मेरठ/गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का कपसाड़ गांव (Kapsad Village) इस समय छावनी में तब्दील हो चुका है। एक दलित महिला की निर्मम हत्या और उसकी बेटी के अपहरण (Kidnapping Case) के मामले ने अब बड़ा सियासी रूप ले लिया है। शनिवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का माहौल उस वक्त गरमा गया, जब पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) और समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने सीमाओं पर ही रोक दिया।READ ALSO:-UP Weather: यूपी बना 'शिमला', पहाड़ों की बर्फबारी से मैदानी इलाकों में 'हाड़कंपाऊ' ठंड; 16 जिलों में बारिश-ओले का रेड अलर्ट, बिजनौर में 2.4°C पहुंचा पारा
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मेरठ बॉर्डर पर हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। सपा विधायक अतुल प्रधान (Atul Pradhan) और एसपी ट्रैफिक के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। वहीं, भाजपा नेता संगीत सोम ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर "सिलेक्टेड राजनीति" करने का आरोप लगाया है।
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इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको घटना की पूरी जानकारी, पुलिस कार्रवाई, सियासी बयानबाजी और मौके के हालात के बारे में विस्तार से बताएंगे।
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प्रतापपुर टोल पर बवाल: सपा विधायक और पुलिस आमने-सामने
\r\n\r\nमेरठ के कपसाड़ गांव में हुई वारदात के बाद समाजवादी पार्टी का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने जा रहा था। इस दल में सांसद रामजीलाल सुमन और सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान शामिल थे।
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जैसे ही सपा नेताओं का काफिला दिल्ली-मेरठ बॉर्डर स्थित प्रतापपुर टोल प्लाजा पर पहुंचा, वहां पहले से मौजूद भारी पुलिस बल ने उन्हें रोक लिया। पुलिस द्वारा रोके जाने पर सपा कार्यकर्ता भड़क गए।
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- \r\n धक्का-मुक्की का वीडियो वायरल: मौके पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सपा विधायक अतुल प्रधान और एसपी ट्रैफिक राघवेंद्र कुमार मिश्रा के बीच तीखी बहस हो रही है। परतापुर थाना प्रभारी अजय शुक्ला और अतुल प्रधान के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।\r\n \r\n
- \r\n अफसरों से भिड़े विधायक: अतुल प्रधान पुलिस अफसरों पर भड़कते नजर आए। उनका कहना था कि एक जनप्रतिनिधि को अपने क्षेत्र के पीड़ित परिवार से मिलने से कैसे रोका जा सकता है। घंटों चले हंगामे के बाद पुलिस ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया और सपा नेताओं को बैरंग लौटना पड़ा।\r\n \r\n
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चंद्रशेखर आजाद को गाजियाबाद में रोका, भीम आर्मी ने दी चकमा
\r\n\r\nआजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद भी अपने काफिले के साथ मेरठ के लिए निकले थे। प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए उन्हें गाजियाबाद में ही रोक दिया।
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- \r\n बॉर्डर सील: चंद्रशेखर को रोकने के लिए मेरठ के काशी टोल प्लाजा और गाजियाबाद बॉर्डर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। उन्हें मेरठ में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।\r\n \r\n
- \r\n भीम आर्मी का दूसरा दल पहुंचा: जहां पुलिस बड़े नेताओं को रोकने में व्यस्त थी, वहीं हापुड़ से भीम आर्मी नेताओं का एक दल पुलिस को चकमा देने में कामयाब रहा। भीम आर्मी नेता अभिषेक कुमार जाटव अपने काफिले के साथ सरधना की ओर निकल गए, जबकि पुलिस उन्हें रोक नहीं पाई।\r\n \r\n
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संगीत सोम का अखिलेश यादव पर तीखा हमला
\r\n\r\nइस पूरे घटनाक्रम के बीच भाजपा के पूर्व विधायक और फायरब्रांड नेता संगीत सोम (Sangeet Som) और हरेंद्र मलिक ने कपसाड़ गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की। संगीत सोम ने इस घटना को दुखद बताते हुए समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर करारा हमला बोला।
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संगीत सोम ने क्या कहा?
