मेरठ (Meerut News): सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और सीलिंग की कार्रवाई के डर के साये में जी रहे मेरठ के हजारों व्यापारियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। मेरठ में व्यावसायिक निर्माण शमन (Meerut Commercial Construction Compounding) नीति को लेकर आवास विकास परिषद ने बड़ा फैसला लिया है। अब शहर में 24 मीटर और 36 मीटर चौड़ी सड़कों पर हुए व्यावसायिक निर्माणों को कुछ शर्तों के साथ नियमित (Regularize) किया जा सकेगा।READ ALSO:-सावधान: अब आपकी 'आवाज' और 'चेहरे' का इस्तेमाल कर लूट रहे साइबर ठग; 'डीप फेक' स्कैम पर एडवाइजरी जारी
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से जहां एक तरफ व्यापारियों की नींद उड़ी हुई थी, वहीं अधिकारी भी पशोपेश में थे। लेकिन अब लखनऊ मुख्यालय से आए उच्च अधिकारियों के मंथन के बाद समाधान का रास्ता निकल आया है।
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लखनऊ से आए अधिकारियों ने किया मंथन

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शनिवार को लखनऊ मुख्यालय से आवास विकास परिषद (Avas Vikas Parishad) के मुख्य अभियंता डीवी सिंह और मुख्य वास्तुविद नियोजक संजीव कश्यप मेरठ पहुंचे। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों के साथ नई भवन निर्माण उपविधि (Building Bye-laws) के तहत व्यापारियों को राहत देने के लिए लंबी चर्चा की।
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इस मैराथन बैठक में यह निष्कर्ष निकाला गया कि मेरठ में व्यावसायिक निर्माण शमन योजना के दायरे में 24 और 36 मीटर चौड़े मार्गों पर स्थित उन आवासीय भूखंडों को लाया जा सकता है, जिन पर दुकानें या शोरूम बना लिए गए हैं। यानी अब ये निर्माण अवैध की श्रेणी से बाहर निकलकर वैध हो सकेंगे।
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शास्त्रीनगर में घर-घर सर्वे शुरू

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शमन नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवास विकास परिषद का स्टाफ पिछले तीन दिनों से एक्शन मोड में है। शास्त्रीनगर योजना संख्या 7 और 3 के अलावा सेक्टर-2 में हर व्यावसायिक निर्माण का बारीकी से सर्वे किया जा रहा है। सर्वे टीम मौके पर जाकर निम्नलिखित तथ्य जुटा रही है, जो शमन प्रक्रिया में निर्णायक साबित होंगे:
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    सड़क की चौड़ाई: निर्माण कितने मीटर चौड़े मार्ग पर स्थित है?
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    व्यापार का प्रकार: वहां किस तरह का कमर्शियल एक्टिविटी चल रही है?
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    निर्माण का क्षेत्रफल: कितनी जगह में निर्माण किया गया है और कितना हिस्सा अवैध है?
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    स्वामित्व: दुकान किराए पर है या आवंटी स्वयं अपना व्यापार कर रहा है?
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अधिकारियों का कहना है कि यह डेटा बेस तैयार होने के बाद शमन शुल्क (Compounding Fee) की गणना और नियमितीकरण की प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर

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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने रिहायशी इलाकों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सख्त आदेश जारी किए थे। इसके बाद से मेरठ में व्यापारियों के बीच हड़कंप मचा हुआ था। डर था कि कहीं उनकी दुकानें सील न हो जाएं या तोड़फोड़ न शुरू हो जाए। लेकिन अब आवास विकास परिषद की इस पहल से मेरठ में व्यावसायिक निर्माण को बचाने का एक लीगल रास्ता मिल गया है। 24 और 36 मीटर रोड वाले निर्माणों को प्राथमिकता के आधार पर राहत दी जाएगी।
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अभी तक आए सिर्फ 15 आवेदन

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राहत की खबर के बावजूद, अभी तक शमन (Compounding) के लिए आवेदनों की संख्या बहुत कम है। परिषद के पास अब तक केवल 15 आवेदन ही आए हैं। अधिकारियों का मानना है कि जानकारी के अभाव में व्यापारी आगे नहीं आ रहे हैं। बैठक में तय किया गया है कि ऐसे निर्माणकर्ताओं को जागरूक करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। उन्हें बताया जाएगा कि वे कैसे आवेदन करें और अपनी संपत्ति को कानूनी रूप से सुरक्षित करें।
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क्या करना होगा व्यापारियों को?

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जो व्यापारी 24 या 36 मीटर चौड़ी सड़क पर अपनी दुकान या प्रतिष्ठान चला रहे हैं, उन्हें तुरंत आवास विकास परिषद के कार्यालय से संपर्क करना चाहिए।
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    उन्हें एक निर्धारित प्रारूप में आवेदन करना होगा।
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    सर्वे रिपोर्ट के आधार पर तय किया गया शमन शुल्क जमा करना होगा।
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    अग्नि सुरक्षा और पार्किंग जैसे मानकों को, जहां तक संभव हो, पूरा करना होगा।
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मेरठ में व्यावसायिक निर्माण शमन नीति शहर के अनियोजित विकास को पटरी पर लाने का एक सकारात्मक प्रयास है। यह न केवल व्यापारियों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा, बल्कि विभाग को भी राजस्व प्राप्त होगा। व्यापारियों के लिए सलाह है कि वे सुप्रीम कोर्ट की किसी भी अगली सख्त टिप्पणी का इंतजार न करें और इस योजना का लाभ उठाकर अपने निर्माणों को जल्द से जल्द नियमित करा लें।
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