मेरठ (स्पेशल डेस्क): उत्तर प्रदेश के मेरठ में सोमवार (16 फरवरी 2026) की सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब जिला एवं सत्र न्यायालय (Meerut District and Sessions Court) को बम से उड़ाने की धमकी मिली। यह धमकी कचहरी की आधिकारिक ईमेल आईडी पर भेजी गई थी, जिसमें साफ लिखा था कि सुबह 11 बजकर 20 मिनट पर कोर्ट परिसर में धमाका होगा। इस सूचना के मिलते ही पुलिस-प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में पूरे कोर्ट परिसर को खाली कराने का आदेश जारी किया गया।READ ALSO:-भिवाड़ी का 'बारूद कांड': केमिकल फैक्ट्री की आड़ में चल रही थी मौत की दुकान; धमाके के बाद लॉकरनुमा कमरों में जिंदा जले 7 मजदूर, फावड़े से समेटने पड़े शरीर के टुकड़े
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स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी और सीओ एलआईयू (LIU) प्रदीप कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad) और डॉग स्क्वायड ने तुरंत मोर्चा संभाला। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस ने कोर्ट के बराबर में स्थित अलेक्जेंडर क्लब (Alexander Club) के परिसर से ड्रोन उड़ाकर पूरी कचहरी और आठ मंजिला नई कोर्ट बिल्डिंग की छतों की निगरानी की। यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब मंगलवार (17 फरवरी) को मेरठ बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव होने हैं, जिसे लेकर पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद थी।
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ईमेल में क्या लिखा था? 11:20 का अल्टीमेटम

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कचहरी के सूत्रों के अनुसार, सोमवार सुबह जैसे ही कोर्ट का कामकाज शुरू हुआ, आधिकारिक ईमेल आईडी पर एक संदिग्ध मेल प्राप्त हुआ। इस मेल की भाषा बेहद धमकी भरी और डराने वाली थी। भेजने वाले ने दावा किया था कि कोर्ट परिसर में विस्फोटक लगाए गए हैं और ठीक 11 बजकर 20 मिनट पर उन्हें उड़ा दिया जाएगा।
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CCTV से कचहरी की निगरानी करते CO सिविल लाइन अभिषेक तिवारी।

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समय सीमा बेहद कम थी, इसलिए अधिकारियों ने बिना कोई जोखिम उठाए तुरंत एक्शन लेने का फैसला किया। 11 बजे के आसपास ही पुलिस ने लाउडस्पीकर और सीटी बजाकर लोगों को बाहर निकलने का निर्देश देना शुरू कर दिया।
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    ईमेल का समय: सुबह के वक्त आया मेल।
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    धमकी का समय: 11:20 बजे विस्फोट का दावा।
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    प्रतिक्रिया: 11:20 से पहले ही परिसर को 90% खाली करा लिया गया।
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अफरा-तफरी का माहौल: जजों ने छोड़ी कुर्सी, वकील चैंबर से बाहर

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जैसे ही बम की खबर फैली, कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जिला जज और अन्य न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। देखते ही देखते सभी न्यायिक अधिकारी जिला जज कोर्ट के सामने बने लॉन (Lawn) में एकत्रित हो गए।
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वकीलों ने अपने बस्ते समेटे और चैंबरों से बाहर आ गए। वादकारी (Litigants), जो दूर-दराज के गांवों से अपनी तारीख पर आए थे, उन्हें पुलिस ने मुख्य द्वारों से बाहर निकाल दिया। एक प्रत्यक्षदर्शी वकील ने बताया, "हम अपनी फाइलें तैयार कर रहे थे कि तभी पुलिस वाले दौड़ते हुए आए और तुरंत बिल्डिंग खाली करने को कहा। पहले हमें लगा कि यह कोई मॉक ड्रिल है, लेकिन जब डॉग स्क्वायड और बज्र वाहन अंदर आए, तब असलियत का पता चला।"
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पुलिस ने एहतियात के तौर पर:

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    जिला एवं सत्र न्यायालय की पुरानी बिल्डिंग को खाली कराया।
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    14 सत्र न्यायालय के सभी तलों की तलाशी ली।
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    कोर्ट नंबर 11, 12 और 13 (जो संवेदनशील माने जाते हैं) को पूरी तरह सील कर दिया।
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    हर कोर्ट रूम के दरवाजे पर पुलिस का पहरा बिठा दिया गया ताकि कोई अंदर न जा सके।
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अलेक्जेंडर क्लब से ड्रोन सर्विलांस: हवा से निगरानी

