मेरठ (क्राइम रिपोर्टर/लीगल डेस्क): पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे प्रमुख अदालतों में से एक मेरठ कचहरी (Meerut Court) गुरुवार को जंग के मैदान में तब्दील हो गई। यहाँ न्याय की गुहार लगाने आने वाले वादी-प्रतिवादी उस वक्त सहम गए, जब उन्होंने काले कोट में सजे वकीलों के हाथ में फाइलों की जगह 'फांसी के फंदे' देखे।READ ALSO:-Bijnor School News: बिजनौर में शीतलहर का कहर! 2 जनवरी को 12वीं तक के सभी स्कूल बंद, DM ने जारी किया सख्त आदेश; शिक्षकों को भी मिली राहत
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चैंबर की कमी से जूझ रहे वकीलों के सब्र का बांध जब टूटा, तो उन्होंने कानून को अपने हाथ में लेते हुए रातों-रात सरकारी जमीन पर कब्जा कर चैंबर खड़े कर दिए। जब प्रशासन और पुलिस की टीम इस अवैध निर्माण को हटाने पहुंची, तो वकीलों ने ऐसा कदम उठाया जिसने पुलिस के भी हाथ-पांव फुला दिए। वकीलों ने खुद को लोहे के जाल वाले चैंबर में कैद कर लिया और गले में फांसी का फंदा डालकर आत्महत्या करने की धमकी दे डाली।
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घंटों चले इस 'हाई वोल्टेज ड्रामा' के बाद पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा, लेकिन प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाते हुए सभी आरोपी वकीलों को नोटिस थमा दिए हैं।
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क्या है पूरा मामला? (The Full Incident)
\r\n\r\nयह पूरा विवाद मेरठ कचहरी परिसर स्थित प्याऊ चौराहे (Pyau Chauraha) के पास की जमीन को लेकर है।
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- \r\n कूड़े का ढेर बना चैंबर: कचहरी परिसर में एक काफी पुरानी जगह थी, जहाँ लंबे समय से कूड़ा डाला जा रहा था। यह जगह वीरान पड़ी थी। युवा अधिवक्ताओं का आरोप है कि वे सालों से चैंबर के लिए भटक रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।\r\n \r\n
- \r\n रातों-रात निर्माण: बुधवार की रात, जब कचहरी में सन्नाटा था, कुछ अधिवक्ताओं ने मिलकर रातों-रात वहां सफाई करवाई और लोहे के एंगल व जाल (Iron Mesh) लगाकर अपने लिए 'अस्थाई चैंबर' तैयार कर लिए।\r\n \r\n
- \r\n सुबह का मंजर: गुरुवार सुबह जब अन्य अधिवक्ता और न्यायालय के कर्मचारी कचहरी पहुंचे, तो कूड़े के ढेर की जगह नए नवेले लोहे के चैंबर देखकर हैरान रह गए। बात जंगल में आग की तरह फैली और देखते ही देखते प्रशासन के कान खड़े हो गए।\r\n \r\n
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प्रशासन की एंट्री और वकीलों का 'सुसाइड प्लान'
\r\n\r\nअवैध कब्जे की खबर लगते ही केंद्रीय नजारद जनपद न्यायालय मेरठ के प्रभारी अधिकारी नाजिर आलोक द्विवेदी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि सरकारी जमीन पर कब्जा हो चुका है।
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1. लॉक-इन ड्रामा: अधिकारियों को अपनी ओर आता देख, चैंबर के अंदर मौजूद वकीलों ने खुद को अंदर से लॉक कर लिया। नाजिर आलोक द्विवेदी ने लोहे की जालियों के बाहर से ही वकीलों को समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यह सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण है और इसे खाली करना होगा। लेकिन, वकील कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे।
\r\n\r\n2. पुलिस का आगमन: स्थिति बिगड़ती देख कचहरी चौकी पुलिस और बाद में सीओ सिविल लाइन (CO Civil Lines) अभिषेक तिवारी भारी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने सख्ती दिखाने की कोशिश की और चैंबर का दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया।
\r\n\r\n3. फांसी के फंदे और धमकी: जैसे ही पुलिस ने बल प्रयोग करने या धमकी देने की कोशिश की, वकीलों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने चैंबर के अंदर ही रस्सियों से फांसी के फंदे तैयार कर लिए। वकीलों ने पुलिस अधिकारियों के सामने ही फंदे गले में डालने का प्रयास करते हुए चिल्लाकर कहा, "अगर पुलिस या प्रशासन ने जबरदस्ती की, तो हम यहीं इसी चैंबर में अपनी जान दे देंगे। हमारी लाशें ही यहाँ से बाहर निकलेंगी।"
