मेरठ (विशेष संवाददाता):
\r\n\r\nसोमवार की शाम जब सूरज ढल रहा था, मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में एक बार फिर वही खौफनाक मंजर सामने आया, जिसने इस शहर के "स्मार्ट सिटी" होने के दावे की धज्जियां उड़ा दीं। थाने के ठीक सामने, जहां कानून और सुरक्षा का पहरा होना चाहिए, वहां मौत का खुला खेल चल रहा था। ओडियन नाले के गंदे पानी में एक युवक का शव तैरता मिला। यह शव सिर्फ एक इंसान का नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक व्यवस्था का भी था, जो पिछले कई सालों से गहरी नींद में सोई हुई है।Read also:-मेरठ कपसाड़ कांड: 'कातिल' की उम्र पर कोर्ट का फैसला—सिर्फ 17 साल 7 महीने! हत्या और अपहरण का केस अब जेजे बोर्ड के हवाले
\r\n\r\n\r\n\r\n
नोएडा में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की डूबने से हुई मौत ने राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचा, लेकिन मेरठ के लोगों के लिए नालों में गिरकर मरना अब खबरों से ज्यादा एक 'रोजमर्रा का डर' बन चुका है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
घटना का आंखों देखा हाल: थाने के सामने सनसनी
\r\n\r\nसोमवार शाम करीब 6 बजे ब्रह्मपुरी थाने के पास गुजर रहे राहगीरों की नजर नाले (Odeon Nala) पर पड़ी। नाले की गंदगी और गाद के बीच एक इंसान का शरीर फंसा हुआ था। देखते ही देखते वहां भीड़ जमा हो गई। "अरे, कोई नाले में पड़ा है!" की आवाज ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी।
\r\n\r\n
\r\n\r\nघटनास्थल की विडंबना देखिए—हादसा ठीक उस पुलिस थाने के सामने हुआ, जहां लोग अपनी सुरक्षा की गुहार लगाने आते हैं। सूचना मिलते ही ब्रह्मपुरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने रस्सियों और स्थानीय गोताखोरों की मदद से शव को बाहर निकाला।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
शव की स्थिति:
\r\n\r\nपुलिस के अनुसार, शव को देखने से प्रतीत होता है कि वह करीब दो दिन पुराना है। पानी में रहने के कारण शरीर फूल चुका था। युवक की उम्र 30 से 35 वर्ष के बीच आंकी जा रही है। उसके कपड़ों की तलाशी लेने पर कोई पहचान पत्र (ID Proof) नहीं मिला, जिससे उसकी शिनाख्त अभी तक पहेली बनी हुई है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
पुलिस की थ्योरी और जांच की दिशा
\r\n\r\nमौके पर पहुंचे एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मीडिया को बताया:
\r\n\r\n\r\n\r\n
\r\n\r\n\r\n"शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि युवक नशे की हालत में रहा होगा और संतुलन बिगड़ने से नाले में गिर गया। नाले की गहराई और उसमें फंसी गाद के कारण वह बाहर नहीं निकल सका होगा। हम आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि वह कब और कैसे गिरा। साथ ही, पिछले कुछ दिनों में दर्ज हुई गुमशुदगी की रिपोर्ट से भी मिलान किया जा रहा है।"\r\n
\r\n\r\n
पुलिस भले ही इसे हादसा मान रही हो, लेकिन स्थानीय लोगों का सवाल यह है कि अगर नाले पर बाउंड्री वॉल (सुरक्षा दीवार) होती, तो क्या कोई नशे में भी इसमें गिरता?
