[मेरठ, 05 फरवरी 2026] — "कानून का डर" और "पुलिस का इकबाल"—ये दो शब्द किसी भी शहर की कानून व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। लेकिन जब शहर के सबसे व्यस्त और पॉश इलाके यानी बेगम पुल (Begum Pul) पर पुलिस की मौजूदगी सिर्फ एक 'मूकदर्शक' की तरह रह जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है। आज सुबह बेगम पुल मुख्य बाजार में जो हुआ, वह न केवल यातायात नियमों का उल्लंघन है, बल्कि वर्दी की हनक पर एक करारा तमाचा भी है।Read also:-मेरठ SSP ट्रांसफर: विपिन ताडा बने कानपुर के जॉइंट सीपी, अब 'सिंघम' अविनाश पांडे संभालेंगे मेरठ की कमान; 24 IPS अफसरों का तबादला
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
बेगम पुल व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ व्यापारी नेता श्री पुनीत शर्मा ने आज एक बार फिर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की नींद तोड़ने का प्रयास किया है। उन्होंने सीधे जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को पत्र लिखकर और मौके की तस्वीरें भेजकर यह साबित कर दिया है कि बेगम पुल पर ई-रिक्शा और टेम्पो चालकों के मन से पुलिस का खौफ पूरी तरह गायब हो चुका है।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

घटना का आँखों देखा हाल: 05 फरवरी, सुबह 10:45 बजे

\r\n\r\n
आज सुबह की घटना किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं थी, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि यह हकीकत थी जो मेरठ की सड़कों पर घट रही थी। पुनीत शर्मा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, घटनाक्रम कुछ इस प्रकार रहा:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    स्थान: बेगम पुल मुख्य बाजार, सेठ ऊन चौराहे के ठीक पास।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    समय: सुबह के 10:45 बजे (पीक आवर्स)।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    दृश्य: यातायात पुलिस और होमगार्ड के जवान तैनात थे। एक टेम्पो चालक बीच सड़क पर नियम विरुद्ध तरीके से सवारियां बैठा रहा था।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    कार्यवाही का नाटक: पुलिस कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए उस टेम्पो को रोका। एक पुलिसकर्मी ने अपने मोबाइल से टेम्पो की फोटो खींची (शायद चालान के लिए या उच्चाधिकारियों को दिखाने के लिए)। टेम्पो में बैठी सवारियों को नीचे उतार दिया गया।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
असली खेल इसके बाद शुरू हुआ: आमतौर पर फोटो खींचने और सवारियां उतारने के बाद चालक डर जाता है या वहां से खाली गाड़ी लेकर भागता है। लेकिन यहाँ नजारा उल्टा था। जैसे ही पुलिसकर्मी (एक दरोगा और दो सिपाही) कुछ कदम दूर खड़े दूसरे टेम्पो मालिक से बातचीत में मशगूल हुए, पहले वाले टेम्पो चालक ने उसी जगह, उसी वक्त दोबारा सवारियां भरीं। उसने पुलिस की तरफ देखा तक नहीं और बेखौफ होकर वहां से अपनी गाड़ी लेकर निकल गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
यह दृश्य वहां खड़े व्यापारियों और आम जनता के लिए आश्चर्यजनक था। सवाल यह है कि जिस टेम्पो की फोटो खींची गई, जिसे रोका गया, वह पुलिस की नाक के नीचे से दोबारा सवारी भरकर कैसे चला गया?
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

पुनीत शर्मा का पत्र: प्रशासन से तीखे सवाल

\r\n\r\n
व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष पुनीत शर्मा ने अपने पत्र में बेहद संयमित लेकिन कड़े शब्दों का प्रयोग किया है। उनका यह पत्र केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि सिस्टम पर एक सवालिया निशान है।
\r\n\r\n
उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
\r\n
"ऐसा प्रतीत होता है कि ई-रिक्शा और टेम्पो वालों की पुलिस से 'आत्मीयता' है या इनमे पुलिस का भय खत्म हो चुका है।"
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
'आत्मीयता' शब्द का इस्तेमाल कर उन्होंने बिना कहे ही पुलिस और डग्गामार वाहनों के बीच की संभावित 'सांठगांठ' की ओर इशारा कर दिया है। उन्होंने यह भी लिखा कि दरोगा जी और सिपाही पास में ही खड़े होकर बातें करते रहे, जबकि नियम तोड़ने वाला चालक उनके सामने ही फिर से कानून की धज्जियां उड़ा कर चला गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
यह पहली बार नहीं है जब पुनीत शर्मा ने यह मुद्दा उठाया है। उन्होंने पत्र की शुरुआत में ही "पुनः" शब्द का प्रयोग किया है, जो दर्शाता है कि वे पहले भी इस समस्या को उठा चुके हैं, लेकिन प्रशासन के कान पर जूं नहीं रेंग रही।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बेगम पुल का दर्द: जाम, शोर और व्यापारियों का नुकसान

