मेरठ (Meerut News): उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहाँ एक ओर प्रदेश की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने और इंफ्रास्ट्रक्चर को विश्वस्तरीय बनाने के कड़े निर्देश दे रहे हैं, वहीं मेरठ विकास प्राधिकरण (Meerut Development Authority - MDA) अपनी ही विकसित की गई योजनाओं को अनाथ छोड़ने पर आमादा है। मेरठ शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के बड़े-बड़े दावों के बीच शताब्दी नगर योजना की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। आज की यह खबर मेरठ विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली, लालफीताशाही और घोर प्रशासनिक उदासीनता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करती है।Read also:-मेरठ वासियों के लिए बड़ी खुशखबरी! कंक्रीट के जंगल के बीच 38 एकड़ में सज रहा 'संजय वन', 8 करोड़ की लागत से बनेगा शहर का सबसे शानदार पिकनिक और टूरिस्ट स्पॉट
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पिछले 7 महीनों से शताब्दी नगर योजना के लगभग 380 परिवारों के निवासी अपनी ही कॉलोनी के एक अदद 'लिंक मार्ग' (Link Road) के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। अब तक 40 से ज्यादा प्रार्थना पत्र और कानूनी नोटिस मेरठ विकास प्राधिकरण को सौंपे जा चुके हैं, लेकिन इस 'सरकारी चाल' कहें या 'देश का दुर्भाग्य', आज तक एक साधारण से लिंक रोड का निर्माण कराने में विकास प्राधिकरण पूरी तरह विफल साबित हुआ है।
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25 साल पुराने ले-आउट प्लान का सच और आज की बदहाली
\r\n\r\nइस पूरे प्रकरण में स्थानीय निवासियों के हक की आवाज उठा रही सामाजिक संस्था 'उद्देश्य फाउंडेशन' निरंतर संघर्षरत है। संस्था के अध्यक्ष हृदय मोहन शर्मा ने मेरठ विकास प्राधिकरण के खोखले वादों की कलई खोलते हुए बताया कि यह कोई नई मांग नहीं है। यह रास्ता पिछले 25 वर्षों से इस कॉलोनी का मुख्य लिंक रोड रहा है।
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जब मेरठ विकास प्राधिकरण ने इस योजना को लॉन्च किया था, तब बकायदा ब्रॉशर और ले-आउट प्लान (Layout Plan) में इस सड़क को दर्शाया गया था। इसी ले-आउट को देखकर आम जनता ने अपनी गाढ़ी कमाई एमडीए की इस योजना में लगाई थी। लेकिन समय के अंतराल में रखरखाव के अभाव में इस सड़क की दुर्दशा होती चली गई। जो सड़क कभी कॉलोनी की लाइफलाइन थी, वह आज गड्ढों, धूल और कीचड़ का पर्याय बन चुकी है।
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7 महीने, 40 प्रार्थना पत्र और सिस्टम की बहरी दीवारें
\r\n\r\nस्थानीय निवासी राज किरण शर्मा जी सहित सभी कॉलोनीवासियों के अनुरोध पर इस सड़क के पुनः निर्माण के लिए एक या दो नहीं, बल्कि लगभग 40 प्रार्थना पत्र मेरठ विकास प्राधिकरण के कार्यालय में जमा कराए जा चुके हैं। जनसुनवाई से लेकर अधिकारियों के घेराव तक, हर लोकतांत्रिक तरीका अपनाया गया है।
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बीच में एक बार ऐसा प्रतीत हुआ कि शायद प्राधिकरण की नींद टूट गई है। जहाँ-तहाँ जेसीबी (JCB) मशीनें लाई गईं और दिखावे के लिए काम शुरू हुआ, लेकिन यह केवल ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुआ। कुछ ही दिनों में बिना कोई ठोस कारण बताए काम को बीच में ही रोक दिया गया। वर्तमान उपाध्यक्ष (VC) संजय मीणा हों या एमडीए के आला अभियंता, कोई भी इस जनहित से जुड़े अति-महत्वपूर्ण कार्य पर ध्यान देने को राजी नहीं है। जब भी निवासी गुहार लेकर जाते हैं, उन्हें केवल "समय" और "आश्वासन" की घुट्टी पिलाकर वापस भेज दिया जाता है।
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भू-माफियाओं की गिद्ध दृष्टि और साठगांठ का गंभीर आरोप
\r\n\r\nयह मामला केवल प्रशासनिक ढिलाई का नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी और खतरनाक साजिश की बू आ रही है। स्थानीय निवासी राज किरण शर्मा ने एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाते हुए बताया कि इस अहम रास्ते पर अब भू-माफियाओं (Land Mafias) की गिद्ध दृष्टि पड़ चुकी है।
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आरोप है कि मेरठ विकास प्राधिकरण के कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ मिलकर ये भू-माफिया इस सड़क की जमीन को अवैध रूप से कब्जाने की फिराक में हैं। यही कारण है कि सड़क के निर्माण कार्य को बार-बार रोका जा रहा है ताकि निवासियों को थका-हारा कर पीछे हटने पर मजबूर किया जा सके और बाद में इस बेशकीमती जमीन की बंदरबांट की जा सके। यह आरोप एमडीए की कार्यशैली पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
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380 परिवारों का दर्द: क्यों आ गई पलायन की नौबत?
