उत्तर प्रदेश की हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं (Anganwadi Workers) और आशा बहुओं (ASHA Workers) के लिए सोमवार का दिन बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने विधान परिषद में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा है कि उनकी सरकार आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने (UP Anganwadi ASHA Mandey Hike) जा रही है। यह घोषणा न केवल इन जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए आर्थिक संबल लेकर आई है, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य और बाल विकास सेवाओं को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।READ ALSO:-आगरा टू मुंबई: रोहित शेट्टी के घर फायरिंग मामले में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के 7 शूटर गिरफ्तार, सोशल मीडिया पोस्ट में दी थी 'बाबा सिद्दीकी' जैसी धमकी
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इसके साथ ही, सीएम योगी ने शिक्षा विभाग की रीढ़ माने जाने वाले शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों के लिए भी खजाने का मुंह खोल दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल से इन संविदा कर्मियों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
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आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को तोहफा: मानदेय में बढ़ोतरी जल्द

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विधान परिषद में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की मातृशक्ति और जमीनी स्तर के कर्मचारियों के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने हाल ही में निराश्रित और वृद्धावस्था पेंशन में की गई बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार का अगला लक्ष्य आंगनबाड़ी और आशा बहनों के जीवन स्तर को ऊपर उठाना है।
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मुख्यमंत्री ने सदन में ऐलान करते हुए कहा, "हम आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं का भी मानदेय बढ़ाएंगे।"
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यह बयान ऐसे समय में आया है जब महंगाई के दौर में ये कार्यकर्ता लंबे समय से मानदेय वृद्धि की आस लगाए बैठी थीं। (Internal link to related article: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की पुरानी मांगें और सरकार का रुख)
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हालांकि, मुख्यमंत्री ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह बढ़ोतरी कितने प्रतिशत या कितने रुपये की होगी, लेकिन आधिकारिक सूत्रों का मानना है कि जल्द ही इसका विस्तृत शासनादेश जारी कर दिया जाएगा। इस फैसले से प्रदेश की लाखों महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य और पोषण की अलख जगा रही हैं।
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शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को 'सुरक्षा कवच': कैशलेस इलाज की सुविधा

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मानदेय बढ़ाने की घोषणा के अलावा, मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षामित्रों (Shikshamitras), अनुदेशकों और रसोइयों की एक बहुत पुरानी मांग को पूरा कर दिया है। अक्सर देखा गया है कि गंभीर बीमारी की स्थिति में इन अल्प मानदेय भोगी कर्मचारियों को इलाज के लिए कर्ज लेना पड़ता था या जमीन गिरवी रखनी पड़ती थी।
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सीएम योगी ने घोषणा की, "शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा हो चुकी है। 1 अप्रैल से इसका लाभ भी मिलने लगेगा। इसमें पांच लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध होगी।"
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यह 'हेल्थ कार्ड' योजना इन कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगी। सरकार के इस कदम को शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के बीच 'संतुष्टीकरण' की नीति के तहत देखा जा रहा है। सीएम ने कहा, "हमारी सरकार तुष्टीकरण नहीं, बल्कि संतुष्टीकरण कर रही है।"
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"देख सपाई, बिटिया घबराई" का दौर अब खत्म

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अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून व्यवस्था (Law and Order) के मुद्दे पर विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) को आड़े हाथों लिया। उन्होंने महिला सुरक्षा पर अपनी सरकार की पीठ थपथपाते हुए पुराने दिनों की याद दिलाई।
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सीएम योगी ने तंज कसते हुए कहा, "पहले कहा जाता था कि 'देख सपाई, बिटिया घबराई'। किंतु अब ऐसा नहीं है। आज प्रदेश का माहौल बदल चुका है। अब बेटियां रात की शिफ्ट में भी काम करके सुकून और सुरक्षा के साथ घर जाती हैं।"
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उन्होंने कहा कि विकास की पहली और अनिवार्य शर्त 'रूल ऑफ लॉ' (कानून का राज) है। इसी लक्ष्य को पाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में रिकॉर्ड स्तर पर पुलिस भर्तियां की गई हैं। महिला सशक्तीकरण (Women Empowerment) केवल कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिख रहा है। मॉडर्न पुलिसिंग, साइबर थानों की स्थापना और फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास ने अपराधियों के मन में खौफ पैदा किया है।
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फियर जोन से 'फेथ जोन' बना उत्तर प्रदेश

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मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बदलती छवि का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय था जब उत्तर प्रदेश को दंगों और कर्फ्यू के लिए जाना जाता था। लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।
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मुख्यमंत्री के शब्दों में, "सुदृढ़ कानून-व्यवस्था से उत्तर प्रदेश अब 'फियर जोन' (Fear Zone) से 'फेथ जोन' (Faith Zone) में बदला है। अब यहां भय का नहीं बल्कि आस्था का वातावरण है। लोग सुरक्षा और व्यवस्था पर विश्वास के साथ प्रदेश में निवेश कर रहे हैं और आ रहे हैं।"
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उन्होंने कहा कि प्रदेश में 'कर्फ्यू कल्चर' की जगह अब 'जीरो टॉलरेंस कल्चर' ने ले ली है। दंगों की जगह अब फेस्टिवल और टेंपल आधारित अर्थव्यवस्था (Temple Economy) तेजी से विकसित हो रही है। जहां पहले सड़कों पर उपद्रव होता था, वहां अब उत्सव मनाया जाता है। यूपी अब 'उपद्रव प्रदेश' नहीं, बल्कि 'उत्सव प्रदेश' बन गया है।
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संवैधानिक संस्थाओं का अपमान: विपक्ष पर तीखा हमला

