निशांत कुमार गौड़ विशेष संवाददाता-बिजनौर/धामपुर। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की धामपुर तहसील अंतर्गत आने वाली फ्रेंड्स कॉलोनी में प्रशासनिक लापरवाही और बदहाल नागरिक सुविधाओं की ऐसी डरावनी तस्वीर सामने आई है, जिसने शासन-प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है। जरा सी बारिश होते ही पूरी फ्रेंड्स कॉलोनी जलमग्न होकर एक तालाब का रूप धारण कर लेती है। पानी का निकास न होने की वजह से जलभराव घंटों नहीं, बल्कि कई-कई दिनों तक बना रहता है।READ ALSO:-सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: गाड़ी का इंश्योरेंस नहीं तो पेट्रोल-डीजल नहीं! नई कार-बाइक के लिए भी बदल गए नियम, पढ़ें पूरी डिटेल
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प्रशासनिक उपेक्षा और लगातार बढ़ रही नारकीय स्थिति से तंग आकर बुधवार को कॉलोनी की महिलाओं का धैर्य जवाब दे गया। आक्रोशित महिलाओं ने नाले के बहते गंदे पानी के बीच खड़े होकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जोरदार प्रदर्शन किया।
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ग्राउंड रिपोर्ट: कमर तक पानी, तैरती जिंदगी और जान जोखिम में डालकर निकलते लोग
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मौके से सामने आई तस्वीरों और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पूरी सड़क कमर तक गंदे पानी में डूबी हुई है। इसी बदबूदार और दूषित पानी के बीच से ई-रिक्शा, स्कूटी और मोटरसाइकिल सवार अपनी जान जोखिम में डालकर गुजरने को मजबूर हैं।
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सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति छोटे स्कूली बच्चों और महिलाओं की है। रोज़मर्रा के कामों के लिए लोगों को इसी जलभराव के बीच से होकर निकलना पड़ रहा है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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"हम हर साल इस नरक को झेलते हैं। हमारे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। कई बार बच्चे नाले में गिरते-गिरते बचे हैं। क्या प्रशासन किसी बच्चे की जान जाने का इंतजार कर रहा है?"
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— प्रदर्शनकारी महिला, फ्रेंड्स कॉलोनी
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कॉलोनीवासियों की 3 सबसे बड़ी और भयानक मुसीबतें

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फ्रेंड्स कॉलोनी के निवासियों ने अपनी तीन मुख्य समस्याएं उठाई हैं, जो उनके जीवन के लिए रोज का खतरा बन चुकी हैं:
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    आवागमन पूरी तरह ठप और हादसों का डर: बच्चों का स्कूल और ट्यूशन जाना लगभग बंद हो चुका है। जलभराव के कारण गहरे गड्ढे और खुले नाले दिखाई नहीं देते, जिससे आए दिन बाइक और ई-रिक्शा पलटने का खतरा बना रहता है।
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    जहरीले सांपों का साया और डेंगू का खौफ: खाली पड़े प्लॉटों और जाम पड़े नालों में गंदा पानी एकत्रित रहने से जहरीले सांप निकलकर लोगों के घरों तक पहुंच रहे हैं। इसके अलावा, ठहरे हुए पानी के कारण इलाके में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसे संक्रामक रोगों का प्रकोप फैलने की आशंका बढ़ गई है।
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    अवैध कब्जे और घरों में घुसता गंदा पानी: स्थानीय निवासियों का गंभीर आरोप है कि कुछ दबंग लोगों ने सार्वजनिक नालों पर अवैध कब्जे कर रखे हैं। निकासी के लिए मात्र 8-8 इंच के बेहद छोटे पाइप दबा दिए गए हैं, जो पानी के बहाव को पूरी तरह रोक देते हैं। नतीजतन, नाले का गंदा पानी बैक मारकर सीधे लोगों के ड्राइंग रूम और किचनों में घुस रहा है।
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शिकायतों का अंबार, लेकिन नतीजा निकला 'शून्य'

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कॉलोनीवासियों का कहना है कि उन्होंने समस्या के समाधान के लिए हर दरवाजे पर दस्तक दी है, लेकिन हर जगह से केवल कोरे आश्वासन ही मिले हैं।
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    सांसद को पत्र: अमित यादव के नेतृत्व में निवासियों ने पिछले वर्ष क्षेत्रीय सांसद चंद्रशेखर आजाद को लिखित प्रार्थना पत्र दिया था। सांसद जी खुद भी लगभग दो वर्षों तक इस इलाके में रहे हैं, लेकिन उनके आश्वासन के बाद भी धरातल पर कोई काम नहीं हुआ।
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    अधिकारियों की टालमटोल: ग्राम प्रधान (जित्तनपुर), PWD विभाग, SDM धामपुर और तहसीलदार तक को दर्जनों बार लिखित शिकायतें भेजी जा चुकी हैं। आरोप है कि हर विभाग अपनी जिम्मेदारी दूसरे विभाग पर डालकर पल्ला झाड़ लेता है।
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    भाजपा नेताओं से मुलाकात: हाल ही में कॉलोनी के प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा जिलाध्यक्ष भूपेंद्र चौहान और बॉबी जी को भी ज्ञापन सौंपा है, जिन्होंने अधिकारियों से वार्ता कर जल्द निस्तारण का आश्वासन दिया है।
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प्रदर्शन में उमड़ा महिलाओं का सैलाब

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प्रशासनिक निकम्मेपन के खिलाफ हुए इस उग्र प्रदर्शन में कॉलोनी की महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रदर्शन करने वालों में मुख्य रूप से निर्मला यादव, पल्लवी सैनी, मधु, अनीता, पूनम चौहान, निशि चौहान, कविता डोगरा, संतोष, बबीता, मीतू शर्मा सहित दर्जनों स्थानीय महिलाएं शामिल रहीं।
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इसके अलावा प्रार्थना पत्र देने और आंदोलन का समर्थन करने वालों में अमित यादव, शिवि यादव, आशुतोष चौहान, सहदेव सिंह, बब्लू चौहान, मुन्ने सिंह गुर्जर, अंकित गुर्जर, विरेन्द्र चौहान, राहुल डोगरा, गुप्ता जी (पेट्रोल पंप वाले), और निशांत गौड़ सहित समस्त फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी एकजुट रहे।
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कॉलोनीवासियों की स्पष्ट मांग और चेतावनी

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फ्रेंड्स कॉलोनी के निवासियों ने बिजनौर जिलाधिकारी (DM Bijnor) और उत्तर प्रदेश सरकार से गुहार लगाते हुए स्पष्ट मांग रखी है:
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    नालों को तुरंत अवैध कब्जों से मुक्त कराया जाए।
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    8-इंच के पाइपों को हटाकर पक्के और चौड़े नालों का निर्माण कराया जाए ताकि जल निकासी सुचारू हो सके।
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    जमा पानी को निकालने के लिए तत्काल पंपिंग सेट लगाए जाएं और एंटी-लायर्वा का छिड़काव हो।
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चेतावनी: स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शासन और प्रशासन ने जल्द से जल्द इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं निकाला, तो वे तहसील मुख्यालय पर तालाबंदी कर बड़े स्तर पर जन-आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
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