\r\n\r\n\r\n\r\n
'मौत का कुआं' बने शहर के 257 नाले
\r\n\r\nमेरठ शहर के भीतर से 257 छोटे-बड़े नाले गुजरते हैं। ये नाले शहर की गंदगी को बाहर ले जाने के लिए बनाए गए थे, लेकिन नगर निगम की घोर लापरवाही ने इन्हें इंसानों को निगलने वाला 'मौत का कुआं' बना दिया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
खतरे के प्रमुख हॉटस्पॉट:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n ओडियन नाला (ब्रह्मपुरी): यह नाला सबसे ज्यादा कुख्यात है। घनी आबादी के बीच से गुजरने वाले इस नाले के दोनों तरफ कई जगहों पर दीवार ही नहीं है।\r\n \r\n
- \r\n आबू नाला: शहर की लाइफलाइन कहा जाने वाला यह नाला अब डेडलाइन बन चुका है।\r\n \r\n
- \r\n मोहनपुरा और सुभाष नगर नाला: यहां भी आए दिन हादसे होते रहते हैं।\r\n \r\n
\r\n\r\n
हैरानी की बात यह है कि ये नाले किसी सुनसान जंगल से नहीं, बल्कि शहर की घनी बस्तियों, बाजारों और स्कूलों के पास से गुजरते हैं। बच्चे यहां खेलते हैं, बुजुर्ग यहां से गुजरते हैं, और हर पल एक अनहोनी का साया उनके साथ चलता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आंकड़ों की जुबानी: 5 साल, 38 मौतें, और बेशर्म खामोशी
\r\n\r\nअगर हम पिछले 5 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो रूह कांप जाती है। मेरठ के खुले नालों ने 38 परिवारों के चिराग बुझा दिए हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n 18 महीने की मासूम की मौत: पल्लवपुरम में एक कार नाले में गिर गई थी, जिसमें 18 महीने की एक बच्ची की दर्दनाक मौत हो गई थी। उस बच्ची का क्या कसूर था? सिर्फ यह कि वह उस शहर में पैदा हुई जहां नगर निगम को सुरक्षा दीवार बनाने की फुर्सत नहीं है।\r\n \r\n
- \r\n जागृति विहार हादसा: अभी एक महीना भी नहीं बीता है, जब जागृति विहार में एक कार सवार तीन लोग नाले में गिर गए थे। गनीमत रही कि जेसीबी की मदद से उन्हें समय रहते बाहर निकाल लिया गया, वरना आंकड़ा 38 से बढ़कर 41 हो गया होता।\r\n \r\n
- \r\n युवराज की मौत की याद: नोएडा के हादसे ने देश को हिलाया, लेकिन मेरठ के ओडियन नाले में दर्जनों 'युवराज' अपनी जान गंवा चुके हैं, जिनका जिक्र राष्ट्रीय पटल पर कभी नहीं होता।\r\n \r\n
\r\n\r\n
नगर निगम: 'न सुनवाई, न कार्यवाही'
\r\n\r\nइस पूरी त्रासदी का सबसे शर्मनाक पहलू है जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि वे दर्जनों बार नगर निगम में शिकायत कर चुके हैं। पार्षद से लेकर मेयर तक, और नगर आयुक्त से लेकर स्थानीय विधायकों तक—सबको पता है कि ये नाले खुले पड़े हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
फोन जो कभी नहीं उठता:
\r\n\r\nइस घटना के बाद जब मीडिया ने नगर निगम के नगर आयुक्त से संपर्क करने की कोशिश की, तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। यह 'नॉट रिस्पॉन्डिंग' रवैया ही मेरठ की सबसे बड़ी समस्या है। अधिकारी एसी कमरों में बैठकर योजनाओं का खाका तैयार करते हैं, लेकिन जमीन पर खुले नाले चीख-चीख कर उनकी विफलता की गवाही दे रहे हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
स्थानीय निवासी रमेश कुमार (काल्पनिक नाम) ने गुस्से में कहा:
\r\n\r\n\r\n\r\n
\r\n\r\n\r\n"साहब, जब तक किसी बड़े अधिकारी या नेता का बच्चा इस नाले में नहीं गिरेगा, तब तक यहां दीवार नहीं बनेगी। हम गरीबों की जान की कोई कीमत नहीं है। हर बार चुनाव में वादा करते हैं कि नाला ढक देंगे, लेकिन चुनाव जीतते ही गायब हो जाते हैं।"\r\n
\r\n\r\n
समस्या की जड़: क्यों नहीं बनती दीवार?
\r\n\r\nआखिर क्या वजह है कि सालों से ये नाले खुले पड़े हैं?
