रिपोर्टर: शकील अहमद, बिजनौर
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बिजनौर (Bijnor News): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में पंचायती राज व्यवस्था के सबसे अहम स्तंभ माने जाने वाले ग्राम प्रधानों ने अब अपने अधिकारों और गांवों के निर्बाध विकास के लिए हुंकार भर दी है। जनपद बिजनौर के नूरपुर ब्लॉक परिसर में अखिल भारतीय प्रधान संगठन के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में ग्राम प्रधान एकत्रित हुए और सरकार के खिलाफ एक शांतिपूर्ण लेकिन जोरदार आंदोलन का आगाज किया। ग्राम प्रधानों की यह लामबंदी आगामी 26 मई को समाप्त हो रहे उनके पांच साल के कार्यकाल को लेकर है। प्रधानों का स्पष्ट कहना है कि जब तक प्रदेश में नए सिरे से पंचायत चुनाव (UP Gram Panchayat Election) संपन्न नहीं हो जाते, तब तक वर्तमान ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाए ताकि ग्रामीण विकास की गति पर ब्रेक न लगे। अपनी इसी मांग को लेकर नूरपुर से बिजनौर कलेक्ट्रेट (Bijnor Collectorate) तक एक विशाल मार्च निकाला गया।Read also:-मेरठ को मिलेगी वर्ल्ड-क्लास ट्रैफिक व्यवस्था: 8 प्रमुख चौराहों और 'किला रोड' के चौड़ीकरण का मास्टरप्लान तैयार, मेडा (MDA) ने जारी किए करोड़ों के टेंडर
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26 मई की डेडलाइन और प्रधानों की बढ़ती चिंता

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उत्तर प्रदेश में वर्तमान ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को अपनी तय सीमा पूरी कर रहा है। पंचायती राज अधिनियम के तहत कार्यकाल खत्म होने के बाद ग्राम पंचायतों का कामकाज प्रशासकों (एडमिनिस्ट्रेटर) के हाथों में सौंप दिया जाता है। ऐसे में पंचायत चुनाव होने तक गांवों के विकास कार्यों की जिम्मेदारी सरकारी अधिकारियों (जैसे एडीओ पंचायत या सेक्रेटरी) पर आ जाती है। नूरपुर ब्लॉक के ग्राम प्रधानों का तर्क है कि अधिकारी कई-कई गांवों का प्रभार संभालते हैं, जिससे जमीनी स्तर पर जनता की रोजमर्रा की समस्याएं सुनने और विकास कार्यों को तेजी से लागू करने में भारी व्यावहारिक अड़चनें आती हैं।
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अखिल भारतीय प्रधान संगठन ने भरी हुंकार

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नूरपुर ब्लॉक परिसर में आयोजित इस विशाल एकत्रीकरण का नेतृत्व अखिल भारतीय प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष सचिन मलिक ने किया। उनके नेतृत्व में सैकड़ों प्रधानों ने एकजुटता का परिचय देते हुए सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का संकल्प लिया। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद प्रधानों के चेहरों पर जहां एक ओर अपना कार्यकाल खत्म होने की चिंता थी, वहीं दूसरी ओर गांवों में अधूरे पड़े विकास कार्यों के रुक जाने का मलाल भी साफ देखा जा सकता था।
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ब्लॉक अध्यक्ष सचिन मलिक ने मीडिया और प्रशासन को संबोधित करते हुए स्थिति की गंभीरता को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि, "वर्तमान राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियों का यदि आकलन किया जाए, तो पंचायत चुनाव (Panchayat Chunav UP) अगले एक वर्ष तक होने की कोई ठोस संभावना दिखाई नहीं दे रही है। परिसीमन, मतदाता सूची का नवीनीकरण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में लंबा समय लग सकता है। ऐसे में यदि 26 मई के बाद ग्राम प्रधानों के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए जाते हैं, तो इसका सीधा और सबसे भयानक नुकसान गांवों की भोली-भाली जनता और वहां के विकास को होगा।"
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गांवों के विकास पर मंडराता संकट: आखिर क्या होगा असर?

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प्रधानों का कलेक्ट्रेट कूच (Bijnor Collectorate Protest) सिर्फ एक राजनीतिक मांग नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई व्यावहारिक कारण छिपे हैं। यदि प्रशासक राज लागू होता है, तो निम्नलिखित विकास कार्य सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं:
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    मनरेगा (MGNREGA) के कार्य: गांवों में दिहाड़ी मजदूरों को रोजगार देने वाली यह सबसे बड़ी योजना है। प्रधान की अनुपस्थिति में मस्टर रोल जारी करने और भुगतान में देरी की समस्याएं आम हो जाती हैं।
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    पेयजल और स्वच्छता: गर्मियों का मौसम चरम पर है। ऐसे में इंडिया मार्का हैंडपंपों की मरम्मत, पेयजल आपूर्ति और नालियों की साफ-सफाई जैसे त्वरित कार्यों के लिए ग्रामवासी सीधे प्रधान के पास जाते हैं, न कि ब्लॉक मुख्यालय के चक्कर काटते हैं।
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    प्रधानमंत्री आवास योजना: अधूरे पड़े आवासों की किश्तें जारी करवाने और नए लाभार्थियों के चयन में प्रधान की भूमिका अहम होती है।
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    सड़क और खड़ंजा निर्माण: बारिश से पहले गांवों के संपर्क मार्गों और खड़ंजों की मरम्मत का कार्य प्रभावित हो सकता है।
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    प्रमाण पत्र और आपातकालीन सहायता: जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र का सत्यापन, या किसी ग्रामीण के सामने अचानक आई आर्थिक या मेडिकल इमरजेंसी में ग्राम प्रधान ही रात-बिरात सबसे पहले खड़ा होता है। प्रशासक राज में यह आत्मीयता और त्वरित सहायता खत्म हो जाती है।
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नूरपुर से कलेक्ट्रेट तक का मार्च: एकता का बड़ा संदेश

