मेरठ नगर निगम हाउस टैक्स (Meerut Nagar Nigam House Tax) को लेकर इन दिनों शहर में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) सर्वे के लागू होने के बाद से शहर के लाखों भवन स्वामियों के टैक्स में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को मेरठ नगर निगम (Meerut Municipal Corporation) कार्यालय पर भारी हंगामा हुआ। महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रंजन शर्मा के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर आयुक्त कार्यालय का घेराव किया और प्रशासन की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।READ ALSO:-मेरठ में गैस किल्लत से रसोई में मचा हाहाकार: विकल्प तलाश रहे लोग, बाजार में इंडक्शन चूल्हों की डिमांड में भारी उछाल
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इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य GIS सर्वे के नाम पर हाउस टैक्स में की गई कई सौ प्रतिशत की वृद्धि, कथित अवैध वसूली, और शहर में लगातार बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक की ओर प्रशासन का ध्यान खींचना था। कांग्रेस नेताओं का स्पष्ट आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था के तहत आम जनता का आर्थिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है। आइए इस पूरे घटनाक्रम, कांग्रेस की मांगों और नगर निगम प्रशासन के जवाब का विस्तृत विश्लेषण करते हैं।
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मेरठ नगर निगम हाउस टैक्स: GIS सर्वे बना जनता के लिए सिरदर्द 

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हाल ही में उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहरों की तरह मेरठ में भी संपत्तियों का मूल्यांकन करने और कर ढांचे को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से GIS (Geographic Information System) सर्वे कराया गया था। सिद्धांत रूप में, इस सर्वे का उद्देश्य उन संपत्तियों को कर के दायरे में लाना था जो पहले छूटी हुई थीं। लेकिन, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
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सर्वे के बाद जब लोगों के घरों पर नए हाउस टैक्स के बिल पहुंचे, तो उनमें कई सौ प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई। जिन मकानों का टैक्स पहले 1,000 रुपये था, वह बढ़कर 4,000 से 5,000 रुपये तक हो गया है। इसके अलावा, कई आवासीय संपत्तियों को व्यावसायिक श्रेणी में डाल दिया गया है, जिससे कर का बोझ और अधिक बढ़ गया है।
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कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा ने इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगातार आम जनता पर नए-नए करों का बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई की मार झेल रही जनता से पहले जलकर (Water Tax) के नाम पर वसूली की गई और अब मेरठ नगर निगम हाउस टैक्स में बेतहाशा वृद्धि करके उनका सीधा आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
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नगर आयुक्त की अनुपस्थिति से भड़के कांग्रेसी कार्यकर्ता

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शुक्रवार को जब यह प्रदर्शन पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत शुरू हुआ, तो इसमें एक बड़ा नाटकीय मोड़ तब आया जब कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल नगर आयुक्त से मिलने उनके कार्यालय पहुंचा। कार्यकर्ताओं का कहना है कि महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा ने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने और समस्याओं पर चर्चा करने के लिए नगर आयुक्त से पहले ही समय लिया था।
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लेकिन, जब प्रदर्शनकारी भारी संख्या में नगर निगम पहुंचे, तो पता चला कि नगर आयुक्त अपने कार्यालय में मौजूद ही नहीं हैं। एक जिम्मेदार अधिकारी के अपने वादे के बावजूद नदारद रहने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आक्रोश चरम पर पहुंच गया। उन्होंने इसे जनता की समस्याओं के प्रति प्रशासन का ढुलमुल रवैया और घोर लापरवाही करार दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने नगर निगम परिसर में ही धरने पर बैठकर प्रशासन और राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। "तानाशाही नहीं चलेगी" और "हाउस टैक्स वापस लो" जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
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मुख्य कर निर्धारण अधिकारी से वार्ता और तीखी नोकझोंक

