रिपोर्ट: न्यूज़ डेस्क बिजनौर (उत्तर प्रदेश)
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उत्तर प्रदेश में ठंड का प्रकोप (Cold Wave) जानलेवा होता जा रहा है। गिरते पारे ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। ऐसे मौसम में, जब लोग अपने घरों में रजाईयों में दुबके हुए थे, बिजनौर (Bijnor) की जिलाधिकारी (DM) जसजीत कौर ने प्रशासन की संवेदनशीलता का एक बड़ा उदाहरण पेश किया है।READ ALSO:-मेरठ में हैवानियत की हदें पार: कुत्ते ने बच्चे को काटा तो युवक बना 'जल्लाद', ईंट से मुंह कुचला; फिर लाश को रस्सी से बांधकर पूरी कालोनी में घसीटा
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रविवार की देर रात, जब शहर नींद के आगोश में था, डीएम जसजीत कौर अपने सरकारी आवास से निकलीं और सीधे शहर के उन इलाकों का रुख किया, जहां ठंड सबसे ज्यादा मार करती है—रेलवे स्टेशन और रैन बसेरे। यह एक औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) था, जिसका मकसद जमीनी हकीकत को जानना और यह सुनिश्चित करना था कि कड़ाके की इस ठंड में प्रशासन के दावे कागजों तक ही सीमित न रहें।
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रेलवे स्टेशन पर डीएम का मानवीय स्पर्श

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डीएम जसजीत कौर का काफिला सबसे पहले बिजनौर रेलवे स्टेशन पहुंचा। रात के सन्नाटे और घने कोहरे के बीच स्टेशन के प्लेटफॉर्म और आसपास के इलाकों में कई यात्री और असहाय लोग ठंड से बचने के लिए सिकुड़े बैठे थे।
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जिलाधिकारी ने प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए सीधे इन लोगों के बीच जाकर उनसे बातचीत शुरू की। उन्होंने मुसाफिरों से पूछा कि उन्हें किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। क्या उन्हें ठंड से बचने के लिए पर्याप्त सुविधाएं मिल रही हैं?
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इस दौरान जो दृश्य सामने आया, उसने वहां मौजूद सभी लोगों का दिल छू लिया। डीएम ने अपने हाथों से ठंड में ठिठुर रहे बुजुर्गों, महिलाओं और असहाय लोगों को कंबल वितरित किए। उन्होंने कई लोगों को खुद कंबल ओढ़ाया और उन्हें ठंड से बचकर रहने की सलाह दी।
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साथ रहीं एसडीएम सदर: इस मानवीय पहल और निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी (SDM) सदर, रितु चौधरी भी डीएम के साथ मौजूद रहीं। उन्होंने भी व्यवस्थाओं का जायजा लिया और लोगों की समस्याएं सुनीं।
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रैन बसेरों की हकीकत परखने पहुंचीं डीएम

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रेलवे स्टेशन के बाद जिलाधिकारी ने स्टेशन पर ही बने अस्थायी रैन बसेरे (Night Shelter) का रुख किया। रैन बसेरे सरकार द्वारा उन लोगों के लिए बनाए जाते हैं, जिनके पास इस भीषण ठंड में सिर छिपाने के लिए कोई छत नहीं होती।
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डीएम ने रैन बसेरे के अंदर जाकर वहां की व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने वहां ठहरने वाले लोगों से बात की और जाना कि उन्हें बिस्तर, कंबल और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि रैन बसेरे में रुकने वाले किसी भी व्यक्ति को असुविधा का सामना न करना पड़े।
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अधिकारियों को सख्त अल्टीमेटम: 'कागजी काम नहीं, जमीनी हकीकत चाहिए'

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निरीक्षण के दौरान डीएम जसजीत कौर का रुख प्रशासन की जिम्मेदारियों को लेकर बेहद सख्त नजर आया। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि ठंड से बचाव के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों और बाद में जारी निर्देशों के माध्यम से जिले के सभी उप जिलाधिकारियों (SDMs) और नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों (EOs) को कड़े आदेश जारी किए।
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डीएम के प्रमुख निर्देश:

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    कोई भी ठिठुरता न मिले: जिलाधिकारी का सबसे महत्वपूर्ण और कड़ा निर्देश यह था कि शहरी क्षेत्रों में कोई भी लाचार, बेसहारा या गरीब व्यक्ति खुले आसमान के नीचे ठंड से ठिठुरता हुआ नहीं मिलना चाहिए। यह प्रशासन की नैतिक जिम्मेदारी है कि हर व्यक्ति को छत और गर्माहट मिले।
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    नियमित निरीक्षण हो: उन्होंने सभी एसडीएम और ईओ को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs/PHCs) और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बने रैन बसेरों का केवल दिन में नहीं, बल्कि रात में भी नियमित रूप से औचक निरीक्षण करें।
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    सुविधाओं में कमी न हो: डीएम ने जोर देकर कहा कि रैन बसेरों में ठहरने वाले यात्रियों और बेसहारा लोगों को सर्दी से बचाव के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं (जैसे पर्याप्त कंबल, गद्दे, पीने का पानी, शौचालय और अलाव) अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं। उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए।
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    तत्काल सहायता: उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि यदि रात्रि गश्त के दौरान कोई असहाय व्यक्ति या यात्री सड़क पर या खुले में सहायता योग्य स्थिति में पाया जाता है, तो उसे तत्काल सम्मान के साथ नजदीकी रैन बसेरे में ठहरने की व्यवस्था की जाए।
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शहर के चौराहों पर जलेंगे अलाव

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ठंड से राहत देने के लिए अलाव (Bonfire) एक बड़ा सहारा होते हैं, खासकर रिक्शा चालकों, मजदूरों और राहगीरों के लिए। इसे ध्यान में रखते हुए, डीएम जसजीत कौर ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को विशेष निर्देश दिए।
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उन्होंने कहा कि शहर के सभी बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों के बाहर और शहर के सभी मुख्य चौराहों व सार्वजनिक स्थानों पर नियमित रूप से अलाव जलाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अलाव के लिए लकड़ी का पर्याप्त इंतजाम समय रहते कर लिया जाए, ताकि शाम ढलते ही लोगों को राहत मिल सके।
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प्रशासन की संवेदनशीलता का संदेश

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बिजनौर डीएम का यह देर रात का निरीक्षण केवल एक प्रशासनिक कवायद नहीं थी, बल्कि यह समाज के सबसे कमजोर तबके के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता का प्रतीक था। जब एक जिले का मुखिया खुद आधी रात को ठंड में लोगों का दर्द जानने निकलता है, तो इसका असर पूरे प्रशासनिक अमले पर पड़ता है।
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इस निरीक्षण ने यह संदेश दिया है कि आपदा या कठोर मौसम की स्थिति में प्रशासन वातानुकूलित कमरों में बैठकर आदेश जारी करने के बजाय, सड़क पर उतरकर लोगों के साथ खड़ा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि डीएम के इन सख्त निर्देशों का पालन जमीनी स्तर पर कितनी मुस्तैदी से किया जाता है।
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