मेरठ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश में अपराधियों और गुंडों के खिलाफ योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) नीति का असर एक बार फिर मेरठ की सड़कों और थानों में देखने को मिला है। वेब सीरीज और फिल्मों की तर्ज पर 'भौकाल' (स्वैग) जमाने के लिए स्कूली बच्चों को निशाना बनाने वाले मनचलों को मेरठ पुलिस ने ऐसा सबक सिखाया है कि वे अब अपने पैरों पर ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे हैं।READ ALSO:-मेरठ मेट्रो: सफर शुरू होते ही 'पटरी' से उतरी व्यवस्था, तकनीकी खराबी से MES स्टेशन पर ठहराव बंद; बदइंतजामी का शिकार हुआ यात्री
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मामला मेरठ के लोहियानगर थाना क्षेत्र का है, जहां 25 फरवरी को सरेआम एक स्कूली बस को तमंचे के बल पर रोककर एक बोर्ड परीक्षार्थी के साथ खौफनाक तरीके से मारपीट की गई थी। इस दुस्साहसिक वारदात का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मेरठ पुलिस (Meerut Police) हरकत में आई और महज कुछ ही घंटों के भीतर दो मुख्य आरोपियों को धर दबोचा। पुलिस की 'खातिरदारी' के बाद दोनों आरोपी थाने में लंगड़ाते हुए और हाथ जोड़कर अपने किए की माफी मांगते नजर आए। आइए, इस पूरी घटना की शुरुआत, वारदात के खौफनाक मंजर, स्कूल प्रशासन के एक्शन और पुलिस की सर्जिकल स्ट्राइक का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
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वारदात की पृष्ठभूमि: बोर्ड परीक्षा का तनाव और रास्ते में 'मौत' का खौफ

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यह खौफनाक घटना 25 फरवरी 2026 की है। उत्तर प्रदेश में इस समय यूपी बोर्ड (UP Board) और सीबीएसई (CBSE) की परीक्षाएं चल रही हैं। छात्र वैसे ही परीक्षा के भारी दबाव और तनाव से गुजर रहे होते हैं, ऐसे में उनके साथ इस तरह की हिंसक वारदात उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती है।
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कौन है पीड़ित छात्र? पीड़ित छात्र का नाम जतिन त्यागी है। जतिन हापुड़ जिले के गांव सूदना का रहने वाला है। वह हापुड़ के ही प्रतिष्ठित बीआर इंटरनेशनल स्कूल (BR International School) का छात्र है।
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कहां गया था जतिन? बोर्ड परीक्षाओं के लिए छात्रों के परीक्षा केंद्र (Exam Centers) अक्सर दूसरे स्कूलों या जिलों में भी पड़ जाते हैं। जतिन त्यागी का परीक्षा केंद्र मेरठ के शास्त्री नगर स्थित डीएवी स्कूल (DAV School) में पड़ा था। 25 फरवरी को जतिन अपनी बोर्ड परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से देकर अपनी स्कूल बस से वापस हापुड़ स्थित अपने घर (गांव सूदना) लौट रहा था।
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बस में जतिन के अलावा उसके स्कूल के कई अन्य छात्र-छात्राएं भी मौजूद थे, जो परीक्षा देकर थके-हारे घर वापसी कर रहे थे। किसी को भी इस बात का रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था कि रास्ते में मौत के सौदागर उनका रास्ता रोककर खड़े हैं।
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खौफनाक मंजर: गांव हाजीपुर के पास तमंचे के बल पर बस का अपहरण जैसा दृश्य

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जैसे ही बीआर इंटरनेशनल स्कूल की बस मेरठ के लोहियानगर थाना क्षेत्र से गुजरते हुए गांव हाजीपुर के पास पहुंची, अचानक सड़क का माहौल किसी फिल्मी एक्शन सीन में बदल गया।
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बाइकों पर सवार मौत के साये

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रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे चार युवक अपनी तेज रफ्तार बाइकों पर आए और उन्होंने चलती हुई स्कूल बस को ओवरटेक किया। इन बदमाशों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने बीच सड़क पर सरेआम अपनी बाइक बस के आगे लगा दी।
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तमंचे का खौफ और ड्राइवर की मजबूरी

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बस ड्राइवर ने जब अचानक बस रोकने का कारण पूछना चाहा या आगे बढ़ने की कोशिश की, तो एक आरोपी ने अपनी पैंट से देसी तमंचा (Country-made pistol) निकाल लिया। तमंचा लहराते हुए आरोपियों ने ड्राइवर को बस रोकने और दरवाजा खोलने की धमकी दी। हथियार देखकर बस का ड्राइवर और कंडक्टर बुरी तरह घबरा गए। बस में बैठे मासूम छात्रों की जान खतरे में देख ड्राइवर को मजबूरन बस के दरवाजे खोलने पड़े।
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बस के अंदर घुसे बदमाश: जतिन को खींचने और पीटने की खौफनाक कहानी

