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भ्रामक खबरों पर सरकार का सख्त और कड़ा रुख
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\r\n— Ministry of Petroleum and Natural Gas #MoPNG (@PetroleumMin) April 23, 2026
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\r\nThere are some news reports suggesting a price hike of petrol and diesel. It is hereby clarified that there is no such proposal under consideration by the Government.
\r\nSuch news items are designed to create fear and panic amongst the citizens and are mischievous and… pic.twitter.com/yTAfJdah2o
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\r\n\r\n\r\n"कुछ समाचार रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट्स में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि का संकेत दिया जा रहा है। हम देशवासियों को यह स्पष्ट रूप से आश्वस्त करते हैं कि सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इस तरह की खबरें केवल नागरिकों के बीच डर, घबराहट और अनिश्चितता पैदा करने के उद्देश्य से फैलाई जा रही हैं। ये पूरी तरह से भ्रामक, आधारहीन और शरारतपूर्ण हैं।"\r\n
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आखिर कहां से शुरू हुआ यह पूरा विवाद? (कोटक इक्विटीज की रिपोर्ट)
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- \r\n चुनाव के बाद का अनुमान: रिपोर्ट में यह भविष्यवाणी की गई थी कि 29 अप्रैल को जब विधानसभा चुनाव समाप्त हो जाएंगे, तब सरकारी तेल कंपनियां अपने पिछले घाटे (Under-recovery) की भरपाई करने के लिए कीमतों में बड़ा इजाफा कर सकती हैं।\r\n \r\n
- \r\n 120 डॉलर प्रति बैरल का गणित: इस रिपोर्ट का सबसे मुख्य तर्क यह था कि यदि मध्य पूर्व का तनाव और गहराता है और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर को पार कर जाती हैं और वहीं बनी रहती हैं, तो भारतीय तेल कंपनियों को भारी नुकसान होने लगेगा। उस घाटे को पाटने के लिए घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम ₹25 से ₹28 प्रति लीटर तक बढ़ाने आवश्यक हो जाएंगे।\r\n \r\n
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वैश्विक संकट, मध्य पूर्व का तनाव और भारत की मजबूत ढाल
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- \r\n इजरायल-ईरान संघर्ष: इजरायल और ईरान के बीच हाल ही में शुरू हुए सीधे सैन्य संघर्ष ने दुनिया भर के शेयर और कमोडिटी बाजारों को हिला कर रख दिया है। ईरान दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में से एक है।\r\n \r\n
- \r\n 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) का संकट: ईरान की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि वह 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' पर नियंत्रण रखता है। यह समुद्र का वह संकरा रास्ता है जहां से दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20% से 30% हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह के सैन्य हस्तक्षेप से आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बुरी तरह बाधित होती है, जिससे तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं।\r\n \r\n
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- \r\n पिछले चार वर्षों में (कोविड-19 महामारी से लेकर रूस-यूक्रेन युद्ध और अब मध्य पूर्व संकट तक) भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल रहा है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बावजूद घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों को असाधारण रूप से स्थिर रखा गया है। पश्चिमी देशों में जहां पेट्रोल के दाम दोगुने हो गए, वहीं भारत ने इसे नियंत्रण में रखा।\r\n \r\n
- \r\n केंद्र सरकार ने आम जनता को महंगाई की मार से बचाने के लिए पहले ही पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में ₹10 प्रति लीटर तक की भारी कटौती की हुई है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा राजकोषीय बोझ उठाने जैसा है।\r\n \r\n
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देश में तेल की आपूर्ति और स्टॉक की क्या है स्थिति?
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सरकार ने देशवासियों को पूर्ण रूप से आश्वस्त करते हुए कहा है:
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- \r\n रिफाइनरियों की पूरी क्षमता: देश की सभी सरकारी और निजी पेट्रोलियम रिफाइनरियां अपनी 100% क्षमता (Full Capacity) के साथ सुचारू रूप से काम कर रही हैं। कच्चे तेल को साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाने की प्रक्रिया में कहीं कोई बाधा नहीं है।\r\n \r\n
- \r\n पर्याप्त भंडार (Adequate Stock): भारत के पास 'स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व' (SPR) और तेल कंपनियों के पास अपनी जरूरत के हिसाब से कच्चे तेल का पर्याप्त और सुरक्षित भंडार मौजूद है। देश के किसी भी राज्य, शहर या सुदूर हिस्से में ईंधन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n पेट्रोकेमिकल उत्पादन पर विशेष जोर: परिवहन ईंधन के साथ-साथ सरकार ने पेट्रोकेमिकल परिसरों को भी सख्त निर्देश दिए हैं। उन्हें यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि प्लास्टिक, उर्वरक और अन्य महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक 'C3 और C4 स्ट्रीम' (प्रोपलीन और ब्यूटेन आधारित उत्पाद) की उपलब्धता में कोई कमी न आए, ताकि देश का औद्योगिक पहिया बिना रुके घूमता रहे।\r\n \r\n
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Sabse pehle comment karne wale banein.