मेरठ (ब्यूरो): देश की ऐतिहासिक छावनियों में से एक, मेरठ कैंट (Meerut Cantonment) के निवासियों के लिए सोमवार का दिन बड़ी खुशखबरी लेकर आया। लंबे समय से फंड की कमी और विकास कार्यों की धीमी रफ्तार से जूझ रहे कैंट क्षेत्र को अब 'रैपिड' गति मिलने वाली है। मेरठ कैंट बोर्ड की एक अहम बैठक में कई ऐसे प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई है, जो आने वाले दिनों में छावनी क्षेत्र की सूरत और सीरत दोनों बदल देंगे।READ ALSO:-"न्यू ईयर पर हुड़दंग मचाया तो साल की पहली सुबह लॉकअप में होगी..." मेरठ SSP ने तैयार किया 'चक्रव्यूह'; ड्रोन, LIU और 300 एक्स्ट्रा पुलिसकर्मी संभालेंगे कमान
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सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि कैंट बोर्ड के खाते में रैपिड रेल कॉर्पोरेशन (RRTC) से 57 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि आ चुकी है। इस फंड के आते ही बोर्ड ने विकास का खाका खींचना शुरू कर दिया है। सड़कों के निर्माण से लेकर कूड़ा प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं तक, हर मोर्चे पर बड़े बदलाव की तैयारी कर ली गई है।
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57 करोड़ का फंड: विकास कार्यों को मिलेगी 'संजीवनी'

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काफी समय से रैपिड रेल प्रोजेक्ट (RRTS) के तहत अधिग्रहित की गई जमीनों और अन्य संसाधनों के बदले कैंट बोर्ड को मिलने वाला मुआवजा अटका हुआ था। बोर्ड की बैठक में जानकारी दी गई कि RRTC ने लंबित 57 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी है। यह राशि कैंट बोर्ड के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।
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बोर्ड अधिकारियों के अनुसार, इस पैसे का उपयोग वेतन या अन्य प्रशासनिक खर्चों में न होकर, सीधे तौर पर जनता से जुड़े विकास कार्यों (Development Projects) में किया जाएगा। इसका खाका तैयार करने के लिए बोर्ड ने एक रणनीतिक योजना बनाई है।
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MES संभालेगी निर्माण की कमान

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चूंकि यह क्षेत्र रक्षा मंत्रालय के अधीन आता है, इसलिए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि ये सभी विकास कार्य मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (MES) के माध्यम से कराए जाएंगे।
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    प्राथमिकता समिति का गठन: 57 करोड़ रुपये कहां और कैसे खर्च होंगे, इसमें पारदर्शिता लाने के लिए एक विशेष समिति (Committee) का गठन किया गया है।
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    कैसे होगा चयन? कैंट बोर्ड के पास पहले से ही कई प्रस्ताव लंबित थे। यह समिति उन सभी प्रस्तावों का अध्ययन करेगी और तय करेगी कि कौन से कार्य 'अति आवश्यक' हैं और किन्हें तत्काल शुरू करने की जरूरत है। प्राथमिकता के आधार पर लिस्ट बनाकर MES को सौंपी जाएगी।
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इन प्रमुख सड़कों और बाजारों का होगा कायाकल्प

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मेरठ कैंट की सड़कें, जो कभी अपनी हरियाली और साफ-सफाई के लिए जानी जाती थीं, पिछले कुछ समय से मरम्मत की बाट जोह रही थीं। बैठक में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को लेकर बड़े फैसले लिए गए हैं। कुल मिलाकर 14 से 15 बड़े प्रोजेक्ट्स को लाइन-अप किया गया है।
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1. प्रमुख सड़कों का निर्माण: बोर्ड ने विशेष रूप से उन सड़कों को चुना है जिन पर ट्रैफिक का दबाव सबसे ज्यादा है और जिनकी हालत खस्ता है।
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    बुचड़ी रोड (Buchdi Road): यह सड़क लंबे समय से उपेक्षा का शिकार थी। इसके निर्माण से स्थानीय लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी।
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    माल रोड (Mall Road): कैंट की शान कही जाने वाली माल रोड की मरम्मत और सौंदर्यीकरण का कार्य प्राथमिकता पर किया जाएगा।
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    सप्लाई डिपो रोड: सेना और आम नागरिकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण इस मार्ग को भी नया रूप दिया जाएगा।
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2. दो नई मार्केट का निर्माण: कैंट बोर्ड ने अपनी आय बढ़ाने और लोगों को खरीदारी की बेहतर सुविधा देने के लिए दो नए बाजार (Shopping Complexes) विकसित करने का प्रस्ताव पास किया है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि कैंट बोर्ड को किराये के रूप में नियमित आय भी होगी।
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3. अन्य सड़कें और कारपेटिंग: सदर बाजार और नेताजी सुभाष मार्ग, जो कि कैंट का कॉमर्शियल हब है, वहां की सड़कों की 'री-कारपेटिंग' (Re-carpeting) और मरम्मत पर भी सहमति बनी है। इससे व्यापारियों और ग्राहकों को धूल और गड्ढों से मुक्ति मिलेगी।
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कूड़े के ढेर से मुक्ति: बनेंगे 2 हाईटेक गार्बेज स्टेशन

