मेरठ (खबरीलाल विशेष रिपोर्ट): किसी ने सच ही कहा है कि 'आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है।' जब पारंपरिक संसाधन जवाब दे जाते हैं, तो इंसान तुरंत विकल्पों की तरफ भागता है। उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में इन दिनों कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। शहर में एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडरों की अचानक पैदा हुई किल्लत ने आम आदमी की रसोई का पूरा गणित बिगाड़ कर रख दिया है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें और अनिश्चित सप्लाई के चलते परेशान जनता ने अब एक नया और हाई-टेक रास्ता चुन लिया है। मेरठ के लोग अब गैस सिलेंडर का इंतजार करने के बजाय सीधे इलेक्ट्रॉनिक बाजारों का रुख कर रहे हैं, जिससे 'इंडक्शन चूल्हों' (Induction Cooktops) की डिमांड ने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।READ ALSO:-बिजनौर में सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की बड़ी साजिश नाकाम: रुपयों के लालच में युवक ने पिकअप को किया आग के हवाले, मुंबई से जुड़े तार
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बाजार का बदला मिजाज: संकट में उभरा नया व्यापार
\r\n\r\nगैस की कमी सिर्फ एक घरेलू समस्या नहीं रह गई है, बल्कि इसने मेरठ के इलेक्ट्रॉनिक बाजार को एक अप्रत्याशित 'बूम' दे दिया है। शहर के प्रमुख बाजारों— बेगमपुल, आबूलेन और सदर बाजार के इलेक्ट्रॉनिक शोरूम्स पर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। जो ग्राहक कल तक सिर्फ टीवी या फ्रिज देखने आते थे, वे आज सबसे पहले इंडक्शन चूल्हे के काउंटर पर जा रहे हैं। ऑफलाइन दुकानों से लेकर ई-कॉमर्स वेबसाइट्स तक, हर जगह लोग इंडक्शन की कीमत और फीचर्स खंगाल रहे हैं।
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आंकड़ों की जुबानी: 2 दिन में 15% का जबर्दस्त उछाल
\r\n\r\nबाजार के मौजूदा रुझान को समझने के लिए जब मेरठ के प्रमुख व्यापारियों से बात की गई, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। बेगमपुल स्थित 'मुकेश इलेक्ट्रिकल्स' के संचालक मुकुल सिंघल ने इस ट्रेंड पर विस्तार से चर्चा की।
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मुकुल सिंघल ने बताया, "गैस की किल्लत का सीधा और सबसे तेज असर इलेक्ट्रिकल कुकिंग उपकरणों की बिक्री पर पड़ा है। खासतौर पर इंडक्शन चूल्हों की सेल अचानक रॉकेट की तरह बढ़ गई है। अगर कीमतों की बात करें तो बाजार में फिलहाल 1550 रुपये से लेकर 5,000-6,000 रुपये तक के इंडक्शन मौजूद हैं। लेकिन मध्यवर्गीय परिवार सबसे ज्यादा 2500 से 3000 रुपये की रेंज वाले इंडक्शन पसंद कर रहे हैं। हालात ये हैं कि अगर यही पैनिक बाइंग चलती रही, तो मार्केट में इंडक्शन की भारी शॉर्टेज हो जाएगी और कंपनियों को सप्लाई चेन मेंटेन करना मुश्किल हो जाएगा।"
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दुकानों पर लौट आई रौनक: रोजाना दर्जनों नई 'क्वैरी'
\r\n\r\nसजल इलेक्ट्रॉनिक्स के संचालक सजल अग्रवाल के अनुसार, जिन प्रोडक्ट्स का मार्केट पूरी तरह से डाउन हो चुका था, आज वे 'हॉट केक' की तरह बिक रहे हैं। उन्होंने बाजार की नब्ज टटोलते हुए कहा, "ये हालात कब तक रहेंगे, यह कहना तो मुश्किल है, लेकिन इतना तय है कि अब इंडक्शन की मांग में 5 से 10 प्रतिशत तक की ठोस बढ़ोतरी जरूर हुई है। पिछले 3 दिनों का ही आंकड़ा लें, तो मेरे पास दिनभर में 10 से 15 नए कस्टमर सिर्फ इंडक्शन की जानकारी लेने आ रहे हैं। भले ही वे तुरंत खरीदारी न करें, लेकिन वे यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कौन सी कंपनी का मॉडल बेस्ट है। पूछताछ (Query) का यह ग्राफ आगे और भी बढ़ने के आसार हैं।"