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अपनी मांगों के समर्थन में नूरपुर ब्लॉक (Nurpur Block News) के सैकड़ों प्रधानों ने अपने वाहनों और पदयात्रा के माध्यम से बिजनौर जिला मुख्यालय (कलेक्ट्रेट) का रुख किया। रास्ते भर ग्राम प्रधानों ने 'प्रधान एकता जिंदाबाद' और 'गांवों का विकास जारी रहे' जैसे नारे लगाए। बिजनौर कलेक्ट्रेट पहुंचकर इस हुजूम ने प्रशासन के सामने अपना शक्ति प्रदर्शन किया। यह एकजुटता इस बात का प्रमाण थी कि पूरे जनपद के ग्राम प्रधान इस मुद्दे पर एक राय रखते हैं।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम सौंपा ज्ञापन

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कलेक्ट्रेट पहुंचकर अखिल भारतीय प्रधान संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी (DM Bijnor) से मुलाकात की। उन्होंने उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन जिलाधिकारी महोदय को सौंपा।
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ज्ञापन के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

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    प्रदेश में जब तक आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं होती और चुनाव संपन्न नहीं हो जाते, तब तक वर्तमान ग्राम पंचायतों को ही कार्य करते रहने का अधिकार दिया जाए।
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    कोरोना काल और अन्य कारणों से पिछले वर्षों में विकास कार्यों को जो नुकसान पहुंचा था, उसकी भरपाई के लिए भी यह अतिरिक्त समय दिया जाना न्यायसंगत होगा।
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    प्रशासक राज लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में जो विकास का पहिया रुकेगा, उससे सरकार की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए जनहित में कार्यकाल विस्तार जरूरी है।
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क्या कहते हैं ग्राम प्रधान और उनके प्रतिनिधि?

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इस बड़े प्रदर्शन के दौरान नूरपुर ब्लॉक से आए प्रधानों और उनके प्रतिनिधियों ने भी अपनी राय बेबाकी से रखी।
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बाइट (1): सचिन मलिक (ब्लॉक अध्यक्ष, अखिल भारतीय प्रधान संगठन, नूरपुर) "हमारी मांग कोई व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं है। हम देख रहे हैं कि पंचायत चुनाव फिलहाल होते नजर नहीं आ रहे हैं। अगर चुनाव में एक साल का वक्त लगता है, तो क्या एक साल तक गांव लावारिस छोड़ दिए जाएंगे? अधिकारी ब्लॉक में बैठते हैं, वो रोज गांव की गलियों की समस्या नहीं देख सकते। हमारी माननीय मुख्यमंत्री जी से अपील है कि जब तक चुनाव नहीं होते, तब तक हमें ही गांवों की सेवा करने का और अधूरे काम पूरे करने का मौका दिया जाए।"
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बाइट (2): आफताब आलम (ग्राम प्रधान पुत्र व प्रतिनिधि) "गांव का हर व्यक्ति आधी रात को भी प्रधान का दरवाजा खटखटाता है। चाहे किसी की तबीयत खराब हो या नाली-खड़ंजे का विवाद हो। अगर कार्यकाल खत्म हो गया, तो गांव वाले अपनी फरियाद लेकर कहां जाएंगे? विकास कार्यों की निरंतरता (Continuity) बनाए रखने के लिए यह बहुत जरूरी है कि सरकार हमारे कार्यकाल को एक्सटेंड (बढ़ाए) करे। हमें पूरी उम्मीद है कि सरकार हमारी इस जायज मांग को जरूर सुनेगी।"
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आगे की राह: क्या सरकार सुनेगी प्रधानों की पुकार?

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बिजनौर (Bijnor Hindi News) से उठी यह आवाज केवल एक जिले तक सीमित रहने वाली नहीं है। माना जा रहा है कि पूरे उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से ग्राम प्रधान इसी तरह लामबंद हो रहे हैं। अखिल भारतीय प्रधान संगठन राज्य स्तर पर इस मुद्दे को उठा रहा है। अब गेंद पूरी तरह से उत्तर प्रदेश शासन और पंचायती राज मंत्रालय के पाले में है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या योगी सरकार (Yogi Government) आगामी राजनीतिक समीकरणों और ग्रामीण विकास की दलीलों को ध्यान में रखते हुए पंचायती राज अधिनियम में कोई विशेष प्रावधान लागू कर प्रधानों को राहत देती है, या फिर 26 मई के बाद तय प्रक्रिया के तहत गांवों की सत्ता प्रशासकों के हाथों में सौंप दी जाती है।
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फिलहाल, बिजनौर के नूरपुर के प्रधानों ने अपनी हुंकार से यह साफ कर दिया है कि वे अपने अधिकारों के लिए चुप बैठने वाले नहीं हैं। कलेक्ट्रेट पर हुए इस भारी जमावड़े ने जिला प्रशासन को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि इस जमीनी मुद्दे का जल्द से जल्द शासन स्तर पर कोई संतोषजनक समाधान निकाला जाना चाहिए।
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(रिपोर्टर शकील अहमद की यह विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट बिजनौर के ग्रामीण और पंचायती राज से जुड़े हालातों को बयां करती है।)
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