बिजनौर/अल्हैपुर | मई 2026-Anil Kumar Sharma, Special Correspondent — Dhampur (Bijnor)
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उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UPSLSA), लखनऊ के "मई 2026 एक्शन प्लान" के सफल क्रियान्वयन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), बिजनौर के निर्देशानुसार आज एक विशेष 'विधिक साक्षरता शिविर' का आयोजन किया गया। जनपद के ब्लॉक अल्हैपुर के अंतर्गत आने वाले "प्राईमरी पाठशाला मिलक पूरनपुर" में आयोजित इस शिविर का मुख्य केंद्र बिंदु "राइट टू एजूकेशन एक्ट-2009" (RTE) रहा।READ ALSO:-यूपी के युवाओं के लिए बंपर खुशखबरी: अब 18 साल की उम्र में ही मिलेगा 5 लाख का बिजनेस लोन; योगी सरकार करने जा रही है बड़ा बदलाव
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इस कार्यक्रम के माध्यम से न केवल कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई, बल्कि समाज के सबसे वंचित वर्गों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने का एक सशक्त संदेश भी प्रसारित किया गया।
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संविधान की ताकत: अनुच्छेद 21-A और 86वां संशोधन

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शिविर के दौरान मुख्य वक्ता और पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) जयवीर सिंह ने ग्रामीणों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए भारत के गौरवशाली संविधान की बारीकियों को समझाया। उन्होंने बताया कि शिक्षा अब केवल एक इच्छा नहीं, बल्कि हर बच्चे का जन्मसिद्ध अधिकार है।
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उन्होंने विस्तार से बताया, "वर्ष 2002 में भारतीय संविधान के 86वें संशोधन के माध्यम से 'शिक्षा' को एक मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया। संविधान के अनुच्छेद 21-A के तहत यह प्रावधान किया गया है कि 6 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे को राज्य की ओर से मुफ्त और अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा (कक्षा 1 से 8 तक) प्रदान की जाएगी। यह कानून देश के हर गरीब और जरूरतमंद बच्चे को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की गारंटी देता है।"
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RTE एक्ट 2009 की प्रमुख विशेषताएं: जो हर अभिभावक को जाननी चाहिए

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जयवीर सिंह ने 1 अप्रैल 2010 से पूरे देश में लागू हुए 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम' के उन पहलुओं पर प्रकाश डाला, जिन्हें अक्सर सामान्य नागरिक नहीं जानते।
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    निजी स्कूलों में 25% आरक्षण: इस अधिनियम के तहत केवल सरकारी स्कूल ही नहीं, बल्कि नामी निजी (प्राइवेट) स्कूलों में भी समाज के दुर्बल और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। इन सीटों पर बच्चों का प्रवेश पूरी तरह मुफ्त होता है।
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    स्क्रीनिंग और इंटरव्यू पर प्रतिबंध: अक्सर देखा जाता है कि निजी स्कूल प्रवेश के समय बच्चों की परीक्षा लेते हैं या माता-पिता का इंटरव्यू लेते हैं। जयवीर सिंह ने स्पष्ट किया कि कानून के तहत किसी भी प्रकार की स्क्रीनिंग या साक्षात्कार पूरी तरह से प्रतिबंधित है। यदि कोई स्कूल ऐसा करता है, तो वह कानून का उल्लंघन है।
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    आयु के अनुसार प्रवेश (Age Appropriate Admission): यदि कोई बच्चा किसी कारणवश सही उम्र में स्कूल नहीं जा सका, तो उसे उसकी आयु के अनुरूप कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा। उदाहरण के तौर पर, यदि 10 साल का बच्चा पहली बार स्कूल जा रहा है, तो उसे उम्र के हिसाब से कक्षा में दाखिला मिलेगा और उसकी पढ़ाई की भरपाई के लिए विशेष प्रशिक्षण (Special Training) दिया जाएगा।
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    कोई दंड या प्रताड़ना नहीं: स्कूलों में बच्चों को शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित करना कानूनन अपराध है।
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समाज के निर्माण में विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका

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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिजनौर निरंतर ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से न्याय को आम आदमी के दरवाजे तक पहुँचाने का कार्य कर रहा है। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त अशिक्षा और कानूनी अनभिज्ञता के अंधेरे को दूर करना था। प्राधिकरण का मानना है कि जब तक माता-पिता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होंगे, तब तक बच्चों के स्वर्णिम भविष्य की कल्पना करना कठिन है।
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शिक्षा के अधिकार के प्रति इस जागरूकता अभियान का प्रभाव न केवल उपस्थिति में दिखा, बल्कि ग्रामीणों के सवालों और उनकी जिज्ञासाओं ने यह सिद्ध कर दिया कि ऐसे आयोजनों की ग्रामीण भारत में भारी आवश्यकता है।
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शिविर में मौजूद रहे प्रमुख सदस्य

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इस विधिक साक्षरता शिविर को सफल बनाने में पैरा लीगल वॉलंटियर्स की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जयवीर सिंह के साथ-साथ पी.एल.वी. राजीव कुमार, ममता रानी, हिमानी सिंह, गुंजन गुप्ता, नूतन कुमारी और उदयवीर सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इन सभी वॉलंटियर्स ने व्यक्तिगत स्तर पर अभिभावकों से संवाद किया और उन्हें बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया।
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एक कदम उज्ज्वल भविष्य की ओर (विस्तृत विश्लेषण)

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RTE एक्ट 2009 मात्र एक कानून नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक क्रांति है। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में, जहाँ आर्थिक असमानता एक बड़ी चुनौती है, शिक्षा का अधिकार कानून उस खाई को पाटने का काम करता है।
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अभिभावकों के लिए संदेश: शिविर के समापन पर वक्ताओं ने जोर दिया कि "शिक्षा ही वह एकमात्र हथियार है जिससे गरीबी की बेड़ियों को काटा जा सकता है।" यदि किसी भी अभिभावक को स्कूल में प्रवेश दिलाने में समस्या आ रही है, या कोई स्कूल 25% आरक्षित सीटों पर प्रवेश देने से इनकार कर रहा है, तो वे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क कर कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
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बिजनौर के मिलक पूरनपुर में आयोजित यह शिविर शिक्षा की मशाल जलाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण का यह "एक्शन प्लान" वास्तव में जमीनी स्तर पर बदलाव लाने वाला है। शिक्षा के प्रति इस प्रकार की सजगता न केवल साक्षरता दर बढ़ाएगी, बल्कि भविष्य में एक शिक्षित और सशक्त समाज का निर्माण भी करेगी।
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