उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग (Election Commission) ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR-2026) की अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को आधिकारिक रूप से जारी कर दी है। इस बार की सूची में एक बेहद चौंकाने वाला और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग द्वारा चलाए गए अभियान के तहत यूपी में कुल मतदाताओं की संख्या में भारी कमी आई है।READ ALSO:-डिजिटल पेमेंट में होने जा रहा है अब तक का सबसे बड़ा बदलाव: ₹10,000 से ज्यादा के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर लगेगी 1 घंटे की रोक, जानें RBI का पूरा मास्टरप्लान
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बताया कि राज्य में मतदाताओं की संख्या में 13% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की इस 'महा-सफाई' प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से कुल 2.05 करोड़ नाम काटे गए हैं। वहीं, 84 लाख नए और पात्र मतदाताओं के नामों को सूची में जोड़ा भी गया है। पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव की दिशा में इसे एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे फर्जी वोटिंग और डुप्लीकेट मतदाताओं पर पूरी तरह से लगाम लगेगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

आंकड़ों में समझिए कैसे घटे यूपी के मतदाता

\r\n\r\n
मतदाता सूची शुद्धिकरण (Voter List Purification) की यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की गई। आंकड़ों पर गौर करें तो यह साफ होता है कि यह अभियान कितने बड़े पैमाने पर चलाया गया था:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    अक्टूबर 2025 (SIR से पहले): विशेष पुनरीक्षण अभियान शुरू होने से पहले उत्तर प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 15.44 करोड़ थी।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    जनवरी 2026 (ड्राफ्ट सूची): 6 जनवरी को जब पहली ड्राफ्ट सूची जारी हुई, तब यह आंकड़ा गिरकर 12.55 करोड़ रह गया था। इस चरण में 2.89 करोड़ लोगों के नाम लिस्ट से हटा दिए गए थे।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    अप्रैल 2026 (अंतिम सूची): ड्राफ्ट सूची पर आपत्तियों और नए आवेदनों के निस्तारण के बाद, अंतिम सूची में 84 लाख नए नाम जोड़े गए।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    वर्तमान स्थिति: अब, 10 अप्रैल 2026 को जारी फाइनल लिस्ट के अनुसार, यूपी में कुल वोटर्स की संख्या 13.39 करोड़ (13,39,84,792) रह गई है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

आखिर क्यों काटे गए लाखों नाम? जानिए मुख्य कारण

\r\n\r\n
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि 6 जनवरी (ड्राफ्ट सूची प्रकाशन) से लेकर आज 10 अप्रैल तक अकेले 8,15,996 नाम और काटे गए हैं। चुनाव आयोग ने हर एक नाम को काटने के पीछे का स्पष्ट कारण भी साझा किया है, जो इस प्रकार है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    लॉजिकल एरर (Logical Errors): 3,50,436 नाम तकनीकी या तार्किक त्रुटियों के कारण हटाए गए।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    गैर-मौजूदगी (Shifted/Absent): 3,28,350 मतदाता अपने पते पर मौजूद नहीं मिले या कहीं और शिफ्ट हो चुके थे।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    दोहराव (Duplicate Voters): 79,076 मतदाताओं के नाम दो अलग-अलग जगहों (डुप्लीकेट) पर दर्ज थे, जिन्हें निरस्त किया गया।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    मृतक (Deceased): 55,865 ऐसे लोगों के नाम हटाए गए, जिनका निधन हो चुका था।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    कम उम्र (Underage): 2,269 लोग ऐसे पाए गए जिनकी उम्र 18 साल से कम थी, इसलिए उनका पंजीकरण रद्द किया गया।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

जेंडर के आधार पर मतदाताओं की स्थिति

\r\n\r\n
अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, 13.39 करोड़ कुल मतदाताओं में पुरुष और महिला मतदाताओं का अनुपात कुछ इस प्रकार है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    कुल पुरुष मतदाता: 7,30,71,061 (कुल मतदाताओं का 54.54%)
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    कुल महिला मतदाता: 6,09,09,525 (कुल मतदाताओं का 45.46%)
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    थर्ड जेंडर (तृतीय लिंग): 4,206 (0.01% से कम)
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

किन जिलों में सबसे ज्यादा नाम कटे और कहां बढ़े? (Top 5 Districts)

\r\n\r\n
इस पुनरीक्षण अभियान का सबसे ज्यादा असर राजधानी लखनऊ और प्रयागराज में देखने को मिला है। यहां लाखों की संख्या में फर्जी या शिफ्ट हो चुके वोटर्स के नाम हटाए गए हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

सबसे ज्यादा नाम कटने वाले टॉप 5 जिले:

