मेरठ (Meerut)। शहर का दिल कहे जाने वाले और सबसे व्यस्ततम चौराहे 'बेगमपुल' (Begumpul) की तस्वीर अब बदलने वाली है। दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल (RRTS) का संचालन शुरू होने से पहले ही प्रशासन ने यहां भविष्य में लगने वाले 'महाजाम' और पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। रविवार की रात घने कोहरे के बीच मेरठ के जिलाधिकारी (DM) डॉ. वीके सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉ. विपिन ताडा ने बेगमपुल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान जो हालात सामने आए, उसने अधिकारियों को भी चिंता में डाल दिया।READ ALSO:-16 साल की उम्र में किया पहला अपराध और अब कस्टडी में हुआ हमला, जानें कौन है कुख्यात विनय त्यागी?
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दोनों शीर्ष अधिकारियों ने माना कि रैपिड रेल स्टेशन शुरू होने के बाद यहाँ वाहनों और पैदल यात्रियों का दबाव कई गुना बढ़ जाएगा, जिसे संभालने के लिए फुट ओवरब्रिज (Foot Overbridge - FOB) का निर्माण अनिवार्य है। इसी के साथ, 10 साल से ठंडे बस्ते में पड़ा वह प्रोजेक्ट एक बार फिर जीवित हो गया है, जिसकी मांग स्थानीय व्यापारी और जनता दशकों से कर रही थी।
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रविवार की रात: कोहरा, रफ्तार और खतरे का सायरन

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निरीक्षण के दौरान डीएम और एसएसपी ने देखा कि कोहरे की वजह से दृश्यता (Visibility) बेहद कम थी, लेकिन इसके बावजूद वाहन तेज गति से दौड़ रहे थे। सबसे डराने वाली तस्वीर वह थी जब पैदल यात्री जान जोखिम में डालकर दौड़ते हुए वाहनों के बीच से सड़क पार कर रहे थे।
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एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने मौके पर ही स्थिति का विश्लेषण करते हुए कहा, "बेगमपुल पर वर्तमान में भी वाहनों का दबाव बहुत ज्यादा है। यहां पैंठ बाजार और कचहरी रोड होने के कारण दिनभर भीड़ रहती है। ऐसे में पैदल यात्रियों के लिए सड़क पार करना मौत को दावत देने जैसा है। भविष्य में रैपिड रेल शुरू होने पर स्थिति और विस्फोटक हो सकती है।"
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अधिकारियों के बीच विमर्श हुआ और यह तय किया गया कि पैदल यात्रियों को सुरक्षित रास्ता देने और यातायात को सुचारु रखने के लिए फुट ओवरब्रिज ही एकमात्र विकल्प है।
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रैपिड रेल: विकास के साथ बड़ी चुनौती भी

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मेरठ में रैपिड रेल का काम अंतिम चरण में है। बेगमपुल स्टेशन रैपिड रेल का सबसे महत्वपूर्ण भूमिगत (Underground) स्टेशन है। यह केवल एक स्टेशन नहीं, बल्कि शहर का एक बड़ा कमर्शियल हब भी बनने जा रहा है।
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    भीड़ का अनुमान: विशेषज्ञों का मानना है कि रैपिड रेल शुरू होते ही बेगमपुल स्टेशन पर हजारों यात्रियों का आवागमन रोजाना होगा।
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    आधुनिक मार्केट: स्टेशन परिसर के भीतर ही आधुनिक मार्केट को आकार दिया जा रहा है, जिससे खरीदारों की भीड़ भी बढ़ेगी।
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    ट्रैफिक का दबाव: ई-रिक्शा, ऑटो और निजी वाहनों की कतारें लगेंगी जो यात्रियों को स्टेशन छोड़ने और लेने आएंगे।
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अगर समय रहते यहां फुट ओवरब्रिज और ट्रैफिक मैनेजमेंट का प्लान लागू नहीं किया गया, तो बेगमपुल चौराहे पर पैर रखने की जगह नहीं मिलेगी।
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10 साल पहले भी दिखा था सपना, जो फाइलों में खो गया

