उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को और अधिक सुदृढ़ तथा अत्याधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा केंद्रों में से एक, लाला लाजपत राय स्मारक (एलएलआरएम) मेडिकल कॉलेज को अब एक अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस डायबिटिक रेटिनोपैथी मोबाइल वैन मेरठ की शानदार सौगात मिली है। यह मोबाइल वैन डिजिटल और स्मार्ट तकनीक से पूरी तरह से लैस है। इसका मुख्य उद्देश्य शहरी सीमाओं से बाहर निकलकर, सुदूर ग्रामीण अंचलों में रहने वाले उन मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों की आंखों की जांच करना है, जो सही समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। इस अनूठी पहल से न केवल आंखों की रोशनी जाने के खतरे को कम किया जा सकेगा, बल्कि यह प्रदेश के हेल्थकेयर सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल का एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश करेगा।READ ALSO:-पीएम सूर्य घर योजना: उत्तर प्रदेश में आई 'सोलर क्रांति', एक महीने में 35 हजार से ज्यादा रूफटॉप प्लांट लगाकर रचा इतिहास
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डायबिटिक रेटिनोपैथी मोबाइल वैन मेरठ: एक नजर में इस बड़ी सौगात पर
\r\n\r\nएलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर.सी. गुप्ता ने इस अवसर पर खुशी जाहिर करते हुए बताया कि प्रदेश सरकार की तरफ से यह महत्वपूर्ण और बेहद ही उपयोगी वैन मेडिकल कॉलेज को सौंपी गई है। शासन स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं के विकेंद्रीकरण और विशेषज्ञता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में, बीते साल मेडिकल कॉलेज मेरठ के नेत्र रोग विभाग, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (के.जी.एम.यू.) लखनऊ और राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रयागराज को एक साथ प्रदेश का “एडवांस डायबिटिक रेटिनोपैथी सेंटर“ (Advanced Diabetic Retinopathy Centre) घोषित किया गया था। इस घोषणा के बाद से ही इन केंद्रों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से अपग्रेड करने का काम चल रहा है।
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प्राचार्य डॉ. गुप्ता के अनुसार, उच्चीकृत नेत्र रोग विभाग में संचालित इस “डायबिटिक रेटीनोपैथी सेंटर” की तरफ से संचालित यह डायबिटिक रेटिनोपैथी मोबाइल वैन मेरठ और इसके आसपास के जिलों के मरीजों के लिए एक बहुत बड़ी मददगार साबित होगी। इस वैन के जरिये अब चिकित्सा सुविधाएं खुद चलकर मरीजों के दरवाजे तक पहुंचेंगी।
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मधुमेह (Diabetes) का बढ़ता प्रकोप और आंखों पर उसका जानलेवा प्रभाव
\r\n\r\nआज के आधुनिक लेकिन तनावपूर्ण दौर में मधुमेह (Diabetes) एक वैश्विक महामारी का रूप ले चुका है। भारत को तो 'दुनिया की डायबिटीज राजधानी' तक कहा जाने लगा है। खराब जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक श्रम की कमी के कारण शुगर के मरीजों की संख्या लगातार और तेजी से बढ़ती जा रही है, जो चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।
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जब शरीर में ब्लड शुगर का स्तर लंबे समय तक अनियंत्रित रहता है, तो यह शरीर के विभिन्न अंगों की रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को नुकसान पहुंचाने लगता है। इसका सबसे बुरा और खामोश असर हमारी आंखों के पर्दे, यानी रेटिना (Retina) पर पड़ता है। इस गंभीर चिकित्सीय स्थिति को ही 'डायबिटिक रेटिनोपैथी' कहा जाता है। शुगर की प्रॉब्लम होने से, आंखों के पर्दों की नसें या तो फूल जाती हैं, उनमें से खून रिसने लगता है, या नई असामान्य नसें बनने लगती हैं जो देखने की क्षमता को स्थायी रूप से खत्म कर सकती हैं।
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समय पर इलाज मिला तो आंखें रहेंगी सही सलामत: विशेषज्ञ की राय
