मेरठ। डिजिटल दुनिया की चकाचौंध के पीछे एक ऐसी काली दुनिया भी है, जो मासूम बचपन को अपना शिकार बना रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिस प्रशासन से लेकर आम जनता तक को हिला कर रख दिया है। मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र का रहने वाला एक शख्स ऑनलाइन 'चाइल्ड पोर्नोग्राफी' (Child Pornography) के एक ऐसे गिरोह का हिस्सा निकला, जो टेलीग्राम (Telegram) जैसे सुरक्षित माने जाने वाले ऐप पर मासूमों के अश्लील वीडियो की मंडी सजाता था।Read also:-सड़क सुरक्षा पर सख्ती: ट्रैफिक सिग्नल और स्पीड लिमिट का उल्लंघन पड़ेगा भारी; स्कूल-अस्पताल क्षेत्रों में विशेष निगरानी, जानें नए नियम
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पुलिस ने इस मामले में आरोपी अमित जैन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है, लेकिन आरोपी फिलहाल पुलिस की पकड़ से दूर है। यह मामला सिर्फ मेरठ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार उत्तराखंड और तमिलनाडु जैसे राज्यों से भी जुड़े हुए हैं।
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देहरादून से सुलझी गुत्थी, मेरठ तक पहुंची आंच

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इस पूरे 'डार्क वेब' जैसे नेटवर्क का खुलासा तब हुआ जब देहरादून (Dehradun) पुलिस ने एक विशेष ऑपरेशन शुरू किया। देहरादून पुलिस को खुफिया जानकारी मिली थी कि टेलीग्राम पर कुछ ऐसे चैनल्स सक्रिय हैं, जहां बच्चों के अश्लील वीडियो (Child Porn) खरीदे और बेचे जा रहे हैं। जब देहरादून पुलिस और साइबर सेल ने परतें खोलनी शुरू कीं, तो जांच की आंच उत्तर प्रदेश तक आ पहुंची।
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जांच में सामने आया कि इस गिरोह के तार कई राज्यों में फैले हैं और इसका एक प्रमुख सिरा मेरठ में है। तकनीकी सर्विलांस और डिजिटल फुटप्रिंट का पीछा करते हुए जांच एजेंसियां मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके तक पहुंचीं, जहां अमित जैन नाम के व्यक्ति की संदिग्ध भूमिका उजागर हुई।
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टेलीग्राम पर लगती थी बोली, अमित जैन था 'एडमिन'

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पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। आरोपी की पहचान मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के बागपत गेट निवासी अमित जैन के रूप में हुई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, अमित जैन केवल इस ग्रुप का सदस्य नहीं था, बल्कि वह उस टेलीग्राम ग्रुप के चार प्रमुख एडमिन (Admins) में से एक था।
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इस टेलीग्राम चैनल पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े वीडियो न केवल शेयर किए जाते थे, बल्कि उनकी 'ऑनलाइन बोली' (Bidding) भी लगती थी। जो खरीदार सबसे ऊंची बोली लगाता था, उसे वह वीडियो उपलब्ध कराया जाता था। यह पूरा कारोबार क्रिप्टोकरंसी या अन्य डिजिटल वॉलेट के जरिए चलाए जाने की आशंका है, जिसकी जांच अब साइबर टीम कर रही है। अमित जैन इस प्लेटफॉर्म पर वीडियो उपलब्ध कराने और ग्राहकों से डील करने में अहम भूमिका निभाता था।
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7 सितंबर को मिला था इनपुट, घर पर लटका है ताला

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सीओ ब्रह्मपुरी सौम्या अस्थाना (CO Soumya Asthana) ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि 7 सितंबर को साइबर थाने को इस गंभीर प्रकरण से जुड़ा एक पत्र और इनपुट प्राप्त हुआ था। देहरादून पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर मेरठ पुलिस ने अपनी जांच शुरू की। पुलिस टीम जब अमित जैन की गिरफ्तारी के लिए उसके बागपत गेट स्थित आवास पर पहुंची, तो वहां ताला लटका मिला।
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पड़ोसियों और स्थानीय लोगों से पूछताछ करने पर पता चला कि घर पर काफी समय से ताला लगा हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि अमित जैन को भनक लग गई थी कि पुलिस उस तक पहुंच सकती है, इसलिए वह पहले ही फरार हो गया। पुलिस अब उसकी कॉल डिटेल्स और लोकेशन ट्रेस करने में जुटी है।
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वीडियो कहां बने? यह अभी भी पहेली

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इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन वीडियो का व्यापार किया जा रहा था, क्या वे मेरठ में ही शूट किए गए थे? पुलिस का कहना है कि अभी तक ऐसे प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिले हैं जो यह साबित करें कि वीडियो मेरठ में तैयार हुए हैं। संभव है कि अमित जैन केवल एक 'मिडलमैन' या 'डिस्ट्रीब्यूटर' की भूमिका में हो, जो कहीं और से वीडियो लेकर ग्रुप में बेचता था।
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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक बड़ा नेटवर्क है। अमित जैन की गिरफ्तारी के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि वीडियो का सोर्स (Source) क्या है और इस गिरोह में और कितने सफेदपोश लोग शामिल हैं।
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तीन राज्यों का 'ट्रायंगल' और पुलिस की चुनौती

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सीओ सौम्या अस्थाना ने बताया कि जांच में अब तक तीन राज्यों का कनेक्शन सामने आया है:
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    उत्तराखंड (देहरादून): जहां से जांच शुरू हुई।
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    उत्तर प्रदेश (मेरठ): जहां गिरोह का एडमिन सक्रिय था।
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    तमिलनाडु: जहां से भी कुछ इनपुट मिले हैं।
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फिलहाल, मेरठ पुलिस की कई टीमें इस केस पर काम कर रही हैं। घर की निगरानी की जा रही है और साइबर सेल अमित जैन के पुराने डिजिटल रिकॉर्ड्स खंगाल रही है ताकि उसके अन्य साथियों तक पहुंचा जा सके। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और आरोपी को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
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