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मेरठ/लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का आक्रोश एक बार फिर सड़क से लेकर सत्ता के गलियारों तक गूंजने लगा है। अपनी जान जोखिम में डालकर प्रदेश को 24 घंटे रोशन रखने वाले UPPCL आउटसोर्सिंग कर्मचारी (UPPCL Outsourcing Employees) लंबे समय से अपने अधिकारों, समान वेतन और सुरक्षित भविष्य की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसी क्रम में, निविदा-संविदा कर्मचारी सेवा समिति (रजि.) के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मेरठ-हापुड़ लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री अरुण गोविल (Arun Govil) और उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य ऊर्जा मंत्री श्री सोमेंद्र तोमर (Somendra Tomar) से मुलाकात कर उन्हें अपना विस्तृत मांग पत्र सौंपा।READ ALSO:-मेरठ में दिनदहाड़े 'रक्तचरित्र': बीच बाजार युवक की कनपटी पर सटाकर मारी गोली, कातिल बोला- 'है कोई माई का लाल जो इसे बचा ले...'
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इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को राज्य सरकार द्वारा नवगठित 'उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग सेवा निगम' (UP Outsourcing Seva Nigam) में शामिल कराना और व्याप्त वेतन विसंगतियों को दूर कराना था। इस विस्तृत विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में हम जानेंगे कि आखिर आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की मुख्य समस्याएं क्या हैं, वेतन को लेकर क्या भारी अंतर सामने आया है, और शासन स्तर पर इस पूरे मामले का क्या समाधान निकलने की उम्मीद है।
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क्या है पूरा मामला? सांसद और मंत्री से मुलाकात के मायने
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के अंतर्गत पूरे प्रदेश में लगभग एक लाख से अधिक संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारी कार्यरत हैं। ये वो जमीनी सिपाही हैं जो आंधी, तूफान, बारिश और भीषण गर्मी में भी बिजली के खंभों पर चढ़कर फॉल्ट ठीक करते हैं। निविदा-संविदा कर्मचारी सेवा समिति के पदाधिकारियों ने सांसद अरुण गोविल और ऊर्जा मंत्री सोमेंद्र तोमर से भेंट कर अपना दर्द साझा किया।
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प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन रहा शामिल? इस महत्वपूर्ण बैठक में समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय महामंत्री अमित खारी (Amit Khari) ने किया। उनके साथ प्रतिनिधिमंडल में पश्चिमांचल अध्यक्ष सचिन सिंह, निरंजन शर्मा, सोनू जाटव, और अक्षय सहित कई अन्य प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे। इन सभी नेताओं ने एकजुट होकर शासन की उन नीतियों का विरोध किया, जो UPPCL आउटसोर्सिंग कर्मचारी वर्ग को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित कर रही हैं।
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नवगठित 'उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग सेवा निगम': क्या है मांग?
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में विभिन्न सरकारी विभागों में ठेकेदारी प्रथा (Contractor System) के तहत होने वाले शोषण को रोकने के लिए 'उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग सेवा निगम' (UP Outsourcing Seva Nigam) के गठन का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को सीधे निगम के जरिए रोजगार देना है, ताकि बीच में निजी ठेकेदार उनका कमीशन या पीएफ (PF) न मार सकें।
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बिजली कर्मियों को निगम से बाहर रखने का विरोध: समिति के राष्ट्रीय महामंत्री अमित खारी ने बैठक में प्रमुखता से इस बात को उठाया कि शासन स्तर पर कुछ ऐसे प्रयास (या पत्र) सामने आए हैं, जिनमें पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) को इस नई सेवा निगम से बाहर रखने का निवेदन किया गया है।
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- \r\n खारी का कड़ा बयान: अमित खारी ने इसे लाखों संविदा कर्मियों के हितों के साथ सीधा खिलवाड़ बताया है। उन्होंने सांसद अरुण गोविल के समक्ष स्पष्ट किया कि जब अन्य सरकारी विभागों के आउटसोर्सिंग कर्मियों को इस निगम के जरिए सुरक्षित भविष्य देने की बात हो रही है, तो बिजली विभाग के कर्मचारियों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है?\r\n \r\n