\r\n\r\nलाल लाजपत राय स्मारक मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में रेटिना स्पेशलिस्ट (Retina Specialist) के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे डॉ. प्रियांक का कहना है कि डायबिटिक रेटिनोपैथी एक 'साइलेंट किलर' की तरह काम करती है। शुरुआती दौर में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, और जब तक मरीज की दृष्टि में धुंधलापन आता है, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है।
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उन्होंने बताया कि "अगर समय रहते किसी व्यक्ति की जांच हो जाए और बीमारी को शुरुआती चरण में ही पकड़ लिया जाए, तो उचित इलाज के माध्यम से डायबिटिक रेटीनोपैथी के कारण आंख की रोशनी जाने (अंधेपन) से व्यक्ति को शत-प्रतिशत बचाया जा सकता है।" इसी महान उद्देश्य की पूर्ति के लिए नेत्र रोग विभाग द्वारा इस डायबिटिक रेटिनोपैथी मोबाइल वैन मेरठ का संचालन शुरू किया गया है, ताकि बीमारी के लक्षण उभरने से पहले ही मशीनरी की मदद से उसकी पहचान कर ली जाए।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस है यह मोबाइल वैन
\r\n\r\nयह कोई साधारण एम्बुलेंस या मेडिकल वैन नहीं है, बल्कि यह पहियों पर चलता हुआ एक 'हाई-टेक नेत्र जांच केंद्र' है। इस वैन की सबसे बड़ी खासियत इसमें मौजूद 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) तकनीक है। पारंपरिक रूप से रेटिना की जांच के लिए एक विशेषज्ञ डॉक्टर की आवश्यकता होती है जो आंखों में दवा डालकर पुतली फैलाता है और फिर जांच करता है। लेकिन इस डायबिटिक रेटिनोपैथी मोबाइल वैन मेरठ में मौजूद AI सॉफ्टवेयर चंद सेकंड में आंखों की स्कैनिंग करके यह बता सकता है कि मरीज को रेटिनोपैथी का खतरा है या नहीं।
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वैन में लगे प्रमुख अत्याधुनिक उपकरण और उनकी खासियतें:
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- \r\n ए.आई. फन्डस कैमरा (AI Fundus Camera): यह इस वैन का सबसे प्रमुख उपकरण है। यह कैमरा आंख के पिछले हिस्से (रेटिना, मैकुला और ऑप्टिक नर्व) की बेहद उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल तस्वीरें लेता है। इसमें लगा AI एल्गोरिदम इन तस्वीरों का तुरंत विश्लेषण करता है और बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के बता देता है कि रक्त वाहिकाओं में कोई रिसाव या डैमेज तो नहीं है।\r\n \r\n
- \r\n इन्डायरैक्ट ऑप्थलमोस्कोप (Indirect Ophthalmoscope): यह उपकरण डॉक्टर को रेटिना का एक विहंगम और विस्तृत त्रिमितीय (3D) दृश्य प्रदान करता है। इससे आंख के भीतरी हिस्से की बारीकियों को समझना आसान हो जाता है।\r\n \r\n
- \r\n स्लिट लैम्प (Slit Lamp): यह एक माइक्रोस्कोप की तरह काम करता है जो एक बहुत ही तेज रोशनी के साथ आंख के अगले और पिछले हिस्से (कॉर्निया, आईरिस, लेंस) की जांच करने में मदद करता है।\r\n \r\n
- \r\n एन.सी.टी. (Non-Contact Tonometer - NCT): आंखों के अंदर के दबाव (Intraocular Pressure) को मापने के लिए इसका उपयोग होता है। यह ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद) जैसी बीमारियों का पता लगाने में महत्वपूर्ण है।\r\n \r\n
- \r\n ओटोरैफ्रैक्टोमीटर (Autorefractometer): यह कंप्यूटर के जरिये आंखों के नंबर (चश्मे का नंबर) की सटीक जांच करने वाली मशीन है।\r\n \r\n
- \r\n मोटराइज्ड चेयर यूनिट (Chair Unit): मरीजों के आराम के लिए और डॉक्टर को सही एंगल से जांच करने की सुविधा देने के लिए एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक चेयर यूनिट भी वैन के भीतर स्थापित की गई है।\r\n \r\n
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गांव-गांव पहुंचेगी डिजिटल स्वास्थ्य क्रांति
\r\n\r\nभारत की आत्मा गांवों में बसती है, लेकिन अक्सर बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं केवल बड़े शहरों तक ही सीमित रह जाती हैं। इसी खाई को पाटने के लिए इस डायबिटिक रेटिनोपैथी मोबाइल वैन मेरठ को जिले और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए व्यापक प्रयास और एक सुव्यवस्थित रूट मैप तैयार किया गया है।
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गांव के लोगों को अक्सर खेत-खलिहान और मजदूरी के कामों से फुर्सत नहीं मिलती कि वे शहर जाकर अपनी आंखों की जांच कराएं। कई बार आर्थिक तंगी भी एक बड़ी रुकावट बन जाती है। ऐसे में यह वैन उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
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जागरूकता फैलाने के लिए विशेष टीवी स्क्रीन की व्यवस्था
\r\n\r\nइलाज से बेहतर बचाव है (Prevention is better than cure)। इस सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए, इस वैन के बाहरी हिस्से में एक बड़ी और हाई-डेफिनिशन टी.वी. स्क्रीन भी लगाई गई है। जब यह वैन किसी गांव के पंचायत भवन या चौपाल पर खड़ी होगी, तो इस स्क्रीन के माध्यम से ग्रामीण जनता को डायबिटीज, आंखों के रोगों और उनसे बचाव के तरीकों के बारे में ऑडियो-विजुअल (Video) जानकारियां दी जाएंगी। लोगों को यह बताया जाएगा कि खानपान में क्या सुधार करें, नियमित जांच क्यों जरूरी है, और डायबिटीज कैसे उनके शरीर को अंदर से खोखला कर सकती है।
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पूर्णतः निशुल्क जांच और परामर्श: डॉ. लोकेश कुमार सिंह
\r\n\r\nइस पूरी योजना और वैन के संचालन के बारे में मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) डॉक्टर लोकेश कुमार सिंह ने विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खास और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इस वाहन का उपयोग आंखों की गंभीर बीमारियों के बारे में आम लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ, विभिन्न नेत्र रोग जांच शिविरों (Eye Checkup Camps) के आयोजन में प्रमुखता से किया जाएगा।
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डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि "इतना ही नहीं, जहां भी यह डायबिटिक रेटिनोपैथी मोबाइल वैन मेरठ पहुंचेगी, वहां के आसपास के गांवों और कस्बों के लोगों की न सिर्फ सघन जांच की जाएगी, बल्कि इस वैन में मिलने वाली सभी सुविधाएं, परामर्श और प्राथमिक दवाएं भी पूरी तरह से निशुल्क (Free of Cost) दी जाएंगी।" यदि किसी मरीज की स्थिति गंभीर पाई जाती है और उसे सर्जरी या लेजर ट्रीटमेंट की आवश्यकता होती है, तो उसे मेडिकल कॉलेज के 'एडवांस डायबिटिक रेटिनोपैथी सेंटर' के लिए रेफर कर दिया जाएगा, जहां सरकारी योजनाओं (जैसे आयुष्मान भारत) के तहत उसका मुफ्त या रियायती दरों पर आगे का इलाज सुनिश्चित किया जाएगा।
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मेरठ के लाला लाजपत राय स्मारक मेडिकल कॉलेज को मिली यह डायबिटिक रेटिनोपैथी मोबाइल वैन मेरठ चिकित्सा और तकनीक (Medicine and Technology) के बेहतरीन समन्वय का प्रतीक है। प्रदेश सरकार द्वारा केजीएमयू, प्रयागराज और मेरठ मेडिकल कॉलेज को एडवांस सेंटर बनाना और फिर उन्हें एआई-आधारित मोबाइल वैन जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान करना, राज्य के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के मजबूत होने का संकेत है। इस पहल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों उन गरीब और ग्रामीण मरीजों को सीधा फायदा पहुंचेगा, जो अनजाने में मधुमेह के कारण अपनी आंखों की रोशनी खोने की कगार पर खड़े थे। मुफ्त जांच, एआई की सटीकता और घर-द्वार पर इलाज की यह सुविधा निश्चित रूप से अंधेपन निवारण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगी।
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एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, मेरठ को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एक अत्याधुनिक एआई आधारित 'डायबिटिक रेटिनोपैथी मोबाइल वैन' मिली है। यह वैन एआई फंडस कैमरा, स्लिट लैम्प और ऑटोरेफ्रेक्टोमीटर जैसी हाई-टेक मशीनों से लैस है। यह मोबाइल वैन पश्चिमी यूपी के गांव-गांव जाकर मधुमेह के मरीजों की आंखों की निशुल्क जांच करेगी और रेटिनोपैथी जैसी गंभीर बीमारी के कारण होने वाले अंधेपन से बचाएगी। वैन में लगी बड़ी टीवी स्क्रीन के जरिये ग्रामीणों को नेत्र रोगों के प्रति जागरूक भी किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार, यह सुविधा ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाएगी।
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