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\r\n\r\nमेरठ (छोटा मवाना): शिक्षा के मंदिर के ठीक सामने अवैध निर्माण और मनमानी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छोटा मवाना स्थित ऐतिहासिक जवाहर इंटर कॉलेज (Jawahar Inter College Chota Mawana) के मुख्य द्वार के सामने कुछ दबंगों द्वारा अवैध रूप से नाला खोदे जाने के कारण विद्यालय परिसर में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई है।READ ALSO:-बच्चों के स्वास्थ्य का 'सुरक्षा कवच': DM ने रवाना की 'टीका मित्र वैन', मेरठ में अब घर-घर पहुंचेगा '5 साल में 7 बार' टीकाकरण का मंत्र
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स्कूल के खेल के मैदान में जमा हो रहा गंदा पानी न केवल विद्यालय की 84 साल पुरानी इमारत के लिए खतरा बन गया है, बल्कि यहां पढ़ने वाले सैकड़ों छात्रों के स्वास्थ्य पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहा है। इस गंभीर समस्या को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता पुनीत शर्मा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की है।
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ऐतिहासिक धरोहर पर संकट: 1942 से संचालित है विद्यालय
\r\n\r\nसबसे पहले इस विद्यालय के महत्व को समझना आवश्यक है। जवाहर इंटर कॉलेज (छोटा मवाना) कोई साधारण स्कूल नहीं है। यह एक अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय है, जो सन् 1942 से संचालित है। जिस दौर में देश में 'भारत छोड़ो आंदोलन' की गूंज थी, उस समय से यह संस्था क्षेत्र में शिक्षा का प्रकाश फैला रही है।
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शिकायतकर्ता पुनीत शर्मा (निवासी बेगम पुल, मेरठ) द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार, स्कूल की दीवार के ठीक पास 3 फुट गहरा अवैध नाला (Illegal Drainage) कुछ स्थानीय लोगों द्वारा खुदवा दिया गया है। यह निर्माण न केवल विद्यालय की संपत्ति का अतिक्रमण है, बल्कि यह ऐतिहासिक ढांचे के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है।
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क्या है पूरा मामला? (The Complete Incident)
\r\n\r\nघटनाक्रम के अनुसार, कुछ अज्ञात या स्थानीय दबंग लोगों ने बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के स्कूल की बाउंड्री वॉल के पास खुदाई शुरू कर दी। देखते ही देखते वहां एक 3 फुट गहरा नाला खोद दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इस नाले का निर्माण तकनीकी रूप से पूरी तरह गलत है।
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- \r\n निकासी (Outlet) नदारद: किसी भी ड्रेनेज सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उसका 'आउटलेट' या निकास होता है, जहां से पानी बड़े नाले या सीवर लाइन में जाता है। लेकिन, यहां खोदे गए नाले का किसी भी बड़े मुख्य नाले से मिलान नहीं किया गया है।\r\n \r\n
- \r\n उल्टा ढलान: नाले का ढलान (Slope) वैज्ञानिक तरीके से नहीं बनाया गया है।\r\n \r\n
- \r\n परिणाम: निकासी न होने के कारण, नाले में आने वाला गंदा पानी आगे बहने के बजाय ओवरफ्लो होकर स्कूल के खेल के मैदान (Playground) में जमा हो रहा है।\r\n \r\n
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छात्रों के स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा (Health Hazards)
\r\n\r\nविद्यालय में जमा गंदा पानी केवल गंदगी की समस्या नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल (Health Emergency) का संकेत है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, रुका हुआ गंदा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए सबसे उपयुक्त स्थान होता है।
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- \r\n बीमारियों का खतरा: डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसे जानलेवा बुखार फैलाने वाले मच्छर ऐसे ही पानी में पनपते हैं।\r\n \r\n
- \r\n संक्रमण: स्कूल के मैदान में गंदे पानी के संपर्क में आने से बच्चों को त्वचा संबंधी रोग (Skin Diseases) होने का खतरा है।\r\n \r\n
- \r\n दुर्गंध: गंदे पानी से उठने वाली दुर्गंध के कारण कक्षाओं में पढ़ाई करना दूभर हो गया है।\r\n \r\n
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सामाजिक कार्यकर्ता पुनीत शर्मा ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि "बच्चों के स्वास्थ्य, विद्यालय व सामाजिक सरोकार को दृष्टिगत रखते हुए" इस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।
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प्रशासनिक अमले पर गंभीर सवाल
\r\n\r\nयह मामला सिर्फ एक नाले का नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी है। शिकायतकर्ता ने अपने पत्र में बहुत ही तार्किक प्रश्न उठाए हैं जो सीधे तौर पर नगर पंचायत, ग्राम सभा और नगर निगम की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हैं।
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\r\n\r\n\r\n"ऐसे में कोई भी व्यक्ति/समूह कैसे कोई सार्वजनिक नाला सड़क के किनारे बना सकता है? यह प्रशासनिक अमले के लिए प्रश्न चिह्न है। ऐसे तो कोई भी अपनी मर्जी से किसी भी जगह नाले-नाली खोदने लगेंगे। नगर पंचायत, ग्राम सभा, नगर निगम, विकास प्राधिकरण की तो आवश्यकता ही नहीं है। कोई भी कहीं भी कुछ भी निर्माण कर दें?" - (शिकायत पत्र का अंश)\r\n
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यह सवाल जायज है। उत्तर प्रदेश में जहां सरकार अवैध निर्माण और भू-माफियाओं (Land Mafia) के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना रही है, वहां दिनदहाड़े एक इंटर कॉलेज के सामने अवैध खुदाई कैसे हो गई? क्या स्थानीय पुलिस और लेखपाल को इसकी भनक नहीं लगी?
