एलन मस्क और मुकेश अंबानी के बीच विवाद अब सोशल मीडिया से लेकर भारत के दूरसंचार बाजार तक चर्चा का विषय बन गया है। स्पेसएक्स के प्रमुख मस्क भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा Starlink शुरू करना चाहते हैं, लेकिन कंपनी की व्यावसायिक सेवाएं अभी शुरू नहीं हुई हैं। इसी देरी को लेकर मस्क ने भारतीय बाजार में प्रभावशाली कारोबारी समूहों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

8 अक्टूबर को मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सवाल किया कि क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं। इसके बाद 9 अक्टूबर को उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में मुकेश अंबानी को ‘डियर प्राइम मिनिस्टर अंबानी’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा कारोबारी व्यवस्था स्टारलिंक को प्रतिस्पर्धा करने से रोकना चाहती है। हालांकि, मस्क ने अपने आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है।

‘डियर प्राइम मिनिस्टर अंबानी’ कहकर क्या बोले एलन मस्क?

मस्क ने अपनी पोस्ट में व्यंग्य करते हुए कहा कि उन्हें यह समझने में देर हो गई कि भारत में असली ताकत किसके पास है। उन्होंने अंबानी से स्टारलिंक को प्रतिस्पर्धा करने देने की अपील भी की।

मस्क का तर्क है कि भारत के कई इलाकों में अभी भी विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं है। उनके मुताबिक, स्टारलिंक दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंचाने, बच्चों की शिक्षा और छोटे कारोबारों को वैश्विक बाजार से जोड़ने में मदद कर सकता है।

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मस्क की नाराजगी का मुख्य कारण यह है कि कंपनी लंबे समय से भारत में सेवाएं शुरू करने की कोशिश कर रही है, लेकिन अभी तक व्यावसायिक लॉन्च का रास्ता पूरी तरह साफ नहीं हुआ है। उन्होंने इस देरी को प्रभावशाली कारोबारी समूहों के हितों से जोड़कर देखा है। यह मस्क का आरोप है, स्थापित तथ्य नहीं।

भारत सरकार ने क्या जवाब दिया?

मस्क के आरोपों पर भारत सरकार ने कहा कि देश में सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए नियामकीय व्यवस्था निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण है। संचार मंत्रालय के अनुसार, स्टारलिंक सहित तीन कंपनियां सुरक्षा संबंधी जांच की प्रक्रिया से गुजर रही हैं।

इन कंपनियों में शामिल हैं:

Starlink: एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा।

Jio Satellite Communications: रिलायंस जियो से जुड़ी सैटेलाइट संचार कंपनी।

Eutelsat OneWeb: भारती समूह से जुड़ी सैटेलाइट संचार सेवा।

सरकार के मुताबिक, इन कंपनियों को व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने से पहले जरूरी सुरक्षा शर्तें पूरी करनी होंगी। सुरक्षा आकलन पूरा होने के बाद स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़ी अगली प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

सरकार ने यह भी कहा कि तीनों कंपनियां मोटे तौर पर नियामकीय प्रक्रिया के समान चरण में हैं। इसलिए स्टारलिंक के साथ भेदभाव किए जाने का आरोप सही नहीं है।

क्या मुकेश अंबानी स्टारलिंक की राह में बाधा हैं?

यही इस पूरे विवाद का सबसे अहम सवाल है। भारत में रिलायंस जियो दूरसंचार बाजार की प्रमुख कंपनियों में शामिल है। स्टारलिंक की एंट्री से सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, खासकर उन इलाकों में जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क या ब्रॉडबैंड की पहुंच सीमित है।

रिलायंस जियो और भारती एयरटेल दोनों ने 2025 में स्टारलिंक की सेवाओं और उपकरणों को भारत में उपलब्ध कराने के लिए समझौते किए थे। ये समझौते सरकारी मंजूरी और नियामकीय शर्तें पूरी होने पर निर्भर हैं। इससे साफ है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा के साथ कारोबारी सहयोग की स्थिति भी मौजूद है।

मस्क के आरोपों के बावजूद अब तक ऐसा कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि मुकेश अंबानी या रिलायंस ने स्टारलिंक की मंजूरी रुकवाई है। फिलहाल सरकार ने देरी की वजह सुरक्षा जांच और नियामकीय प्रक्रिया को बताया है।

राहुल गांधी भी विवाद में कूदे

स्टारलिंक की भारत में एंट्री को लेकर शुरू हुई बहस में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की प्रतिक्रिया भी सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार, राहुल गांधी ने मस्क की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय बाजार में प्रभावशाली कारोबारी समूहों की भूमिका पर तंज कसा। इसके जवाब में मस्क ने राहुल गांधी को धन्यवाद दिया और चिंता जताई।

इस घटनाक्रम ने कारोबारी प्रतिस्पर्धा को राजनीतिक बहस का रूप दे दिया है। हालांकि, स्टारलिंक की मंजूरी में देरी का वास्तविक कारण सुरक्षा संबंधी जांच और अन्य नियामकीय प्रक्रियाओं से जुड़ा है या इसके पीछे दूसरे कारोबारी हित भी हैं, इस पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए स्वतंत्र प्रमाण जरूरी हैं।

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