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बस का दरवाजा खुलते ही चारों आरोपी किसी भूखे भेड़िये की तरह बस के अंदर घुस गए। उनका निशाना पहले से तय था। वे सीधे हापुड़ निवासी जतिन त्यागी की सीट के पास पहुंचे।
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अपहरण की कोशिश और कड़ा विरोध

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आरोपियों ने बस के अंदर घुसते ही जतिन त्यागी को कॉलर से पकड़ा और उसे गालियां देते हुए जबरन बस से नीचे उतारने का (खींचने का) प्रयास किया। यह स्पष्ट रूप से अपहरण (Kidnapping) और मॉब लिंचिंग जैसी नीयत को दर्शाता है। अगर वे जतिन को बस से नीचे उतारने में सफल हो जाते, तो शायद स्थिति बहुत ज्यादा भयावह हो सकती थी।
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लेकिन जतिन त्यागी ने हिम्मत नहीं हारी। जब बदमाशों ने उसे घसीटना शुरू किया, तो जतिन ने उनका डटकर विरोध किया और अपनी सीट को मजबूती से पकड़ लिया।
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बस के अंदर खूनी खेल

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जब आरोपी जतिन को नीचे उतारने में विफल रहे, तो उन्होंने बस के अंदर ही उसके साथ बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी। उन्होंने जतिन पर लात-घूंसों की बरसात कर दी। बस के अंदर चीख-पुकार मच गई। अन्य छात्र दहशत से कांपने लगे। कुछ छात्राएं रोने लगीं।
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वायरल वीडियो: डिजिटल युग का सबसे बड़ा गवाह

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इस पूरी दहशतगर्दी के बीच, बस में पीछे की सीट पर बैठे कुछ निडर छात्रों ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने चुपके से अपने मोबाइल फोन निकाले और इस पूरी घटना (मारपीट और तमंचा लहराने) का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। यह वीडियो ही बाद में पुलिस के लिए सबसे बड़ा और अहम सुराग साबित हुआ।
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मारपीट करने के बाद, जब बदमाशों को लगा कि बस के बाहर भी लोगों की भीड़ जमा हो सकती है, तो वे जतिन को खुलेआम जान से मारने की धमकी (Death Threats) देते हुए अपनी बाइकों पर बैठकर मौके से फरार हो गए।
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स्कूल प्रशासन का एक्शन: प्रिंसिपल डॉ. पुरुषोत्तम ने दिखाई सख्ती

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अक्सर देखा जाता है कि स्कूलों के बाहर होने वाले झगड़ों या बस में होने वाली घटनाओं को स्कूल प्रशासन यह कहकर पल्ला झाड़ लेता है कि यह स्कूल कैंपस के बाहर का मामला है। लेकिन इस मामले में बीआर इंटरनेशनल स्कूल (हापुड़) के प्रशासन ने जिम्मेदारी और सख्ती की एक बड़ी मिसाल पेश की।
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जैसे ही डरे-सहमे छात्र हापुड़ पहुंचे और उन्होंने घटना की जानकारी स्कूल प्रशासन को दी, पूरे स्कूल में हड़कंप मच गया। जतिन त्यागी के चेहरे और शरीर पर चोट के निशान थे।
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बिना किसी देरी के, बीआर इंटरनेशनल स्कूल के प्रिंसिपल डॉ. पुरुषोत्तम (Dr. Purushottam) ने मोर्चा संभाला। उन्होंने छात्रों द्वारा बनाए गए वीडियो को अपने कब्जे में लिया और तुरंत मेरठ के लोहियानगर थाने का रुख किया। डॉ. पुरुषोत्तम ने थाने पहुंचकर पुलिस को घटना की पूरी जानकारी दी और आरोपियों के खिलाफ नामजद लिखित तहरीर (Complaint) दर्ज कराई। एक स्कूल प्रिंसिपल द्वारा खुद आगे आकर एफआईआर दर्ज कराना यह संदेश देता है कि स्कूल अपने छात्रों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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मेरठ पुलिस का 'ऑपरेशन लंगड़ा': 24 घंटे में निकली गुंडई की हवा

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प्रिंसिपल डॉ. पुरुषोत्तम की तहरीर और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो को मेरठ पुलिस के उच्चाधिकारियों ने बेहद गंभीरता से लिया। एसएसपी (SSP) मेरठ के सख्त निर्देशों के बाद, लोहियानगर पुलिस ने तत्काल एक्शन प्लान तैयार किया।
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सर्विलांस और ताबड़तोड़ छापेमारी

