया जाएगा।
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    चौड़ीकरण: नाला शिफ्टिंग और अधिग्रहित जमीन का उपयोग करके सड़क को दोनों तरफ तीन-तीन मीटर चौड़ा किया जाएगा। यानी कुल मिलाकर सड़क को 6 मीटर अतिरिक्त चौड़ाई मिलेगी, जिससे मुख्य कैरिजवे ट्रैफिक के लिए बेहद सुगम हो जाएगा।
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मुआवजा वितरण: सत्यापन से लेकर खाते में ट्रांसफर तक

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जिला प्रशासन ने दिल्ली रोड चौड़ीकरण प्रोजेक्ट को शीर्ष प्राथमिकता पर रखा है। इस परियोजना के लिए एनसीईआरटीसी के प्रस्ताव के तहत कुल 70 दुकानों और भवनों के हिस्सों का अधिग्रहण चिन्हित किया गया था।
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अगले सप्ताह तक टारगेट पूरा करने का दावा: अधिकारियों के अनुसार, अधिग्रहण की विधिक प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। प्रशासन ने मुआवजे के वितरण के लिए एक पारदर्शी सिस्टम बनाया है:
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    दस्तावेज सत्यापन: भूमि मालिकों से उनकी जमीन या दुकान के मालिकाना हक (Registry/Ownership) के पक्के दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।
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    वेरिफिकेशन: राजस्व विभाग की टीम इन दस्तावेजों का गहन सत्यापन कर रही है ताकि भविष्य में कोई कानूनी विवाद न हो।
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    डायरेक्ट ट्रांसफर: दस्तावेजों की पुष्टि होते ही, बिना किसी देरी के मुआवजा राशि सीधे संबंधित व्यक्ति के बैंक खाते में आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से भेजी जा रही है।
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अधिकारियों का दावा है कि कई व्यापारियों को मुआवजा मिल भी चुका है और जिस तेजी से काम चल रहा है, उम्मीद है कि अगले सप्ताह तक मुआवजा वितरण का यह कार्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया जाएगा।
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विवाद का केंद्र: 5 व्यापारियों का 'अस्तित्व' संकट

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जहां एक तरफ आंशिक रूप से प्रभावित हो रहे 65 व्यापारियों के मामले सुलझते दिख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बहादुर मोटर के सामने स्थित पांच दुकानों का मामला प्रशासन के लिए गले की फांस बन गया है। चौड़ीकरण के नक्शे के मुताबिक, ये पांच दुकानें पूरी तरह से अधिग्रहण की जद में आ रही हैं, यानी इनका अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
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व्यापारियों का दर्द: इन दुकानदारों का तर्क है कि वे दशकों से यहां अपना कारोबार कर रहे हैं। सरकार द्वारा दिया जाने वाला नकद मुआवजा आज की महंगाई और दिल्ली रोड जैसी 'प्राइम लोकेशन' पर दोबारा कारोबार स्थापित करने के लिए ऊंट के मुंह में जीरा समान है।
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अल्टीमेटम: इन पांचों व्यापारियों ने एक सुर में 'दुकान के बदले दुकान' की मांग उठाई है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है:
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"अगर प्रशासन ने हमें कहीं और दुकान देकर पुनर्वासित नहीं किया, तो हम अपनी जमीन पर कब्जा नहीं देंगे। हम अपने परिवार और बच्चों के साथ भूख हड़ताल पर बैठने को मजबूर होंगे।"
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फिलहाल, इस मांग पर जिला प्रशासन और एनसीईआरटीसी के बीच मंथन चल रहा है, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। यह गतिरोध प्रोजेक्ट की टाइमलाइन को प्रभावित कर सकता है।
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प्रशासनिक चूक: 4 खसरा नंबर छूटे, अब 'बैनामे' की शरण में अफसर

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दिल्ली रोड चौड़ीकरण की इस पूरी कवायद में एक बड़ी तकनीकी चूक भी सामने आई, जिसे अब सुधारने के लिए अधिकारी पसीना बहा रहे हैं।
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क्या है मामला? एनसीआरटीसी ने जब शुरुआत में भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव बनाया था, तो उसमें अहम स्थानों के चार खसरा (Khasra) संख्या गलती से छूट गए थे। बाद में सर्वे में पता चला कि ये जमीनें बहादुर मोटर के आसपास और बेरीपुरा मोड़ वाली दुकानों की हैं। इंजीनियरों ने साफ कर दिया कि इन जमीनों के बिना सड़क का चौड़ीकरण तकनीकी रूप से संभव ही नहीं है, क्योंकि एलाइनमेंट सीधा नहीं हो पाएगा।
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नई रणनीति: सीधे बैनामा (Direct Sale Deed) चूंकि अब नए सिरे से भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत प्रक्रिया (धारा 11, 19 आदि की अधिसूचना) शुरू करने में महीनों का समय लगेगा, इसलिए प्रशासन ने 'शॉर्टकट' यानी बीच का रास्ता निकाला है।
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    अधिकारी अब इन जमीनों के मालिकों (व्यापारी राजीव जैन, अमित सचदेवा, जितेंद्र शर्मा, मुनीष, दीपांशु आदि) से सीधे बातचीत कर रहे हैं।
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    प्रयास यह है कि इनसे आपसी सहमति के आधार पर जमीन का सीधे बैनामा करा लिया जाए।
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    इससे अधिग्रहण प्रक्रिया में लगने वाला समय बच जाएगा और काम तुरंत शुरू हो सकेगा। हालांकि, व्यापारी अभी भी दरों और शर्तों को लेकर बातचीत (Negotiation) के दौर में हैं।
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अधिकारियों का बयान: "जल्द दौड़ेगा काम"

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इस पूरे मामले पर जिलाधिकारी (DM) डॉ. वी.के. सिंह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए प्रोजेक्ट की गंभीरता को रेखांकित किया है।
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"दिल्ली रोड के चौड़ीकरण के लिए प्रभावितों को मुआवजा भुगतान शुरू कर दिया गया है। हमारी प्राथमिकता है कि इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। 5 दुकानों के मामले में भी नियमानुसार समाधान निकाला जाएगा। जैसे ही मुआवजा वितरण और कब्जे की प्रक्रिया पूरी होगी, सड़क चौड़ीकरण का सिविल कार्य तत्काल शुरू करा दिया जाएगा, ताकि मेरठ की जनता को जाम से राहत मिल सके।" — डॉ. वी.के. सिंह, जिलाधिकारी, मेरठ
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भविष्य की तस्वीर: चौड़ी सड़क, तेज रफ़्तार

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अगर अगले सप्ताह तक मुआवजा वितरण और कब्जे की कार्रवाई पूरी हो जाती है, तो नए साल की शुरुआत में ही दिल्ली रोड पर बुलडोजर गरजते दिखाई देंगे।
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    नालों को पीछे शिफ्ट किया जाएगा।
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    यूटिलिटी (बिजली के खंभे, तार) शिफ्टिंग का काम होगा।
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    सड़क निर्माण के बाद रैपिड रेल स्टेशन तक पहुंचना आसान होगा।
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मेरठ की जनता को उम्मीद है कि प्रशासन व्यापारियों की समस्याओं का मानवीय हल निकालते हुए इस प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करेगा, ताकि वर्षों से जाम में फंसी दिल्ली रोड को मोक्ष मिल सके।
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