बिजनौर (शकील अहमद ब्यूरो चीफ बिजनौर)
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में पुलिस ने एक बड़े ठगी के रैकेट का पर्दाफाश किया है। बिजनौर के थाना कोतवाली शहर स्थित HDFC बैंक में एक महिला खुद को न्यायाधीश (Judge) बताकर 30 लाख रुपये का फर्जी लोन (Fake Loan) कराने पहुँची थी। बैंक के सतर्क कर्मचारियों और पुलिस की मुस्तैदी से यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। पुलिस ने आरोपी नकली महिला न्यायाधीश समेत एक वकील को भी गिरफ्तार किया है। यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।READ ALSO:-दिवाली से पहले एक्शन में प्रशासन: नूरपुर में पटाखा बाजार का CO ने किया औचक निरीक्षण, सुरक्षा नियमों में लापरवाही पर दी सख्त चेतावनी
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The Scam: जज बनकर लोन लेने का प्रयास
\r\n\r\nघटना तब सामने आई जब आरोपी महिला आयशा परवीन, एक वकील के साथ बैंक पहुँची और खुद को न्यायाधीश बताकर बैंक अधिकारियों पर जल्दी लोन पास करने का दबाव बनाने लगी।
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- \r\n ठगी की कोशिश: महिला 30 लाख रुपये का फर्जी लोन कराने की फिराक में थी।\r\n \r\n
- \r\n फर्जी पहचान: महिला ने ठगी के लिए बाकायदा फर्जी आईडी (Fake ID) तैयार की थी, जिसमें वह खुद को जज बता रही थी।\r\n \r\n
- \r\n पोल खुली: बैंक द्वारा लोन की प्रक्रिया के तहत जब वेरिफिकेशन (Verification) शुरू किया गया, तो महिला के दस्तावेज और उसकी पहचान संदिग्ध लगी। बैंक कर्मचारियों ने तत्काल स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी।\r\n \r\n
- \r\n गिरफ्तारी: पुलिस ने मौके पर पहुँचकर आरोपी महिला आयशा परवीन और उसके साथी वकील अनश को गिरफ्तार कर लिया।\r\n \r\n
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Arrest and Investigation: मुजफ्फरनगर से कनेक्शन और जाँच
\r\n\r\nपुलिस द्वारा की गई शुरुआती जाँच में पता चला है कि गिरफ्तार की गई आरोपी महिला मुजफ्फरनगर की रहने वाली बताई जा रही है।
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- \r\n आरोपियों की पहचान: आयशा परवीन और वकील अनश।\r\n \r\n
- \r\n मामला दर्ज: पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी (Fraud) के तहत केस दर्ज कर लिया है।\r\n \r\n
- \r\n जांच: पुलिस अब इस रैकेट के तार अन्य शहरों से जुड़े होने और इसमें शामिल अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह ने पहले भी इस तरह की ठगी को अंजाम दिया है या नहीं।\r\n \r\n
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Conclusion: पुलिस की सतर्कता से बड़ी घटना टली
\r\n\r\nबिजनौर पुलिस की सतर्कता और बैंक कर्मचारियों की सूझबूझ से यह बड़ा फर्जीवाड़ा समय रहते पकड़ में आ गया। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वित्तीय संस्थानों को लोन और पहचान सत्यापन के मामलों में अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
Sabse pehle comment karne wale banein.