Meerut News: उत्तर प्रदेश के मेरठ से सरकारी मशीनरी पर सवाल खड़ा करने वाली एक दुखद खबर सामने आई है। मंगलवार देर रात काम के भारी दबाव और उत्पीड़न से तंग आकर एक बीएलओ (Booth Level Officer) ने जहर खा लिया। घटना के बाद उन्हें गंभीर हालत में गढ़ रोड स्थित लोकप्रिय अस्पताल (Lokpriya Hospital) के आईसीयू में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।READ ALSO:-मेरठ में 'कबूतरबाजों' का बड़ा खेल: विदेश में 'मलाईदार' नौकरी के नाम पर 40 लाख डकारे, वर्क वीजा बताकर थमा दिया टूरिस्ट वीजा
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पीड़ित कर्मचारी का नाम मोहित चौधरी है, जो सिंचाई विभाग में वरिष्ठ सहायक हैं और साथ ही बीएलओ की ड्यूटी भी निभा रहे थे। मोहित की पत्नी और परिजनों ने सुपरवाइजर पर मानसिक प्रताड़ना और सस्पेंड करने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है।
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फोन पर रोते हुए बताई परेशानी, फिर खाया जहर

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मुंडाली के मुरलीपुरा गांव के रहने वाले मोहित चौधरी पल्लवपुरम के वार्ड 57 में बीएलओ का काम देख रहे थे। मोहित के रिश्तेदार अमित चौधरी ने बताया कि जहर खाने से ठीक 30 मिनट पहले मोहित ने उन्हें फोन किया था। फोन पर वह काफी परेशान थे।
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आरोप है कि उनके सुपरवाइजर आशीष शर्मा उन्हें बार-बार फोन करके धमका रहे थे। सुपरवाइजर का कहना था कि अगर काम पूरा नहीं हुआ तो उन्हें सस्पेंड करवा दिया जाएगा और एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी। इसी तनाव में आकर मोहित ने यह आत्मघाती कदम उठाया।
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पत्नी का दर्द: "सुबह जाते थे, देर रात लौटते थे"

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मोहित की पत्नी ज्योति का कहना है कि उनके पति पर काम का इतना बोझ था कि वह मानसिक रूप से टूट चुके थे। ज्योति ने बताया, "वह सुबह जल्दी घर से निकल जाते थे और देर रात लौटते थे। काम का प्रेशर इतना था कि उन्होंने ठीक से खाना भी छोड़ दिया था। सुपरवाइजर की धमकियों ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।"
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सिंचाई विभाग की नियमित नौकरी और ऊपर से बीएलओ की चुनावी ड्यूटी (SIR Survey) के दोहरे दबाव ने मोहित को अवसाद में धकेल दिया था।
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अस्पताल में हंगामा, यूनियन ने दी आंदोलन की चेतावनी

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घटना की खबर मिलते ही सिंचाई विभाग और बीएलओ यूनियन के कर्मचारी बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच गए। यूनियन लीडर आशीष शर्मा (यूनियन नेता) और अन्य साथियों ने सुपरवाइजर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और तत्काल कार्रवाई की मांग की।
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यूनियन का कहना है कि अफसरों के उत्पीड़न के कारण ही मोहित की जान पर बन आई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। स्थिति को संभालने के लिए एसीएम दीपक कथूरिया और नायब तहसीलदार आदेश सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
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DM बोले- उत्पीड़न नहीं हुआ, जांच जारी है

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हंगामे के बीच डीएम (District Magistrate) और जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. वीके सिंह भी अस्पताल पहुंचे और मोहित का हालचाल जाना। डीएम ने उत्पीड़न के आरोपों को नकारते हुए कहा, "किसी भी प्रकार का कोई उत्पीड़न नहीं किया गया है। मोहित का एसआईआर (SIR) फॉर्म भरने का काम चल रहा था। हमें जानकारी मिली है कि सुपरवाइजर ने काम पूरा न होने की वजह पूछी थी।"
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डीएम ने आगे कहा, "अस्पताल में मोहित का इलाज चल रहा है। मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दे दिए गए हैं। यह भी देखा जाएगा कि कहीं कोई घरेलू विवाद तो नहीं था। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही असली वजह साफ होगी।"
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मेरठ में बीएलओ मोहित चौधरी द्वारा जहर खाने की घटना ने सरकारी कर्मचारियों पर काम के बढ़ते दबाव को उजागर किया है। जहां परिवार और यूनियन इसे अफसरों की प्रताड़ना बता रहे हैं, वहीं प्रशासन इसे रूटीन कामकाज का हिस्सा बताकर जांच की बात कह रहा है। फिलहाल मोहित जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं।
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