मेरठ (उत्तर प्रदेश): रंगों, उमंगों और भाईचारे का सबसे बड़ा महापर्व 'होली' (Holi 2026) बस दस्तक देने ही वाला है। उत्तर प्रदेश में होली खेलने का अपना एक अलग और पारंपरिक अंदाज होता है। लेकिन इस बार की होली पुलिस और प्रशासन के लिए किसी 'अग्निपरीक्षा' से कम नहीं है। वजह साफ है— एक तरफ पवित्र रमजान (Ramadan) का महीना चल रहा है, तो दूसरी तरफ यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों (Panchayat Elections) की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। इन तीनों बड़े इवेंट्स के एक साथ टकराने से मेरठ रेंज (Meerut Range) का पूरा इलाका अति-संवेदनशील (Hyper-sensitive) हो गया है।READ ALSO:-नमो भारत और मेरठ मेट्रो का सफर: तकनीकी खराबी से न खुलें दरवाजे तो न हों पैनिक, जानें 'इमरजेंसी बटन' से लेकर ₹60/घंटे जुर्माने तक के सभी सख्त नियम
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इस चुनौती को भांपते हुए और 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति अपनाते हुए, मेरठ रेंज के डीआईजी (DIG) कलानिधि नैथानी ने सुरक्षा का एक ऐसा अभेद्य खाका तैयार किया है, जिसे भेद पाना किसी भी उपद्रवी के लिए नामुमकिन होगा। मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़—इन चार जनपदों के चप्पे-चप्पे पर खाकी का पहरा बिठा दिया गया है।
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इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि पुलिस ने 5358 होलिका दहन स्थलों की सुरक्षा के लिए क्या रणनीति बनाई है, डीजे (DJ) और म्यूजिक सिस्टम को लेकर क्या सख्त गाइडलाइंस जारी हुई हैं, और छतों से राहगीरों पर पानी के गुब्बारे फेंकने वाले हुड़दंगियों पर पुलिस कैसे लगाम कसेगी।
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1. सुरक्षा का 'मेगा ब्लूप्रिंट': 5000 पुलिसकर्मी और 4 कंपनी PAC का कड़ा पहरा
\r\n\r\nपश्चिमी उत्तर प्रदेश का मेरठ रेंज हमेशा से सांप्रदायिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील माना जाता रहा है। त्योहारों पर छोटी सी भी चिंगारी यहाँ बड़ा रूप ले सकती है। इसे रोकने के लिए डीआईजी ने 'प्रिवेंटिव पुलिसिंग' (Preventive Policing) पर सबसे ज्यादा जोर दिया है।
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- \r\n विशाल फोर्स की तैनाती: रेंज के चारों जनपदों (मेरठ, बुलंदशहर, हापुड़ और बागपत) में कानून-व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए कुल 28 राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officers) और 5000 से अधिक पुलिसकर्मियों की भारी-भरकम फौज जमीन पर उतार दी गई है।\r\n \r\n
- \r\n पीएसी की विशेष टुकड़ियां: किसी भी बड़े दंगे या आपात स्थिति को तुरंत नियंत्रित करने के लिए 4 कंपनी पीएसी (Provincial Armed Constabulary - PAC) को भी 'स्टैंडबाय' और संवेदनशील फ्लैग मार्च ड्यूटी पर लगाया गया है। पीएसी की मौजूदगी ही उपद्रवियों के मन में खौफ पैदा करने के लिए काफी मानी जाती है।\r\n \r\n
- \r\n बाडी प्रोटेक्टर से लैस जवान: होली पर अक्सर रंग फेंकने के बहाने पथराव या हिंसक झड़पों का खतरा रहता है। इसलिए स्पष्ट निर्देश हैं कि सड़कों पर तैनात पुलिस फोर्स पूरी तरह से 'बाडी प्रोटेक्टर' (Body Protector/Riot Gear), हेलमेट और डंडों से लैस रहेगी।\r\n \r\n
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2. माइक्रो-मैनेजमेंट: 23 जोन, 79 सेक्टर और 66 QRT टीमें
\r\n\r\nपुलिस की इस भारी तैनाती को एक दिशा देने के लिए पूरे मेरठ रेंज को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर 'माइक्रो-मैनेजमेंट' (Micro-management) किया गया है।
