सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जमानत मिलने के बाद सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखा है। पोस्ट में उन्होंने उस दिन का जिक्र किया है, जब उन्होंने अमेरिका से भारत लौटकर प्रदर्शनों का नेतृत्व करने का फैसला किया था। दीपके ने कहा कि उस दिन उन्हें पता था कि उनका जीवन हमेशा के लिए बदल जाएगा।

उन्होंने लिखा कि उन्हें कई चीजें छोड़नी पड़ेंगी। कुछ ऐसी बातें भी होंगी, जिन्हें लोग कभी नहीं जानेंगे और जिन पर वह खुद कभी बात नहीं करेंगे। दीपके ने यह भी कहा कि जेल जाना उनके लिए अपरिहार्य था।

अपने परिवार का जिक्र करते हुए दीपके ने कहा कि उन्हें पता था कि परिवार को किन हालातों से गुजरना पड़ेगा। उन्होंने इसे हर दिन परेशान करने वाली बात बताया। उनके मुताबिक, जिस मिशन की जिम्मेदारी वह ले रहे हैं, वह आसान नहीं है। यह भी तय नहीं था कि लक्ष्य हासिल होगा या नहीं।

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दीपके ने साफ किया कि एक बात वह जानते थे—चाहे कुछ भी हो, उन्हें कोशिश करनी ही होगी। यह कोशिश अपने देश और अपने लोगों के लिए थी। उन्होंने कहा कि सामने जो भी आए, वह उसका सामना करने को तैयार हैं।

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जमानत की शर्तें

तिरंगा मार्च के दौरान हिरासत में लिए जाने और निवारक गिरफ्तारी के बाद अभिजीत दीपके को शर्तों के साथ जमानत मिली है। शर्तों में एक वर्ष तक शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने में सहयोग करना शामिल है। हिंसक घटनाओं में शामिल न होने और अनधिकृत सभा न करने की भी शर्त है।

दीपके ने अपनी पोस्ट में कहा कि भारत लौटने के दिन उन्होंने अपनी किस्मत देश के लोगों और संविधान के हाथ में सौंप दी थी। यह बयान उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए दिया।

जेल में बंद साथियों का जिक्र

इस बीच, जंतर-मंतर पर अतिक्रमण करने के आरोप में गिरफ्तार सीजेपी नेता सौरव दास और अशुतोष रंका जुडिशियल कस्टडी में हैं। दीपके ने दोनों की तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा कि जेल में बंद उनके भाई बाहर आने का इंतजार कर रहे हैं।

दीपके की यह पोस्ट जमानत मिलने के तुरंत बाद सामने आई है। उन्होंने इसमें अपने फैसले, परिवार पर पड़े असर और देश के लिए काम करने की अपनी मंशा का जिक्र किया है।

स्रोत: Media One

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