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n बजट का रोना: हर बार नगर निगम बजट की कमी का हवाला देता है, जबकि शहर के सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं।\r\n \r\n
- \r\n अतिक्रमण: नालों के किनारे अवैध निर्माण और अतिक्रमण भी दीवार न बन पाने का एक बड़ा कारण है, जिसे हटाने में निगम के पसीने छूटते हैं।\r\n \r\n
- \r\n इच्छाशक्ति की कमी: सबसे बड़ी वजह है राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति का अभाव। अगर अधिकारी चाहें, तो जाल लगवाकर या दीवार बनाकर इन हादसों को रोका जा सकता है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
जनता के सवाल: कब तक सहेंगे हम?
\r\n\r\nमेरठ की जनता अब जवाब मांग रही है। ब्रह्मपुरी की घटना महज एक हादसा नहीं है, यह एक 'सिस्टमैटिक मर्डर' है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n क्या किसी इंसान का नशा करना उसे मौत की सजा देने का आधार बन सकता है?\r\n \r\n
- \r\n क्या थाने के सामने नाले का खुला होना पुलिस और प्रशासन के मुंह पर तमाचा नहीं है?\r\n \r\n
- \r\n उन 38 परिवारों का जवाबदेह कौन है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया?\r\n \r\n
\r\n\r\n
अब जागने का वक्त है
\r\n\r\nब्रह्मपुरी में मिले इस अज्ञात युवक के शव को सिर्फ एक फाइल नंबर बनकर नहीं रह जाना चाहिए। पुलिस अपनी जांच कर रही है, सीसीटीवी फुटेज देखे जा रहे हैं, लेकिन असली गुनहगार वह व्यवस्था है जिसने नाले को खुला छोड़ रखा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
नोएडा के बाद मेरठ की यह घटना उत्तर प्रदेश सरकार के लिए एक चेतावनी (Wake-up Call) होनी चाहिए। अगर जल्द ही ओडियन नाले समेत शहर के सभी 257 नालों पर सुरक्षा दीवार (Boundary Wall) या जाल नहीं लगाया गया, तो आने वाले बरसात के मौसम में यह आंकड़ा 38 से बढ़कर कहां पहुंचेगा, इसका अंदाजा लगाना भी डरावना है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
हमारी अपील: प्रशासन तुरंत इस मामले का संज्ञान ले और युद्ध स्तर पर नालों को ढकने या बाउंड्री वॉल बनाने का काम शुरू करे। जनता की जान से खिलवाड़ अब बंद होना चाहिए।
\r\n\r\n\r\n\r\n
महत्वपूर्ण तथ्य एक नज़र में (Quick Facts)
\r\n\r\n| \r\n विवरण \r\n | \r\n \r\n जानकारी \r\n | \r\n
| \r\n घटनास्थल \r\n | \r\n \r\n ओडियन नाला, ब्रह्मपुरी थाना के सामने, मेरठ \r\n | \r\n
| \r\n मृतक \r\n | \r\n \r\n अज्ञात युवक (उम्र 30-35 वर्ष अनुमानित) \r\n | \r\n
| \r\n मौत का कारण \r\n | \r\n \r\n नाले में गिरने से (संभावित) \r\n | \r\n
| \r\n शव की स्थिति \r\n | \r\n \r\n 2 दिन पुराना, फूला हुआ \r\n | \r\n
| \r\n खतरा \r\n | \r\n \r\n शहर में 257 खुले नाले \r\n | \r\n
| \r\n त्रासदी \r\n | \r\n \r\n 5 साल में 38 मौतें \r\n | \r\n
| \r\n अधिकारी का बयान \r\n | \r\n \r\n एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह (जांच जारी) \r\n | \r\n
| \r\n निगम का रवैया \r\n | \r\n \r\n नगर आयुक्त संपर्क से बाहर \r\n | \r\n
\r\n\r\n
(यह रिपोर्ट जमीनी हकीकत और उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है। मेरठ की जनता से अपील है कि वे खुले नालों के पास सावधानी बरतें और प्रशासन पर उचित कार्यवाही के लिए दबाव बनाएं।)
Sabse pehle comment karne wale banein.