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- \r\n जोन और सेक्टर प्रणाली: पूरे परिक्षेत्र को सुरक्षा के लिहाज से 23 जोन (Zones) और 79 सेक्टरों (Sectors) में विभाजित कर दिया गया है। हर जोन की जिम्मेदारी एक वरिष्ठ अधिकारी (सर्किल ऑफिसर स्तर) के पास होगी, जबकि सेक्टरों की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को सौंपी गई है।\r\n \r\n
- \r\n क्विक रिस्पांस टीम (QRT): किसी भी इलाके से बवाल या हुड़दंग की सूचना मिलने पर मात्र कुछ मिनटों के भीतर पहुँचने के लिए 66 'क्यूआरटी' (Quick Response Teams) का गठन किया गया है। ये टीमें आधुनिक हथियारों, आंसू गैस के गोलों और संचार उपकरणों से लैस होकर लगातार गश्त पर रहेंगी।\r\n \r\n
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3. होलिका दहन (Holika Dahan) पर सख्त नियम: कोई 'नई परंपरा' नहीं पड़ेगी
\r\n\r\nहोलिका दहन होली का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन अक्सर होलिका रखने की जगह को लेकर दो गुटों या समुदायों के बीच भारी विवाद पैदा हो जाता है। पुलिस ने इस विवाद की जड़ को ही खत्म करने का फैसला किया है।
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- \r\n 5358 होलिका दहन स्थल चिन्हित: मेरठ रेंज के चारों जिलों में पुलिस ने फिजिकल वेरिफिकेशन करके कुल 5358 होलिका दहन स्थलों को चिन्हित किया है। इनमें से कई स्थान बेहद संवेदनशील आबादी के बीच हैं।\r\n \r\n
- \r\n नया स्थान पूर्णतः प्रतिबंधित: डीआईजी कलानिधि नैथानी ने अत्यंत सख्त शब्दों में आदेश जारी किया है कि पूरे रेंज में किसी भी जनपद में होलिका दहन का कोई भी नया स्थान नहीं बनाया जाएगा। होलिका केवल उन्हीं जगहों पर जलाई जाएगी, जहाँ वर्षों से पारंपरिक रूप से जलाई जाती रही है। कोई भी 'नई परंपरा' (New Tradition) शुरू करने की अनुमति बिल्कुल नहीं है।\r\n \r\n
- \r\n थाना प्रभारियों की जवाबदेही: यदि किसी इलाके में जबरन या रातों-रात किसी नई जगह पर होलिका रखी जाती है, तो इसके लिए संबंधित थाना प्रभारी (SHO) और चौकी इंचार्ज की सीधी जवाबदेही (Accountability) तय कर दी गई है। उनके खिलाफ निलंबन जैसी कड़ी कार्रवाई हो सकती है।\r\n \r\n
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ऊंचाई और बिजली के तारों का विशेष ध्यान
\r\n\r\nकई बार होलिका की लपटें इतनी ऊंची उठ जाती हैं कि ऊपर से गुजर रहे हाई-टेंशन बिजली के तारों को अपनी चपेट में ले लेती हैं, जिससे पूरे इलाके की बिजली गुल हो जाती है या बड़ा हादसा हो जाता है।
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- \r\n इसे रोकने के लिए निर्देश दिए गए हैं कि होलिका की ऊंचाई सीमित रखी जाए ताकि वह बिजली के तारों से किसी भी सूरत में स्पर्श न हो।\r\n \r\n
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4. संवेदनशील और मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में 'ड्रोन' से निगरानी
\r\n\r\nमेरठ, हापुड़ और बुलंदशहर में कई ऐसे इलाके हैं जहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय की मिश्रित आबादी (Mixed Population) एक साथ रहती है।
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- \r\n पैदल गश्त (Foot Patrolling): इन इलाकों में आपसी विश्वास बहाली और असामाजिक तत्वों पर दबाव बनाने के लिए पुलिस लगातार भारी संख्या में पैदल गश्त कर रही है।\r\n \r\n