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बेगमपुल पर फुट ओवरब्रिज का मुद्दा नया नहीं है। स्थानीय लोगों के लिए यह एक 'जुमला' सा बन गया है। आज से करीब 10 साल पहले भी प्रशासन ने यहां एफओबी (FOB) बनाने का प्रस्ताव तैयार किया था। उस समय योजना यह थी:
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    आबूलेन पुलिस चौकी को हटाया जाएगा।
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    शनि मंदिर के पास से फुट ओवरब्रिज शुरू होकर डेरावाल ड्रेसर तक जाएगा।
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    आबू नाले को कवर करके पार्किंग बनाई जाएगी।
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लेकिन, यह पूरा प्लान लाल फीताशाही और एनओसी (NOC) के चक्कर में अटक गया। क्यों फेल हुआ था पिछला प्लान? बेगमपुल का बड़ा हिस्सा छावनी क्षेत्र (Cantonment Area) और सेना की ए-1 श्रेणी की जमीन के अंतर्गत आता है। आबू नाला सिंचाई विभाग के अधीन है। पिछली बार सेना से जमीन की एनओसी और सिंचाई विभाग से नाला कवर करने की अनुमति न मिलने के कारण प्रस्ताव डस्टबिन में चला गया। सपा सरकार के दौरान नगर विकास मंत्री आजम खान की पहल पर दयानंद नर्सिंग होम के सामने नाले का कुछ हिस्सा कवर कर पार्किंग जरूर बनी, लेकिन वह ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई।
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वर्तमान हालात: अतिक्रमण और अवैध पार्किंग का अड्डा

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आज बेगमपुल की स्थिति यह है कि इसे चौराहा कम और 'अघोषित बस अड्डा' ज्यादा कहा जा सकता है।
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    अवैध कब्जा: पुलिस चौकी के सामने से लेकर जीरो माइल तक रोडवेज और प्राइवेट बसों की लंबी कतारें लगती हैं।
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    ई-रिक्शा का आतंक: चौराहे के चारों तरफ ई-रिक्शा और टेंपो का जमावड़ा रहता है, जिससे जाम की स्थिति 24 घंटे बनी रहती है।
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    पटरी बाजार: रही सही कसर फल वाले, ठेले और सड़क पर सजी कपड़ों की दुकानों ने पूरी कर दी है।
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व्यापारियों की आवाज: "साहब! बस बनवा दीजिए"

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इस बार डीएम और एसएसपी की सक्रियता देखकर स्थानीय व्यापारियों में एक बार फिर उम्मीद जगी है। हालांकि, उनके मन में पिछले अनुभवों को लेकर संशय भी है। आबूलेन व्यापार संघ के अध्यक्ष आकाश खन्ना और महामंत्री सरदार राजबीर सिंह ने कहा, "हम दो दशकों से चिंता जता रहे हैं। इस बार अगर योजना बनी है, तो इसे हर हाल में पूरा होना चाहिए। रैपिड रेल आने के बाद बेगमपुल मेरठ का सबसे बड़ा केंद्र होगा। अगर अब भी फुट ओवरब्रिज नहीं बना, तो पूरा बाजार जाम में फंसकर रह जाएगा।"
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स्थानीय नागरिक रमेश चंद ने कहा, "डीएम साहब अगर इस प्रोजेक्ट को जरूरी मान रहे हैं, तो हम बस यही कहेंगे कि फाइलों से निकालकर इसे जमीन पर उतार दीजिए।"
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अधिकारियों का 'एक्शन प्लान': बजट की नहीं होगी कमी

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इस बार प्रशासन के तेवर सख्त और स्पष्ट नजर आ रहे हैं। डीएम डॉ. वीके सिंह ने आश्वस्त किया है कि इस प्रोजेक्ट के आड़े बजट नहीं आएगा।
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डीएम का रोडमैप:

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    समन्वय (Coordination): डीएम जल्द ही छावनी बोर्ड (Cantonment Board) के सीईओ, लोक निर्माण विभाग (PWD), सिंचाई विभाग और नगर निगम के अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक करेंगे।
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    एनओसी (NOC): सेना और अन्य विभागों से एनओसी लेने की प्रक्रिया को व्यक्तिगत निगरानी में पूरा कराया जाएगा।
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    बजट (Budget): डीएम ने साफ कहा है कि फुट ओवरब्रिज के लिए बजट की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। राज्य सरकार या स्मार्ट सिटी फंड से इसका इंतजाम किया जाएगा।
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मेरठ की स्मार्ट सिटी छवि का सवाल

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बेगमपुल पर फुट ओवरब्रिज का निर्माण केवल एक पुल बनाना नहीं है, बल्कि यह मेरठ की 'स्मार्ट सिटी' छवि और रैपिड रेल की सफलता से जुड़ा मुद्दा है। रैपिड रेल जैसी वर्ल्ड क्लास ट्रांसपोर्ट सुविधा के बाहर अगर यात्रियों को जाम और दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ा, तो यह प्रशासन की बड़ी विफलता होगी।
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रविवार की रात डीएम-एसएसपी के बीच बनी सहमति ने शहरवासियों को एक नई आस दी है। अब देखना यह होगा कि 10 साल पुराना यह 'जिन्न' क्या वाकई इस बार हकीकत का रूप ले पाएगा या फिर एक बार फिर फाइलों में दफन हो जाएगा। फिलहाल, गेंद प्रशासन के पाले में है।
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