उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली और हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। एक बेबस मां-बाप की आंखों के सामने उनका 8 साल का हंसता-खेलता बच्चा मौत के मुंह में समा गया और वे चाहकर भी कुछ नहीं कर सके। घात लगाए बैठे एक खूंखार आदमखोर तेंदुए ने पलक झपकते ही मासूम पर झपट्टा मारा, उसे अपने मजबूत जबड़ों में दबोचा और गन्ने के खेतों के घने अंधेरे में गायब हो गया।READ ALSO:-हवा में हिचकोले खाने लगा एअर इंडिया का विमान: फुकेट से दिल्ली आ रही फ्लाइट AI2379 दिल दहलाने वाले टर्बुलेंस में फंसी, जानिए पायलट ने कैसे बचाई जान
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घटना के दो घंटे बाद जब बच्चे का क्षत-विक्षत शव खेतों से बरामद हुआ, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक पड़ीं। मासूम के शरीर को तेंदुए ने इस कदर नोच डाला था कि उस मंजर को देखकर बच्चे की मां वहीं बेसुध होकर गिर पड़ी। यह पूरी दर्दनाक घटना जिला मुख्यालय से करीब 38 किलोमीटर दूर नगीना कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सीखनीवाला गांव की है।
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\r\n\r\nखेत से लौटते वक्त घात लगाए बैठा था मौत का साया
\r\n\r\nग्रामीण इलाकों में अक्सर किसान परिवार एक साथ खेतों में काम करने जाते हैं। सीखनीवाला गांव के रहने वाले 33 वर्षीय नरसिंह सैनी भी पेशे से किसान और मजदूर हैं। उनका परिवार इसी खेती-किसानी और मजदूरी के सहारे अपना जीवनयापन करता है। सोमवार की शाम नरसिंह अपनी 30 वर्षीय पत्नी गीता और सबसे छोटे बेटे रवि (8 वर्ष) के साथ अपने खेत पर काम करने गए हुए थे।
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दिनभर की हाड़-तोड़ मेहनत के बाद शाम करीब 6 बजे, जब सूरज ढलने लगा था, तीनों खेत का काम खत्म करके अपने घर की ओर लौट रहे थे। पगडंडी वाले रास्तों पर अमूमन बच्चे आगे-आगे चलते हैं। यहां भी गीता और नरसिंह थके कदमों से पीछे-पीछे चल रहे थे, जबकि उनका लाडला बेटा रवि खेलते-कूदते और उछलते हुए उनके कुछ कदम आगे चल रहा था। उन बेबस माता-पिता को इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि खेतों की हरियाली के बीच मौत उनका इंतजार कर रही है।
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\r\n\r\nपलक झपकते ही हुआ हमला: चीखते रहे बेबस मां-बाप, अंधेरे में ओझल हो गया तेंदुआ
\r\n\r\nरास्ते में गन्ने और अन्य फसलों के खेतों के बीच पहले से ही एक विशालकाय तेंदुआ घात लगाए बैठा था। जैसे ही नन्हा रवि उस जगह के करीब पहुंचा, बिना कोई आहट किए तेंदुआ बिजली की तेजी से बाहर निकला।
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इससे पहले कि रवि संभल पाता या उसके माता-पिता कुछ समझ पाते, तेंदुए ने एक जोरदार झपट्टा मारा और 8 साल के मासूम को अपने खतरनाक जबड़ों में जकड़ लिया। अपने जिगर के टुकड़े को एक खूंखार जानवर के मुंह में जाते देख गीता और नरसिंह की चीखें निकल गईं। वे दोनों बदहवास होकर, जान की परवाह किए बिना, जोर-जोर से शोर मचाते हुए तेंदुए के पीछे दौड़ पड़े। लेकिन, जंगली जानवर की फुर्ती के आगे वे बेबस साबित हुए। कुछ ही सेकंड में तेंदुआ उनके लाडले को मुंह में दबाए हुए घने जंगलों और खेतों के अंधेरे में पूरी तरह ओझल हो गया।
\r\n\r\n\r\n\r\nलाठी और टॉर्च लेकर खेतों में उतरे ग्रामीण: 2 घंटे तक चला महा-सर्च अभियान
\r\n\r\nमाता-पिता की चीख-पुकार और रोने की आवाजें सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग और गांव वाले दौड़कर मौके पर इकट्ठा हो गए। जब ग्रामीणों को इस खौफनाक घटना का पता चला, तो पूरे गांव में हड़कंप मच गया।
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बिना समय गंवाए, दर्जनों ग्रामीण अपनी जान हथेली पर रखकर लाठी, डंडे और टॉर्च लेकर खेतों में उतर गए। गन्ने के ऊंचे-ऊंचे खेतों और आसपास के जंगली इलाकों में सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया। हर तरफ टार्च की रोशनी मारकर रवि को ढूंढा जाने लगा। गांव वाले शोर मचाते हुए आगे बढ़ रहे थे, इस उम्मीद में कि शायद शोर सुनकर तेंदुआ बच्चे को छोड़कर भाग जाए और उनका रवि जिंदा मिल जाए।
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खौफनाक मंजर: चेहरा नोंचा, आधा कान खाया... बेटे की हालत देख बेसुध हुई मां
\r\n\r\nकरीब 2 घंटे की कड़ी मशक्कत और खौफनाक सन्नाटे को चीरती तलाश के बाद, रात करीब 8 बजे ग्रामीणों को एक खेत में बच्चे का शव दिखाई दिया। लेकिन शव की हालत देखकर पत्थर दिल इंसान का भी कलेजा फट जाए।
