उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित एनसीआर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर (NCR Medical College and Research Centre) एक बार फिर सुर्खियों में है। यह कॉलेज भाजपा की पूर्व एमएलसी डॉ. सरोजिनी अग्रवाल से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक टीम ने कॉलेज परिसर में लगभग 22 घंटे तक लंबी छापेमारी की, जिससे चिकित्सा शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है। दिल्ली से आई टीम ने गहन जांच के बाद कॉलेज से महत्वपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड, हार्ड डिस्क, लैपटॉप और ज़रूरी कागज़ात जब्त किए हैं। यह कार्रवाई राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की मान्यता प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हुई रिश्वतखोरी और गोपनीय सूचनाएं लीक करने के एक बड़े रैकेट की जांच का हिस्सा है।Read also:-UP वालों ध्यान दें! 14 घंटे न जमा होंगे बिजली बिल और न होंगे मीटर रिचार्ज, जानें शनिवार रात 10 बजे से कब तक रहेगी समस्या
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22 घंटे तक चला गोपनीय ऑपरेशन

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ईडी की टीम गुरुवार सुबह करीब 4:15 बजे मेरठ के खरखौदा स्थित कॉलेज परिसर में पहुँची और देर रात लगभग 2:15 बजे अपनी जाँच पूरी कर वापस लौटी। लगभग 22 घंटे तक चली यह कार्रवाई पूरी तरह से गोपनीय रखी गई। स्थानीय पुलिस को इसकी कोई सूचना नहीं दी गई थी, और ईडी की टीम पैरामिलिट्री फोर्स के साथ परिसर में दाखिल हुई। गोपनीयता बनाए रखने के लिए, पूछताछ के दौरान संबंधित अधिकारियों के मोबाइल फोन भी बंद करा दिए गए थे।
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क्या-क्या हुआ जब्त?

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ED ने छापेमारी के दौरान कॉलेज के प्रशासनिक कार्यालय और महानिदेशक के कक्ष से कई अहम सबूत अपने कब्जे में लिए हैं, जिनमें शामिल हैं:
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    डिजिटल रिकॉर्ड: हार्ड डिस्क, लैपटॉप और कार्यालय से डिजिटल डेटा।
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    शैक्षणिक रिकॉर्ड: छात्रों की पंजीयन संख्या, उपस्थिति रजिस्टर।
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    कर्मचारी विवरण: फैकल्टी का पूरा विवरण।
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    वित्तीय दस्तावेज: कॉलेज के लेन-देन से जुड़े महत्त्वपूर्ण कागज़ात।
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    संचार रिकॉर्ड: मैनेजिंग डायरेक्टर समेत संबंधित लोगों की कॉल डिटेल्स।
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NMC घूसखोरी मामले से सीधा कनेक्शन

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ईडी की यह व्यापक छापेमारी सीबीआई द्वारा 30 जून 2025 को दर्ज की गई 225 एफआईआर और 35 आरोपियों के ख़िलाफ़ शुरू की गई कार्रवाई का अगला चरण है। इस मामले में कॉलेज की असिस्टेंट मैनेजिंग डायरेक्टर और पूर्व एमएलसी डॉ. सरोजिनी अग्रवाल की बेटी डॉ. शिवानी अग्रवाल का नाम भी प्रमुखता से शामिल है।
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पूरा मामला राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के अधिकारियों द्वारा निजी मेडिकल कॉलेजों को मान्यता देने, सीटों की संख्या बढ़ाने या अनुकूल निरीक्षण रिपोर्ट देने के लिए रिश्वत लेने से जुड़ा है। 
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डॉ. शिवानी अग्रवाल के मोबाइल से मिले अहम सबूत

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सीबीआई को पूर्व में की गई जाँच के दौरान डॉ. शिवानी अग्रवाल के मोबाइल से कुछ महत्वपूर्ण चैट और कॉल रिकॉर्डिंग के रूप में निर्णायक सबूत मिले थे। ये साक्ष्य एनसीआर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 50 सीटें बढ़ाने के आवेदन से संबंधित हैं। इन रिकॉर्डिंग में गीतांजलि विश्वविद्यालय (उदयपुर) के रजिस्ट्रार मयूर रावल और दिल्ली स्थित एमएस टेक्नीफाई सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट हेड केआर रणदीप नायर से हुई बातचीत शामिल थी। इन्हीं डिजिटल सबूतों के आधार पर ईडी ने अब मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए यह व्यापक छापेमारी की है।
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मेडिकल कॉलेजों पर लगातार शिकंजा

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एनसीआर मेडिकल कॉलेज पर यह पहली जांच नहीं है। एनएमसी की जांच में पहले ही फैकल्टी और मरीजों की संख्या में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है, जिसके बाद सीबीआई ने भी कॉलेज और आवास पर छापेमारी की थी। 
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यह मामला दर्शाता है कि किस प्रकार बिचौलिए और कॉलेज प्रतिनिधि, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा NMC के अधिकारियों के साथ मिलकर निरीक्षण से जुड़ी गोपनीय जानकारी को अवैध रूप से बाहर पहुंचा रहे थे, ताकि कॉलेज के मूल्यांकन को प्रभावित किया जा सके। ईडी की यह कार्रवाई मेडिकल शिक्षा प्रणाली में जड़ तक फैली भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है। यह सुनिश्चित करता है कि घूसखोरी और फर्जीवाड़े के इस एनसीआर मेडिकल कॉलेज ED छापा मामले में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
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मेरठ के एनसीआर मेडिकल कॉलेज में ईडी की 22 घंटे चली लंबी कार्रवाई ने मेडिकल शिक्षा में व्याप्त भ्रष्टाचार की परतें खोल दी हैं। डॉ. शिवानी अग्रवाल समेत 35 आरोपियों के ख़िलाफ़ चल रही इस श्रृंखलाबद्ध जांच में डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त करना एक महत्वपूर्ण कदम है। अब सभी की निगाहें जब्त किए गए डिजिटल रिकॉर्ड्स के विश्लेषण पर टिकी हैं, जिससे इस बड़े रैकेट से जुड़े और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं। 
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मेरठ के खरखौदा स्थित एनसीआर मेडिकल कॉलेज में 22 घंटे तक छापेमारी की और पूर्व एमएलसी की बेटी डॉ. शिवानी अग्रवाल से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स जब्त किए। यह कार्रवाई NMC अधिकारियों द्वारा रिश्वत लेने और सीटों की संख्या बढ़ाने में फर्जीवाड़े के एक बड़े मामले की जांच का हिस्सा है।
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