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मेरठ (Meerut) महानगर के पश्चिमी क्षेत्र के निवासियों के लिए मंगलवार का दिन किसी ऐतिहासिक जीत से कम नहीं था। दशकों पुरानी मांग और पिछले चार साल से चल रहे अनवरत संघर्ष, धरने और प्रदर्शनों के बाद आखिरकार बागपत रोड (Baghpat Road) से रेलवे रोड (Railway Road) को जोड़ने वाले नवनिर्मित संपर्क मार्ग (Link Road) पर वाहनों के पहिए घूमने लगे।READ ALSO:-मेरठ नगर निगम का 'मेकओवर': अब इंजीनियरों के हाथ में होगी ट्रैफिक और पर्यावरण की कमान; 'नगर स्वास्थ्य अधिकारी' का पद इतिहास बना, शासन ने बदली पूरी व्यवस्था
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महज 825 मीटर लंबी और 7 मीटर चौड़ी यह सड़क सिर्फ डामर और गिट्टी का मिश्रण नहीं है, बल्कि यह स्थानीय नागरिकों की एकजुटता और लोकतंत्र में जन-आंदोलन की शक्ति का प्रमाण है। इस मार्ग के खुलने से न केवल दो प्रमुख मार्गों की दूरी सिमट गई है, बल्कि टीपी नगर (TP Nagar) और दिल्ली रोड (Delhi Road) पर लगने वाले भीषण जाम के 'चक्रव्यूह' को तोड़ने में भी बड़ी मदद मिली है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने दावा किया है कि सड़क का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और अगले 72 घंटों (तीन दिनों) में इसे पूरी तरह फिनिश कर दिया जाएगा।
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'खबरिलाल' की इस विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि कैसे एक जन आंदोलन ने प्रशासन को झुकने पर मजबूर किया, इस सड़क के बनने से किसे फायदा होगा, '2 फुट' जमीन छोड़ने का विवाद क्या है और भविष्य में इस सड़क को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन क्या कदम उठा रहा है।
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1. संघर्ष की जीत: 15 अगस्त 2021 से जारी थी लड़ाई
\r\n\r\nकिसी भी विकास कार्य के पीछे अक्सर एक लंबी कहानी होती है। बागपत रोड-रेलवे रोड लिंक मार्ग की कहानी भी संघर्ष और संयम की है।
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आंदोलन की नींव:
\r\n\r\nइस लिंक मार्ग निर्माण को लेकर संघर्षरत 'जन आंदोलन समिति' के अध्यक्ष सरदार राजेंद्र सिंह ने बताया कि स्थानीय निवासी वर्षों से प्रशासन से गुहार लगा रहे थे, लेकिन फाइलें सरकारी दफ्तरों में धूल फांक रही थीं। जब सुनवाई नहीं हुई, तो स्थानीय लोगों ने खुद मोर्चा संभालने की ठानी।
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- \r\n ऐतिहासिक तारीख: 15 अगस्त 2021, यानी स्वतंत्रता दिवस के दिन टीपी नगर में इस आंदोलन की औपचारिक शुरुआत की गई थी।\r\n \r\n
- \r\n संघर्ष का सफर: सर्दी, गर्मी और बरसात की परवाह किए बिना समिति के सदस्य लगातार कई महीनों तक धरने पर बैठे रहे। उन्होंने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे, जनप्रतिनिधियों का घेराव किया और सोशल मीडिया पर मुहिम चलाई।\r\n \r\n
- \r\n परिणाम: यह उसी संघर्ष का परिणाम है कि आज चार साल बाद यह मांग धरातल पर उतरी है। समिति के प्रचार प्रमुख गौरव सिंह और महामंत्री सचिन गोयल ने कहा कि यह जीत साबित करती है कि अगर जनता ठान ले, तो कोई भी काम असंभव नहीं है।\r\n \r\n
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जश्न का माहौल:
\r\n\r\nमंगलवार को जैसे ही इस मार्ग से पहले वाहन ने फर्राटा भरा, वहां मौजूद लोगों के चेहरे खिल उठे। 24 कॉलोनियों की संयुक्त संघर्ष समिति ने मौके पर ही एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर हर्ष व्यक्त किया और इसे नए साल के तोहफे के रूप में स्वीकार किया।
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2. 825 मीटर का सफर और 24 कॉलोनियों को 'संजीवनी'
\r\n\r\nयह सड़क शहर के ट्रैफिक मैनेजमेंट (Traffic Management) के लिए एक 'गेम चेंजर' साबित होगी। तकनीकी रूप से यह सड़क 825 मीटर लंबी और 7 मीटर चौड़ी है, लेकिन इसका प्रभाव बहुत व्यापक है।
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किसे और कैसे मिलेगा फायदा?