\r\n\r\nकिसी भी कॉलोनी में 380 मकानों का मतलब है लगभग 1500 से 2000 लोगों की आबादी। बिना एक सुचारू लिंक रोड के इन परिवारों का दैनिक जीवन नर्क बन चुका है।
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- \r\n स्कूली बच्चे और बुजुर्ग: उबड़-खाबड़ और जर्जर रास्ते के कारण स्कूली बच्चों की बसों को अंदर आने में भारी परेशानी होती है। बारिश के मौसम में यह रास्ता पूरी तरह से दलदल में तब्दील हो जाता है।\r\n \r\n
- \r\n मेडिकल इमरजेंसी: सबसे भयावह स्थिति तब होती है जब रात-बिरात किसी को मेडिकल इमरजेंसी हो जाए। एंबुलेंस का इस रास्ते से होकर गुजरना किसी দুঃस्वप्न से कम नहीं है।\r\n \r\n
- \r\n सुरक्षा का अभाव: जर्जर सड़क और सुनसान इलाके के कारण शाम ढलते ही यहाँ असामाजिक तत्वों का जमावड़ा शुरू हो जाता है, जिससे महिलाओं और नौकरीपेशा लोगों का आना-जाना असुरक्षित हो गया है।\r\n \r\n
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इन सभी त्रासदियों से टूट चुके 380 मकानों के निवासियों के पास अब 'पलायन' (Mass Migration) के अतिरिक्त कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। अपने ही शहर में, अपनी ही खरीदी हुई जमीन पर आज ये लोग शरणार्थियों जैसा जीवन जीने को विवश हैं।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दरबार में जाने की तैयारी
\r\n\r\nअब निवासियों के सब्र का बांध टूट चुका है। 'उद्देश्य फाउंडेशन' और स्थानीय लोगों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मेरठ विकास प्राधिकरण ने इस दिशा में तुरंत कोई ठोस और जमीनी कार्रवाई (Action) नहीं की, तो वे सभी मिलकर सीधे माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की शरण में लखनऊ जाएंगे और एमडीए के भ्रष्ट तंत्र की पोल खोलेंगे।
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इस जन आंदोलन में 'उद्देश्य फाउंडेशन' की ओर से आलोक कुमार, विकास कुमार, संदीप भसीन, सरदार राम सिंह, संजीव द्विवेदी, विक्रम सिंह, विकास रस्तोगी, अरुण राणा आदि पदाधिकारी निरंतर स्थानीय लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष कर रहे हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक सड़क का निर्माण कार्य पूरी तरह से शुरू होकर खत्म नहीं हो जाता, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
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एमडीए के लिए जागने का अंतिम अवसर
\r\n\r\nमेरठ विकास प्राधिकरण के लिए यह चेतावनी की घंटी है। सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के दौर में, जहां भू-माफियाओं पर सीधे बुलडोजर की कार्रवाई हो रही है, वहां एमडीए के ही नाक के नीचे एक सरकारी ले-आउट की सड़क को कब्जाने की साजिश और 380 परिवारों का पलायन की कगार पर पहुंचना प्रशासन की भारी नाकामी है। समय रहते यदि एमडीए के उच्चाधिकारियों ने इस मामले का संज्ञान लेकर सड़क निर्माण शुरू नहीं कराया, तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक बवंडर खड़ा कर सकता है। देखना यह है कि क्या एमडीए कुंभकर्णी नींद से जागेगा, या इन 380 परिवारों को मुख्यमंत्री के दरबार का ही रुख करना पड़ेगा?
Sabse pehle comment karne wale banein.