गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश से बांग्लादेश में ₹100 करोड़ से अधिक की कोडिन कफ सिरप तस्करी का एक बड़ा और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। यह गोरखधंधा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और धर्म नगरी बनारस (वाराणसी) से संचालित हो रहा था। इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड दवा कारोबारी शुभम जायसवाल बताया जा रहा है, जो पुलिस की कार्रवाई शुरू होते ही फरार हो गया है।READ ALSO:-हापुड़ में 'लेडी सिंघम' बनी प्रिंसिपल: छात्रा को पीटा, मां से बोली- 'हाथ लगाया तो हत्या कर दूंगी', ऑडियो-वीडियो वायरल
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उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में एसआईटी (SIT) जांच का आदेश दिया है। जांच के दौरान वाराणसी के रोहनिया इलाके में एक जिम के गोदाम से करीब दो करोड़ रुपए के कोडिन कफ सिरप जब्त किए गए हैं, जिसके बाद पुलिस ने शुभम जायसवाल पर एक और एफआईआर दर्ज की है।
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कैसे चलता था ₹100 करोड़ का गोरखधंधा?
\r\n\r\nप्रतिबंधित कोडिन युक्त कफ सिरप का यह सिंडिकेट पिछले तीन-चार सालों से चल रहा था। भारत सरकार ने जब फैंसीडिल जैसे कोडिन कफ सिरप के निर्माण पर प्रतिबंध लगाया, तो दवा माफिया सक्रिय हो गए।
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- \r\n भारी मांग: इस कफ सिरप में नशा होने के कारण झारखंड, बंगाल और बांग्लादेश में इसकी भारी मांग है, जिसके चलते इसे बैन लगने के बाद 10 गुना दाम पर बेचा जाने लगा।\r\n \r\n
- \r\n सप्लाई रूट: यह गोरखधंधा गाजियाबाद से शुरू होता था और बनारस होते हुए झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा पार कर बांग्लादेश तक पहुंचता था।\r\n \r\n
- \r\n ऑपरेटिंग हब: खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में खुलासा हुआ है कि शुभम जायसवाल और उसके पिता भोलानाथ प्रसाद का झारखंड के रांची में मेसर्स शैली ट्रेडर्स नाम का एक फर्म है। इस फर्म के जरिए ही पिता-पुत्र वाराणसी के 26 कारोबारियों को बड़ी मात्रा में कोडिन युक्त सिरप सप्लाई करते थे। ड्रग विभाग को अंदेशा है कि यह पूरा सिंडिकेट बनारस से ही संचालित हो रहा था।\r\n \r\n
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मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल फरार, 26 फर्मों पर एक्शन
\r\n\r\nगाजियाबाद पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि इस रैकेट का मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल है, जो हिमाचल में इसका निर्माण करवाता था। रांची का शैली ट्रेडर्स सुपर स्टॉकिस्ट के रूप में इसे बल्क में मंगाता था और वहां से पूरे पूर्वी भारत और बांग्लादेश में इसकी सप्लाई होती थी। अपर आयुक्त रेखा एस चौहान ने बताया कि अब तक 5 लाख शीशियां बरामद हुई हैं।
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- \r\n FIR दर्ज: शुभम जायसवाल के खिलाफ अब तक दो एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।\r\n \r\n
- \r\n दवा कारोबारियों पर शिकंजा: खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन की आयुक्त रोशन जैकब के निर्देश पर बनारस के कोतवाली थाने में 26 फर्मों के 28 दवा कारोबारियों पर NDPS एक्ट के तहत केस दर्ज किए गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n जांच का दायरा: पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने बताया कि डीसीपी काशी जोन के नेतृत्व में एसआईटी जांच का गठन किया गया है। पुलिस शुभम जायसवाल की तलाश कर रही है।\r\n \r\n
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फर्जी लाइसेंस और अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका
\r\n\r\nअपर आयुक्त ड्रग डिपार्टमेंट एवं विशेष सचिव रेखा एस चौहान ने इस बात की पुष्टि की है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और यह घोटाला 100 करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है।
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- \r\n जड़ों की तलाश: उन्होंने स्वीकार किया कि इस नेक्सस में ड्रग डिपार्टमेंट के अधिकारियों, कर्मचारियों और पुलिस की मिलीभगत का अंदेशा है। विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि आखिर इतने फर्जी लाइसेंस किसके समय में दिए गए और इसमें कितने डीआई (ड्रग इंस्पेक्टर) एवं डीएलए (डिस्ट्रिक्ट लाइसेंसिंग अथॉरिटी) शामिल हैं।\r\n \r\n
- \r\n घोटाले का खुलासा: इस पूरे घोटाले का खुलासा तब हुआ जब सोनभद्र और गाजियाबाद में फलों के ट्रकों में प्रतिबंधित दवाओं की खेप पकड़ी गई।\r\n \r\n
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डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया है कि हर स्तर पर कार्रवाई होगी और दोषी बख्शे नहीं जाएंगे। एसआईटी इस कोडिन कफ सिरप तस्करी के नेटवर्क, सप्लायर, ट्रांसपोर्ट चैनल और फंडिंग सहित विभिन्न पहलुओं की गहन जांच कर रही है।
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गाजियाबाद और बनारस से संचालित हो रहे ₹100 करोड़ से अधिक की कोडिन कफ सिरप तस्करी के खुलासे ने यूपी के ड्रग माफिया सिंडिकेट की गहराई को उजागर किया है। मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल की गिरफ्तारी और फर्जी लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारियों की जांच इस मामले की अगली महत्वपूर्ण कड़ी होगी, ताकि इस बड़े नशे के कारोबार को जड़ से खत्म किया जा सके।
Sabse pehle comment karne wale banein.