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वीडियो में दिख रहे चेहरों की पहचान करने के लिए सर्विलांस (Surveillance) सेल और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) को सक्रिय किया गया। वीडियो की मदद से कुछ ही घंटों में आरोपियों की शिनाख्त कर ली गई। इसके बाद पुलिस की कई टीमों ने आरोपियों के संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ दबिश (Raids) देना शुरू कर दिया।
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हरकित और मोहित की गिरफ्तारी: 'भौकाल' से 'बैसाखी' तक

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लगातार दबिश और पुलिस के भारी दबाव के चलते, वारदात के मुख्य सूत्रधार पुलिस के हत्थे चढ़ गए। पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में हरकित (Harkit) और मोहित (Mohit) नामक दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
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लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उनकी गिरफ्तारी के तरीके और उसके बाद के दृश्यों की हो रही है। गिरफ्तारी के बाद जब इन दोनों आरोपियों को लोहियानगर थाने लाया गया और बाद में मेडिकल के लिए ले जाया गया, तो मीडिया के कैमरों ने एक ऐसा दृश्य कैद किया जो यूपी पुलिस की 'वर्किंग स्टाइल' का 'ट्रेडमार्क' बन चुका है।
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लंगड़ाते हुए चले आरोपी, हाथ जोड़कर मांगी माफी

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जो आरोपी एक दिन पहले बस में तमंचा लहराकर खुद को किसी 'डॉन' से कम नहीं समझ रहे थे, वे पुलिस हिरासत में लंगड़ाते हुए (Limping) नजर आए। उनके चलने के अंदाज से साफ पता चल रहा था कि पुलिस ने उनकी 'गुंडई का भूत' पूरी तरह से उतार दिया है।
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इतना ही नहीं, पुलिस के खौफ से दोनों आरोपी मीडिया और पुलिस के सामने हाथ जोड़कर, कान पकड़कर और रोते हुए माफी मांगते दिखे। उन्होंने कबूल किया कि उनसे भारी भूल हो गई है और वे भविष्य में कभी किसी छात्र या व्यक्ति पर हाथ नहीं उठाएंगे। यूपी में अपराधियों का यह 'लंगड़ाता हुआ' स्वरूप (जिसे आम बोलचाल में 'हाफ एनकाउंटर' या 'ऑपरेशन लंगड़ा' कहा जाता है) बदमाशों के मन में खौफ पैदा करने का एक प्रभावी तरीका माना जाता है।
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क्या था इस जानलेवा हमले का कारण? (जांच के बिंदु)

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अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर हापुड़ के एक स्कूली छात्र (जतिन त्यागी) को मेरठ के लोहियानगर इलाके में क्यों निशाना बनाया गया? पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और पूछताछ में कई अहम कारण सामने आने की उम्मीद है।
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संभावित कारण जिन पर पुलिस कर रही है जांच:

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    छात्रों की आपसी रंजिश (Student Rivalry): अक्सर देखा जाता है कि स्कूलों या कोचिंग सेंटर्स में मामूली कहासुनी, बैठने की जगह या किसी अन्य छोटी सी बात को लेकर छात्रों के दो गुटों में ठन जाती है। बाहरी लड़के (जो अक्सर कॉलेज ड्रॉपआउट या आवारा होते हैं) इस रंजिश में दखल देते हैं। संभव है कि जतिन का परीक्षा केंद्र (डीएवी स्कूल) पर या पहले कभी किसी से कोई विवाद हुआ हो।
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    रोड रेज या दबंगई (Road Rage): कई बार ये बाइक सवार मनचले बिना किसी पुरानी रंजिश के भी केवल अपना 'रुतबा' दिखाने या किसी मामूली ओवरटेकिंग के विवाद में भी बसों को रोककर हमला कर देते हैं।
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    पहचान की गलतफहमी (Mistaken Identity): क्या बदमाश किसी और छात्र को निशाना बनाने आए थे और गलती से जतिन को पीट दिया? हालांकि यह संभावना कम है क्योंकि वे सीधा जतिन के पास गए थे।
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गिरफ्तार किए गए हरकित और मोहित से पुलिस की पूछताछ (Interrogation) जारी है, जिससे हमले के वास्तविक कारण (Motive) का खुलासा जल्द ही आधिकारिक तौर पर किया जाएगा।
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स्कूली छात्रों की सुरक्षा: एक गंभीर सामाजिक चुनौती

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मेरठ की यह घटना केवल एक अपराध (Crime) नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की एक गहरी बीमारी की ओर भी इशारा करती है।
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'भाईगीरी' और सोशल मीडिया का प्रभाव