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काफी देर तक चले हंगामे और नारेबाजी के बाद हालात को संभालने के लिए मुख्य कर निर्धारण अधिकारी (Chief Tax Assessment Officer) शिवकुमार गौतम खुद कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचे। शुरुआत में, आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने उनसे बात करने से इनकार कर दिया। उनकी जिद थी कि वे अपना ज्ञापन केवल नगर आयुक्त को ही सौंपेंगे, क्योंकि नीतिगत फैसले लेने का अधिकार उन्हीं के पास है।
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हालांकि, काफी मान-मनौव्वल और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, कांग्रेस नेता मुख्य कर निर्धारण अधिकारी को ज्ञापन देने और उनसे वार्ता करने के लिए सहमत हुए। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई, जहां कांग्रेस नेताओं ने अधिकारियों के सामने GIS सर्वे की खामियों और जनता की शिकायतों का अंबार लगा दिया।
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प्रमुख मांगें: बिल सुधार और सीलिंग कार्रवाई पर रोक

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कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने मेरठ नगर निगम हाउस टैक्स और अन्य नागरिक समस्याओं को लेकर अधिकारियों के सामने कई स्पष्ट और अहम मांगें रखीं। इन मांगों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
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    बिल सुधार के लिए अलग काउंटर: GIS सर्वे के कारण हजारों बिलों में त्रुटियां आई हैं। क्षेत्रफल गलत नापा गया है या संपत्ति का प्रकार गलत दर्ज किया गया है। कांग्रेस ने मांग की कि इन त्रुटियों को सुधारने के लिए नगर निगम में तत्काल प्रभाव से अलग और विशेष काउंटर स्थापित किए जाएं ताकि जनता को बाबूओं के चक्कर न काटने पड़ें।
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    नाम परिवर्तन (Mutation) प्रक्रिया का सरलीकरण: भवन स्वामियों की मृत्यु के बाद या संपत्ति खरीदे जाने पर नाम परिवर्तन की प्रक्रिया बेहद जटिल हो गई है। कांग्रेस ने शासनादेश को सख्ती से लागू करते हुए इस प्रक्रिया को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की मांग की।
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    अनुपयोगी जलकर की समाप्ति: कई व्यावसायिक भवन और दुकानें ऐसी हैं जहां निगम के पानी का कनेक्शन नहीं है या पानी का उपयोग ही नहीं हो रहा है, फिर भी उन पर भारी जलकर थोपा जा रहा है। नेताओं ने मांग की कि जहां पानी का उपयोग नहीं है, वहां से जलकर तुरंत हटाया जाए।
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    अवैध वसूली पर लगाम: कर संग्रह के नाम पर ठेकेदारों और कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों द्वारा की जा रही कथित अवैध वसूली पर सख्त कार्रवाई की जाए।
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50 हजार से कम के बकाये पर सीलिंग से फौरी राहत

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कांग्रेस नेताओं के आक्रामक रुख और तर्कों के सामने नगर निगम प्रशासन को थोड़ा झुकना पड़ा। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी शिवकुमार गौतम ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए प्रतिनिधिमंडल को एक बड़ा आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि मेरठ नगर निगम हाउस टैक्स के उन मामलों में, जहां बकाया राशि 50,000 रुपये से कम है, वहां फिलहाल संपत्तियों को सील करने (Sealing) की कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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यह शहर के छोटे दुकानदारों और मध्यम वर्गीय मकान मालिकों के लिए एक बड़ी फौरी राहत है, जो कर न चुका पाने की स्थिति में अपने घरों या दुकानों के सील होने के डर के साये में जी रहे थे। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि बिलों की विसंगतियों को दूर करने के लिए आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चालू है और नागरिकों को इसका लाभ उठाना चाहिए।
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आवारा कुत्तों का आतंक: मेरठ की एक और ज्वलंत समस्या