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तकनीकी पहलू: सरकारी नक्शे में नाले का कोई वजूद नहीं
\r\n\r\nशिकायत में एक और चौंकाने वाला दावा किया गया है। पत्र के मुताबिक, "आज तक भी किसी नक्शे में नाला/नाली तस्दीक नहीं है।" यानी, राजस्व विभाग (Revenue Department) या नगर निकाय के रिकॉर्ड में इस जगह पर किसी नाले का प्रस्ताव ही नहीं है।
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जब कोई निर्माण सरकारी नक्शे में नहीं होता, तो उसे अवैध अतिक्रमण (Illegal Encroachment) की श्रेणी में रखा जाता है। सार्वजनिक सड़क या सरकारी स्कूल की जमीन के पास बिना अनुमति के खुदाई करना 'सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम' (Prevention of Damage to Public Property Act) के तहत दंडनीय अपराध हो सकता है।
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सीएम योगी और अधिकारियों से की गई मांगें
\r\n\r\n22 जनवरी 2026 को भेजे गए इस शिकायती पत्र में पुनीत शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी प्रतिलिपियाँ न केवल मुख्यमंत्री को, बल्कि प्रमुख सचिव (उत्तर प्रदेश शासन), मंडलायुक्त (मेरठ मंडल), जिलाधिकारी (मेरठ) और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को भी भेजी हैं।
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प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
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- \r\n उच्च स्तरीय जांच: मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए कि आखिर किसके आदेश या शह पर यह अवैध निर्माण किया गया।\r\n \r\n
- \r\n वैज्ञानिक निर्माण (यदि आवश्यक हो): शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि वास्तव में वहां जल निकासी के लिए नाले की आवश्यकता है, तो उसका विरोध नहीं है। लेकिन, यह निर्माण सरकारी विभाग (PWD या नगर निगम) द्वारा सही मापदंड, नक्शे और ढलान के साथ किया जाना चाहिए ताकि पानी स्कूल में न भरे।\r\n \r\n
- \r\n तत्काल कार्रवाई: यदि यह निर्माण अनावश्यक है, तो इसे तुरंत बंद कराया जाए।\r\n \r\n
- \r\n दोषियों पर एक्शन: जिन लोगों ने अवैध रूप से यह नाला खुदवाया है, उनके विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए।\r\n \r\n
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अभिभावकों में रोष
\r\n\r\nइस घटना को लेकर स्थानीय अभिभावकों और छात्रों में भी दबी जुबान में रोष है। एक ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान, जहां हजारों बच्चों का भविष्य संवरता है, वहां इस तरह की अव्यवस्था प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाती है। खेल का मैदान बच्चों के शारीरिक विकास के लिए होता है, न कि मोहल्ले का गंदा पानी जमा करने के लिए।
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Jawahar Inter College Chota Mawana का यह प्रकरण केवल एक नाले की समस्या नहीं, बल्कि नियम-कानूनों की अनदेखी का उदाहरण है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय या मेरठ के जिलाधिकारी इस पत्र पर क्या संज्ञान लेते हैं। क्या प्रशासन का बुलडोजर इस अवैध निर्माण पर चलेगा, या फिर नौनिहालों को गंदे पानी और बीमारियों के बीच ही अपनी पढ़ाई जारी रखनी पड़ेगी?
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यह उम्मीद की जाती है कि प्रशासन बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द इस अवैध नाले को बंद कराएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाएगा।
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मेरठ के छोटा मवाना स्थित जवाहर इंटर कॉलेज के मुख्य द्वार पर अवैध नाला खोदने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। 22 जनवरी 2026 को सामाजिक कार्यकर्ता पुनीत शर्मा ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर शिकायत की है कि निकासी न होने के कारण नाले का गंदा पानी स्कूल के खेल के मैदान में भर रहा है। इससे छात्रों में बीमारी फैलने का खतरा है। पत्र में अवैध निर्माण करने वालों पर कार्रवाई और नाले को बंद करने की मांग की गई है।
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Disclaimer: यह समाचार सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा की गई शिकायत और स्कूल प्रशासन द्वारा जारी विज्ञप्ति पर आधारित है। अंतिम निष्कर्ष प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगा।
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Sabse pehle comment karne wale banein.