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इस बार पुलिस ने केवल जमीनी तलाशी पर भरोसा नहीं किया। चूंकि धमकी बड़ी थी और मंगलवार को चुनाव होने हैं, इसलिए पुलिस ने हाई-टेक निगरानी का सहारा लिया। कोर्ट परिसर के ठीक बगल में स्थित ऐतिहासिक अलेक्जेंडर क्लब के मैदान को पुलिस ने अपना बेस बनाया।
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यहां से पुलिस की सर्विलांस टीम ने उच्च क्षमता वाले ड्रोन उड़ाए। इन ड्रोनों के जरिए:
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    आठ मंजिला नई कोर्ट बिल्डिंग की छतों की जांच की गई।
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    कचहरी की पुरानी बिल्डिंग के छज्जों और पानी की टंकियों को स्कैन किया गया।
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    आसपास की ऊंची इमारतों पर संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी की गई।
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सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी ने बताया, "हम कोई रिस्क नहीं ले सकते। ड्रोन के जरिए उन जगहों को देखा गया जहां इंसान का तुरंत पहुंचना मुश्किल है। फिलहाल कुछ संदिग्ध नहीं मिला है, लेकिन सर्च ऑपरेशन जारी है।"
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मंगलवार को बार चुनाव: सुरक्षा पहले से ही थी कड़ी

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इस धमकी को इसलिए भी ज्यादा गंभीरता से लिया जा रहा है क्योंकि मेरठ बार एसोसिएशन (Meerut Bar Association Election) का चुनाव कल यानी मंगलवार को होना है। चुनाव की तैयारियों के चलते कचहरी में पहले से ही गहमागहमी का माहौल था। टेंट लगाए जा रहे थे और उम्मीदवारों के समर्थकों की भीड़ थी।
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पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह धमकी चुनाव में व्यवधान डालने या दहशत फैलाने की एक साजिश हो सकती है। चुनाव के मद्देनजर पुलिस ने पहले ही अतिरिक्त बल की मांग की थी, जो आज की घटना में काम आया।
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    चुनाव की तारीख: 17 फरवरी 2026 (मंगलवार)।
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    मतदान स्थल: कोर्ट परिसर के पास बने बूथ।
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    प्रभाव: धमकी के बाद चुनाव की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। अब हर मतदाता की गहन तलाशी के बाद ही प्रवेश दिया जाएगा।
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शुक्रवार को भी मिली थी धमकियां: एक पैटर्न?

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यह घटना अकेली नहीं है। इससे पहले बीते शुक्रवार (13 फरवरी 2026) को भी उत्तर प्रदेश के कई जिलों की कचहरियों को निशाना बनाया गया था।
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    शुक्रवार की घटनाएं: लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या और मिर्जापुर कोर्ट को भी इसी तरह के धमकी भरे ईमेल मिले थे।
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    क्या था ईमेल में: उन ईमेल्स में भी विस्फोटक प्लांट करने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में वे सभी 'होक्स' (फर्जी) साबित हुए।
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    कनेक्शन: पुलिस जांच कर रही है कि क्या मेरठ का आज का मेल उसी सिंडिकेट का हिस्सा है जिसने शुक्रवार को प्रदेश भर में दहशत फैलाई थी। साइबर सेल (Cyber Cell) ईमेल के आईपी एड्रेस (IP Address) को ट्रेस करने में जुटी है।
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पुलिस की कार्रवाई और सर्च ऑपरेशन

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सूचना मिलते ही मेरठ पुलिस के आला अधिकारियों ने मोर्चा संभाल लिया।
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    अधिकारी मौके पर: सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी और सीओ एलआईयू प्रदीप कुमार ने कमान संभाली।
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    टीमें तैनात:
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      बम निरोधक दस्ता (BDDS): मेटल डिटेक्टर और स्निफर डॉग्स के साथ कोर्ट रूम्स के फर्नीचर, अलमारियों और संदिग्ध बैग्स की तलाशी ली।
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      डॉग स्क्वायड: खोजी कुत्तों ने पार्किंग एरिया और वकीलों के चैंबरों को सूंघकर जांचा।
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      QRT (Quick Response Team): किसी भी स्थिति से निपटने के लिए हथियारों से लैस क्यूआरटी गेट पर तैनात रही।
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दोपहर 1 बजे तक चले सघन तलाशी अभियान के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली। हालांकि, अभी तक कोई विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा घेरा ढीला नहीं किया गया है।
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वादकारियों की परेशानी: तारीख पर आए, दहशत लेकर लौटे

