मेरठ (Meerut): उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से सरेआम गुंडागर्दी और पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा करने वाला एक बेहद संगीन मामला सामने आया है। यहाँ कोतवाली थाना क्षेत्र में चुनावी रंजिश (Election Rivalry) के चलते एक पूर्व पार्षद प्रत्याशी पर दिनदहाड़े जानलेवा हमला किया गया।
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आरोप है कि हमलावरों ने सरेराह पीड़ित की कनपटी पर तमंचा तान दिया और ट्रिगर दबा दिया। गनीमत यह रही कि गोली 'मिस' हो गई और उनकी जान बच गई। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती; पीड़ित का दावा है कि इस खौफनाक वारदात के बाद स्थानीय पुलिस ने उलटा उनके और उन्हें बचाने वालों के खिलाफ ही झूठा मुकदमा दर्ज कर लिया है, और अब उनसे 5 लाख रुपये की रंगदारी मांगी जा रही है।
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मंगलवार को न्याय की आस में पीड़ित ने मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के दरबार में गुहार लगाई है। आइए जानते हैं क्या है यह पूरी खौफनाक वारदात।
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क्या है पूरा मामला? (चुनावी रंजिश और धमकियों का दौर)

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यह सनसनीखेज मामला मेरठ के कोतवाली इलाके के शाहपीर गेट का है। यहाँ के निवासी सऊद अहमद दिलेजा इलाके के एक जाने-माने चेहरे हैं।
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    सऊद अहमद ने वर्ष 2023 में पार्षद पद का चुनाव लड़ा था और वह आगामी नगर निगम चुनावों के लिए भी जोर-शोर से अपनी राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे हैं।
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    सऊद का सीधा आरोप है कि उनकी इसी बढ़ती लोकप्रियता और राजनीतिक सक्रियता के चलते मोहल्ले के ही कुछ लोग उनसे रंजिश रखने लगे थे। इनमें मुख्य रूप से फिरोज उर्फ टिंगू, उसका भाई जावेद उर्फ चिड़ीमार और इमरान उर्फ शक्ति शामिल हैं। ये तीनों उन्हें लगातार चुनाव न लड़ने की धमकियां दे रहे थे।
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19 फरवरी का वो खौफनाक मंजर... जब सिर पर रखी गई बंदूक

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पीड़ित सऊद अहमद ने पुलिस कप्तान (SSP) को दी गई अपनी शिकायत में 19 फरवरी 2026 (गुरुवार) की शाम का रोंगटे खड़े कर देने वाला घटनाक्रम बताया है:
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    रास्ते में घेरा: शाम करीब 5 बजे सऊद नमाज अदा करने के बाद मस्जिद से अपने घर की तरफ लौट रहे थे। तभी रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे फिरोज, जावेद और इमरान ने अपने 3-4 अन्य अज्ञात साथियों के साथ मिलकर उनका रास्ता रोक लिया।
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    गाली-गलौज और मारपीट: आरोपियों ने सरेराह उन्हें भद्दी-भद्दी गालियां देनी शुरू कर दीं। जब सऊद ने इसका विरोध किया, तो सभी ने मिलकर उन्हें लात-घूंसों से बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया।
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    कनपटी पर तमंचा और 'मिस फायर': मारपीट के बीच ही आरोपी फिरोज ने अचानक तमंचा निकाल लिया और सीधे सऊद के सिर पर तान कर गोली चला दी। लेकिन किस्मत सऊद के साथ थी; गोली 'मिस' हो गई और उनकी जान बच गई।
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    घटना के दौरान हुए भारी शोर-शराबे को सुनकर मोहल्ले के लोग मौके की तरफ दौड़ पड़े। भीड़ को अपनी तरफ आता देख आरोपी सऊद को जान से मारने की धमकियां देते हुए वहां से फरार हो गए।
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पुलिस ने नहीं सुनी फरियाद, उल्टे हम पर ही कर दिया केस'

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इस घटना के बाद जो हुआ, वह कानून व्यवस्था (Law and Order) पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। सऊद अहमद का आरोप है कि जब वह मौत के मुंह से बचकर न्याय मांगने के लिए कोतवाली थाना पुलिस के पास पहुंचे, तो पुलिस ने उनका प्रार्थना पत्र (Complaint) लेने से ही साफ इनकार कर दिया।
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    झूठा मुकदमा: पीड़ित का दावा है कि रसूखदार आरोपियों ने स्थानीय पुलिस को गुमराह कर लिया है। पुलिस ने उल्टे सऊद और उन बेकसूर लोगों के खिलाफ ही संगीन धाराओं में झूठा मुकदमा दर्ज कर लिया है, जो घटना के वक्त उनकी जान बचाने दौड़े थे।
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    5 लाख की रंगदारी: पीड़ित का आरोप है कि अब आरोपी पुलिस की शह पर खुलेआम घूम रहे हैं और केस वापस लेने या जान बख्शने के एवज में 5 लाख रुपये की रंगदारी (Extortion) की मांग कर रहे हैं।
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SSP अविनाश पांडे के दरबार में पहुंची गुहार

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स्थानीय पुलिस से निराश होकर सऊद अहमद ने मंगलवार को मेरठ के एसएसपी (SSP) अविनाश पांडे के कार्यालय पहुंचकर उन्हें एक विस्तृत प्रार्थना पत्र सौंपा।
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सऊद ने एसएसपी से इस पूरे मामले की किसी अन्य निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने, अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा हमलावरों के खिलाफ तुरंत हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज करने की गुहार लगाई है।
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SSP का आश्वासन: शिकायत को गंभीरता से सुनते हुए एसएसपी अविनाश पांडे ने पीड़ित को इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने का ठोस आश्वासन दिया है। अब देखना यह होगा कि इस 'खाकी और खादी' के गठजोड़ वाले मामले में मेरठ पुलिस आगे क्या एक्शन लेती है।
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