मेरठ (स्पेशल क्राइम रिपोर्ट)। देश की आर्थिक सुरक्षा में सेंध लगाने वाले तस्करों और कस्टम ड्यूटी चोरी करने वालों के खिलाफ मेरठ की अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। तस्करी के एक हाई-प्रोफाइल मामले में कड़ा संदेश देते हुए मेरठ के अपर सत्र न्यायाधीश (Additional Sessions Judge), कोर्ट नंबर 01, श्री अचल नारायण सकलानी ने आरोपी सलमान की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।Read also:-मेरठ में गूंजेंगी सामूहिक शहनाइयां: फरवरी में 4 मेगा आयोजनों की तैयारी; बेटियों की शादी के लिए सरकार देगी ₹1 लाख, ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन
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यह मामला दिल्ली स्थित फर्म मैसर्स डिवाइन इंटरनेशनल (M/S Devine International) के प्रोपराइटर सलमान से जुड़ा है, जिस पर साधारण मशीनों और सामान की आड़ में भारी मात्रा में प्रतिबंधित हाई-टेक ड्रोन और बिना बीआईएस (BIS) प्रमाणन वाले विदेशी ब्रांडेड जूतों की तस्करी करने का गंभीर आरोप है। डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI), नोएडा द्वारा पकड़ी गई इस खेप की कुल कीमत लगभग 2.49 करोड़ रुपये आंकी गई है।
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क्या है पूरा मामला? DRI की खुफिया नजर और ICD दादरी में छापा

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इस पूरे मामले की शुरुआत एक सटीक खुफिया जानकारी (Specific Intelligence) से हुई थी। DRI नोएडा की टीम को इनपुट मिला था कि नई दिल्ली के केशव पुरम, लॉरेंस रोड स्थित फर्म M/S Devine International (IEC No. IDWPS5386A) द्वारा विदेश से एक बड़ी खेप मंगाई गई है, जिसमें भारी गड़बड़ी है।
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    आयात का विवरण: यह खेप ICD दादरी (इनलैंड कंटेनर डिपो) में बिल ऑफ एंट्री संख्या 5546386, दिनांक 06.11.2025 के तहत पहुंची थी।
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    दस्तावेजों में खेल: दस्तावेजों में दिखाया गया था कि कंटेनर में साधारण सामान जैसे पाउडर प्रेस मशीन, मोटरसाइकिल चेन और साइकिल के पार्ट्स हैं, जिन पर कम ड्यूटी लगती है।
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    कार्यवाही: खुफिया जानकारी पुख्ता होने पर 16 नवंबर 2025 को खेप को रोका गया (Hold) और 18-19 नवंबर को स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में कंटेनर का पंचनामा भरकर गहन जांच शुरू की गई।
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कंटेनर खुलते ही उड़े होश: मशीनों के पीछे छिपा था 'काला खजाना'

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जब अधिकारियों ने कंटेनर को खोला, तो तस्करी का तरीका देखकर वे भी हैरान रह गए। तस्करों ने 'कन्सीलमेंट' (Concealment) यानी छिपाने का शातिराना तरीका अपनाया था। कंटेनर के आगे के हिस्से में घोषित सामान (साधारण पाउडर प्रेस मशीन और लोहे की चेन) रखी गई थीं, ताकि यदि कोई सरसरी तौर पर जांच करे तो उसे सब ठीक लगे। लेकिन जब गहराई से जांच की गई, तो पीछे अवैध सामान का जखीरा मिला।
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बरामद अवैध सामान का विवरण (Detailed Inventory):

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    हाई-टेक ड्रोन (High-Tech Drones): कुल 7,072 पीस ड्रोन बरामद हुए। भारत सरकार की नीति के अनुसार, बिना DGFT (Director General of Foreign Trade) लाइसेंस के ड्रोन का आयात प्रतिबंधित है, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है।
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      बरामद मॉडल्स: KY102, Smart CT Drone 8, A18 Max (एरियल फोटोग्राफी), J2 Drone और K 100 Max जैसे उन्नत किस्म के ड्रोन शामिल थे।
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    ब्रांडेड जूते (Branded Shoes): कुल 3,144 जोड़े जूते मिले। इन पर "New Balance", "Nike" और "Nitro" जैसे महंगे अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों के लेबल लगे थे। इनके पास भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का अनिवार्य सर्टिफिकेट नहीं था, जो सीधे तौर पर भारतीय गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन है।
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    अन्य सामग्री: इसके अलावा 11,725 मोटरसाइकिल आयरन चेन्स, स्टील डिस्क ब्रेक लॉक और खाली मेकअप बॉक्स भी मिले, जिन्हें कम कीमत (Undervaluation) पर या गलत घोषणा करके लाया गया था।
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स्वतंत्र चार्टर्ड इंजीनियर श्री आर. के. अग्रवाल ने इस पूरे सामान का मूल्यांकन किया और इसकी कुल कीमत 2,49,23,813 रुपये (दो करोड़ उनचास लाख तेइस हजार आठ सौ तेरह रुपये) आंकी।
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अदालत में महा-मुकाबला: बचाव पक्ष की दलीलें बनाम सरकारी वकील के सबूत

