बिजनौर (रिपोर्टर: शकील अहमद)। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में इन दिनों गुलदार (तेंदुए) का खौफ चरम पर है। शाम ढलते ही लोग अपने घरों में कैद होने को मजबूर हो जाते हैं। वन विभाग इस आदमखोर होते जा रहे जानवर को पकड़ने के लिए दिन-रात एक किए हुए है। लेकिन, इस दहशत भरे माहौल के बीच नजीबाबाद क्षेत्र से एक ऐसा चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है, जिसने न सिर्फ वन विभाग की नींद उड़ा दी है, बल्कि ग्रामीणों की एक बड़ी और जानलेवा लापरवाही को भी उजागर कर दिया है। वन विभाग ने जिस भारी-भरकम पिंजरे को गुलदार को कैद करने के लिए लगाया था, गांव के बच्चों ने उसे अपना नया 'खिलौना' बना लिया है।Read also:-जिंदगी से 'खिलवाड़' का काला कारोबार: मेरठ में पुलिस का बड़ा छापा, ₹1 करोड़ की एक्सपायर्ड दवाएं और कॉस्मेटिक्स बरामद; 4 सगे भाई गिरफ्तार
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वायरल वीडियो का सच: मौत के मुंह में 'खेल' सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वन विभाग द्वारा जंगल के किनारे लगाए गए पिंजरे के आसपास कुछ बच्चे मंडरा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि ये बच्चे सिर्फ पिंजरे के बाहर ही नहीं खड़े हैं, बल्कि बेखौफ होकर पिंजरे के अंदर घुस रहे हैं। वीडियो में एक बच्चा पिंजरे के अंदर जाता है, खटके (ट्रिगर) के साथ छेड़छाड़ करता है और अंदर से पिंजरे का भारी दरवाजा बंद कर लेता है। यह नजारा रोंगटे खड़े कर देने वाला है क्योंकि जिस जगह यह पिंजरा रखा गया है, वहां हाल ही में गुलदार की लगातार आवाजाही दर्ज की गई है। ऐसे में बच्चों का इस तरह से पिंजरे के साथ खेलना किसी बहुत बड़े और दुखद हादसे को सीधा निमंत्रण देने जैसा है।
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गायब हो गया पिंजरे का चारा: ग्रामीणों की लापरवाही वन विभाग की रणनीति के अनुसार, गुलदार को पिंजरे की तरफ आकर्षित करने के लिए उसमें जिंदा चारे के रूप में मुर्गे या बकरियां बांधी जाती हैं। नजीबाबाद के इस पिंजरे में भी बाकायदा मुर्गे रखे गए थे। लेकिन विभागीय सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ अज्ञात ग्रामीणों ने पिंजरे से उन मुर्गों को हटा दिया या चुरा लिया। चारे के गायब होने के बाद पिंजरा पूरी तरह से खाली हो गया और यही वजह रही कि बच्चों को इसके अंदर घुसकर खेलने का मौका मिल गया। यह घटना सीधे तौर पर वन विभाग के पूरे अभियान को पलीता लगाने वाली साबित हो रही है। अगर ग्रामीण इस तरह से पिंजरों से छेड़छाड़ करेंगे, तो गुलदार को पकड़ने की योजना कभी सफल नहीं हो पाएगी।
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बिजनौर में गुलदार का आतंक: एक खौफनाक हकीकत बिजनौर जिले का एक बड़ा हिस्सा जंगलों और गन्ने के खेतों से घिरा हुआ है, जो गुलदार के छिपने के लिए सबसे मुफीद जगह माने जाते हैं। पिछले कुछ महीनों में जिले के अलग-अलग हिस्सों में गुलदार के हमलों में कई बेगुनाह लोगों और मासूम बच्चों की जान जा चुकी है। इसके अलावा, दर्जनों लोग इन हमलों में गंभीर रूप से घायल हुए हैं। गुलदार बड़ी संख्या में पालतू पशुओं, कुत्तों और जंगल के छोटे जानवरों को भी अपना निवाला बना चुका है। किसानों का खेतों में जाना दुश्वार हो गया है और स्कूल जाने वाले बच्चों के माता-पिता हर समय खौफ में रहते हैं। इसी गंभीर स्थिति से निपटने के लिए ही वन विभाग ने जिले को हाई अलर्ट पर रखा हुआ है।
