मेरठ के दिल कहे जाने वाले शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट (Central Market) में इन दिनों सन्नाटा और खौफ दोनों पसरा हुआ है। यहां के 400 से ज्यादा व्यापारियों की रातों की नींद उड़ गई है। वजह है—सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का सख्त आदेश और आवास विकास परिषद की नई 'भवन निर्माण एवं विकास उप-विधि' (Building By-laws)।READ ALSO:-Meerut News: 2.84 लाख मतदाताओं पर चुनाव आयोग का 'सर्च वारंट', 6 जनवरी से घर पहुंचेंगे नोटिस; जानिये क्या है पूरा मामला
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हालात यह हैं कि अगर नियमों का शत-प्रतिशत पालन हुआ, तो करीब 100 दुकानें नक्शे से ही गायब हो जाएंगी। रोजी-रोटी छिनने के डर से बेचैन व्यापारी नेताओं और अफसरों के दरवाजे खटखटा रहे हैं, लेकिन लखनऊ से लेकर मेरठ तक, कहीं से भी राहत की खबर नहीं मिल रही है।
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1. क्या है पूरा मामला? (The Core Issue)

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सेंट्रल मार्केट क्षेत्र मूल रूप से 'आवासीय' (Residential) नक्शे पर बसा था, लेकिन समय के साथ यहाँ घरों में दुकानें खुल गईं और यह एक बड़ा कॉमर्शियल हब बन गया।
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    सुप्रीम कोर्ट का डंडा: 1 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे में आवास एवं विकास परिषद को निर्देश दिया था कि आवासीय भवनों में चल रही अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई की जाए और दो महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपी जाए।
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    शमन (Compounding) का रास्ता: कोर्ट के आदेश के बाद परिषद ने व्यापारियों को एक मौका दिया—नक्शा पास कराकर 'शमन' (जुर्माना देकर नियमितीकरण) कराने का।
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    विफलता: इस दायरे में करीब 400 दुकानें आ रही हैं, लेकिन अब तक सिर्फ 25 फीसदी (करीब 100) व्यापारियों ने ही आवेदन किया है। बाकी 75% डरे हुए हैं।
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2. '15 फीट सेटबैक' वाला जानलेवा नियम

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व्यापारियों के आवेदन न करने की सबसे बड़ी वजह 'शमन शुल्क' (पैसा) नहीं, बल्कि 'सेटबैक' (Setback) का नियम है। नई उप-विधि के अनुसार, 18 मीटर और 12 मीटर चौड़ी सड़कों पर स्थित दुकानों को नियमित कराने के लिए आगे से जगह छोड़नी होगी।
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    नियम: दुकान के आगे 10 से 15 फीट का 'फ्रंट सेटबैक' छोड़ना अनिवार्य है।
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    असर: सेंट्रल मार्केट में कई दुकानें बेहद छोटी हैं। अगर वे 10 से 15 फीट जगह आगे छोड़ देंगी, तो पीछे दुकान बचेगी ही नहीं।
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    आशंका: व्यापारी संघ का दावा है कि इस नियम के चलते 100 छोटी दुकानें पूरी तरह खत्म (Zero) हो जाएंगी। यही कारण है कि व्यापारी आवेदन करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
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3. 'बाजार स्ट्रीट' की उम्मीद भी टूटी

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व्यापारी लगातार यह मांग कर रहे थे कि सेंट्रल मार्केट को 'बाजार स्ट्रीट' (Market Street) घोषित कर दिया जाए।
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    फायदा: अगर इसे 'बाजार स्ट्रीट' का दर्जा मिल जाता, तो सेटबैक और लैंड यूज़ (Land Use) के कड़े नियमों में शिथिलता (राहत) मिल जाती। दुकानें जैसी हैं, वैसी ही बच जातीं।
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    लखनऊ से झटका: 26 दिसंबर को लखनऊ मुख्यालय में आवास एवं विकास परिषद की 274वीं बोर्ड बैठक हुई। एजेंडे में सेंट्रल मार्केट का प्रस्ताव शामिल था, लेकिन उस पर न चर्चा हुई और न ही अनुमोदन (Approval) मिला। प्रस्ताव ठंडे बस्ते में जाने से व्यापारियों की आखिरी उम्मीद भी टूट गई है।
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4. ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू: दहशत का माहौल

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प्रशासन ने यह दिखाने के लिए कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर गंभीर है, कार्रवाई शुरू भी कर दी है।
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    हाल ही में भवन संख्या 661/6 के व्यावसायिक हिस्से को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया।
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    इस कार्रवाई ने बाकी दुकानदारों के दिलों में दहशत भर दी है। उन्हें डर है कि अगला नंबर उनका हो सकता है।
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5. व्यापारियों का दर्द: 'हम कहाँ जाएं?'

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सेंट्रल मार्केट के एक वरिष्ठ व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "हमने जीवन भर की कमाई लगाकर दुकान खड़ी की। अब कहा जा रहा है कि 15 फीट जगह छोड़ दो। मेरी दुकान ही कुल 18 फीट गहरी है, अगर 15 फीट छोड़ दूंगा तो 3 फीट में क्या व्यापार करूँगा? यह सीधे-सीधे हमें बेरोजगार करने की साजिश है।"
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व्यापारियों का कहना है कि यदि क्षेत्र को राहत नहीं दी गई, तो सैकड़ों परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।
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6. आगे क्या? (What Next?)

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    समय कम है: सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई दो महीने की समय सीमा तेजी से खत्म हो रही है।
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    प्रशासन का रुख: आवास विकास परिषद के अधिकारी नियमों से बंधे हैं। उनका कहना है कि बिना शमन कराए दुकानें सील या ध्वस्त की जाएंगी।
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    व्यापारियों की रणनीति: व्यापारी अब लामबंद होकर लखनऊ में उच्च अधिकारियों और मंत्रियों से मिलने की योजना बना रहे हैं।
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मेरठ का सेंट्रल मार्केट इस समय अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट का आदेश है, दूसरी तरफ सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि यह बाजार बचेगा या इतिहास बन जाएगा।
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