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अर्थशास्त्र का सीधा नियम: मांग बढ़ी तो आसमान पर पहुंची कीमतें
\r\n\r\nअर्थशास्त्र का पुराना नियम है कि जब डिमांड बढ़ती है और सप्लाई सीमित होती है, तो कीमतें अपने आप बढ़ जाती हैं। मेरठ के बाजार में इस समय बिल्कुल यही स्थिति है। इलेक्ट्रॉनिक शोरूम संचालक प्रदीप अग्रवाल बताते हैं कि पिछले चार-पांच दिनों में बाजार का माहौल पूरी तरह बदल गया है।
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प्रदीप बताते हैं, "कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स ने भी इस हाई डिमांड को भांप लिया है। नतीजतन, इंडक्शन की कीमतों में रातों-रात बढ़ोतरी कर दी गई है। जो सामान्य इंडक्शन कुछ दिन पहले तक 2000 रुपये में आसानी से मिल जाता था, वह अब 2200 से 2250 रुपये तक पहुंच गया है। ग्राहक भी बिना ज्यादा मोलभाव किए इसे खरीद रहे हैं क्योंकि उनके पास रसोई चालू रखने का यही एकमात्र विकल्प बचा है।"
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स्मार्ट किचन का दौर: सिर्फ इंडक्शन नहीं, इन उपकरणों की भी मची है लूट
\r\n\r\nगैस संकट ने लोगों को अपनी कुकिंग हैबिट्स (खाना पकाने की आदतों) में आमूल-चूल बदलाव करने पर मजबूर कर दिया है। आबूलेन में मनोचा सेल्स के संचालक बंटी मनोचा का मानना है कि यह सिर्फ एक इमरजेंसी नहीं है, बल्कि 'स्मार्ट किचन' की ओर एक बड़ा कदम है।
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बंटी मनोचा कहते हैं, "बाजार में सिर्फ इंडक्शन की डिमांड हाई नहीं है, बल्कि पूरे कुकिंग अप्लायंस इकोसिस्टम पर इसका असर पड़ा है। लोग अब एयर फ्रायर, इलेक्ट्रॉनिक कुकर, इलेक्ट्रिक राइस कुकर, ओटीजी (OTG), माइक्रोवेव ओवन, इलेक्ट्रॉनिक तंदूर, रोटी मेकर, इलेक्ट्रिक केतली और एग बॉयलर की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। वर्किंग प्रोफेशनल्स के बीच इलेक्ट्रिक लंच बॉक्स की डिमांड सबसे ज्यादा है। अब कोई भी पुराने जमाने के मिट्टी के तेल वाले स्टोव या अंगीठी पर खाना नहीं बनाना चाहता। लोगों के पास समय की कमी है, वे सेफ और फास्ट कुकिंग चाहते हैं, जो सिर्फ इन्हीं अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से संभव है।"
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थोक बाजार में हलचल: 20 फीसद तक बढ़ा कारोबार
\r\n\r\nमेरठ में इलेक्ट्रॉनिक अप्लायंसेज के बड़े थोक डीलर अतुल सिंघल बताते हैं कि शहर में रोजाना कितने इंडक्शन बिक रहे हैं, इसका सटीक गणित लगाना फिलहाल मुश्किल है। लेकिन उन्होंने एक बड़ा अनुमान साझा किया, "पिछले तीन दिनों में मेरठ जिले में इंडक्शन और दूसरे कुकिंग अप्लायंसेज का ओवरऑल कारोबार लगभग 20 फीसद तक उछल गया है। सिर्फ रिटेल दुकानें ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन शॉपिंग, मॉल्स और बड़े ब्रांडेड आउटलेट्स के जरिए भी भारी बिक्री हो रही है। बड़ी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब सीधे डीलर्स के संपर्क में हैं ताकि स्टॉक खत्म न हो।"
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क्या गैस वापस आने पर बदलेंगे हालात?
\r\n\r\nइस पूरे परिदृश्य को देखते हुए एक बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या एलपीजी गैस की सप्लाई सामान्य होने के बाद इंडक्शन की ये डिमांड वापस गिर जाएगी? मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही पैनिक बाइंग कम हो जाए, लेकिन एक बार जिन घरों में इंडक्शन या माइक्रोवेव पहुंच गया, वे आगे भी इसका इस्तेमाल 'सपोर्टिंग अप्लायंस' के तौर पर करते रहेंगे। फिलहाल, जब तक गैस की गाड़ियां सुचारू रूप से मोहल्लों में नहीं पहुंचने लगतीं, मेरठ के इलेक्ट्रॉनिक बाजारों में त्योहारी सीजन जैसी रौनक यूं ही बनी रहेगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.