- \r\n तीसरी आंख का पहरा: संकरी गलियों और छतों पर पुलिस की नजर आसानी से नहीं पहुँच पाती। लोग अक्सर छतों पर पत्थर या तेजाब/खराब रंग इकट्ठा कर लेते हैं। इसे पकड़ने के लिए पुलिस ड्रोन कैमरों (Drone Cameras) का भारी इस्तेमाल कर रही है। मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए हर छत और गली की सघन चेकिंग की जा रही है।\r\n \r\n
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5. रमजान और पंचायत चुनावों का 'डबल इफेक्ट': संयम की अपील
\r\n\r\nइस बार की होली सामान्य होली नहीं है। डीआईजी कलानिधि नैथानी ने अपनी ब्रीफिंग में स्पष्ट किया है कि यह समय बेहद 'संवेदनशील' (Sensitive) है।
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- \r\n पवित्र रमजान: मुस्लिम समुदाय का पवित्र माह 'रमजान' चल रहा है। दिन में रोजेदार इबादत करते हैं और शाम को मस्जिदों में तरावीह (विशेष नमाज) पढ़ी जाती है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है कि रंग खेलते समय किसी नमाजी या रोजेदार पर रंग न पड़े, जिससे सांप्रदायिक सद्भाव (Communal Harmony) न बिगड़े। पुलिस ने रमजान के कार्यक्रमों और मस्जिदों के आसपास विशेष ध्यान रखने के आदेश दिए हैं।\r\n \r\n
- \r\n पंचायत चुनाव (Panchayat Chunav): यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का बिगुल भी बजने वाला है। गांवों में चुनावी रंजिशें (Political Rivalries) चरम पर होती हैं। कई बार चुनावी खुन्नस निकालने के लिए होली पर रंग फेंकने के बहाने जानलेवा हमले या दंगे भड़का दिए जाते हैं। पुलिस ने गांवों में चुनाव लड़ने वाले संभावित उम्मीदवारों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे माहौल न बिगाड़ें।\r\n \r\n
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6. DJ और म्यूजिक सिस्टम पर पुलिस का कड़ा प्रहार: अश्लील गानों पर FIR
\r\n\r\nहोली पर डीजे (DJ) और तेज संगीत के बिना रंग अधूरा माना जाता है, लेकिन यही डीजे सबसे ज्यादा विवादों की जड़ भी बनता है। शराब के नशे में डीजे पर नाचते हुए दो गुटों में मारपीट होना यूपी में आम बात है।
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- \r\n डीजे संचालकों के साथ मीटिंग: पुलिस ने डीजे और म्यूजिक सिस्टम संचालकों के साथ पहले ही मीटिंग कर ली है।\r\n \r\n
- \r\n 75 डेसिबल (Decibel) की लिमिट: ध्वनि प्रदूषण और विवादों को रोकने के लिए म्यूजिक सिस्टम की आवाज की अधिकतम सीमा 75 डेसीबल (75 dB) तय कर दी गई है। तेज आवाज में डीजे बजाने पर मशीन तुरंत सीज (Seize) कर ली जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n अश्लील (Vulgar) गानों पर पूर्ण प्रतिबंध: सबसे सख्त निर्देश गानों के 'कंटेंट' को लेकर है। डीआईजी ने दो टूक कहा है कि होलिका दहन और रंगोत्सव पर डीजे पर किसी भी प्रकार के अश्लील गानों, डबल मीनिंग भजनों या भड़काऊ गीतों का प्रयोग कदापि न हो। यदि किसी ने डीजे पर सांप्रदायिक या अश्लील गाना बजाया, तो डीजे मालिक और आयोजक दोनों के खिलाफ तुरंत आपराधिक मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाएगा।\r\n \r\n
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7. राहगीरों पर गुब्बारे, कीचड़ और कूड़ा फेंकने वालों की खैर नहीं
\r\n\r\nहोली 'रंगों' का त्योहार है, 'हुड़दंग' का नहीं। लेकिन कुछ शरारती तत्व 'बुरा न मानो होली है' की आड़ में महिलाओं और अंजान राहगीरों के साथ अभद्रता करते हैं।
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- \r\n चलते वाहनों पर रोक: अक्सर छतों या गलियों से गुजरते हुए दोपहिया वाहनों (Bikes/Scooters) पर पानी से भरे भारी गुब्बारे (Water Balloons) पूरी ताकत से फेंके जाते हैं। इससे चालक का संतुलन बिगड़ जाता है और जानलेवा सड़क दुर्घटनाएं (Road Accidents) हो जाती हैं।\r\n \r\n