\r\n\r\n
मेरठ का बेगम पुल शहर का दिल कहा जाता है। आबूलेन, पीएल शर्मा रोड और दिल्ली रोड को जोड़ने वाला यह केंद्र पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख व्यापारिक हब है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह 'ट्रैफिक जाम हब' बन गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
व्यापारियों की पीड़ा: बाजार में ग्राहक आना चाहते हैं, लेकिन जाम के डर से वे ऑनलाइन शॉपिंग या दूसरे बाजारों का रुख कर रहे हैं। पुनीत शर्मा जैसे व्यापारी नेताओं का दर्द यही है कि अगर मुख्य बाजार तक ग्राहक पहुँच ही नहीं पाएगा, तो व्यापार कैसे चलेगा?
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    दुकानों के आगे टेम्पो और ई-रिक्शा की अवैध पार्किंग।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    सवारियां बैठाने के लिए बीच सड़क पर ब्रेक मारना।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    हॉर्न का शोर और प्रदूषण।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
यह सब पुलिस पिकेट और बूथ के सामने होता है, जो स्थिति को और भी हास्यास्पद बना देता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

ई-रिक्शा और टेम्पो: सुविधा या समस्या?

\r\n\r\n
मेरठ में ई-रिक्शा और टेम्पो का अनियंत्रित संचालन अब एक नासूर बन चुका है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    रूट का कोई निर्धारण नहीं: जिसे जिधर जाना है, वह उधर ही गाड़ी घुमा देता है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    ओवरलोडिंग: 4 सवारी की जगह 8-8 सवारियां लटकी हुई दिखाई देती हैं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    नाबालिग चालक: कई ई-रिक्शा तो कम उम्र के बच्चे चला रहे हैं, जिन्हें ट्रैफिक सेंस का 'क' भी नहीं पता।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
05 फरवरी की घटना यह साबित करती है कि चालकों को पता है कि पुलिस उनका कुछ नहीं बिगाड़ेगी। ज्यादा से ज्यादा एक फोटो खींची जाएगी, और फिर सब 'सेट' हो जाएगा। जब तक यह मानसिकता नहीं बदलेगी, तब तक मेरठ जाम से मुक्त नहीं हो सकता।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान

\r\n\r\n
मेरठ पुलिस और ट्रैफिक विभाग अक्सर "स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट" के दावे करते हैं। चौराहों पर कैमरे लगे हैं, पुलिसकर्मी तैनात हैं, फिर भी व्यवस्था क्यों नहीं सुधर रही?
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    फोटो वाली कार्यवाही: क्या पुलिस सिर्फ 'कागजी कार्यवाही' या 'डिजिटल सबूत' इकट्ठा करने के लिए खड़ी है? अगर फोटो खींचने के बाद भी अपराध (नियम उल्लंघन) जारी रहता है, तो उस फोटो का क्या औचित्य?
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    चयनित कार्यवाही (Selective Action): पुनीत शर्मा ने जिक्र किया कि पुलिसकर्मी दूसरे टेम्पो मालिक से बात कर रहे थे। क्या कार्यवाही चेहरे देखकर की जाती है?
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    भय का अभाव: कानून का पालन सम्मान से कम और भय से ज्यादा होता है। यदि सड़क पर खड़ा सिपाही नियम तोड़ने वाले को देखकर अनदेखा कर दे, तो वर्दी का सम्मान अपने आप कम हो जाता है।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

अब आगे क्या? प्रशासन से उम्मीदें

\r\n\r\n
पुनीत शर्मा का यह पत्र SSP मेरठ और DM मेरठ की टेबल पर एक अलार्म की तरह बजना चाहिए। मेरठ की जनता और व्यापारी वर्ग अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर कार्यवाही चाहता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

व्यापारियों की प्रमुख मांगे:

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    बेगम पुल को 'नो-टोलरेंस ज़ोन' घोषित किया जाए।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    चौराहों पर नियम तोड़ने वाले टेम्पो/ई-रिक्शा को तत्काल सीज किया जाए, न कि सिर्फ फोटो खींचकर छोड़ा जाए।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय हो। यदि उनके ड्यूटी पॉइंट पर जाम या उल्लंघन होता है, तो उन पर विभागीय कार्यवाही हो।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    अवैध स्टैंड पूरी तरह खत्म किए जाएं।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

समाधान की तत्काल आवश्यकता

\r\n\r\n
05 फरवरी 2026 की सुबह 10:45 बजे की यह घटना कोई मामूली बात नहीं है। यह एक 'केस स्टडी' है कि कैसे सिस्टम में छेद होते हैं और कैसे उनका फायदा उठाया जाता है। पुनीत शर्मा ने अपनी जिम्मेदारी निभा दी है, अब गेंद जिला प्रशासन के पाले में है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
क्या मेरठ पुलिस उस टेम्पो चालक को ढूँढकर मिसाल कायम करेगी? या फिर यह शिकायत भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगी? यह देखना दिलचस्प होगा। लेकिन एक बात तय है—जब तक बेगम पुल की सांसें (ट्रैफिक) नहीं खुलेंगी, तब तक मेरठ का व्यापार दम तोड़ता रहेगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
(नोट: यह रिपोर्ट श्री पुनीत शर्मा, पूर्व अध्यक्ष, बेगम पुल व्यापार संघ द्वारा प्रेषित शिकायत पत्र और संलग्न तस्वीरों के आधार पर तैयार की गई है।)
विज्ञापन
विज्ञापन