- \r\n मुख्य मांग: समिति ने पुरजोर मांग की है कि जिस प्रकार अन्य विभागों के लिए यह निगम कार्य करेगा, उसी तर्ज पर सभी UPPCL आउटसोर्सिंग कर्मचारी को भी बिना किसी देरी के 'उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग सेवा निगम' में शामिल किया जाए, ताकि ठेकेदारों द्वारा किया जा रहा आर्थिक शोषण हमेशा के लिए बंद हो सके।\r\n \r\n
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वेतन विसंगति का बड़ा मुद्दा: जोखिम 100%, लेकिन वेतन न्यूनतम से भी कम
\r\n\r\nइस मांग पत्र में जो सबसे हैरान करने वाला और दर्दनाक पहलू सामने रखा गया, वह है— 'वेतन विसंगति' (Wage Disparity)। ऊर्जा मंत्री सोमेंद्र तोमर के सामने कर्मचारियों ने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी, जो व्यवस्था की एक बड़ी खामी को उजागर करता है।
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वेतन का गणित और विसंगति:
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- \r\n अन्य विभागों के पद: शासन द्वारा प्रस्तावित नए ढांचे में चौकीदार (Watchman) और स्वीपर (Sweeper) जैसे पदों के लिए लगभग ₹20,000 मासिक वेतन तय करने की बात कही जा रही है। यह स्वागत योग्य है, लेकिन इसके विपरीत बिजली कर्मियों की स्थिति दयनीय है।\r\n \r\n
- \r\n अकुशल बिजली कर्मी (Unskilled): जो लाइनमैन या हेल्पर 11,000 वोल्ट और 33,000 वोल्ट की हाई-टेंशन लाइनों पर काम करते हैं, उनके अकुशल वर्ग को मात्र ₹11,021 का मानदेय मिल रहा है।\r\n \r\n
- \r\n कुशल बिजली कर्मी (Skilled): वहीं, तकनीकी रूप से दक्ष और अनुभवी कुशल कर्मियों को सिर्फ ₹13,580 के करीब मानदेय दिया जा रहा है।\r\n \r\n
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जान का जोखिम और आर्थिक शोषण: अमित खारी ने बताया कि एक बिजली कर्मचारी का काम 100 प्रतिशत जोखिम (100% Risk) वाला होता है। आए दिन लाइनमैन करंट लगने (Electrocution) से अपनी जान गंवा देते हैं या जिंदगी भर के लिए अपाहिज हो जाते हैं। ऐसे अत्यधिक खतरनाक काम के लिए ₹11,000 से ₹13,000 का वेतन देना न केवल श्रम कानूनों का मज़ाक है, बल्कि मानवाधिकारों का भी उल्लंघन है। एक तरफ जहां 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए ये कर्मचारी अपनी जान हथेली पर रखते हैं, वहीं दूसरी तरफ निजी आउटसोर्सिंग एजेंसियां (Private Agencies) उनका ईपीएफ (EPF) और ईएसआई (ESI) तक समय पर जमा नहीं करती हैं।
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आउटसोर्सिंग एजेंसियों द्वारा आर्थिक और मानसिक शोषण का जाल
\r\n\r\nUPPCL आउटसोर्सिंग कर्मचारी लंबे समय से निजी ठेकेदारों के शोषण का शिकार रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने जनप्रतिनिधियों को बताया कि वर्तमान आउटसोर्सिंग सिस्टम पूरी तरह से भ्रष्टाचार और मनमानी से ग्रस्त है।
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- \r\n वेतन में कटौती: ठेकेदार सरकार से प्रति कर्मचारी एक निश्चित राशि लेते हैं, लेकिन कर्मचारियों के खाते में उसका आधा या उससे भी कम पैसा पहुंचता है।\r\n \r\n
- \r\n सुरक्षा उपकरणों का अभाव: ठेकेदारों की जिम्मेदारी होती है कि वे कर्मचारियों को सेफ्टी बेल्ट, ग्लव्स, हेलमेट और इंसुलेटेड जूते (Safety Gears) प्रदान करें। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ज्यादातर ठेकेदार यह सामान देते ही नहीं हैं, जिसके कारण हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है।\r\n \r\n
- \r\n नौकरी से निकालने की धमकी: अगर कोई कर्मचारी अपने हक की आवाज उठाता है या रुका हुआ वेतन मांगता है, तो आउटसोर्सिंग एजेंसियां उसे काम से निकालने (Termination) की धमकी देती हैं।\r\n \r\n
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यही वह मुख्य कारण है कि निविदा-संविदा कर्मचारी सेवा समिति 'उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग सेवा निगम' में शामिल होने पर जोर दे रही है। निगम के बनने से बिचौलिया व्यवस्था (Middlemen) खत्म हो जाएगी और सरकार सीधा कर्मचारियों के बैंक खातों में उचित और सम्मानजनक वेतन भेज सकेगी।
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सांसद अरुण गोविल और राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर का सकारात्मक आश्वासन