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"मुझे शर्म आ रही है कि ऐसे व्यक्ति (अखिलेश यादव) को नेता किसने बना दिया। उन्हें यह नहीं दिख रहा कि यह एक बेटी का गंभीर मामला है। आप इस पर राजनीति कर रहे हैं। आज आपको दलित की बेटी याद आ रही है, लेकिन आपने तो दलित के बेटे को ब्लास्ट से उड़वाने तक की कोशिश की थी। जिन जिलों के नाम दलित महापुरुषों के नाम पर थे, उन्हें बदलने का काम भी आपने किया। अब आप दलितों की बात कर रहे हैं।"\r\n
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सोम ने आगे कहा कि कुछ 'छुटभैया नेता' माहौल खराब कर रहे हैं। उन्होंने फफूंडा गांव का जिक्र करते हुए कहा कि वहां एक बेटी के साथ 6 लोगों ने दुष्कर्म किया और उसने आत्महत्या कर ली, लेकिन वहां कोई धरना नहीं दिया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि गांव में "सिलेक्टेड राजनीति" नहीं चलने दी जाएगी।
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क्या है पूरा मामला? (The Case Details)
\r\n\r\nयह पूरा बवाल 8 जनवरी को हुई एक दिल दहला देने वाली घटना के बाद शुरू हुआ।
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- \r\n वारदात: कपसाड़ गांव में पारस नाम का एक युवक, जो पेशे से कंपाउंडर है, दलित परिवार की बेटी रूबी (काल्पनिक नाम) को अगवा करने की नीयत से घर में घुसा।\r\n \r\n
- \r\n मां की हत्या: जब लड़की की मां सुनीता ने इसका विरोध किया और चीखना-चिल्लाना शुरू किया, तो पारस ने दरांती (हंसिया) से सुनीता के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए।\r\n \r\n
- \r\n अपहरण: मां को लहूलुहान हालत में छोड़कर आरोपी पारस लड़की को जबरन अपनी सफेद रंग की ऑल्टो कार में डालकर फरार हो गया।\r\n \r\n
- \r\n इलाज के दौरान मौत: घायल सुनीता को अस्पताल ले जाया गया, जहां 8 जनवरी की शाम 5 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया।\r\n \r\n
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पुलिस की कार्रवाई और अब तक का अपडेट
\r\n\r\nघटना के 48 घंटे से ज्यादा बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। मुख्य आरोपी पारस और अपहृत युवती का कोई सुराग नहीं मिला है।
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- \r\n 10 थानों की फोर्स तैनात: गांव में तनाव को देखते हुए 10 थानों की पुलिस, पीएसी (PAC) और आरएएफ (RAF) को तैनात किया गया है।\r\n \r\n
- \r\n बॉर्डर पर चेकिंग: मेरठ की सभी सीमाओं पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसके चलते दौराला टोल प्लाजा पर 3 किलोमीटर लंबा जाम लग गया है।\r\n \r\n
- \r\n लोकेशन ट्रेसिंग: पुलिस के अनुसार, आरोपी पारस के 3 मोबाइल नंबर हैं और तीनों बंद आ रहे हैं। लड़की के पास कोई फोन नहीं है। दोनों की आखिरी लोकेशन कैली गांव में मिली थी।\r\n \r\n
- \r\n दबिश: पुलिस ने सरधना, ठाकुर चौबीसी, दौराला और कैली गांव में छापेमारी की है। 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे खंगाले जा चुके हैं।\r\n \r\n
- \r\n परिवार पर शिकंजा: आरोपी पारस के माता-पिता और भाई फरार हैं। पुलिस ने पूछताछ के लिए उसके दादा-दादी को हिरासत में लिया है।\r\n \r\n
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परिवार का दर्द और आर्थिक मदद
\r\n\r\nपीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। लड़की के पिता ने बताया कि उनकी बेटी की शादी तय हो चुकी थी, लेकिन दरिंदों ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। लड़की के भाई ने अपनी बहन की जान को खतरा बताया है।
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- \r\n अंतिम संस्कार: अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समझाने के बाद परिजनों ने घटना के 30 घंटे बाद मृतका का अंतिम संस्कार किया।\r\n \r\n
- \r\n सपा की मदद: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पीड़ित परिवार से फोन पर बात की और 3 लाख रुपये की मदद का ऐलान किया। वहीं, विधायक अतुल प्रधान ने मौके पर पहुंचकर 2 लाख रुपये का चेक सौंपा।\r\n \r\n
- \r\n गांव वालों की मांग: गांव के लोगों का कहना है कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती। जो भी दोषी है, उस पर सख्त कार्रवाई हो, चाहे उसके घर पर बुलडोजर ही क्यों न चलाना पड़े। लेकिन किसी निर्दोष समाज को टारगेट न किया जाए।\r\n \r\n
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मेरठ का कपसाड़ कांड अब कानून-व्यवस्था से ज्यादा सियासी अखाड़ा बनता जा रहा है। एक तरफ पुलिस पर आरोपी को जल्द से जल्द पकड़ने और लड़की को सकुशल बरामद करने का भारी दबाव है, तो दूसरी तरफ विपक्षी दल इसे दलित सुरक्षा का मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने में लगे हैं। आरोपी पारस की गिरफ्तारी के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आखिर इस जघन्य अपराध के पीछे की मुख्य वजह क्या थी। फिलहाल, पश्चिमी यूपी में सियासी पारा चढ़ा हुआ है और प्रशासन हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहा है।
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मेरठ में दलित महिला की हत्या और बेटी के अपहरण के बाद सियासत तेज हो गई है। पुलिस ने चंद्रशेखर आजाद और सपा नेताओं को पीड़ित परिवार से मिलने से रोक दिया, जिसके बाद प्रतापपुर टोल पर पुलिस और सपा विधायक अतुल प्रधान के बीच झड़प हुई। भाजपा नेता संगीत सोम ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। पुलिस की 10 टीमें आरोपी की तलाश में जुटी हैं, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला है।
Sabse pehle comment karne wale banein.