मेरठ (Meerut News): उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को चुनौती देते हुए शुक्रवार (13 फरवरी, 2026) को शरारती तत्वों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी। मेरठ जिला एवं सत्र न्यायालय (Meerut District and Sessions Court) समेत प्रदेश की पांच प्रमुख अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। यह धमकी एक ईमेल के जरिए दी गई, जिसके बाद मेरठ कचहरी परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।READ ALSO:-लखनऊ यूनिवर्सिटी में 'समता' की मांग पर संग्राम: यूजीसी नियमों के समर्थन में उतरे छात्रों को पुलिस ने रोका, जमीन पर घसीटा और जबरन वैन में भरा
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धमकी मिलते ही मेरठ पुलिस और प्रशासनिक अमला एक्शन मोड में आ गया। आनन-फानन में पूरा कचहरी परिसर खाली कराया गया। जजों, वकीलों और वादियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। मौके पर एसएसपी (SSP) अविनाश पांडेय, सीओ सिविल लाइन और बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad) पहुंच गया है। फिलहाल पूरे परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है और सघन तलाशी अभियान जारी है।
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ईमेल से मिली धमकी, मचा हड़कंप (Email Threat Causes Panic)
\r\n\r\nजानकारी के मुताबिक, शुक्रवार की सुबह एक आधिकारिक ईमेल आईडी पर धमकी भरा संदेश प्राप्त हुआ। इस ईमेल में दावा किया गया कि मेरठ कोर्ट परिसर में बम रखा गया है और इसे जल्द ही उड़ा दिया जाएगा। जैसे ही यह खबर पुलिस अधिकारियों तक पहुंची, उनके होश उड़ गए।
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तुरंत ही वायरलेस पर अलर्ट जारी किया गया। मेरठ कोर्ट बम की धमकी (Meerut Court Bomb Threat) की खबर आग की तरह फैल गई। देखते ही देखते भारी संख्या में पुलिस बल कचहरी पहुंच गया। पुलिस ने लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से तुरंत परिसर खाली करने की अपील की। वकीलों के चैंबर, कोर्ट रूम और कैंटीन में मौजूद लोग जान बचाने के लिए गेट की तरफ भागे।
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एसएसपी और बम निरोधक दस्ता मौके पर
\r\n\r\nसूचना की गंभीरता को देखते हुए मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय (SSP Avinash Pandey) खुद मौके पर पहुंचे। उनके साथ सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी और सीओ एलआईयू प्रदीप कुमार भी मौजूद रहे।
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पुलिस ने तत्काल प्रभाव से निम्नलिखित कदम उठाए:
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- \r\n बैरिकेडिंग: कचहरी के सभी प्रवेश द्वारों (गेट नंबर 1, 2 और 3) पर बैरिकेडिंग कर दी गई। किसी भी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।\r\n \r\n
- \r\n खाली कराया परिसर: पुलिस ने एक-एक कमरे की तलाशी लेते हुए यह सुनिश्चित किया कि कोई भी व्यक्ति अंदर न रह जाए।\r\n \r\n
- \r\n सर्च ऑपरेशन: बम निरोधक दस्ता (BDS) और डॉग स्क्वायड (Dog Squad) ने मोर्चा संभाला। कोर्ट रूम, पार्किंग एरिया, वकीलों के तख्त और संदिग्ध वस्तुओं की जांच शुरू की गई।\r\n \r\n
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संदिग्धों से पूछताछ, कई हिरासत में
\r\n\r\nसर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से सख्त रवैया अपनाया। कचहरी परिसर में बिना उचित पहचान पत्र के घूम रहे कई संदिग्ध लोगों को पुलिस ने रोका।
\r\n\r\nप्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पुलिस ने पार्किंग स्टैंड और कोर्ट के गलियारों में खड़े कुछ युवकों की तलाशी ली और उनसे कड़ी पूछताछ की। जिन लोगों पर संदेह हुआ या जो अपनी मौजूदगी का सही कारण नहीं बता पाए, उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस चौकी ले जाया गया। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरी तसल्ली होने के बाद ही निर्दोष लोगों को छोड़ा जाएगा।
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यूपी की 5 अदालतों को बनाया निशाना
\r\n\r\nहैरानी की बात यह है कि यह धमकी केवल मेरठ तक सीमित नहीं थी। यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा लग रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मेरठ के अलावा उत्तर प्रदेश के चार अन्य प्रमुख धार्मिक और संवेदनशील शहरों की अदालतों को भी इसी तरह की धमकी मिली है।