- \r\n कीचड़ और कूड़ा फेंकना: रंग के नाम पर महिलाओं और बुजुर्गों पर कीचड़, नाली का पानी, पेंट या कूड़ा फेंकने की विकृत मानसिकता को कुचलने के लिए पुलिस सादे कपड़ों में तैनात रहेगी।\r\n \r\n
- \r\n पुलिस ने स्पष्ट आदेश दिया है कि चलते वाहनों पर पानी के गुब्बारे, रंग, कीचड़, कूडा आदि फेंकने की घटनाओं को पूरी सख्ती से रोका जाए। ऐसा करते पकड़े जाने वालों को हवालात की हवा खानी पड़ेगी।\r\n \r\n
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8. शराब माफियाओं पर नकेल और 108 समन्वय गोष्ठियां
\r\n\r\nहोली पर शराब की खपत कई गुना बढ़ जाती है, और इसी का फायदा उठाकर शराब माफिया (Liquor Mafia) जहरीली और अवैध शराब (Illicit/Poisonous Liquor) खपाने की कोशिश करते हैं।
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- \r\n जहरीली शराब पर अलर्ट: आबकारी विभाग (Excise Department) और पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार शराब के ठेकों और संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। जहरीली शराब की बिक्री पर पूर्ण रोक लगाने और अवैध शराब की भट्टियों को नष्ट करने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है।\r\n \r\n
- \r\n अंतर-विभागीय समन्वय: डीआईजी कलानिधि नैथानी ने बताया कि होली को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए समाज के हर वर्ग को साथ लिया गया है। पूरे रेंज में शांति समिति (Peace Committee) की अनगिनत मीटिंग्स की गई हैं। इसके अलावा नगर निगम (साफ-सफाई), बिजली विभाग (निर्बाध आपूर्ति), पीडब्ल्यूडी (सड़कों के गड्ढे भरना), और परिवहन विभाग के साथ कुल 108 समन्वय गोष्ठियां (Coordination Meetings) आयोजित की गई हैं।\r\n \r\n
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9. साइबर सेल (Cyber Cell) की 'हॉक आई': अफवाह फैलाई तो तुरंत मुकदमा
\r\n\r\nआजकल दंगे सड़कों से ज्यादा सोशल मीडिया (Social Media) पर भड़कते हैं। एक पुरानी तस्वीर या झूठा वीडियो मिनटों में पूरे शहर को आग के हवाले कर सकता है।
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- \r\n विशेष निगरानी टीम: इंटरनेट मीडिया (Facebook, Twitter, WhatsApp, Instagram) पर 24 घंटे निगरानी रखने के लिए साइबर सेल की एक 'विशेष टीम' (Special Team) का गठन किया गया है।\r\n \r\n
- \r\n गलत पोस्ट पर जीरो टॉलरेंस: डीआईजी ने जनता से सीधे अपील की है कि कोई भी व्यक्ति बिना पुष्टि किए कोई भी भड़काऊ या गलत पोस्ट (Fake Post) शेयर न करे। अफवाह (Rumors) फैलाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे लोगों को तुरंत ट्रेस (Trace) करके उनके खिलाफ आईटी एक्ट (IT Act) और गंभीर धाराओं में तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाएगा।\r\n \r\n
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10. पिछले वर्षों के 'दंगाइयों' पर निरोधात्मक कार्रवाई (Preventive Action)
\r\n\r\nपुलिस किसी भी खतरे को मोल नहीं लेना चाहती। आदेश दिए गए हैं कि गत वर्षों (पिछले सालों) में होलिका दहन और रंगोत्सव पर जिन भी लोगों ने विवाद किया था, मारपीट की थी या दंगा भड़काया था, उन सभी खुराफाती तत्वों की लिस्ट निकालकर उनके खिलाफ भारी 'निरोधात्मक कार्रवाई' (Preventive Action under CrPC 107/116) की जाए। उन्हें भारी मुचलके पर पाबंद किया जा रहा है और कई 'हिस्ट्रीशीटरों' को जिला बदर भी किया जा रहा है।
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जिलेवार आंकड़ों का विश्लेषण (District-wise Data Analysis)