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मेरठ शहर और कैंट क्षेत्र के बीच सबसे बड़ा अंतर सफाई का रहा है, लेकिन पिछले कुछ समय से कैंट में भी कूड़ा निस्तारण (Waste Management) एक चुनौती बन गया था। विशेषकर कैंट बोर्ड ऑफिस के पीछे और रिहायशी इलाकों में खुले में पड़ा कूड़ा बीमारी और बदबू का कारण बन रहा था।
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इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए बोर्ड ने दो नए गार्बेज ट्रांसफरिंग स्टेशन (Garbage Transfer Stations) बनाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।
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    स्टेशन 1: बाउंड्री रोड (Boundary Road) पर स्थित होगा। यह उस पूरे इलाके का कूड़ा कलेक्ट करेगा और वैज्ञानिक तरीके से कॉम्पैक्ट करेगा।
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    स्टेशन 2: कैंट बोर्ड कार्यालय के पीछे की तरफ बनाया जाएगा। यह वो जगह है जहां वर्तमान में कूड़े के अंबार लगे रहते हैं।
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क्या होगा फायदा? इन स्टेशनों के बनने से कूड़ा सड़कों पर नहीं फैलेगा। कूड़े को यहां लाकर मशीनों से कंप्रेस किया जाएगा और फिर निस्तारण प्लांट भेजा जाएगा। इससे कैंट क्षेत्र में स्वच्छता की रैंकिंग सुधरेगी और निवासियों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा।
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स्वास्थ्य सेवा: 30 से 100 बेड का अस्पताल बनाने की तैयारी

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कैंट बोर्ड का मौजूदा अस्पताल संसाधनों की कमी और पुरानी इमारत के चलते अपनी क्षमता के अनुसार सेवा नहीं दे पा रहा है। बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर चर्चा हुई। बोर्ड ने स्वीकार किया कि अस्पताल की वर्तमान स्थिति अच्छी नहीं है और इसे तत्काल सुधार की आवश्यकता है।
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मास्टर प्लान:

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    बेड क्षमता में वृद्धि: बोर्ड का लक्ष्य अस्पताल की क्षमता को मौजूदा 30 बेड से बढ़ाकर 100 बेड करने का है।
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    सरकारी योजनाओं का सहारा: इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए फंड जुटाने हेतु केंद्र सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं (जैसे आयुष्मान भारत इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन आदि) का अध्ययन किया जा रहा है।
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    आवेदन प्रक्रिया: बोर्ड जल्द ही एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर सरकार को भेजेगा ताकि अस्पताल को आधुनिक मशीनों और बेहतर डॉक्टरों की सुविधाओं से लैस किया जा सके।
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वित्तीय संकट और टैक्स का गणित: जनता पर क्या असर?

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विकास की बातें अपनी जगह हैं, लेकिन बैठक में कैंट बोर्ड की खस्ताहाल आर्थिक स्थिति पर भी चिंता जताई गई। अधिकारियों ने बताया कि बोर्ड मुख्य रूप से केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान (Grant) पर निर्भर है।
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आय में कमी के कारण:

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    हाउस टैक्स: पुराने नियमों और कम दरों के कारण हाउस टैक्स से होने वाली आय बहुत कम है।
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    प्रोफेशनल टैक्स: यहां से भी अपेक्षित राजस्व प्राप्त नहीं हो रहा है।
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टैक्स बढ़ाने पर विचार? बोर्ड बैठक में आय बढ़ाने के नए साधनों (Revenue Generation Models) की तलाश पर जोर दिया गया। इस दौरान वाणिज्यिक (Commercial) और आवासीय (Residential) संपत्तियों पर कराधान (Taxation) के ढांचे को पुनर्गठित करने पर चर्चा हुई। हालांकि, अभी कोई नया टैक्स लागू नहीं किया गया है, लेकिन संकेत साफ हैं कि आने वाले समय में कैंट क्षेत्र में रहने वाले लोगों और दुकानदारों को बेहतर सुविधाओं के बदले थोड़ा अधिक टैक्स चुकाना पड़ सकता है। बोर्ड का तर्क है कि 'स्मार्ट कैंट' बनाने के लिए 'स्मार्ट रेवेन्यू' की जरूरत है।
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उम्मीदों का नया सवेरा

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मेरठ कैंट बोर्ड की यह बैठक सिर्फ कागजी कार्यवाही नहीं, बल्कि धरातल पर बदलाव की एक ठोस शुरुआत नजर आ रही है। 57 करोड़ रुपये का फंड एक बड़ी राशि है, और यदि MES और निगरानी समिति ने सही तालमेल के साथ काम किया, तो अगले 6 महीनों में मेरठ कैंट की तस्वीर बदली हुई नजर आएगी।
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कूड़ा निस्तारण स्टेशनों का निर्माण जहां 'स्वच्छ भारत' मिशन को मजबूती देगा, वहीं सड़कों का निर्माण आम आदमी की राह आसान करेगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ये प्रस्ताव कब फाइलों से निकलकर जमीन पर उतरते हैं।
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नोट: यह खबर कैंट बोर्ड की बैठक में लिए गए निर्णयों पर आधारित है। विकास कार्यों की समयसीमा और टेंडर प्रक्रिया की जानकारी बोर्ड द्वारा जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी।
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