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डीएफओ जयसिंह कुशवाहा की सख्त चेतावनी वायरल वीडियो के संज्ञान में आते ही बिजनौर वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने तुरंत एक्शन लिया है। बिजनौर के डीएफओ (प्रभागीय वनाधिकारी) जयसिंह कुशवाहा ने इस घटना को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताया है। उन्होंने वीडियो की पुष्टि करते हुए कहा कि जिस स्थान पर यह पिंजरा स्थापित किया गया था, वहां पिछले कई दिनों से लगातार गुलदार की मौजूदगी के पुख्ता इनपुट मिल रहे थे।
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डीएफओ ने इस लापरवाही के तकनीकी और जानलेवा खतरों के बारे में समझाते हुए सख्त चेतावनी दी। उन्होंने बताया, "गुलदार को पकड़ने वाले पिंजरे का दरवाजा लोहे का और बेहद भारी होता है। जैसे ही अंदर का खटका दबता है, यह दरवाजा झटके के साथ बहुत तेजी से नीचे गिरता है। अगर कोई बच्चा इसके नीचे आ गया, तो उसकी उंगलियां या हाथ कट सकते हैं, और सिर पर चोट लगने से जान भी जा सकती है।" उन्होंने आगे कहा, "इससे भी बड़ा खतरा यह है कि जब बच्चे वहां खेल रहे हों और शोर शराबा हो रहा हो, और उसी वक्त झाड़ियों से निकलकर गुलदार वहां आ जाए, तो एक भयंकर त्रासदी हो सकती है। बच्चे गुलदार का मुकाबला नहीं कर सकते।"
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वन विभाग का महा-अभियान और 120 पिंजरों का जाल गुलदार की दहशत को खत्म करने के लिए वन विभाग ने बिजनौर जिले के अलग-अलग संवेदनशील इलाकों, गन्ने के खेतों और गांवों के बाहरी किनारों पर 120 से ज्यादा विशेष पिंजरे लगाए हैं। यह अपने आप में एक बहुत बड़ा अभियान है। विभाग की कई टीमें रात-दिन गश्त कर रही हैं, ड्रोन से निगरानी की जा रही है और ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए लगातार मुनादी कराई जा रही है। लोगों को समझाया जा रहा है कि वे अकेले खेतों में न जाएं, रात के समय घर से बाहर न निकलें और समूहों में ही यात्रा करें। हाथ में डंडा और रोशनी (टॉर्च) रखने की भी सलाह दी गई है। लेकिन नजीबाबाद की यह घटना दिखाती है कि प्रशासन की इतनी कोशिशों के बावजूद जमीनी स्तर पर लोगों में जागरूकता की भारी कमी है।
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ग्रामीणों से सहयोग की अपील और जिम्मेदारी का सवाल वन विभाग ने इस घटना के बाद पूरे जिले के ग्रामीणों के लिए एक विशेष अपील जारी की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों को पकड़ने के लिए लगाया गया पिंजरा कोई प्रदर्शनी की वस्तु या खेलने की जगह नहीं है। शिकार को फंसाने के लिए बांधी गई बकरी या मुर्गी को वहां से हटाना एक दंडनीय अपराध की श्रेणी में भी आ सकता है, क्योंकि यह सरकारी काम में बाधा डालने जैसा है।
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वन विभाग ने अभिभावकों और ग्राम प्रधानों से अपील की है कि वे अपने बच्चों पर कड़ी नजर रखें। बच्चों को किसी भी हालत में पिंजरों के आसपास न जाने दें और न ही उनके साथ छेड़छाड़ करने दें। गुलदार जैसी भयानक चुनौती से केवल प्रशासन अकेले नहीं लड़ सकता; इसके लिए जनसहयोग और आम नागरिकों की सतर्कता सबसे अहम कड़ी है। अगर ग्रामीण इसी तरह लापरवाही बरतते रहे और शिकार के लिए लगाए गए चारे को हटाते रहे, तो बिजनौर को गुलदार के खौफ से मुक्त कराना एक असंभव काम बन जाएगा। समय रहते अगर लोग नहीं सुधरे, तो इसका खामियाजा किसी मासूम को अपनी जान देकर चुकाना पड़ सकता है।
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