मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सस्ता और सुलभ न्याय पाने की 50 साल पुरानी लड़ाई अब एक निर्णायक मोड़ पर आ गई है। West UP High Court Bench (पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच) की मांग को लेकर अधिवक्ताओं और सामाजिक संगठनों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। इसी कड़ी में कल यानी बुधवार (17 दिसंबर) को 'मेरठ बंद' (Meerut Bandh) का आह्वान किया गया है। यह पहला मौका है जब वकीलों के इस आंदोलन को एक बड़े 'जन आंदोलन' का रूप दिया जा रहा है।READ ALSO:-Bijnor News: कोहरे की 'सफेद चादर' बनी कफन! धामपुर में रफ्तार के कहर ने उजाड़ा हंसता-खेलता परिवार, पत्नी की मौत, पति अस्पताल में भर्ती
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मेरठ बार एसोसिएशन का दावा है कि इस बंद का असर केवल मेरठ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों में इसकी गूंज सुनाई देगी। करीब 1000 से ज्यादा छोटे-बड़े संगठनों ने इस बंद को अपना पूर्ण समर्थन दिया है।
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50 साल पुरानी मांग और जनता का दर्द
\r\n\r\nपश्चिमी उत्तर प्रदेश की करीब 10 करोड़ की आबादी पिछले पांच दशकों से अपने लिए अलग हाईकोर्ट बेंच की मांग कर रही है। वर्तमान में, न्याय पाने के लिए यहां के वादकारियों को करीब 700 किलोमीटर का सफर तय करके प्रयागराज (इलाहाबाद) जाना पड़ता है।
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मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए एक बहुत ही मार्मिक और तार्किक पहलू रखा। उन्होंने कहा, "यह विडंबना ही है कि मेरठ से पाकिस्तान स्थित लाहौर हाईकोर्ट की दूरी, हमारे अपने राज्य के इलाहाबाद हाईकोर्ट से कम है। ऐसी स्थिति में West UP High Court Bench न होने के कारण जनता को भारी आर्थिक, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।"
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हजारों गरीब लोग सिर्फ दूरी और खर्च के डर से न्याय पाने की उम्मीद छोड़ देते हैं। यह लड़ाई अब केवल वकीलों की नहीं, बल्कि उस आम आदमी की है जो न्याय के अधिकार से वंचित हो रहा है।
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1000 संगठनों का समर्थन: अब यह जन आंदोलन है
\r\n\r\nअब तक यह आंदोलन मुख्य रूप से अधिवक्ताओं तक सीमित माना जाता था, लेकिन इस बार तस्वीर बदली हुई है। मेरठ बार एसोसिएशन के महामंत्री राजेंद्र सिंह राणा ने बताया कि बुधवार को होने वाले बंद के लिए जनता खुद आगे आई है। संयुक्त व्यापार संघ, मोटर डीलर्स एसोसिएशन, ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन, ई-रिक्शा एसोसिएशन, और विभिन्न आरडब्ल्यूए (RWA) समेत 1000 से ज्यादा संगठनों ने लिखित में अपना समर्थन दिया है।
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यह एकजुटता दर्शाती है कि West UP High Court Bench अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 'आवश्यकता' बन चुकी है, महज एक मांग नहीं।
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कल क्या खुला रहेगा और क्या बंद?
\r\n\r\nमेरठ बंद को लेकर बार एसोसिएशन और सहयोगी संगठनों ने पूरी तैयारी कर ली है। आम जनता को परेशानी न हो, इसके लिए पहले ही एडवाइजरी जैसी जानकारी साझा की गई है।
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ये रहेंगे बंद:
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- \r\n सभी प्रमुख बाजार और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान।\r\n \r\n
- \r\n पेट्रोल पंप और गैस एजेंसियां।\r\n \r\n
- \r\n स्कूल और कॉलेज (शिक्षण संस्थान)।\r\n \r\n
- \r\n डॉक्टरों के निजी क्लीनिक (OPD)।\r\n \r\n
- \r\n सिनेमा हॉल और मनोरंजन केंद्र।\r\n \r\n
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इनको मिलेगी छूट:
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- \r\n मेडिकल इमरजेंसी सेवाएं।\r\n \r\n
- \r\n अस्पताल और एंबुलेंस सेवाएं।\r\n \r\n
- \r\n आवश्यक दवा की दुकानें।\r\n \r\n
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महामंत्री राजेंद्र सिंह राणा ने स्पष्ट किया कि बंद का उद्देश्य सरकार को जगाना है, न कि मरीजों को परेशान करना। इसलिए मेडिकल इमरजेंसी को इस बंद से पूरी तरह मुक्त रखा गया है।
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सड़कों पर उतरेंगे वकील: 35 पॉइंट और 20 मोबाइल वैन
\r\n\r\nबुधवार सुबह से ही मेरठ की सड़कों पर आंदोलन का असर दिखने लगेगा। मेरठ बार एसोसिएशन ने बंद को सफल बनाने के लिए शहर को अलग-अलग जोन में बांटकर 35 पॉइंट चिन्हित किए हैं। हर पॉइंट पर अधिवक्ताओं की एक टीम तैनात रहेगी जो लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से बंद का समर्थन करने की अपील करेगी।
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इसके अलावा, 20 मोबाइल वैन (Mobile Vans) तैयार की गई हैं। ये गाड़ियां पूरे जिले में घूम-घूम कर जायजा लेंगी। अगर कहीं कोई बाजार या दुकान खुली पाई जाती है, तो ये टीमें वहां पहुंचकर हाथ जोड़कर और गांधीवादी तरीके से प्रतिष्ठान बंद करने का आग्रह करेंगी।
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सरकारें बदलती रहीं, लेकिन नहीं मिला न्याय
\r\n\r\nआंदोलनकारियों का कहना है कि पिछले 50 सालों में लखनऊ और दिल्ली में कई सरकारें आईं और गईं। हर चुनाव में West UP High Court Bench का मुद्दा उठता है, लोक-लुभावन वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही फाइलें ठंडे बस्ते में चली जाती हैं।
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इस बार का आंदोलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे जाति, धर्म और राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर लड़ा जा रहा है। पश्चिमी यूपी के 22 जिलों में इस आंदोलन की सुगबुगाहट यह बता रही है कि अगर जल्द ही मांग पूरी नहीं हुई, तो आने वाले समय में यह आंदोलन दिल्ली की सीमाओं तक भी पहुंच सकता है। अध्यक्ष संजय शर्मा ने हुंकार भरते हुए कहा, "इस बार की गूंज दिल्ली तक पहुंचेगी और हम अपना अधिकार लेकर रहेंगे।"
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बुधवार का मेरठ बंद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इतिहास में एक नया अध्याय लिख सकता है। 10 करोड़ लोगों को सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने की यह मुहिम अब एक निर्णायक चरण में है। प्रशासन ने भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। देखना होगा कि West UP High Court Bench के लिए उठी यह जन-आवाज क्या सरकार के कानों तक पहुंच पाती है। जनता से अपील है कि वे कल घर से निकलने से पहले ट्रैफिक और बाजार की स्थिति का जायजा जरूर लें।
Sabse pehle comment karne wale banein.