दिल्ली में हुए आतंकी ब्लास्ट मामले की जांच कर रही उत्तर प्रदेश ATS (एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड) ने कानपुर से एक रेजीडेंट डॉक्टर को हिरासत में लिया है। पकड़े गए डॉक्टर, डॉ. आरिफ मीर, कानपुर के कार्डियोलॉजी अस्पताल में रेजीडेंट डॉक्टर के रूप में काम कर रहे थे। उन पर दिल्ली ब्लास्ट मामले में पहले से गिरफ्तार डॉ. शाहीन के लगातार संपर्क में रहने का गंभीर आरोप है। सूत्रों की मानें तो ATS ने हापुड़ से भी एक डॉक्टर को हिरासत में लिया है, हालांकि हापुड़ वाले मामले की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।READ ALSO:-यूपी के IPL खिलाड़ी पर रेप का आरोप: हैदराबाद की महिला क्रिकेटर ने लखनऊ में अफसरों को बताई आपबीती, खिलाड़ी ने भी दर्ज कराई ब्लैकमेल की FIR
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जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी महिला और डॉ. आरिफ का संपर्क

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यह मामला तब सामने आया जब जांच एजेंसियों ने जैश-ए-मोहम्मद जैसे खतरनाक आतंकी संगठन की महिला प्रमुख कही जाने वाली डॉ. शाहीन के कनेक्शन खंगालने शुरू किए।
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    डॉ. शाहीन का परिचय: डॉ. शाहीन ने कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज में प्रवक्ता (Lecturer) के तौर पर काम किया था।
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    डॉ. आरिफ मीर का कनेक्शन: डॉ. आरिफ मीर कानपुर के हृदय रोग संस्थान में पीजी सुपर स्पेशिलिटी कोर्स के रेजीडेंट (फर्स्ट ईयर) थे। उन पर डॉ. शाहीन से लगातार संपर्क रखने और बातचीत करने के तथ्य जांच एजेंसियों को मिले हैं। डॉ. आरिफ मीर जम्मू-कश्मीर के खागुनसादीवारा के रहने वाले हैं।
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डॉ. आरिफ मीर की गिरफ्तारी और कॉलेज का बयान

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डॉ. आरिफ मीर को ATS ने उनके किराए के कमरे से गिरफ्तार किया। उनकी गिरफ्तारी के बाद कानपुर के हृदय रोग संस्थान में निदेशक डॉ. राकेश वर्मा व सीनियर डॉ. एके शर्मा ने एक प्रेस वार्ता की।
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    ज्वाइनिंग: प्रो. एके शर्मा ने बताया कि मो. आरिफ मीर ने अगस्त 2025 में हृदय रोग संस्थान में ज्वाइनिंग ली थी और वह इमरजेंसी में रेजीडेंट के तौर पर काम कर रहा था।
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    अस्पताल का रुख: प्रो. शर्मा ने कहा कि मो. आरिफ के चाल-चलन को देखकर अस्पताल में कभी कुछ संदिग्ध नहीं लगा। वह अशोक नगर में किराए पर कमरा लेकर रहता था, क्योंकि छात्रावास में कुछ दिक्कतें थीं।
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    प्रवेश प्रक्रिया: उन्होंने यह भी बताया कि आरिफ ने प्रवेश के लिए पहले प्रयास में एसजीपीजीआई का विकल्प चुना था, लेकिन सेकेंड राउंड की काउंसिलिंग में वह हृदय रोग संस्थान आ गया था।
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जांच के दायरे में कई और डॉक्टर 

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अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि हर साल जम्मू-कश्मीर के दो से तीन छात्र हृदय रोग संस्थान में प्रवेश लेते हैं और कभी कोई छात्र संदिग्ध नहीं लगा।
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    एटीएस का रडार: चर्चा है कि ATS के राडार पर कानपुर के कई और डॉक्टर भी हैं, जिन पर अब जांच एजेंसियां पड़ताल करेंगी।
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    संवाद के तथ्य: डॉ. आरिफ और डॉ. शाहीन के बीच बातचीत के तथ्य जांच एजेंसियों को मिले हैं, जो उनकी गिरफ्तारी का मुख्य आधार बने हैं।
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आतंकी मॉड्यूल के तार

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दिल्ली ब्लास्ट मामले में दो डॉक्टरों की गिरफ्तारी और पूछताछ इस बात का संकेत देती है कि आतंकी मॉड्यूल के तार सिर्फ सीमा पार नहीं, बल्कि देश के शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थानों से भी जुड़े हो सकते हैं। ATS अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन डॉक्टरों की भूमिका क्या थी, क्या वे रसद (Logistics) मुहैया करा रहे थे, या यह कनेक्शन केवल वैचारिक स्तर पर था।
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