मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव के दौरान उस समय जमकर हंगामा हुआ, जब मतगणना में देरी और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी का गुस्सा फूट पड़ा। उनकी यह टिप्पणी – 'सत्ता में हूं इसलिए मजबूर हूं नहीं तो अभी तक मेज पलटकर सिर पर रख देता था' – राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।READ ALSO:-यूपी में प्राइवेट नौकरी वालों के 'अच्छे दिन'! 9 घंटे की शिफ्ट, 2 गुना ओवरटाइम, शाम 7 से नाइट शिफ्ट... 63 साल पुराना कानून बदला, जानिए A to Z
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मेयर हरिकांत अहलूवालिया के निर्देश पर 17 नवंबर को मेरठ नगर निगम कार्यकारिणी के छह पदों के लिए चुनाव निर्धारित था। हालांकि, चुनाव प्रक्रिया के दौरान भाजपा पार्षदों के बीच बगावत और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठने के कारण अंततः चुनाव अधिकारी अमित भार्गव ने इसे निरस्त करने की घोषणा कर दी। नगर निगम के इतिहास में यह पहला मौका है जब कार्यकारिणी का चुनाव रद्द हुआ है।
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मतगणना में देरी पर भड़के सांसद

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, भाजपा में पार्षदों के बीच आम सहमति नहीं बन पाई थी। पार्टी द्वारा चार प्रत्याशियों का नाम तय करने के बावजूद, पार्षद संजय सैनी समेत आठ पार्षदों ने नामांकन दाखिल कर दिया, जिससे पार्टी में बगावत के तेवर साफ दिखे। शाम को जब मतगणना में देरी होने लगी और चुनावी प्रक्रिया पर संदेह गहराया, तो सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी मतगणना स्थल पर पहुंचे।
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वहां उन्होंने निगम अफसरों को सरेआम फटकार लगाई। वाजपेयी ने चुनाव अधिकारी को संबोधित करते हुए कहा कि, “सांसद जी नहीं, सुनो मेज पलटनी छोड़ दी है मैंने, नहीं तो मेज पलटकर सिर पर रख देता था। सांसद बन गया हूं, मेरी मजबूरी है कि मैं सांसदों की लिस्ट में आ गया हूं।” यह बयान लक्ष्मीकांत वाजपेयी मेरठ विवाद का केंद्र बन गया है, जो उनकी 'सख्त' नेता वाली छवि को एक बार फिर सामने लाता है।
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'सूखा खाना जानते हो, भूल रहे हो ये मेरठ है'

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गुस्साए सांसद ने अधिकारियों पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि, "बस सूखा खाना ही जानते हो, भूल रहे हो ये मेरठ है।" चुनाव अधिकारी ने हाथ जोड़कर अपनी गलती स्वीकार की और कहा कि "हमारी गलती है और आप सही कह रहे हैं साथ ही आपको कहने का अधिकार है।"
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मतदान शुरू होने में सवा घंटे की देरी और बैलेट पेपर न मिलने की शिकायत पर भी वाजपेयी ने अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई थी। 
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'गड़बड़ मिली तो नौकरी खा जाऊंगा'

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सांसद वाजपेयी ने चुनाव अधिकारी पर सख्ती दिखाते हुए कहा कि उनकी भूमिका सुबह से ही संदिग्ध दिखाई दे रही है और वह इसकी जांच कराएंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "इस पूरे चुनाव की जांच भी अभी होगी और अगर आपकी जरा भी लापरवाही या गलती मिली तो आपकी नौकरी मैं खा जाऊंगा। मुझे किसी का डर नहीं है।"
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वाजपेयी ने स्पष्ट किया कि उनका यह गुस्सा व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि पार्टी की छवि को बचाने के लिए है। उन्होंने कहा, "मैं सिर्फ इस कमल के फूल के साथ हूं, बाकि मुझे कोई डर नहीं है। अकेला आया था, अकेला जाऊंगा, लेकिन जो पार्टी की छवि धुमिल करने का प्रयास हुआ है, इसको मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता।"
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भाजपा पार्षद पर भी कार्रवाई

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इस चुनाव में पार्टी लाइन से हटकर नामांकन भरने वाले वार्ड-50 के पार्षद संजय सैनी को बाद में अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निलंबित कर दिया गया। उनकी बगावत ने भाजपा के चुनावी समीकरण को बिगाड़ दिया था और पार्टी के भीतर बड़े भूचाल की स्थिति पैदा कर दी थी। 
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यह घटना दर्शाती है कि स्थानीय चुनावों में अनुशासनहीनता और प्रशासनिक लापरवाही किस हद तक जा सकती है, और एक वरिष्ठ नेता को किस तरह से हस्तक्षेप करना पड़ता है। 
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मेरठ नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में मतगणना में देरी और भाजपा पार्षदों की बगावत के कारण चुनाव निरस्त हो गया। इसी दौरान राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी मेरठ विवाद सामने आया, जब उन्होंने अधिकारियों पर जमकर भड़कते हुए कहा कि 'सत्ता में हूं इसलिए मजबूर हूं, नहीं तो अभी तक मेज पलटकर सिर पर रख देता।' उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी पाए जाने पर अधिकारियों की नौकरी खाने तक की चेतावनी दी।
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