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सांसद का रुख: अरुण गोविल ने माना कि जो लोग जनता को 24 घंटे बिजली देने के लिए अपनी जान दांव पर लगाते हैं, उनके परिवारों का आर्थिक भविष्य सुरक्षित होना चाहिए। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे इस मांग पत्र का गहराई से अध्ययन करेंगे और इसे सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) और केंद्रीय नेतृत्व के संज्ञान में लाएंगे।
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ऊर्जा मंत्री का बयान: चूंकि सोमेंद्र तोमर खुद उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य ऊर्जा मंत्री (State Energy Minister) हैं, इसलिए उनकी भूमिका इस मामले में सबसे अहम है। उन्होंने अमित खारी और अन्य पदाधिकारियों को आश्वासन दिया कि:
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- \r\n ऊर्जा विभाग आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत है।\r\n \r\n
- \r\n पावर कॉरपोरेशन के भीतर व्याप्त वेतन विसंगतियों और ठेकेदारों की मनमानी की जांच की जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n 'यूपी आउटसोर्सिंग सेवा निगम' में बिजली कर्मियों को शामिल करने के तकनीकी और विधिक पहलुओं पर उच्च अधिकारियों (MD UPPCL और प्रमुख सचिव ऊर्जा) के साथ जल्द ही एक अहम बैठक की जाएगी।\r\n \r\n
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UPPCL आउटसोर्सिंग कर्मचारी: भविष्य की राह और संभावित चुनौतियां
\r\n\r\nयद्यपि सांसद और मंत्री से मिला आश्वासन कर्मचारियों के लिए एक उम्मीद की किरण है, लेकिन निविदा-संविदा कर्मचारी सेवा समिति जानती है कि यह लड़ाई इतनी आसान नहीं है। पावर कॉरपोरेशन का प्रबंधन अक्सर वित्तीय घाटे (Financial Deficit) का हवाला देकर कर्मचारियों की मांगों को टालने का प्रयास करता है।
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अगर शासन स्तर पर 'उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग सेवा निगम' से बिजली विभाग को बाहर रखा गया, तो प्रदेश भर के लाखो UPPCL आउटसोर्सिंग कर्मचारी एक बार फिर बड़े आंदोलन या अनिश्चितकालीन हड़ताल (Strike) के लिए मजबूर हो सकते हैं। इससे प्रदेश की बिजली व्यवस्था चरमरा सकती है, जिसका सीधा असर आम जनता, उद्योगों और कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा।
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समाधान क्या हो सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार को 3 कदम उठाने चाहिए:
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- \r\n समान काम, समान वेतन: सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 'समान काम के लिए समान वेतन' (Equal Pay for Equal Work) का सिद्धांत लागू किया जाए।\r\n \r\n
- \r\n सेवा निगम में 100% विलय: ठेकेदारी प्रथा को जड़ से खत्म कर सभी संविदा कर्मियों को सीधे सरकारी निगम के पे-रोल (Pay-roll) पर लाया जाए।\r\n \r\n
- \r\n जोखिम भत्ता (Risk Allowance): लाइन पर काम करने वाले सभी तकनीकी कर्मचारियों को उनके मूल वेतन के साथ अतिरिक्त जोखिम भत्ता और कम से कम ₹50 लाख का दुर्घटना बीमा (Accidental Insurance) कवर प्रदान किया जाए।\r\n \r\n
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उत्तर प्रदेश में बिजली की निर्बाध आपूर्ति की रीढ़ माने जाने वाले UPPCL आउटसोर्सिंग कर्मचारी आज अपने ही अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं। निविदा-संविदा कर्मचारी सेवा समिति (रजि.) के राष्ट्रीय महामंत्री अमित खारी के नेतृत्व में सांसद अरुण गोविल और ऊर्जा मंत्री सोमेंद्र तोमर को सौंपा गया मांग पत्र इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि ठेकेदारी प्रथा ने कर्मचारियों का भारी आर्थिक और मानसिक शोषण किया है। जहां एक ओर जोखिम रहित कार्यों के लिए ₹20,000 वेतन का प्रस्ताव है, वहीं हाई-टेंशन लाइन पर जान जोखिम में डालने वाले कर्मियों को मात्र ₹11,000 से ₹13,000 मिलना पूरी व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सांसद अरुण गोविल और मंत्री सोमेंद्र तोमर के आश्वासन के बाद क्या उत्तर प्रदेश सरकार इन लाखों बिजली कर्मियों को 'यूपी आउटसोर्सिंग सेवा निगम' में शामिल कर उन्हें न्याय और सुरक्षित भविष्य दे पाती है या नहीं।
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Sabse pehle comment karne wale banein.