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आजकल युवाओं में 'भाईगीरी' (Gangsterism) का एक खतरनाक ट्रेंड पनप रहा है। सोशल मीडिया पर रील (Reels) बनाने, हथियारों के साथ तस्वीरें खिंचवाने और अपने इलाके में दबदबा कायम करने की चाह में युवा वर्ग अपराध के दलदल में फंस रहा है। हरकित और मोहित जैसे युवा इसी 'फेक स्वैग' के शिकार हैं। उन्हें लगता है कि स्कूल बस रोककर मारपीट करने से समाज में उनका खौफ बनेगा, लेकिन वे भूल जाते हैं कि इसके परिणाम कितने भयंकर हो सकते हैं।
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बोर्ड परीक्षाओं के दौरान सुरक्षा व्यवस्था

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फरवरी और मार्च के महीनों में जब लाखों छात्र बोर्ड परीक्षाएं दे रहे होते हैं, तब उनका मानसिक तनाव अपने चरम पर होता है। ऐसे समय में रास्ते में सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस और प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है।
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    पुलिस गश्त की आवश्यकता: परीक्षा केंद्रों और अंतर-जनपदीय (Inter-district) मार्गों (जैसे मेरठ-हापुड़ मार्ग) पर पुलिस की गश्त बढ़ाई जानी चाहिए।
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    स्कूल बसों में सीसीटीवी: इस घटना ने साबित किया है कि बसों में सीसीटीवी कैमरे (CCTV Cameras) होना कितना जरूरी है। हालांकि यहां छात्रों ने वीडियो बना लिया, लेकिन अगर बस में ही उच्च गुणवत्ता वाले कैमरे लगे होते, तो पुलिस को तुरंत और अधिक स्पष्ट सबूत मिल जाते।
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छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव (Psychological Trauma)

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कल्पना कीजिए उन मासूम छात्रों की जो उस बस में बैठे थे। तमंचे की नोक पर अपने सहपाठी को बुरी तरह पिटते हुए देखना किसी भी बच्चे के लिए एक गहरा मानसिक आघात (Trauma) है। स्कूल प्रशासन को चाहिए कि वे इस घटना के बाद उन सभी छात्रों की काउंसलिंग (Counseling) करवाएं जो उस समय बस में मौजूद थे, ताकि वे इस डर से बाहर निकल सकें और अपनी आगे की परीक्षाओं पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
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आगे की कार्रवाई: फरार 2 आरोपियों की तलाश तेज

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मेरठ पुलिस का काम अभी खत्म नहीं हुआ है। बस में चार लोग घुसे थे। हरकित और मोहित की गिरफ्तारी के बाद भी अभी दो मुख्य आरोपी फरार हैं।
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    वायरल वीडियो से शिनाख्त: पुलिस वायरल वीडियो के आधार पर बाकी बचे दो अज्ञात आरोपियों की पहचान कर रही है। वीडियो में उनके चेहरे और कपड़े साफ दिखाई दे रहे हैं, जिसका विश्लेषण साइबर सेल द्वारा किया जा रहा है।
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    लगातार छापेमारी: फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार उनके घरों, रिश्तेदारों और संभावित ठिकानों पर छापेमारी (Raids) कर रही हैं।
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    कठोर धाराएं (Strict Legal Action): पुलिस इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट (Arms Act) की बेहद गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई कर रही है। इनमें हत्या का प्रयास, अपहरण की कोशिश, दंगा फसाद करना, जान से मारने की धमकी देना और अवैध हथियार रखना जैसी धाराएं शामिल की गई हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इन आरोपियों को आसानी से जमानत (Bail) न मिल सके और उनका यह कृत्य दूसरों के लिए एक सबक बने।
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खौफ का अंत और कानून का राज

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मेरठ के लोहियानगर इलाके में हुई यह घटना एक तरफ जहां समाज में पनप रही युवा आक्रामकता (Youth Aggression) का भयानक चेहरा दिखाती है, वहीं दूसरी ओर यह उत्तर प्रदेश पुलिस की त्वरित कार्यप्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण भी है।
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हरकित और मोहित का थाने में लंगड़ाते हुए माफी मांगना केवल एक खबर नहीं है, बल्कि यह उन सभी मनचलों और सड़क छाप गुंडों के लिए एक खुला संदेश है जो स्कूल-कॉलेज के छात्रों को अपना निशाना बनाते हैं। 'तमंचे पर डिस्को' करने वालों का 'लंगड़ाता हुआ' अंजाम यह साबित करता है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और जब पुलिस एक्शन मोड में आती है, तो बड़े-बड़े अपराधियों की पैंट गीली हो जाती है।
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बीआर इंटरनेशनल स्कूल के प्रिंसिपल और उन बहादुर छात्रों को भी सलाम करना चाहिए जिन्होंने डरने के बजाय सबूत (वीडियो) जुटाए और पुलिस तक पहुंचे। अब सभी की निगाहें मेरठ पुलिस पर हैं कि वे कितनी जल्दी बाकी बचे दो आरोपियों को भी सलाखों के पीछे (या बैसाखियों पर) पहुंचाते हैं।
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