बिजनौर / धामपुर (खबरीलाल न्यूज़ डेस्क)। समाज से बाल विवाह जैसी गहरी और विनाशकारी कुरीति को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए कानूनी जागरूकता का होना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य को धरातल पर उतारते हुए, माननीय राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (State Legal Services Authority), लखनऊ के 'एक्शन प्लान' और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सख्त निर्देशों के अनुपालन में, धामपुर शहर में एक अहम 'विधिक साक्षरता शिविर' (Legal Literacy Camp) का आयोजन किया गया।READ ALSO:-मेरठ: कृषि विश्वविद्यालय में नकल के आरोप से आहत बीटेक छात्रा ने हॉस्टल की तीसरी मंजिल से लगाई छलांग, सुसाइड नोट में खोले शिक्षकों के राज
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यह विशेष जागरूकता कार्यक्रम धामपुर स्थित मुनि विद्यानंद जैन कन्या विद्यालय में आयोजित हुआ, जहां मुख्य फोकस 'बाल विवाह निषेध अधिनियम' (Prohibition of Child Marriage Act) पर रहा। इस शिविर में पैरा लीगल वालंटियर्स (PLV), स्कूल प्रबंधन और भारी संख्या में छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किशोरियों को उनके कानूनी अधिकारों, बाल विवाह से होने वाले विनाशकारी नुकसानों और इसके खिलाफ आवाज उठाने के तरीकों के प्रति जागरूक करना था।
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"बचपन और अधिकारों का कत्ल है बाल विवाह"

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कार्यक्रम के दौरान छात्राओं और उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए पी.एल.वी. (Para Legal Volunteer) जयवीर सिंह ने बाल विवाह को समाज का सबसे बड़ा कलंक बताया। उन्होंने कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाल विवाह केवल एक गलत परंपरा नहीं है, बल्कि यह भारतीय कानून की नजर में एक संगीन अपराध है।
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"बाल विवाह एक ऐसी सामाजिक कुरीति है जो मासूम बच्चों, विशेषकर बेटियों के मूलभूत अधिकारों का पूरी तरह से हनन कर देती है। यह प्रथा बच्चों से उनका बचपन, उनकी शिक्षा का अधिकार और उनके बेहतर स्वास्थ्य का अधिकार हमेशा के लिए छीन लेती है। एक स्वस्थ और सभ्य समाज के निर्माण के लिए इस कुरीति का पूरी तरह से खात्मा होना अनिवार्य है।" — पी.एल.वी. जयवीर सिंह
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शिक्षा और स्वास्थ्य पर पड़ता है सबसे बुरा असर

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शिविर की अध्यक्षता कर रहीं मुनि विद्यानंद जैन कन्या विद्यालय की प्रधानाध्यापिका प्रियंका वत्स ने छात्राओं को एक मां और एक शिक्षिका के नजरिए से समझाया। उन्होंने बाल विवाह के कारण लड़कियों के जीवन पर पड़ने वाले दीर्घकालिक और भयानक प्रभावों (Long-term impacts) के बारे में विस्तार से चर्चा की।
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प्रधानाध्यापिका प्रियंका वत्स ने चिंता जताते हुए कहा:

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    शिक्षा में रुकावट: "बाल विवाह समाज की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा डालता है। कम उम्र में शादी होने का सबसे पहला असर यह होता है कि बच्चियों की पढ़ाई बीच में ही छूट (Drop-out) जाती है। वे अपने सपनों को पूरा नहीं कर पातीं और आर्थिक रूप से दूसरों पर निर्भर हो जाती हैं।"
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    शारीरिक और मानसिक विकास अवरुद्ध: "जिस उम्र में बच्चियों का अपना शारीरिक और मानसिक विकास हो रहा होता है, उस उम्र में उन पर गृहस्थी का बोझ डाल दिया जाता है। इससे उनका संपूर्ण विकास बुरी तरह प्रभावित होता है।"
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    मातृत्व के गंभीर खतरे: "सबसे गंभीर समस्या स्वास्थ्य की है। कच्ची उम्र (कम उम्र) में माता बनने से लड़कियों का शरीर उस बदलाव के लिए तैयार नहीं होता। इसके परिणामस्वरूप जच्चा (मां) और बच्चा दोनों के जीवन को गंभीर खतरा रहता है और अक्सर उन्हें कई जटिल स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।"
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कैसे करें शिकायत और क्या है सजा का प्रावधान?

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अक्सर लोग बाल विवाह होते हुए देखते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव या डर के कारण उसकी शिकायत नहीं करते। इस डर को दूर करते हुए पी.एल.वी. राजीव कुमार ने छात्राओं और उपस्थित स्टाफ को शिकायत करने के बेहद आसान और सुरक्षित तरीके बताए।
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बाल विवाह रोकने के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन: राजीव कुमार ने बताया कि यदि कहीं भी बाल विवाह हो रहा है, तो कोई भी जागरूक नागरिक बिना डरे इसकी सूचना सरकार द्वारा जारी किए गए टोल-फ्री (Toll-Free) नंबरों पर दे सकता है:
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    चाइल्डलाइन (Childline): 1098
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    पुलिस आपातकाल (Police Emergency): 112
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    अन्य हेल्पलाइन: 121
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पहचान गुप्त और सख्त सजा (Strict Punishment): पी.एल.वी. ने एक बहुत महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम और पहचान पूरी तरह से गुप्त (Secret) रखी जाती है, इसलिए किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है।
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सजा का प्रावधान: कानून के हाथ बहुत लंबे हैं। बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह कराने वाले, उसमें शामिल होने वाले (जैसे- टेंट वाले, हलवाई, पंडित, रिश्तेदार) और इसे बढ़ावा देने वाले सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाती है। दोषी पाए जाने पर 2 वर्ष की कठोर जेल (सजा) और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का कड़ा प्रावधान है।
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शिविर में रही इनकी अहम उपस्थिति

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इस ज्ञानवर्धक और जागरूकता से भरे विधिक साक्षरता शिविर में विद्यालय की छात्राओं ने बेहद उत्साह के साथ भाग लिया और कानूनों को बारीकी से समझा। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के स्टाफ और सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी अहम योगदान रहा।
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शिविर में मुख्य रूप से पिंकेश, सोमेश, सोनी वर्मा, और अमित सहित स्कूल की सैकड़ों छात्राएं मौजूद रहीं। अंत में विद्यालय परिवार की ओर से विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
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बाल विवाह एक ऐसा धीमा जहर है, जो हमारी आने वाली पीढ़ियों को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से कमजोर कर रहा है। विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा ग्रामीण और कस्बाई स्तर पर चलाए जा रहे ये जागरूकता शिविर वास्तव में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। 'खबरीलाल' आप सभी पाठकों से अपील करता है कि यदि आपके आस-पास कहीं भी बाल विवाह जैसी कुप्रथा हो रही हो, तो मूकदर्शक न बनें। तुरंत 1098 या 112 पर कॉल करें और एक बेटी का भविष्य बचाएं।
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(बिजनौर, धामपुर और पश्चिमी यूपी की हर अहम खबर, अपराध से जुड़ी अपडेट्स और सामाजिक सरोकार की ग्राउंड रिपोर्ट सबसे पहले पढ़ने के लिए जुड़े रहें खबरीलाल के साथ।)
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