\r\n\r\n\r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n
\r\n
जिला
\r\n
\r\n
कम हुए मतदाताओं की संख्या
\r\n
\r\n
लखनऊ
\r\n
\r\n
9,14,177
\r\n
\r\n
प्रयागराज
\r\n
\r\n
8,26,885
\r\n
\r\n
कानपुर नगर
\r\n
\r\n
6,87,000
\r\n
\r\n
आगरा
\r\n
\r\n
6,37,000
\r\n
\r\n
गाजियाबाद
\r\n
\r\n
5,74,000
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
नोट: लखनऊ में SIR से पहले 39.94 लाख वोटर थे, जो अब घटकर 30.80 लाख रह गए हैं। यानी अकेले लखनऊ में 22.89% वोटर्स कम हुए हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

अंतिम सूची में सबसे ज्यादा मतदाता बढ़ने वाले 5 जिले:

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    प्रयागराज – 3,29,421
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    लखनऊ – 2,85,961
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    बरेली – 2,57,920
    \r\n
  6. \r\n
  7. \r\n
    गाजियाबाद – 2,43,666
    \r\n
  8. \r\n
  9. \r\n
    जौनपुर – 2,37,590
    \r\n
  10. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

सबसे ज्यादा मतदाता बढ़ने वाले 5 विधानसभा क्षेत्र:

\r\n\r\n
साहिबाबाद (82,898), जौनपुर (56,118), लखनऊ पश्चिम (54,822), लोनी (53,679) और फिरोजाबाद (47,757)।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

166 दिन चला महा-अभियान: 11 BLO कर्मियों का दुखद निधन

\r\n\r\n
यह पूरी SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया 27 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई थी और 10 अप्रैल 2026 तक यानी पूरे 166 दिनों तक चली। इस महा-अभियान को सफल बनाने में चुनाव आयोग की एक भारी-भरकम फौज ने दिन-रात काम किया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस कार्य के लिए 75 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों, 403 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO), 12,758 सहायक ERO, 18,026 बीएलओ सुपरवाइजरों और 1,77,516 बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों के 5,82,877 बूथ लेवल एजेंटों ने भी इस काम में पूर्ण सहयोग दिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
हालांकि, इस कठिन अभियान के दौरान एक दुखद पहलू भी सामने आया। पूरे प्रदेश में घर-घर जाकर सर्वे करने और ड्यूटी निभाने के दौरान 11 BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) की मौत हो गई। इन मौतों के मुख्य कारण हार्ट अटैक, सड़क हादसे और आत्महत्या जैसी दुखद घटनाएं रहीं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
जानकारी के लिए बता दें कि यूपी से पहले 11 अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की फाइनल लिस्ट जारी हो चुकी है, जिसमें गुजरात (68 लाख) और बंगाल (63 लाख) में सबसे ज्यादा नाम कटे थे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

अगर आपका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो क्या करें? (Step-by-Step Guide)

\r\n\r\n
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी नागरिक का नाम 10 अप्रैल की इस अंतिम सूची में नहीं है, तो उसे बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग ने नाम जोड़ने और अपील करने की पूरी व्यवस्था खुली रखी है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

अपना नाम कैसे चेक करें?

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in या ceouttarpradesh.nic.in पर जाएं।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    अपना राज्य (उत्तर प्रदेश) और जिला चुनें।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    अपना विधानसभा क्षेत्र (Assembly Constituency) और बूथ सिलेक्ट करें।
    \r\n
  6. \r\n
  7. \r\n
    वहां से अपनी मतदाता सूची की पीडीएफ (PDF) डाउनलोड करें और अपना नाम खोजें।
    \r\n
  8. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

नाम न होने पर पंजीकरण कैसे कराएं?

\r\n\r\n
अगर आपका नाम सूची में कट गया है या आप नए मतदाता हैं, तो आप फॉर्म-6 (Form-6) भरकर पंजीकरण करा सकते हैं। यह फॉर्म आप https://voters.eci.gov.in पर अपने मोबाइल नंबर से रजिस्टर करके ऑनलाइन भर सकते हैं। फॉर्म डाउनलोड करके ऑफलाइन अपने बीएलओ (BLO) को भी जमा किया जा सकता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

नाम कटने के खिलाफ अपील (Appeal) का अधिकार:

\r\n\r\n
यदि आपका नाम गलत तरीके से काटा गया है, तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत आपको अपील करने का पूरा कानूनी अधिकार है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    प्रथम अपील: निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) के फैसले के खिलाफ आप सूची प्रकाशन की तारीख (10 अप्रैल) से 15 दिनों के भीतर जिला मजिस्ट्रेट (DM) के सामने प्रथम अपील [धारा 24 (क) के तहत] कर सकते हैं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    द्वितीय अपील: अगर आप DM के फैसले से भी संतुष्ट नहीं हैं, तो उस फैसले के 30 दिनों के भीतर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के सामने द्वितीय अपील [धारा 24 (ख) के तहत] की जा सकती है।
    \r\n
  • \r\n
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें