(बिजनौर, उत्तर प्रदेश): सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों का पालन कराने वाले 'रोड के रक्षक' ही अब सुरक्षित नहीं रहे हैं। जनपद बिजनौर के कोतवाली शहर क्षेत्र में बीती देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। शहर के व्यस्ततम मंडावर चौराहे (Mandawar Chowk) पर ड्यूटी कर रहे एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी को तेज रफ्तार अनियंत्रित कार ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि पुलिसकर्मी हवा में उछलकर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए।Read also:-बिजनौर में 'डिजिटल क्रांति': जनगणना 2027 के लिए प्रशासन ने कसी कमर; अब घर बैठे मोबाइल से दर्ज होगी आपकी जानकारी, DM जसजीत कौर ने तैयार किया रोडमैप
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घटना के बाद कार चालक मानवीयता को शर्मसार करते हुए घायल सिपाही को सड़क पर तड़पता छोड़, अपनी कार मौके पर ही त्यागकर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गया। इस हाई-प्रोफाइल हिट एंड रन (Hit and Run) मामले की सूचना मिलते ही जिले के पुलिस कप्तान (SP) अभिषेक झा खुद एक्शन मोड में आ गए और आधी रात को ही अस्पताल पहुंच गए।
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यह रिपोर्ट इस पूरी घटना, पुलिस की कार्रवाई, घायल जवान की स्थिति और सड़क सुरक्षा की भयावह वास्तविकता का विस्तृत विश्लेषण है।
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घटनाक्रम: उस काली रात मंडावर चौराहे पर क्या हुआ?
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Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n— Bijnor Police (@bijnorpolice) February 12, 2026
\r\nथाना कोतवाली शहर क्षेत्रान्तर्गत मंडावर चौराहे पर हुई सड़क दुर्घटना के संबंध में पुलिस अधीक्षक, जनपद बिजनौर की बाइट।#UPPolice pic.twitter.com/iyeA4gOKD3
बिजनौर का मंडावर चौराहा, जो दिन भर वाहनों के शोर और भीड़भाड़ से भरा रहता है, रात के समय भी यातायात के लिहाज से महत्वपूर्ण प्वाइंट माना जाता है। पुलिस सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना देर रात की है जब सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगा था, लेकिन भारी वाहनों और रात के यात्रियों की आवाजाही जारी थी।
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ट्रैफिक पुलिस के जवान (जिनका नाम अभी आधिकारिक बुलेटिन में सार्वजनिक नहीं किया गया है) अपनी नियमित ड्यूटी पर तैनात थे। उनका काम रात के समय शहर में प्रवेश करने वाले वाहनों की चेकिंग और यातायात को सुचारू रखना था। वे बैरिकेडिंग के पास खड़े होकर अपनी ड्यूटी निभा रहे थे।
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तभी, शहर की तरफ से एक तेज रफ्तार कार (जिसका मेक और मॉडल पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में नोट कर लिया है) अनियंत्रित गति से आई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कार की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि चालक उसे नियंत्रित नहीं कर सका। इससे पहले कि ट्रैफिक कर्मी कुछ समझ पाते या हट पाते, कार ने उन्हें सीधी टक्कर मार दी।
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टक्कर की भयावहता: टक्कर की आवाज दूर तक सुनी गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार की गति संभवतः 100 किलोमीटर प्रति घंटा से ऊपर रही होगी। टक्कर लगते ही ट्रैफिक कर्मी बोनट से टकराते हुए सड़क पर जा गिरे। उनके सिर और पैरों में गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही खून का रिसाव शुरू हो गया। वर्दी खून से सन गई और वायरलेस सेट हाथ से छिटक कर दूर जा गिरा।
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आरोपी की कायरता: कार छोड़ी और भाग निकला
\r\n\r\nहादसे के तुरंत बाद जो हुआ, वह हिट एंड रन के मामलों में अक्सर देखा जाता है—कायरता। टक्कर मारने के बाद कार का इंजन बंद हो गया या शायद हड़बड़ाहट में चालक ने ब्रेक लगा दिए। बजाय इसके कि चालक उतरकर घायल पुलिसकर्मी की मदद करता या उन्हें अस्पताल ले जाता, उसने पुलिस के डर से भागना बेहतर समझा।
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मौके पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों और होमगार्ड्स ने जब दौड़कर कार को घेरने की कोशिश की, तो चालक गेट खोलकर अंधेरे गलियारों की तरफ भाग निकला। पुलिसकर्मियों ने तत्काल प्राथमिकता घायल साथी की जान बचाने को दी, जिसके चलते चालक भीड़ और अफरा-तफरी का फायदा उठाकर ओझल हो गया।
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हालांकि, पुलिस के लिए यह एक 'ओपन एंड शट' केस साबित हो सकता है क्योंकि 'आला-ए-कत्ल' यानी वह कार पुलिस के कब्जे में है। कार के अंदर से मिले दस्तावेजों और नंबर प्लेट के आधार पर पुलिस ने मालिक की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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पुलिस महकमे में हड़कंप: एसपी अभिषेक झा का त्वरित एक्शन
\r\n\r\nजैसे ही वायरलेस सेट पर यह मैसेज फ्लैश हुआ कि "मंडावर चौराहे पर ट्रैफिक आरक्षी को कार ने उड़ा दिया है," पूरे जिले की पुलिस फोर्स में हड़कंप मच गया। कंट्रोल रूम से सायरन बजाती गाड़ियां मौके की तरफ दौड़ पड़ीं।
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घायल जवान को आनन-फानन में पुलिस जीप और एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल ले जाया गया। इस घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस अधीक्षक (SP) अभिषेक झा, जो अपनी तेज-तर्रार कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं, ने सूचना मिलते ही अपनी गाड़ी अस्पताल की तरफ मोड़ दी।
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एसपी का अस्पताल दौरा: एसपी अभिषेक झा जब जिला अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे, तो वहां का माहौल तनावपूर्ण था। वर्दीधारी साथी अपने घायल सहकर्मी के लिए दुआ कर रहे थे। एसपी ने तुरंत डॉक्टरों से बात की और पुलिसकर्मी की स्थिति का जायजा लिया।
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\r\n\r\n\r\n“हमारे लिए हर जवान के जीवन की कीमत सर्वोच्च है। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी पर हमला या दुर्घटना पूरे फोर्स के लिए चिंता का विषय है। डॉक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि इलाज में कोई कोताही न बरती जाए।” - (पुलिस सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ अधिकारी का वक्तव्य)\r\n
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एसपी ने घायल जवान का हौसला बढ़ाया और उनके परिवार को भी तत्काल सूचित करने और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। उनकी उपस्थिति ने वहां मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों के मनोबल को गिरने से बचाया।
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मेडिकल अपडेट: हायर सेंटर रेफर और 'गोल्डन ऑवर' की जंग
\r\n\r\nजिला अस्पताल के डॉक्टरों ने घायल ट्रैफिक कर्मी का प्राथमिक उपचार (First Aid) किया। शुरुआती जांच में सिर में अंदरूनी चोट (Head Injury) और पैरों में फ्रैक्चर की आशंका जताई गई। चूंकि मामला हेड इंजरी का हो सकता था, और बिजनौर जिला अस्पताल में न्यूरोसर्जरी की अति-विशिष्ट सुविधाएं सीमित हो सकती हैं, इसलिए डॉक्टरों ने रिस्क न लेते हुए उन्हें हायर सेंटर (Higher Centre) रेफर कर दिया।
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आमतौर पर बिजनौर से गंभीर मरीजों को मेरठ के मेडिकल कॉलेज या दिल्ली के ट्रॉमा सेंटर्स में रेफर किया जाता है। पुलिस ने 'ग्रीन कॉरिडोर' जैसा माहौल बनाते हुए एंबुलेंस को रवाना किया ताकि 'गोल्डन ऑवर' (दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा) के भीतर उन्हें विशेषज्ञ इलाज मिल सके। फिलहाल, जवान की हालत 'स्थिर लेकिन गंभीर' बनी हुई है।
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पुलिस की जांच और कार्रवाई: अब तक क्या हुआ?
\r\n\r\nइस घटना को लेकर कोतवाली शहर पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एसपी अभिषेक झा के कड़े निर्देशों के बाद कई टीमें गठित की गई हैं:
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- \r\n सर्विलांस टीम: घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी कैमरों (CCTV Footage) को खंगाला जा रहा है ताकि यह देखा जा सके कि कार कहां से आ रही थी और चालक भागकर किस दिशा में गया।\r\n \r\n
- \r\n आरटीओ डेटा: बरामद कार के रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए मालिक का पता लगाया जा रहा है। क्या कार मालिक ही चला रहा था या कोई और, यह जांच का विषय है।\r\n \r\n
- \r\n नाकेबंदी: शहर के बाहरी रास्तों पर चेकिंग बढ़ा दी गई है ताकि अगर आरोपी किसी दूसरे वाहन से भागने की फिराक में हो तो उसे दबोचा जा सके।\r\n \r\n
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पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सरकारी कार्य में बाधा और पुलिसकर्मी के जीवन को खतरे में डालने का गंभीर अपराध है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
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रात की ड्यूटी और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा का सवाल
\r\n\r\nयह घटना एक बार फिर पुलिसकर्मियों, विशेषकर ट्रैफिक पुलिस की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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- \r\n विजिबिलिटी की समस्या: क्या रात के समय पुलिसकर्मियों के पास पर्याप्त रिफ्लेक्टिव जैकेट (Reflective Jackets) और लाइटिंग की व्यवस्था थी? अक्सर देखा जाता है कि दूर से आने वाली तेज रफ्तार गाड़ियां अंधेरे में खड़े पुलिसकर्मी को देख नहीं पातीं।\r\n \r\n
- \r\n शराबी चालकों का आतंक: देर रात होने वाली दुर्घटनाओं में अक्सर 'ड्रंक एंड ड्राइव' (Drunk and Drive) का मामला सामने आता है। पुलिस जांच करेगी कि क्या फरार चालक नशे में था, जिसके कारण वह कार पर नियंत्रण खो बैठा।\r\n \r\n
- \r\n बैरिकेटिंग के खतरे: मंडावर चौराहा एक संवेदनशील पॉइंट है। यहां स्पीड ब्रेकर या रंबल स्ट्रिप्स की स्थिति क्या है, इस पर भी प्रशासन को ध्यान देना होगा।\r\n \r\n
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बिजनौर में हाल के दिनों में सड़क हादसों में बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन जब रक्षक ही भक्षक वाहनों का शिकार बनने लगें, तो यह चिंताजनक है।
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भारतीय न्याय संहिता (BNS) और हिट एंड रन के नए नियम
\r\n\r\nहाल ही में लागू हुए नए कानूनों के तहत हिट एंड रन (Hit and Run) के मामलों में सजा के कड़े प्रावधान किए गए हैं।
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- \r\n अगर चालक दुर्घटना के बाद पुलिस या मजिस्ट्रेट को सूचित किए बिना भाग जाता है, तो उसे भारी जुर्माने और लंबी कैद की सजा हो सकती है।\r\n \r\n
- \r\n इस मामले में, चूंकि पीड़ित एक लोक सेवक (Public Servant) है जो अपनी ड्यूटी पर था, कानून और भी सख्त हो सकता है।\r\n \r\n
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पुलिस अधीक्षक अभिषेक झा ने भी संकेत दिए हैं कि आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून का पूरा शिकंजा कसा जाएगा। बरामद कार अब इस केस का सबसे बड़ा सबूत है। फॉरेंसिक टीम कार के स्टीयरिंग और गियर नॉब से फिंगरप्रिंट्स (Fingerprints) भी उठा सकती है ताकि चालक की पहचान पुख्ता की जा सके।
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जनमानस की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया
\r\n\r\nजैसे ही यह खबर सोशल मीडिया और स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप्स पर फैली, बिजनौर के लोगों में रोष और चिंता दोनों देखी गई। लोग घायल पुलिसकर्मी के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।
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- \r\n "पुलिस रात भर जागकर हमारी सुरक्षा करती है, उनके साथ ऐसा होना दुखद है," एक स्थानीय निवासी ने सोशल मीडिया पर लिखा।\r\n \r\n
- \r\n वहीं कुछ लोगों ने मंडावर चौराहे पर अव्यवस्थित ट्रैफिक और रात में तेज रफ्तार वाहनों पर लगाम लगाने की मांग की है।\r\n \r\n
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पुलिस परिवार का दर्द
\r\n\r\nएक पुलिसकर्मी सिर्फ एक वर्दी नहीं होता, वह किसी का बेटा, किसी का पति और किसी का पिता होता है। जब वह ड्यूटी पर निकलता है, तो उसका परिवार उसकी सुरक्षित वापसी का इंतजार करता है। इस हादसे ने एक बार फिर उस अनिश्चितता को उजागर किया है जो पुलिस की नौकरी का हिस्सा है। एसपी अभिषेक झा का अस्पताल पहुंचना उस परिवार के लिए एक बड़ा संबल है कि पूरा विभाग उनके साथ खड़ा है।
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एक कड़ा संदेश जरूरी
\r\n\r\nबिजनौर के मंडावर चौराहे की यह घटना महज एक एक्सीडेंट नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। यह चेतावनी उन बेलगाम वाहन चालकों के लिए है जो सड़कों को रेसिंग ट्रैक समझते हैं। यह चेतावनी प्रशासन के लिए है कि पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए और बेहतर उपकरण (जैसे हाई-विजिबिलिटी ब्लिंकर्स) की जरूरत है।
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फिलहाल, सभी की निगाहें हायर सेंटर पर टिकी हैं, जहां ट्रैफिक पुलिस का जवान जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है। वहीं, पुलिस की दूसरी नजर उस फरार चालक पर है, जिसकी गिरफ्तारी अब बस कुछ ही समय की बात लगती है। एसपी अभिषेक झा की सक्रियता से यह तय माना जा रहा है कि न्याय में देरी नहीं होगी।
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हम अपने पाठकों से अपील करते हैं: सड़क पर चलते समय गति सीमा का पालन करें। याद रखें, घर पर कोई आपका इंतजार कर रहा है, और सड़क पर खड़ा वह पुलिसकर्मी भी किसी के घर का चिराग है।
Sabse pehle comment karne wale banein.