मेरठ में इलाज कराने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर है। अब मेरठ का कोई भी निजी अस्पताल या नर्सिंग होम मरीजों को अपने ही मेडिकल स्टोर (इन-हाउस फार्मेसी) से दवा खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अशोक कटारिया ने बुधवार को निजी अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए 13 बिंदुओं वाला सख्त आदेश जारी किया है।READ ALSO:-'रामायण' ने बदल दी मेरी ज़िंदगी: चेन स्मोकर से तंबाकू मुक्त हुए BJP सांसद अरुण गोविल; जानिए क्या है 'तंबाकू मुक्त भारत' वाला बिल
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यदि कोई भी अस्पताल संचालक इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसका पंजीकरण (Registration) तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा। साथ ही, संबंधित चिकित्सक के खिलाफ भी कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
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मरीजों को मिली दवा खरीदने की आजादी

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अक्सर देखा जाता है कि निजी अस्पताल मरीजों को सिर्फ अपनी ही फार्मेसी से दवा लेने का दबाव बनाते हैं, जहां दवाएं बाजार भाव से महंगी मिलती हैं। सीएमओ के नए आदेश के अनुसार, अब Meerut Private Hospital Rules में बदलाव करते हुए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि अस्पताल परिसर में एक बोर्ड लगाया जाए। इस बोर्ड पर साफ शब्दों में लिखा होना चाहिए कि "मरीज अपनी मर्जी से बाहर से या कहीं से भी दवा खरीद सकते हैं।"
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इसके अलावा, एक्सपायरी डेट या निकट एक्सपायरी (Near Expiry) वाली दवाओं के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
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अस्पताल के बाहर लगाना होगा 'पीला बोर्ड'

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पारदर्शिता लाने के लिए सीएमओ ने सभी 300 पंजीकृत निजी अस्पतालों और 1400 निजी चिकित्सकों को अपने संस्थान के मुख्य द्वार पर एक पीला बोर्ड (Yellow Board) लगाने का निर्देश दिया है। इस बोर्ड पर निम्नलिखित जानकारी होनी अनिवार्य है:
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    अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नंबर।
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  • \r\n
    संचालक और डॉक्टरों का नाम।
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  • \r\n
    उपलब्ध बेड की संख्या।
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    प्रदान की जाने वाली चिकित्सा सेवाएं और पद्धति।
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    डॉक्टरों और नर्सों की पूरी सूची।
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रेट-लिस्ट नहीं तो अस्पताल बंद

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विवादों का मुख्य कारण अक्सर इलाज के खर्च को लेकर होता है। इसे खत्म करने के लिए सीएमओ ने निर्देश दिया है कि सभी निजी अस्पताल रिसेप्शन या मेन गेट पर सभी ऑपरेशन और सेवाओं की अनुमानित रेट-लिस्ट (Rate List) चस्पा करें। बिना रेट-लिस्ट के अस्पताल संचालित पाए जाने पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।
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इसके साथ ही, गंभीर मरीजों को पैसे बनाने के चक्कर में अनावश्यक रूप से भर्ती रखने पर रोक लगाई गई है। ऐसे मरीजों को समय पर हायर सेंटर रेफर करना होगा।
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दलाली और सुरक्षा पर सख्त रुख
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सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल परिसर में एंबुलेंस चालकों या बाहरी दलालों द्वारा मरीजों की सौदेबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके अलावा:
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    पार्किंग व स्वच्छता: अस्पतालों में पर्याप्त पार्किंग और संक्रमण नियंत्रण (Infection Control) के मानक पूरे होने चाहिए।
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  3. \r\n
    यूनिफॉर्म: सभी डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ निर्धारित यूनिफॉर्म में ही ड्यूटी करेंगे।
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    रिकॉर्ड अपडेट: इलाज का पूरा रिकॉर्ड अपडेट रखना होगा, जिस पर इलाज करने वाले डॉक्टर की मुहर और नाम हो।
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  6. \r\n
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आयुष्मान कार्ड धारकों को प्राथमिकता

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सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना को लेकर भी कड़े निर्देश दिए गए हैं। आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों को बिना किसी परेशानी के पूर्णतः निशुल्क उपचार मिलना चाहिए। यदि किसी अस्पताल ने आयुष्मान मरीज को टरकाया या सुविधाएं देने में आनाकानी की, तो प्रशासन उस अस्पताल पर कानूनी डंडा चलाएगा।
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मेरठ स्वास्थ्य विभाग का यह कदम निश्चित रूप से आम जनता के हित में है। अब देखना यह होगा कि निजी अस्पताल इन नियमों का पालन कितनी ईमानदारी से करते हैं। प्रशासन की यह सख्ती मरीजों को आर्थिक शोषण से बचाने में "संजीवनी" साबित हो सकती है।
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