\r\n\r\nयह नजारा देखकर मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी भी ठिठक गए। आत्महत्या की धमकी के बाद पुलिस बैकफुट पर आ गई, क्योंकि यदि किसी वकील ने आवेश में आकर कोई गलत कदम उठा लिया होता, तो स्थिति संभालना मुश्किल हो जाता।
\r\n\r\nनोटिस जारी, भविष्य की लड़ाई का ऐलान
\r\n\r\nकाफी देर तक चले हंगामे के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी वहां से लौट गए, लेकिन मामला यहीं शांत नहीं हुआ। यह खबर न्यायिक अफसरों (Judicial Officers) तक पहुंची, जिन्होंने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई।
\r\n\r\nकुछ ही घंटों के भीतर केंद्रीय नजारद जनपद न्यायालय मेरठ की ओर से उन सभी अधिवक्ताओं को आधिकारिक नोटिस (Notice) जारी कर दिए गए, जिन्होंने वहां कब्जा किया था। नोटिस में सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण करने और शांति व्यवस्था भंग करने का आरोप लगाया गया है।
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वकीलों का पक्ष: नोटिस मिलने के बाद वकीलों के तेवर और तीखे हो गए। उनका कहना है कि:
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\r\n\r\n\r\n"यह लड़ाई किसी जमीन के टुकड़े की नहीं, बल्कि हमारे भविष्य की है। नए वकील जो वकालत शुरू करते हैं, उनके पास बैठने तक की जगह नहीं होती। प्रशासन हमें चैंबर नहीं देता, और जब हम अपनी व्यवस्था करते हैं, तो हमें अपराधी बनाया जाता है। हम नोटिस से डरने वाले नहीं हैं।"\r\n
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रात भर चला धरना, वरिष्ठ वकीलों की भी नहीं सुनी
\r\n\r\nगुरुवार शाम होते-होते यह मामला एक बड़े आंदोलन में बदल गया। जिन वकीलों ने चैंबर बनाए थे, उन्होंने ऐलान कर दिया कि वे घर नहीं जाएंगे।
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- \r\n अलाव और पहरा: वकीलों ने वहीं चैंबर के बाहर अलाव जलाया और धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि प्रशासन रात के अंधेरे में उनके चैंबर तोड़ सकता है, इसलिए वे रात भर वहीं पहरा देंगे।\r\n \r\n
- \r\n वरिष्ठों को बैरंग लौटाया: मेरठ बार एसोसिएशन के कुछ वरिष्ठ अधिवक्ता और पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने युवा वकीलों को समझाने और कानूनी तरीके से लड़ाई लड़ने की सलाह दी, लेकिन आक्रोशित वकीलों ने बात करने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि अब फैसला आर-पार का होगा।\r\n \r\n
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सवाल सुरक्षा और व्यवस्था का
\r\n\r\nइस पूरी घटना ने मेरठ कचहरी की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
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- \r\n सामान कैसे आया? कचहरी परिसर एक अति-सुरक्षित क्षेत्र (High Security Zone) होता है। वहां रातों-रात लोहे के भारी एंगल, जालियां और वेल्डिंग मशीनें कैसे पहुंचीं? सुरक्षा गार्ड कहाँ थे?\r\n \r\n
- \r\n युवा वकीलों का संघर्ष: यह घटना यूपी की अदालतों में बुनियादी ढांचे की कमी को भी उजागर करती है। हर साल हजारों नए वकील जुड़ते हैं, लेकिन उनके बैठने के लिए कोई व्यवस्था नहीं होती, जिससे ऐसे अवैध कब्जे की नौबत आती है।\r\n \r\n
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आगे क्या?
\r\n\r\nफिलहाल स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। एक तरफ प्रशासन कानूनी कार्रवाई और नोटिस के जरिए दबाव बना रहा है, तो दूसरी तरफ वकील 'करो या मरो' की स्थिति में हैं। शुक्रवार को कचहरी खुलने पर यह विवाद और बढ़ सकता है। यदि प्रशासन ने पुलिस बल का प्रयोग कर चैंबर हटाने की कोशिश की, तो बड़े टकराव से इनकार नहीं किया जा सकता।
Sabse pehle comment karne wale banein.