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- \r\n 24 कॉलोनियों की लाइफलाइन: बागपत रोड और रेलवे रोड के बीच बसीं लगभग 24 कॉलोनियों (जैसे- न्यू प्रहलाद नगर, शंभू नगर, शिव पुरम, ऋषि नगर, आदि) के हजारों परिवारों को अब मुख्य सड़क पर आने के लिए लंबा चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। पहले उन्हें अपनी कॉलोनी से बाहर निकलने के लिए संकरी गलियों या टीपी नगर के जाम से जूझना पड़ता था।\r\n \r\n
- \r\n दूरी और समय की बचत: अब तक बागपत रोड से रेलवे रोड जाने के लिए वाहनों को टीपी नगर चौराहे या दिल्ली रोड होकर जाना पड़ता था, जिसमें पीक आवर्स (Peak Hours) में 30 से 45 मिनट तक लग जाते थे। इस लिंक रोड के जरिए यह दूरी अब महज 2 से 5 मिनट में तय हो सकेगी।\r\n \r\n
- \r\n जाम से मुक्ति: बागपत रोड पर वाहनों का भारी दबाव रहता है। इस लिंक रोड के खुलने से ट्रैफिक डायवर्ट होगा, जिससे टीपी नगर और मेवला फ्लाईओवर के नीचे लगने वाले जाम में कमी आएगी। स्कूली बच्चों और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं के लिए यह मार्ग वरदान साबित होगा।\r\n \r\n
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3. PWD का दावा और '2 फुट' जगह का विवाद
\r\n\r\nभले ही सड़क शुरू हो गई हो, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता और डिजाइन को लेकर स्थानीय लोगों के मन में कुछ सवाल भी हैं, जिनका जवाब लोक निर्माण विभाग ने दिया है।
\r\n\r\nविवाद क्या है?
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आंदोलन समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) ने बागपत रोड की तरफ शुरुआत में ही दो फुट जगह छोड़ दी है, जहां सड़क नहीं बनाई गई है।
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- \r\n लोगों का डर: स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर यह जगह खाली छोड़ी गई, तो भविष्य में यह अतिक्रमण (Encroachment) का अड्डा बन जाएगी या यहां 'बॉटलनेक' (Bottleneck) बन जाएगा, जिससे जाम की समस्या फिर से खड़ी हो सकती है।\r\n \r\n
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PWD की तकनीकी सफाई:
\r\n\r\nइस मुद्दे पर लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता (Assistant Engineer) अंकित सिंघल ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि यह जगह लापरवाही में नहीं, बल्कि तकनीकी आवश्यकता के चलते छोड़ी गई है।
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- \r\n नाले की पुलिया (Culvert): अंकित सिंघल ने बताया कि छोड़ी गई दो फुट जगह पर नाले की पुलिया का निर्माण किया जाना है।\r\n \r\n
- \r\n जल निकासी (Drainage): इस पुलिया का निर्माण होने से संपर्क मार्ग पर बसी कॉलोनियों के ड्रेनेज सिस्टम को बड़ा फायदा होगा। कॉलोनियों की नालियों का पानी सीधे बागपत रोड के बड़े नाले में गिर सकेगा। इससे बारिश के दिनों में जलभराव की समस्या नहीं होगी।\r\n \r\n
- \r\n डेडलाइन: उन्होंने दावा किया कि अगले तीन दिनों के भीतर सड़क निर्माण और फिनिशिंग का बाकी काम पूरा कर लिया जाएगा।\r\n \r\n
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4. भारी वाहनों की 'नो एंट्री': सुरक्षा के लिए लगेंगे हाइट गेज