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इस प्रदर्शन में केवल हाउस टैक्स का ही मुद्दा नहीं था, बल्कि एक ऐसी समस्या भी गूंजी जिसने मेरठ शहर के हर मोहल्ले की नींद हराम कर रखी है—वह है आवारा कुत्तों का आतंक।
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हाल के महीनों में मेरठ में आवारा कुत्तों के काटने (Dog Bites) के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग इन कुत्तों का सबसे आसान शिकार बन रहे हैं। कई इलाकों में रात के समय घर से बाहर निकलना तक दूभर हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि निगम के पास जनता से टैक्स वसूलने के लिए तो पूरी फौज है, लेकिन शहर को आवारा पशुओं से मुक्त कराने के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) कार्यक्रम पूरी तरह से फेल साबित हुआ है और नसबंदी के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
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अल्टीमेटम: एक सप्ताह में समाधान नहीं तो होगा बड़ा जन आंदोलन

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ज्ञापन सौंपने और वार्ता के बाद, महानगर कांग्रेस कमेटी ने नगर निगम प्रशासन और राज्य सरकार को एक सख्त अल्टीमेटम दिया है। रंजन शर्मा और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर मेरठ नगर निगम हाउस टैक्स की विसंगतियों को दूर करने, विशेष काउंटर खोलने और आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी।
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उन्होंने कहा, "यदि सात दिन में हमारी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो महानगर कांग्रेस कमेटी नगर निगम के खिलाफ एक व्यापक और उग्र जन आंदोलन शुरू करेगी। हम सड़कों पर उतरेंगे और जनता के बीच जाकर भाजपा शासित नगर निगम की कथित साठगांठ और भ्रष्टाचार को पूरी तरह से उजागर करेंगे।"
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इस चेतावनी ने शहर के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नगर निगम प्रशासन इस एक सप्ताह के अल्टीमेटम को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या वास्तव में बिलों में सुधार के लिए कोई त्वरित प्रणाली (Fast-track system) लागू की जाएगी, या यह प्रदर्शन भी सिर्फ एक राजनीतिक रस्म अदायगी बनकर रह जाएगा?
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जवाबदेही और पारदर्शी प्रशासन की जरूरत

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मेरठ में शुक्रवार को हुआ कांग्रेस का यह प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक दल का शक्ति प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह शहर की उस आम जनता की कुंठा का प्रकटीकरण था जो महंगाई और प्रशासनिक लापरवाही के दोहरे पाटों के बीच पिस रही है। मेरठ नगर निगम हाउस टैक्स के लिए किया गया GIS सर्वे अगर सही तरीके से लागू होता, तो यह शहर के विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता था। लेकिन तकनीकी खामियों और प्रशासनिक अदूरदर्शिता ने इसे जनता के लिए एक बुरे सपने में बदल दिया है।
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नगर निगम का प्राथमिक कर्तव्य शहरवासियों को बुनियादी सुविधाएं (सड़क, सफाई, स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा) प्रदान करना है। यदि जनता से बढ़ा हुआ कर वसूला जा रहा है, तो उन्हें उसी अनुपात में नागरिक सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। आवारा कुत्तों का आतंक और जलकर के नाम पर मनमानी वसूली इस बात का प्रमाण है कि सुविधाओं के मोर्चे पर निगम अभी भी बहुत पीछे है। उम्मीद है कि इस विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन गहरी नींद से जागेगा और जनता की शिकायतों का यथोचित एवं त्वरित समाधान सुनिश्चित करेगा।
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शुक्रवार को मेरठ नगर निगम पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया। यह विरोध मुख्य रूप से GIS सर्वे के कारण हाउस टैक्स में हुई भारी वृद्धि, जलकर की अवैध वसूली और शहर में आवारा कुत्तों के आतंक के खिलाफ था। नगर आयुक्त के अनुपस्थित रहने पर कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया, जिसके बाद मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने 50 हजार से कम के बकाये पर सीलिंग न करने का आश्वासन दिया। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह में समस्याएं हल नहीं हुईं, तो व्यापक जन आंदोलन किया जाएगा।
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