\r\n\r\nमेरठ रेंज के चार जिलों का 'क्राइम और वल्नरेबिलिटी मैप' तैयार किया गया है। आइए, आंकड़ों के आधार पर समझते हैं कि पुलिस के लिए कौन सा जिला कितनी बड़ी चुनौती है:
\r\n\r\n| \r\n जनपद (District) \r\n | \r\n \r\n होलिका दहन स्थल (Total Spots) \r\n | \r\n \r\n संवेदनशील स्थान (Sensitive Spots) \r\n | \r\n \r\n शोभायात्राएं (Processions) \r\n | \r\n \r\n मेले (Fairs/Melas) \r\n | \r\n
| \r\n मेरठ (Meerut) \r\n | \r\n \r\n 1576 \r\n | \r\n \r\n 86 \r\n | \r\n \r\n 6 \r\n | \r\n \r\n 7 \r\n | \r\n
| \r\n बुलंदशहर (Bulandshahr) \r\n | \r\n \r\n 2434 \r\n | \r\n \r\n 114 \r\n | \r\n \r\n 10 \r\n | \r\n \r\n 14 \r\n | \r\n
| \r\n बागपत (Baghpat) \r\n | \r\n \r\n 683 \r\n | \r\n \r\n 14 \r\n | \r\n \r\n 0 \r\n | \r\n \r\n 3 \r\n | \r\n
| \r\n हापुड़ (Hapur) \r\n | \r\n \r\n 665 \r\n | \r\n \r\n 84 \r\n | \r\n \r\n 2 \r\n | \r\n \r\n 0 \r\n | \r\n
आंकड़ों की इनसाइड स्टोरी (Inside Story of the Data):
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- \r\n बुलंदशहर सबसे बड़ी चुनौती: आंकड़ों को गौर से देखने पर पता चलता है कि पूरे रेंज में बुलंदशहर (Bulandshahr) पुलिस के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द है। यहां सबसे ज्यादा होलिका दहन स्थल (2434) हैं। इसके अलावा, पूरे रेंज में सबसे अधिक 'संवेदनशील स्थान' (114) भी बुलंदशहर में ही हैं। यहाँ 10 बड़ी शोभायात्राएं और 14 होली के मेले लगेंगे। ऐसे में पुलिस और पीएसी की सबसे ज्यादा तैनाती इसी जिले में सुनिश्चित की गई है।\r\n \r\n
- \r\n मेरठ का शहरी दबाव: मेरठ (Meerut) में भले ही होलिका दहन के स्थान (1576) बुलंदशहर से कम हों, लेकिन मेरठ की सघन और मिश्रित शहरी आबादी के बीच 86 संवेदनशील स्थान पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। मेरठ की 6 शोभायात्राओं और 7 मेलों पर ड्रोन से सबसे ज्यादा निगरानी रखी जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n हापुड़ और बागपत: हापुड़ (Hapur) एक छोटा जिला होने के बावजूद यहाँ 84 संवेदनशील स्थान हैं, जो इस इलाके की सांप्रदायिक संवेदनशीलता को दर्शाते हैं। दूसरी ओर, बागपत (Baghpat) (683 स्थल, केवल 14 संवेदनशील स्थान) में स्थिति अपेक्षाकृत शांत और नियंत्रणीय नजर आ रही है, और यहाँ कोई शोभायात्रा भी नहीं निकाली जानी है।\r\n \r\n
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शांतिपूर्ण होली के लिए पुलिस और जनता का समन्वय जरूरी
\r\n\r\nहोली का त्योहार नफरत मिटाकर गले मिलने का पर्व है। डीआईजी कलानिधि नैथानी के नेतृत्व में मेरठ रेंज पुलिस ने अपनी तरफ से सुरक्षा का कोई भी पहलू अछूता नहीं छोड़ा है। 5000 पुलिसकर्मियों, 4 कंपनी पीएसी, ड्रोन, साइबर सेल और 79 सेक्टरों का यह 'कवच' इस बात की गारंटी देता है कि कोई भी असामाजिक तत्व आम नागरिक की खुशियों में खलल नहीं डाल पाएगा।
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लेकिन, पुलिस की यह तैयारी तभी पूरी तरह सफल हो सकती है जब समाज का हर आम नागरिक एक 'जिम्मेदार नागरिक' (Responsible Citizen) की भूमिका निभाए। 'बुरा न मानो होली है' के नारे को किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाने का लाइसेंस न समझें। डीजे की आवाज को कम रखें, जबरन रंग न लगाएं, चलते वाहनों पर गुब्बारे न फेंकें, और रमजान की पवित्रता का पूरा सम्मान करें।
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तभी सही मायनों में मेरठ रेंज की यह होली सफलता, आनंद और 'आपसी प्रेम-सौहार्द' का एक नया रंग बिखेरेगी।
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