लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश में इन दिनों बिजली का स्मार्ट मीटर एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। आम जनता के लिए जो तकनीक सुविधा का सबब बननी चाहिए थी, वह अब उनके लिए 'जी का जंजाल' बन गई है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आ रही तस्वीरें और वीडियो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि उपभोक्ता स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली और बिजली विभाग की जबरन कार्रवाई से किस कदर त्रस्त हो चुके हैं।READ ALSO:-बिजनौर में लिव-इन रिलेशनशिप का खौफनाक अंत: 'वो मुझे दोस्तों को सौंपना चाहता था', हैवानियत से तंग आकर महिला ने प्रेमी को मारी गोली
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आगरा, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, मेरठ, हमीरपुर, हापुड़ और राजधानी लखनऊ सहित राज्य के कई प्रमुख शहरों में स्मार्ट मीटर को लेकर जोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं। कहीं लोग स्मार्ट मीटर सिर पर रखकर जुलूस निकाल रहे हैं, तो कहीं गुस्से में इसे जमीन पर पटक कर चकनाचूर कर रहे हैं। लोगों का स्पष्ट कहना है कि उन्हें यह नई तकनीक मंजूर नहीं है और वे पुराने मीटरों की वापसी चाहते हैं।
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क्यों भड़का है उपभोक्ताओं का गुस्सा? (मुख्य शिकायतें)
\r\n\r\nस्मार्ट मीटर के खिलाफ इस बड़े जनाक्रोश के पीछे कई ठोस वजहें हैं, जिनका सामना आम उपभोक्ता रोजमर्रा की जिंदगी में कर रहा है:
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- \r\n तेज भागता मीटर और भारी-भरकम बिल: लोगों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि स्मार्ट मीटर पुराने मीटरों की तुलना में बहुत तेज भागते हैं, जिसके कारण उनका मासिक बिजली बिल पहले की तुलना में कई गुना ज्यादा आ रहा है।\r\n \r\n
- \r\n प्रीपेड मोड में अंधाधुंध कटता बैलेंस: स्मार्ट मीटरों को प्रीपेड मोड (Prepaid Mode) पर रखा गया है, जिसमें मोबाइल की तरह पहले रिचार्ज करना होता है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि रिचार्ज का बैलेंस बहुत जल्दी-जल्दी कटता है।\r\n \r\n
- \r\n बंद घर और MCB गिरे होने पर भी कट रहे पैसे: सोशल मीडिया पर एक शख्स का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है, जिसने इस पूरे सिस्टम की पोल खोल कर रख दी है। इस शख्स ने वीडियो में दिखाया कि उसका घर पूरी तरह से बंद है, घर की मुख्य MCB भी गिरा दी गई है, यानी बिजली का इस्तेमाल शून्य है। लेकिन इसके बावजूद स्मार्ट मीटर से रोजाना बैलेंस काटा जा रहा है। बिना इस्तेमाल के पैसे कटने की इस खामी ने लोगों के गुस्से में घी डालने का काम किया है।\r\n \r\n
- \r\n जबरन मीटर लगाने का आरोप: उपभोक्ताओं का यह भी आरोप है कि बिजली विभाग के कर्मचारी पुलिस बल के साथ आकर जबरदस्ती स्मार्ट मीटर लगा रहे हैं, और विरोध करने पर कानूनी कार्रवाई की धमकी दी जा रही है।\r\n \r\n
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योगी सरकार की 'राहत 1.0' और 'राहत 2.0' बेअसर
\r\n\r\nसड़कों पर बढ़ते जन-आक्रोश को देखते हुए योगी सरकार (Yogi Government) ने डैमेज कंट्रोल की कोशिशें शुरू कीं, लेकिन वे फिलहाल नाकाफी साबित हो रही हैं।
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- \r\n राहत 1.0 (20 अप्रैल की घोषणा): भारी विरोध के बीच 20 अप्रैल को सरकार ने 'राहत 1.0' की घोषणा की थी। इसके तहत एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया गया था, जिसे 10 दिन के भीतर (यानी 30 अप्रैल तक) अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपनी थी। इसके अलावा, 2 किलोवाट (2kw) तक के लोड वाले उपभोक्ताओं को रिचार्ज खत्म होने पर तीन दिन का ग्रेस पीरियड (Grace Period) दिया गया था। 200 रुपए तक नेगेटिव बैलेंस होने पर और सार्वजनिक छुट्टी वाले दिन बिजली कनेक्शन नहीं काटने की राहत दी गई थी।\r\n \r\n