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\r\n\r\n\r\nतेंदुए ने मासूम रवि के शरीर को बुरी तरह से अपना निवाला बनाने की कोशिश की थी। उसके मासूम चेहरे को बेदर्दी से नोंच डाला गया था। उसका आधा कान तेंदुए ने खा लिया था और शरीर के अन्य हिस्सों (गर्दन और पीठ) पर भी गहरे दांतों और पंजों के निशान थे।\r\n
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जैसे ही यह क्षत-विक्षत शव मां गीता के सामने आया, वह एक गगनभेदी चीख मारकर वहीं जमीन पर बेसुध होकर गिर पड़ी। पिता नरसिंह की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। परिवार के अन्य लोगों और ग्रामीणों ने किसी तरह बदहवास मां को संभाला। पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई और हर घर में चूल्हा जलना बंद हो गया।
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मजदूरी कर चलता है परिवार, सबसे छोटा और लाडला था रवि
\r\n\r\nरवि अपने परिवार का सबसे छोटा और सबका चहेता बेटा था। नरसिंह और गीता के कुल तीन बच्चे हैं। सबसे बड़ा बेटा योगेश 10 साल का है, बीच में 12 साल की बेटी पल्लवी है और सबसे छोटा 8 साल का रवि था। रवि गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक (Class 1) का होनहार छात्र था। गरीब परिवार ने बड़ी मन्नतों और लाड-प्यार से अपने बच्चों को पाल रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। रवि की मौत के बाद उसके बड़े भाई और बहन का भी रो-रोकर बुरा हाल है।
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दहशत और आक्रोश: पहले भी इलाके में देखा गया था तेंदुआ
\r\n\r\nइस घटना के बाद से सीखनीवाला और आसपास के गांवों में भारी दहशत और वन विभाग के प्रति आक्रोश पनप रहा है। मृतक बच्चे के चाचा ने बताया कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं है।
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- \r\n कुछ दिन पहले पास के ही एक अन्य गांव में भी तेंदुआ देखे जाने की पुष्ट सूचना मिली थी।\r\n \r\n
- \r\n ग्रामीणों के अलर्ट करने के बाद वन विभाग ने वहां एक पिंजरा भी लगाया था, लेकिन तेंदुआ पकड़ में नहीं आया।\r\n \r\n
- \r\n सीखनीवाला गांव में हालांकि यह इस तरह का पहला और इतना बड़ा जानलेवा हमला है।\r\n \r\n
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ग्रामीणों ने अब वन विभाग और प्रशासन से सख्त मांग की है कि इस आदमखोर तेंदुए को जल्द से जल्द पकड़ा जाए। इसके अलावा, गांव के आसपास पुलिस और वनकर्मियों की गश्त बढ़ाई जाए और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, क्योंकि अब लोग अपने खेतों में जाने से भी खौफ खा रहे हैं। गन्ने के खेत (जो बिजनौर में बहुतायत में होते हैं) अब किसानों के लिए रोजी-रोटी का जरिया कम और मौत की पनाहगाह ज्यादा बन गए हैं।
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प्रशासन और वन विभाग का एक्शन: लगाए जा रहे हैं नए पिंजरे
\r\n\r\nमासूम की दर्दनाक मौत की सूचना मिलते ही नगीना देहात थाना पुलिस और वन विभाग की टीम दल-बल के साथ मौके पर पहुंच गई।
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- \r\n पुलिस की कार्रवाई: पुलिस ने तुरंत भीड़ को नियंत्रित किया और पंचायतनामा भरकर मासूम के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है।\r\n \r\n
- \r\n वन विभाग का सर्च ऑपरेशन: वन विभाग की टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया है और पगमार्क (पैरों के निशान) जुटाए हैं।\r\n \r\n
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इस गंभीर मामले पर डीएफओ (DFO) पृथ्वीराज ने जानकारी देते हुए बताया कि, "तेंदुए को पकड़ने के लिए इलाके में पहले से ही दो पिंजरे लगाए गए थे। अब घटना की गंभीरता को देखते हुए एक तीसरा पिंजरा भी गांव के करीब लगाया जा रहा है। वन विभाग की एक विशेष टीम लगातार क्षेत्र में कॉम्बिंग (तलाश अभियान) कर रही है। ग्रामीणों की सुरक्षा और निगरानी के लिए पर्याप्त वनकर्मियों की ड्यूटी भी लगा दी गई है।"
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फिलहाल, बिजनौर का यह इलाका खौफ के साये में है। वन विभाग की टीमें गश्त कर रही हैं, लेकिन एक हंसते-खेलते परिवार का जो चिराग बुझा है, उसकी भरपाई कोई सरकारी पिंजरा या गश्त नहीं कर सकती।



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