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इस घटना का सबसे बुरा असर उन आम लोगों पर पड़ा जो न्याय की आस में कोर्ट आए थे। मेरठ के सरधना से आए 65 वर्षीय रामपाल ने बताया, "मेरी पेशी थी। मैं सुबह 10 बजे ही आ गया था। अचानक पुलिस ने सीटी बजाना शुरू कर दिया और हमें बाहर निकाल दिया। अब पता नहीं अगली तारीख कब मिलेगी।" हजारों की संख्या में आए वादकारियों को गेट के बाहर घंटों खड़ा रहना पड़ा। वकीलों ने भी अपने मुवक्किलों को घर जाने की सलाह दी।
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साइबर सेल की जांच: विदेश से तार जुड़े होने का शक

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शुरुआती जांच में पुलिस को शक है कि यह ईमेल किसी विदेशी सर्वर या वीपीएन (VPN) का इस्तेमाल करके भेजा गया है। पिछले कुछ महीनों में दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों और अस्पतालों को मिली धमकियों में भी यही पैटर्न देखा गया था।
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    आईपी ट्रैकिंग: साइबर सेल ईमेल हेडर (Email Header) की जांच कर रही है।
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    मकसद: पुलिस का मानना है कि इसका मकसद सिर्फ 'पैनिक' (Panic) क्रिएट करना और बार चुनाव को प्रभावित करना हो सकता है।
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    कानूनी कार्रवाई: अज्ञात के खिलाफ बीएनएस (BNS) की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।
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सुरक्षा प्रोटोकॉल और भविष्य की चिंताएं

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मेरठ कचहरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे संवेदनशील कचहरियों में से एक है। अतीत में यहां वकीलों के आंदोलनों और छोटी-मोटी घटनाओं का इतिहास रहा है, लेकिन बम की धमकी ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मांग की है कि कचहरी में स्थायी सुरक्षा बढ़ाई जाए और प्रवेश द्वारों पर स्कैनर मशीनें हमेशा चालू रहें।
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क्या करें अगर आप ऐसी स्थिति में फंसें?

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    घबराएं नहीं: पैनिक करने से भगदड़ मच सकती है।
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    पुलिस के निर्देश मानें: जो रास्ता सुरक्षाकर्मी दिखाएं, उसी से बाहर निकलें।
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    अफवाह न फैलाएं: सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के कोई जानकारी शेयर न करें।
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    संदिग्ध वस्तु न छुएं: अगर कोई लावारिस बैग दिखे, तो तुरंत पुलिस को बताएं।
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मेरठ कोर्ट में मिली बम की धमकी फिलहाल एक 'होक्स' (अफवाह) साबित होती दिख रही है, लेकिन इसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। 11:20 का वक्त बीत चुका है और कोई धमाका नहीं हुआ, जिससे सभी ने राहत की सांस ली है। हालांकि, मंगलवार को होने वाले बार चुनाव के मद्देनजर पुलिस अब फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। अलेक्जेंडर क्लब से उड़ते ड्रोन और खाकी वर्दी का पहरा यह बताने के लिए काफी है कि प्रशासन किसी भी चुनौती के लिए तैयार है।
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मेरठ जिला कोर्ट को सोमवार सुबह ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली। ईमेल में 11:20 बजे धमाके की बात कही गई थी। पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए पूरा परिसर खाली कराया और अलेक्जेंडर क्लब से ड्रोन उड़ाकर निगरानी की। सीओ सिविल लाइन और बम स्क्वायड ने मोर्चा संभाला। मंगलवार को बार एसोसिएशन के चुनाव होने हैं, जिसके चलते सुरक्षा बढ़ा दी गई है। यह घटना शुक्रवार को यूपी के अन्य जिलों में मिली धमकियों की अगली कड़ी मानी जा रही है।
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