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जिन 5 अदालतों को निशाना बनाया गया है, वे हैं:
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- \r\n मेरठ (Meerut)\r\n \r\n
- \r\n लखनऊ (Lucknow)\r\n \r\n
- \r\n वाराणसी (Varanasi)\r\n \r\n
- \r\n अयोध्या (Ayodhya)\r\n \r\n
- \r\n मिर्जापुर (Mirzapur)\r\n \r\n
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इन सभी जिलों में एक साथ हड़कंप मच गया। अयोध्या और वाराणसी जैसे अति-संवेदनशील शहरों में धमकी मिलने के बाद खुफिया एजेंसियां (Intelligence Agencies) और एटीएस (ATS) भी सक्रिय हो गई हैं। साइबर सेल अब उस आईपी एड्रेस (IP Address) को ट्रेस करने में जुटी है जहां से यह ईमेल भेजा गया था।
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वकीलों और वादियों में दहशत का माहौल
\r\n\r\nशुक्रवार का दिन होने के कारण कचहरी में काफी भीड़ थी। हजारों की संख्या में वादी अपने मुकदमों की पैरवी के लिए आए थे। अचानक पुलिस की गाड़ियों के सायरन और भागदौड़ ने सबको डरा दिया।
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मेरठ बार एसोसिएशन के एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया, "हम कोर्ट में बहस की तैयारी कर रहे थे तभी पुलिस ने आकर तुरंत बाहर निकलने को कहा। पहले हमें लगा कि किसी अपराधी को लेकर कोई सूचना है, लेकिन बाद में मेरठ कोर्ट बम की धमकी (Meerut Court Bomb Threat) की बात पता चली। सुरक्षा में यह बड़ी चूक है कि कोई भी आसानी से ईमेल भेजकर न्याय प्रक्रिया को ठप कर सकता है।"
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हर एंगल से हो रही जांच: पुलिस अधिकारी
\r\n\r\nमौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। एसएसपी अविनाश पांडेय ने कहा, "हमें ईमेल के जरिए इनपुट मिला था। सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है, इसलिए एसओपी (SOP) के तहत परिसर खाली कराया गया है। हमारी साइबर सेल ईमेल के स्रोत का पता लगा रही है। यह किसी शरारती तत्व की करतूत भी हो सकती है, लेकिन हम कोई जोखिम नहीं ले सकते।"
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जांच के प्रमुख बिंदु:
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- \r\n ईमेल किस सर्वर से भेजा गया? (क्या वीपीएन का इस्तेमाल हुआ?)\r\n \r\n
- \r\n क्या यह किसी आतंकी संगठन की साजिश है या केवल शरारत?\r\n \r\n
- \r\n क्या इन पांचों जिलों में धमकी देने वाला एक ही व्यक्ति/समूह है?\r\n \r\n
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पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी धमकियां
\r\n\r\nयह पहली बार नहीं है जब मेरठ या यूपी की अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी मिली हो। पिछले कुछ वर्षों में 'बम होक्स' (Bomb Hoax) के मामले तेजी से बढ़े हैं। अक्सर जांच के बाद पता चलता है कि यह धमकियां फर्जी थीं, लेकिन इनका असर बहुत गहरा होता है। अदालती कामकाज ठप हो जाता है, न्याय प्रक्रिया बाधित होती है और आम जनता को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि 'डार्क वेब' और एनक्रिप्टेड ईमेल सेवाओं के कारण अपराधी अपनी पहचान छिपाने में सफल हो जाते हैं, जिससे पुलिस के लिए उन तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
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बम निरोधक दस्ते की कार्यप्रणाली
\r\n\r\nमेरठ कचहरी में मौजूद बम निरोधक दस्ते ने अत्याधुनिक उपकरणों के साथ तलाशी ली।
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- \r\n हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर (HHMD): संदिग्ध बैग और कोनों की जांच के लिए।\r\n \r\n
- \r\n एक्सप्लोसिव वेपर डिटेक्टर (EVD): विस्फोटक की गंध पहचानने के लिए।\r\n \r\n
- \r\n स्निफर डॉग्स: प्रशिक्षित कुत्ते जो बारूद को सूंघकर पहचान सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n नॉन-लीनियर जंक्शन डिटेक्टर: इलेक्ट्रॉनिक सर्किट (जैसे टाइमर बम) का पता लगाने के लिए।\r\n \r\n
पुलिस ने कोर्ट रूम के अंदर अलमारी, फाइलों के ढेर, वकीलों के चैंबर में रखे बक्से और यहां तक कि शौचालयों की भी गहनता से जांच की।
\r\n\r\n(Internal link placeholder: जानें बम स्क्वायड कैसे करता है डिफ्यूज? पूरी प्रक्रिया)
\r\n\r\nकानूनी प्रावधान: पकड़े जाने पर क्या होगी सजा?