- \r\n राहत 2.0 (24 अप्रैल की घोषणा): जब पहली राहत घोषणा से जनता का गुस्सा शांत नहीं हुआ, तो 24 अप्रैल को सरकार ने 'राहत 2.0' का ऐलान किया। इसके तहत 1 किलोवाट (1kw) तक के घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए 30 दिन तक बिजली कनेक्शन नहीं काटे जाने का आदेश जारी किया गया। आसान भाषा में कहें तो इसे वापस 30 दिन के लिए 'पोस्टपेड मोड' में डाल दिया गया, ताकि लोग 30 दिन में रिचार्ज करा सकें।\r\n \r\n
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उत्तर प्रदेश में 1 किलोवाट (1kw) लोड श्रेणी में करीब 42 लाख उपभोक्ता आते हैं। सरकार को उम्मीद थी कि 24 अप्रैल की इस घोषणा से गुस्सा ठंडा होगा, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ। आज की तारीख तक भी लोग सड़कों पर हैं और उनकी एकमात्र मांग ग्रेस पीरियड नहीं, बल्कि स्मार्ट मीटर को पूरी तरह से हटाकर पुराने मीटर वापस लगाने की है।
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विपक्ष और उपभोक्ता परिषद का हल्लाबोल
\r\n\r\nइस पूरे विवाद ने अब एक बड़े राजनीतिक घमासान का रूप ले लिया है। उपभोक्ताओं की तरफ से विपक्ष और राज्य उपभोक्ता परिषद ने मोर्चा संभाल लिया है।
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- \r\n राज्य उपभोक्ता परिषद की दखल: राज्य उपभोक्ता परिषद ने बिजली विभाग द्वारा जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने का कड़ा विरोध किया है। परिषद ने इस मामले में सीधे विद्युत नियामक आयोग (Electricity Regulatory Commission) का दरवाजा खटखटाया है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।\r\n \r\n
- \r\n अखिलेश यादव का तीखा हमला: मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के प्रमुख अखिलेश यादव ने स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर प्रदेश की भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है। अखिलेश यादव ने कहा, "लोग स्मार्ट मीटर को तोड़-तोड़कर फेंक रहे हैं। जनता भारतीय जनता पार्टी (BJP) की टेक्नोलॉजी पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं कर सकती है। इस सरकार ने राज्य में बिजली तो बनाई नहीं है, लेकिन लोगों के घरों में स्मार्ट मीटर जरूर लगा रहे हैं। आज हालत यह है कि महिलाएं अपने घरों से निकल पड़ी हैं और स्मार्ट मीटर उखाड़ कर फेंक रही हैं।"\r\n \r\n
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75 लाख मीटर लग चुके, 2028 की डेडलाइन... फिर जल्दबाजी क्यों?
\r\n\r\nआंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश में आज की तारीख तक करीब 75 लाख स्मार्ट मीटर सफलतापूर्वक लगाए जा चुके हैं। लेकिन जैसे-जैसे इनका दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे विरोध भी तेज होता जा रहा है।
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इस पूरे विवाद में जो सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है, वह विभाग की 'जल्दबाजी' को लेकर है। केंद्र सरकार की रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS - Revamped Distribution Sector Scheme) के तहत देश भर में स्मार्ट मीटर लगाने की डेडलाइन को बढ़ाकर मार्च 2028 कर दिया गया है।
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जब राज्य सरकार और बिजली विभाग के पास इस योजना को पूरा करने के लिए मार्च 2028 तक का लंबा समय मौजूद है, तो ऐसे में उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान किए बिना, आज जब एक्सपर्ट कमेटी की 10 दिन की मियाद (30 अप्रैल) खत्म हो चुकी है, प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। जनता को अब अस्थाई 'ग्रेस पीरियड' या 'राहत' के पैबंद नहीं, बल्कि अपने गायब होते बैलेंस और तेज भागते मीटर की समस्या का स्थायी और तकनीकी समाधान चाहिए। अगर सरकार और बिजली विभाग ने जल्द ही इस समस्या का पारदर्शी समाधान नहीं निकाला, तो यह स्मार्ट मीटर विवाद आने वाले समय में एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।
Sabse pehle comment karne wale banein.