क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक टेस्ट क्रिकेट के महानतम ऑलराउंडर को लेकर एक सांख्यिकीय स्टडी की गई है। स्टडी में पहले 2000 रन और 100 विकेट के टेस्ट पैमाने को आधार बनाया गया। यह दोहरा आंकड़ा अब तक 36 क्रिकेटरों के नाम है।

स्टडी में उन छह खिलाड़ियों को बाहर किया गया जिन्होंने दूसरे विभाग में केवल लंबे करियर की वजह से यह सीमा पार की। बल्लेबाजी औसत 20 से कम रहने पर शेन वॉर्न, अनिल कुंबले, स्टुअर्ट ब्रॉड, हरभजन सिंह और टिम साउदी सूची से हटे। 45 से अधिक गेंदबाजी औसत वाले कार्ल हूपर भी बाहर हुए। इसके बाद 30 खिलाड़ियों की सूची बनी।

रिपोर्ट कहती है कि सच्चा ऑलराउंडर सामान्यतः बल्लेबाजी क्रम के शीर्ष आठ में आता है। उसे कम से कम छह गेंदबाजी विकल्पों में एक भी होना चाहिए। संदर्भ के लिए, अब तक खेले गए 2634 टेस्ट में आठवें नंबर का बल्लेबाजी औसत 21.2 रहा है। वहीं छठे गेंदबाज का औसत 43.6 है।

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स्टोक्स, सोबर्स और कैलिस का दोहरा

बेन स्टोक्स ने जून में अंतरराष्ट्रीय करियर से संन्यास लिया था। कुछ लोगों ने इसे महानतम ऑलराउंडरों में से एक का अंतिम अध्याय कहा। स्टोक्स उन तीन क्रिकेटरों में हैं जिनके टेस्ट में 7000 रन और 200 विकेट हैं। अन्य दो सर गारफील्ड सोबर्स और जैक कैलिस हैं।

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पुराने दौर में विल्फ्रेड रोड्स का जिक्र है। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनके नाम 39969 रन और 4204 विकेट हैं। 56 टेस्ट में भी उनके आंकड़े प्रभावशाली रहे। इसके बाद कीथ मिलर आए और फिर बिग फोर—इमरान खान, रिचर्ड हेडली, इयान बॉथम और कपिल देव—20वीं सदी के अंतिम चौथाई में मुख्य नाम रहे।

मौजूदा टेस्ट ऑलराउंडर रैंकिंग में रवींद्र जडेजा शीर्ष पर हैं। वह दिसंबर में 38 साल के हो जाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक टॉप 15 में कई ऐसे नाम हैं जो सच्चे ऑलराउंडर की परिभाषा पर खरे नहीं उतरते। जो खरे उतरते हैं, उन्होंने अभी पर्याप्त मैच नहीं खेले हैं।

किन नामों पर नहीं हुआ विचार

स्टडी में कुछ नाम कट-ऑफ से चूक गए। दक्षिण अफ्रीका के ऑब्रे फॉकनर और ऑस्ट्रेलिया के मोंटी नोबल व वारविक आर्मस्ट्रांग 20वीं सदी के शुरुआती दौर के नाम हैं। उनके ऑलराउंड आंकड़े शानदार रहे, लेकिन वे तय सीमा से थोड़ा पीछे रहे। मुश्ताक मोहम्मद, लांस क्लुसनर और ब्रायन मैकमिलन को छोटे करियर की वजह से बाहर रखा गया।

रिपोर्ट के अनुसार पुराने दौर के कुछ खिलाड़ियों को कम मैच मिले, जो उनके नियंत्रण से बाहर था। यह नहीं कहा जा सकता कि लंबे करियर में वे अपना प्रदर्शन बरकरार रखते। स्टडी में खिलाड़ियों को दोनों विभागों के अलग-अलग पैमानों और उनके संयोजन पर प्रतिशत के आधार पर रखा गया।

वॉल्यूम श्रेणी में सभी 3281 टेस्ट क्रिकेटरों के संदर्भ में रन और विकेट के प्रतिशत लिए गए। सचिन तेंदुलकर 15921 रन और मुथैया मुरलीधरन 800 विकेट के साथ अपने-अपने चार्ट में शीर्ष पर हैं। कैलिस चौथे सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं; उनका रन प्रतिशत 83.47 और विकेट प्रतिशत 36.5 है। उनके 292 विकेट हैं। इस दोहरे प्रदर्शन की वजह से वे इस सूची में शीर्ष पर हैं।

रिपोर्ट कहती है कि केवल बल्लेबाजी और गेंदबाजी औसत का अंतर देखना पर्याप्त नहीं है। सच्चा ऑलराउंडर अपने मुख्य विभाग के दम पर अधिकांश टीमों में जगह बनाता है। फिर दूसरे विभाग का असर और दोनों कौशलों का संयुक्त प्रभाव अहम होता है। यह स्टडी दो भागों में है; दूसरे भाग में आगे की व्याख्या और निष्कर्ष बताए जाएंगे।

स्रोत: Cricbuzz

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