\r\n\r\nइस सड़क को मुख्य रूप से रिहायशी इलाकों के हल्के वाहनों (Light Motor Vehicles) के आवागमन को सुगम बनाने के लिए बनाया गया है। यह कोई हाईवे या बाईपास नहीं है, इसलिए यहां भारी वाहनों पर लगाम लगाना जरूरी है।
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ट्रक और डंपर होंगे प्रतिबंधित:
\r\n\r\nअक्सर देखा जाता है कि लिंक रोड बनते ही बड़े ट्रक और डंपर टोल या जाम से बचने के लिए रिहायशी इलाकों में घुस जाते हैं, जिससे सड़कें टूट जाती हैं और हादसे होते हैं।
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सुरक्षा का 'आयरन प्लान':
\r\n\r\nPWD ने इस समस्या का पहले ही समाधान निकाल लिया है। सहायक अभियंता ने बताया कि:
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- \r\n हाइट गेज (Height Gauge): संपर्क मार्ग के दोनों छोर (बागपत रोड एंट्री और रेलवे रोड एंट्री) पर लोहे के मजबूत हाइट गेज (ऊंचाई अवरोधक) लगाए जाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n उद्देश्य: इन अवरोधकों की ऊंचाई इतनी रखी जाएगी कि कार, जीप, बाइक, ई-रिक्शा और छोटे लोडर तो आसानी से निकल सकें, लेकिन बड़े ट्रक या बस इसमें प्रवेश न कर सकें।\r\n \r\n
- \r\n दीर्घकालिक लाभ: इससे न केवल सड़क लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी, बल्कि कॉलोनियों में बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी खतरा कम होगा। साथ ही, संकरी सड़क पर बड़े वाहनों के फंसने से लगने वाले जाम की नौबत ही नहीं आएगी।\r\n \r\n
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5. भविष्य की चुनौतियां और उम्मीदें
\r\n\r\nसड़क का बनना पहला कदम है, लेकिन इसका रखरखाव उससे भी बड़ी चुनौती है।
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अतिक्रमण का खतरा:
\r\n\r\nजैसा कि संघर्ष समिति ने आशंका जताई है, सड़क के किनारे खाली पड़ी जगहों पर खोखे या रेहड़ी-पटरी वालों का कब्जा न हो जाए, यह सुनिश्चित करना नगर निगम और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। अगर अभी से सख्ती नहीं बरती गई, तो 7 मीटर चौड़ी यह सड़क कुछ ही महीनों में संकरी गली बन सकती है।
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लाइटिंग और सफाई:
\r\n\r\nस्थानीय लोगों की मांग है कि इस मार्ग पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट्स (Street Lights) लगाई जाएं ताकि रात के समय सुरक्षा बनी रहे। साथ ही, सड़क के किनारे ड्रेनेज सिस्टम की नियमित सफाई भी जरूरी है।
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जनता की आवाज में है दम
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24 कॉलोनियों के निवासियों के लिए यह राहत की सांस है। अब उम्मीद है कि PWD अपने वादे के मुताबिक 3 दिनों में बचा हुआ काम पूरा करेगा और प्रशासन इस सड़क को अतिक्रमण मुक्त रखकर इसे एक आदर्श मार्ग बनाएगा।
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'खबरिलाल' की टीम बागपत रोड और रेलवे रोड के निवासियों को इस जीत की बधाई देती है। हम आशा करते हैं कि प्रशासन इसी तरह शहर की अन्य रुकी हुई परियोजनाओं को भी जल्द पूरा करेगा।
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Sabse pehle comment karne wale banein.