मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर का प्रमुख शहर मेरठ इन दिनों गैस चेंबर में तब्दील हो चुका है। शहर में प्रदूषण नियंत्रण के तमाम सरकारी दावे हवा में उड़ते नजर आ रहे हैं। मेरठ में वायु प्रदूषण (Air Pollution in Meerut) की स्थिति मंगलवार को भयावह हो गई, जब एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के खतरनाक आंकड़े को पार कर गया। हालात यह हैं कि सुबह की शुरुआत ही जहरीली धुंध के साथ हो रही है, जिससे स्कूली बच्चों और बुजुर्गों का सांस लेना दूभर हो गया है।READ ALSO:-मेरठ की 'गोल्डन गर्ल' अन्नू रानी की शाही शादी: किक बॉक्सर साहिल संग लिए सात फेरे, राइफल से हर्ष फायर और नोटों की बारिश
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प्रदूषण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को पल्लवपुरम क्षेत्र में सर्वाधिक AQI 404 दर्ज किया गया, जो 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में आता है। वहीं, बुधवार की सुबह भी राहत लेकर नहीं आई और परतापुर क्षेत्र में AQI 379 दर्ज किया गया।
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क्यों बढ़ रहा है मेरठ में वायु प्रदूषण?
\r\n\r\nशहर की हवा में जहर घुलने के पीछे कई बड़े कारण सामने आए हैं। एक तरफ मौसम की मार है, तो दूसरी तरफ मानवीय लापरवाही।
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- \r\n धीमी हवा और मौसम: सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही के अनुसार, फिलहाल बारिश की कोई संभावना नहीं है। हवा की रफ्तार बेहद धीमी है, जिसके कारण धूल और धुएं के कण बिखरने के बजाय वातावरण में ही जमा हो रहे हैं। यही कारण है कि मेरठ में वायु प्रदूषण का स्तर कम नहीं हो रहा है।\r\n \r\n
- \r\n कूड़ा और अलाव जलाना: ठंड बढ़ते ही लोग जगह-जगह अलाव जला रहे हैं। चिंता की बात यह है कि लकड़ी के बजाय लोग पुराने टायर, प्लास्टिक, काला तेल और पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल कर अलाव जला रहे हैं, जो हवा को बेहद जहरीला बना रहा है।\r\n \r\n
- \r\n प्रशासनिक लापरवाही: शहर में सड़क किनारे कूड़ा जलाने की घटनाएं आम हैं। रोक के बावजूद कूड़े के ढेरों में आग लगाई जा रही है, जिससे उठने वाला धुआं पूरे शहर को अपनी चपेट में ले रहा है।\r\n \r\n
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गांवड़ी में कूड़े के पहाड़ में लगी भीषण आग
\r\n\r\nप्रदूषण के इस संकट के बीच, मेरठ के गांवड़ी में स्थित कूड़े के पहाड़ में मंगलवार को भीषण आग लग गई। इस घटना ने मेरठ में वायु प्रदूषण की स्थिति को और बिगाड़ दिया। आग से निकले जहरीले धुएं के कारण आसपास के लोगों का दम घुटने लगा।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि नगर निगम को सूचना देने के बावजूद शुरुआत में कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। छात्र नेता विनीत चपराना और स्थानीय निवासियों ने हंगामा किया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने दमकल विभाग को बुलाया। दमकल की गाडि़यों को कूड़े के ढेर तक पहुंचने के लिए जेसीबी से रास्ता बनाना पड़ा। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
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एनसीआर में प्रदूषण का हाल: ग्रेटर नोएडा सबसे प्रदूषित
\r\n\r\nसिर्फ मेरठ ही नहीं, पूरा एनसीआर प्रदूषण की चपेट में है। मंगलवार को ग्रेटर नोएडा देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां AQI 454 तक पहुंच गया। गाजियाबाद और बागपत की स्थिति भी मेरठ जैसी ही खतरनाक बनी हुई है।
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प्रमुख शहरों का AQI (मंगलवार का डेटा):
\r\n\r\n| \r\n शहर \r\n | \r\n \r\n AQI स्तर \r\n | \r\n
| \r\n ग्रेटर नोएडा \r\n | \r\n \r\n 432 \r\n | \r\n
| \r\n गाजियाबाद \r\n | \r\n \r\n 423 \r\n | \r\n
| \r\n मेरठ (पल्लवपुरम) \r\n | \r\n \r\n 404 \r\n | \r\n
| \r\n बागपत \r\n | \r\n \r\n 400 \r\n | \r\n
| \r\n दिल्ली \r\n | \r\n \r\n 360 \r\n | \r\n
| \r\n मुजफ्फरनगर \r\n | \r\n \r\n 321 \r\n | \r\n
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प्रशासन के दावे और जमीनी हकीकत
\r\n\r\nक्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी भुवन प्रकाश यादव का कहना है कि मेरठ में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कूड़ा जलाने वालों पर जुर्माना लगाया जा रहा है और जहां AQI बढ़ रहा है, वहां एंटी स्मॉग गन से पानी का छिड़काव किया जा रहा है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि कूड़ा निस्तारण केंद्रों और सड़कों पर जलता कचरा इन दावों की पोल खोल रहा है।
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डॉक्टरों की सलाह: कैसे करें बचाव?
\r\n\r\nबढ़ते प्रदूषण को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है:
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- \r\n मास्क का प्रयोग: घर से बाहर निकलते समय N95 मास्क जरूर पहनें।\r\n \r\n
- \r\n अनावश्यक बाहर न निकलें: जब AQI बहुत खराब हो, तो सुबह की सैर और बाहरी गतिविधियों से बचें।\r\n \r\n
- \r\n एयर प्यूरीफायर: संभव हो तो घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।\r\n \r\n
- \r\n घर में सफाई: झाड़ू लगाने के बजाय वैक्यूम क्लीनर या गीले पोछे का इस्तेमाल करें ताकि धूल न उड़े।\r\n \r\n
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मेरठ में वायु प्रदूषण की स्थिति अब स्वास्थ्य आपातकाल जैसी होती जा रही है। 400 के पार जाता AQI और गांवड़ी जैसे इलाकों में कूड़े में लगती आग प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अगर जल्द ही कड़े कदम नहीं उठाए गए और जनता ने भी जिम्मेदारी नहीं समझी, तो आने वाले दिनों में सांस लेना और भी मुश्किल हो सकता है।
Sabse pehle comment karne wale banein.