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इस मामले की सुनवाई जमानत अर्जी संख्या 6794 ऑफ 2025 के तहत हुई। कोर्ट रूम में दोनों पक्षों के बीच जोरदार बहस हुई।
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बचाव पक्ष (Defense) का तर्क: "पहचान की चोरी" आरोपी सलमान के अधिवक्ता श्री कृष्ण पाल सिंह ने कोर्ट में कहा कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसे फंसाया गया है।
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    मुख्य दलील: "किसी अज्ञात व्यक्ति ने मेरे मुवक्किल के आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो का गलत इस्तेमाल करके धोखाधड़ी से यह फर्म बनाई है। सलमान का इस तस्करी से कोई लेना-देना नहीं है।"
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    उन्होंने कस्टम विभाग पर सामान की कीमत जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप लगाया और कहा कि स्वतंत्र जांच में कीमत 2 करोड़ कम होती।
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    दलील दी गई कि जब सलमान को अपने दस्तावेजों के दुरुपयोग का पता चला, तो वह खुद कस्टम विभाग के सामने पेश हुआ और जांच में सहयोग किया, इसलिए उसे जमानत मिलनी चाहिए।
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अभियोजन पक्ष (Prosecution) का पलटवार: "पुराने बयानों ने खोली पोल" विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) श्री लक्ष्य कुमार सिंह विशेष अभियोजन अधिकारी एवं उनकी सहयोगी श्रीमती वंदना सिंह एडवोकेट ने बचाव पक्ष की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया।
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    कबूलनामा: अभियोजन ने कोर्ट को बताया कि सलमान ने कस्टम एक्ट की धारा 108 के तहत दिए गए अपने स्वैच्छिक बयानों (दिनांक 30.10.2024 और 24.11.2025) में यह स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि उसने मई 2023 में घरेलू सामान के व्यापार के लिए M/S Devine International फर्म खुद बनाई थी।
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    झूठी कहानी: सरकारी वकील ने तर्क दिया कि अब पकड़े जाने के बाद और जेल जाने के डर से आरोपी सहानुभूति प्राप्त करने के लिए "पहचान की चोरी" (Identity Theft) की मनगढ़ंत कहानी गढ़ रहा है।
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    गंभीर अपराध: प्रतिबंधित ड्रोन का आयात और BIS मानकों का उल्लंघन कोई छोटी गलती नहीं, बल्कि एक सुनियोजित आर्थिक अपराध है जो कस्टम एक्ट, 1962 की धारा 135 का सीधा उल्लंघन है।
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फैसला: "गंभीर आर्थिक अपराध में राहत संभव नहीं"

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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद विद्वान न्यायाधीश अचल नारायण सकलानी ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने पाया कि:
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    आरोपी द्वारा जांच के दौरान दिए गए बयान इस बात की पुष्टि करते हैं कि वह फर्म का मालिक है, और अब वह बचने के लिए नई कहानी बना रहा है।
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    7,000 से अधिक ड्रोन और हजारों जूतों की तस्करी, जिनका मूल्य लगभग ढाई करोड़ रुपये है, एक गंभीर प्रकृति का आर्थिक अपराध है।
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    यह कृत्य कस्टम एक्ट की धारा 135(1)(a) और 135(1)(b) के तहत दंडनीय है।
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कोर्ट का आदेश: "तथ्यों और अपराध की गंभीरता को देखते हुए, आरोपी को जमानत पर रिहा करना उचित नहीं होगा।" इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी सलमान पुत्र शब्बीर खान (निवासी पानीपत, हरियाणा) की जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी को फिलहाल मेरठ जेल में ही रहना होगा।
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तस्करों के लिए कड़ा संदेश

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मेरठ कोर्ट का यह फैसला उन सिंडिकेट्स के लिए एक कड़ा संदेश है जो गलत घोषणाओं (Mis-declaration) और छिपाव के जरिए भारतीय सीमा शुल्क कानूनों को चकमा देने की कोशिश करते हैं। DRI की सतर्कता ने न केवल करोड़ों की टैक्स चोरी रोकी, बल्कि हजारों हाई-टेक ड्रोनों के अवैध रूप से भारतीय बाजार में प्रवेश को भी विफल कर दिया, जो सुरक्षा के लिहाज से भी संवेदनशील हो सकता था।
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(नोट: यह रिपोर्ट न्यायालय के आदेश और अभियोजन पक्ष द्वारा उपलब्ध कराए गए तथ्यों पर आधारित है।)
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