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सीएम योगी ने एसआईआर (SIR) और वोटर लिस्ट के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी को जमकर घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा अपनी हार की हताशा में संवैधानिक संस्थाओं का अपमान कर रही है।
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सीएम ने कहा, "समाज को आपस में लड़ाना, आस्था का अपमान करना, गुंडागर्दी और अराजकता को बढ़ाना सपा का चरित्र बन गया है। सपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता एसआईआर की प्रक्रिया से जुड़े बीएलओ (BLO) और अन्य सरकारी कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट कर रहे हैं, जो शोभा नहीं देता।"
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उन्होंने एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि एसआईआरए में 2.88 करोड़ से अधिक लोग अनुपस्थित, मृत या शिफ्टिंग (Shifted) पाए गए हैं। सीएम ने आरोप लगाया कि "सपा इन्हें जबर्दस्ती वोट बनाकर फर्जी पोलिंग करती थी। आज जब इन फर्जी वोटों को हटाया जा रहा है, तो वे चिल्ला रहे हैं कि फॉर्म-7 के नाम पर फर्जी काम हो रहा है।"
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मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग द्वारा बनाई गई फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की व्यवस्था की उपयोगिता को सदन में विस्तार से समझाया और विपक्ष को संवैधानिक शपथ की याद दिलाई।
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अर्थव्यवस्था की नई उड़ान: ईवी और स्टार्टअप में यूपी अव्वल

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मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में प्रदेश की आर्थिक प्रगति का भी विस्तृत ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने पर्यटन, हॉस्पिटिलिटी और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी धाक जमाई है।
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इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर में क्रांति: सीएम ने बताया कि हाल ही में लखनऊ में प्रदेश की पहली इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की स्थापना हुई है। इसके अलावा:
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    आज देश में बिकने वाले कुल इलेक्ट्रिक वाहनों में 19 फीसदी से अधिक हिस्सा उत्तर प्रदेश का है।
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    तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों (E-Rickshaws etc.) में यूपी की भागीदारी 40 फीसदी से अधिक है।
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    फेम-1 और फेम-2 (FAME India Scheme) के तहत सब्सिडी पाने वाले प्रमुख लाभार्थी उत्तर प्रदेश के हैं।
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    प्रदेश में एक्सप्रेस कॉरिडोर पर चार्जिंग स्टेशन का जाल बिछाया जा रहा है और 700 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन हो रहा है।
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स्टार्टअप और युवा शक्ति: युवाओं को प्रदेश की ताकत बताते हुए सीएम ने कहा कि 'स्किल इंडिया', 'स्टार्टअप इंडिया' और 'स्टैंडअप इंडिया' के माध्यम से यूपी का युवा नई पहचान बना रहा है।
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    आज प्रदेश में 20,000 से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं।
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    राज्य में 7 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 8 यूनिकॉर्न (Unicorns) स्थापित हो चुके हैं।
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    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, ड्रोन और साइबर सुरक्षा जैसे भविष्य के क्षेत्रों में यूपी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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बेरोजगारी दर में ऐतिहासिक गिरावट

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मुख्यमंत्री ने विपक्ष के बेरोजगारी के आरोपों का जवाब आंकड़ों से दिया। उन्होंने कहा कि जब युवा स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ता है, तो बेरोजगारी अपने आप कम होती है।
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उन्होंने दावा किया, "वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में बेरोजगारी दर 19 प्रतिशत से अधिक थी, जो अब घटकर 2.24 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हमने छह करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाया है।"
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यह आंकड़ा दर्शाता है कि सरकारी नौकरियों के साथ-साथ स्वरोजगार और निजी क्षेत्र में निवेश ने रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विधान परिषद में दिया गया यह भाषण न केवल उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड था, बल्कि भविष्य का रोडमैप भी। आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी (UP Anganwadi ASHA Mandey Hike) का वादा जहां महिला कर्मचारियों के चेहरों पर मुस्कान लाएगा, वहीं शिक्षामित्रों को कैशलेस इलाज की सुविधा एक बड़ी सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगी। कानून व्यवस्था और आर्थिक मोर्चे पर सरकार ने अपनी पीठ थपथपाई है, लेकिन विपक्ष पर किए गए तीखे हमलों ने यह साफ कर दिया है कि सियासी पारा आने वाले दिनों में और चढ़ेगा। अब सबकी नजरें उस शासनादेश पर टिकी हैं, जिसमें मानदेय वृद्धि की राशि का खुलासा होगा।
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने की घोषणा की है। विधान परिषद में बोलते हुए उन्होंने यह भी ऐलान किया कि 1 अप्रैल से शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलेगी। सीएम ने प्रदेश की कानून व्यवस्था को 'फियर जोन' से 'फेथ जोन' में बदलने का दावा किया और बताया कि बेरोजगारी दर 19% से घटकर 2.24% रह गई है। उन्होंने ईवी सेक्टर और स्टार्टअप्स में यूपी की प्रगति को भी रेखांकित किया।
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