\r\n\r\nफर्जी बम की धमकी देना एक गंभीर अपराध है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट के तहत इसके लिए सख्त सजा का प्रावधान है।
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- \r\n सार्वजनिक उपद्रव (Public Mischief): अफवाह फैलाने और दहशत पैदा करने के लिए जेल और भारी जुर्माना।\r\n \r\n
- \r\n साइबर आतंकवाद (Cyber Terrorism): आईटी एक्ट की धारा 66F के तहत अगर यह सिद्ध होता है कि धमकी का उद्देश्य भारत की एकता और अखंडता को खतरे में डालना था, तो आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।\r\n \r\n
- \r\n आपराधिक धमकी: जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में केस दर्ज किया जाता है।\r\n \r\n
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सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
\r\n\r\nइस घटना ने एक बार फिर जिला अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि मुख्य द्वारों पर मेटल डिटेक्टर लगे होते हैं, लेकिन कई बार भीड़भाड़ के कारण सघन चेकिंग नहीं हो पाती। वकीलों का कहना है कि कचहरी परिसर में कई ऐसे रास्ते हैं जहां से कोई भी आसानी से दाखिल हो सकता है। मेरठ कोर्ट बम की धमकी (Meerut Court Bomb Threat) के बाद अब मांग उठ रही है कि कचहरी की सुरक्षा को एयरपोर्ट जैसी सख्त किया जाए और सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जाए।
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आम जनता के लिए एडवाइजरी
\r\n\r\nपुलिस प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।
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- \r\n अगर आपको कोई लावारिस वस्तु (बैग, टिफिन, खिलौना) दिखे, तो उसे न छुएं।\r\n \r\n
- \r\n तुरंत पुलिस या कंट्रोल रूम (112) को सूचित करें।\r\n \r\n
- \r\n भीड़भाड़ वाले इलाकों में सतर्क रहें।\r\n \r\n
- \r\n सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के कोई भी खबर फॉरवर्ड न करें।\r\n \r\n
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मेरठ समेत यूपी के 5 जिलों में मिली बम की धमकी ने शुक्रवार को प्रशासनिक अमले को दिन भर दौड़ने पर मजबूर कर दिया। हालांकि अभी तक तलाशी में कोई संदिग्ध वस्तु मिलने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस ऑपरेशन जारी है। यह घटना साइबर सुरक्षा और भौतिक सुरक्षा दोनों को मजबूत करने की चेतावनी है।
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एसएसपी अविनाश पांडेय और उनकी टीम मुस्तैदी से डटी हुई है। उम्मीद है कि जल्द ही पुलिस उस कंप्यूटर या मोबाइल तक पहुंच जाएगी जहां से यह ईमेल भेजा गया था और आरोपी सलाखों के पीछे होंगे। फिलहाल, स्थिति नियंत्रण में है लेकिन सतर्कता बरती जा रही है।
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शुक्रवार को मेरठ जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ईमेल मिला। इसके साथ ही लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या और मिर्जापुर कोर्ट को भी धमकी दी गई। सूचना मिलते ही एसएसपी अविनाश पांडेय और बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंचा। पूरे कोर्ट परिसर को खाली कराकर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। पुलिस ने कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है और साइबर सेल ईमेल भेजने वाले की तलाश कर रही है। फिलहाल कोई विस्फोटक नहीं मिला है।
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