अयोध्या: दुनिया भर के राम भक्तों के लिए अयोध्या से एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर मंदिर के सभी मुख्य निर्माण कार्यों के पूर्ण होने की जानकारी दी है। यह घोषणा ठीक उस समय हुई है जब रामनगरी में 30 अक्टूबर से वार्षिक कार्तिक मेले की शुरुआत होने जा रही है।READ ALSO:-चुनाव आयोग का बड़ा ऐलान- 12 राज्यों में कल से SIR शुरू, UP, बंगाल और MP समेत वोटर लिस्ट होगी फ्रीज!
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श्री राम जन्मभूमि परिसर के संपूर्ण निर्माण के बाद यह पहली बार होगा जब श्रद्धालु भव्य मंदिर की परिक्रमा करेंगे। इसे लेकर प्रशासन और ट्रस्ट विशेष तैयारियों में जुटा है, क्योंकि इस बार बीते वर्षों की तुलना में कहीं अधिक, 20 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।
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ट्रस्ट की घोषणा: क्या-क्या हुआ पूरा?

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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए लिखा:
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"सभी श्रीरामभक्तों को यह जानकारी देते हुए हर्ष हो रहा है कि मंदिर निर्माण सबंधी सभी कार्य पूर्ण हो गए हैं। मुख्य मंदिर, परकोटा के 6 मंदिर (भगवान शिव, भगवान गणेश, भगवान हनुमान, सूर्यदेव, देवी भगवती, देवी अन्नपूर्णा) तथा शेषावतार मंदिर भी पूर्ण हो चुके हैं। इन पर ध्वजदण्ड एवं कलश स्थापित हो चुके हैं।"
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ट्रस्ट ने आगे बताया, "इसके अतिरिक्त सप्त मण्डप (महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषादराज, शबरी एवं ऋषि पत्नी अहल्या मंदिर) का भी निर्माण पूर्ण हो चुका है। सन्त तुलसीदास मंदिर भी पूर्ण हो चुका है और जटायु और गिलहरी की प्रतिमाएं स्थापित की जा चुकी हैं।"
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ट्रस्ट के अनुसार, जिन कार्यों का सीधा सम्बन्ध दर्शनार्थियों की सुविधा या व्यवस्था से है, वे सभी कार्य पूरे कर लिए गए हैं।
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कौन से कार्य अभी जारी हैं?

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ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि मानचित्र के अनुसार कुछ कार्य अभी भी तीव्र गति से चल रहे हैं, लेकिन इनका संबंध सीधे तौर पर जनता या दर्शनार्थियों से नहीं है। इनमें 3.5 किलोमीटर लम्बी चारदीवारी, ट्रस्ट कार्यालय, अतिथि गृह, सभागार, सड़कें, फ्लोरिंग, लैंड स्केपिंग और 10 एकड़ में पंचवटी का निर्माण शामिल है।
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परिक्रमा मेला: पहली बार भव्य मंदिर के साथ

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अयोध्या में होने वाली ऐतिहासिक 14 कोसी और पंचकोसी परिक्रमा इस बार विशेष होगी, क्योंकि श्रद्धालु पहली बार श्री राम जन्म स्थान पर बने भव्य मंदिर की भी परिक्रमा करेंगे। इसमें 5000 अन्य मंदिर भी शामिल हैं।
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परिक्रमा का पूरा शेड्यूल:

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    14 कोसी परिक्रमा (42 KM): यह हिन्दू तिथि के अनुसार अक्षय नवमी को होती है।
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      प्रारंभ: 30 अक्टूबर को सुबह 4:51 बजे।
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      समाप्त: 31 अक्टूबर को सुबह 4:40 बजे।
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    पंचकोसी परिक्रमा (15 KM): यह देव उथानी एकादशी को होती है।
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      प्रारंभ: 1 नवंबर को सुबह 4:02 बजे।
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      समाप्त: 2 नवंबर को सुबह 3:57 बजे।
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    कार्तिक पूर्णिमा स्नान: 5 नवंबर को मेले का समापन कार्तिक पूर्णिमा स्नान के साथ होगा।
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क्या है 14 कोसी परिक्रमा का महत्व?

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महंत सत्येंद्र दास वेदांती के मुताबिक, यह परिक्रमा अनादि काल से चली आ रही है और इसका धार्मिक ग्रंथों में भी जिक्र है। 14 कोसी परिक्रमा अयोध्या के 42 किलोमीटर के परिक्षेत्र में की जाती है। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक अक्षय नवमी पर सरयू नदी में स्नान कर भगवान श्री राम की नगरी की परिक्रमा करने से सभी पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति को कभी भी अपने दुश्मनों से पराजय नहीं मिलती।
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क्यों करते हैं पंचकोसी परिक्रमा?

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कार्तिक शुक्ल एकादशी को देव उथानी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन 5 कोस (लगभग 15 किमी) की परिक्रमा की जाती है। माना जाता है कि हमारा शरीर पंच भौतिक चीजों से बना है। 5 कोस की परिक्रमा करने से सभी प्रकार के शारीरिक और मानसिक कष्टों का निवारण होता है और राम नगरी में यह परिक्रमा करने से व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।
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