पटना: तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया है। बिहार का 'महामुकाबला' इस बार दो चरणों में, बिहार के सबसे बड़े पर्व छठ के ठीक बाद, 6 नवंबर और 11 नवंबर को होगा। प्रदेश की नई सरकार का फैसला 14 नवंबर को मतगणना के साथ होगा। इस घोषणा के साथ ही पूरे राज्य में तत्काल प्रभाव से आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है, और सत्ता की बागडोर अब चुनाव आयोग के हाथों में आ गई है।READ ALSO:-यूपी में बेमौसम 'आफत' की बारिश: मानसून गया पर छोड़ा 'आफ्टर इफेक्ट', 24 घंटे में 277% ज्यादा पानी बरसा, आज भी 17 जिलों में अलर्ट
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चुनाव का पूरा कार्यक्रम: एक नजर में
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    छठ महापर्व: 25 से 28 अक्टूबर, 2025
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    पहला चरण (मतदान): 6 नवंबर, 2025
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    दूसरा चरण (मतदान): 11 नवंबर, 2025
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    मतगणना (नतीजे): 14 नवंबर, 2025
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आचार संहिता लागू: अब इन 10 बातों पर रहेगी पाबंदी
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    नई घोषणाएं बंद: सरकार किसी भी नई योजना, परियोजना या वित्तीय मदद का ऐलान नहीं कर सकती।
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    सरकारी भर्तियां रुकीं: किसी भी विभाग में नई नियुक्ति की प्रक्रिया पर रोक।
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    सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल नहीं: सत्ताधारी दल प्रचार के लिए सरकारी गाड़ियों, इमारतों या संसाधनों का उपयोग नहीं कर सकता।
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    मंत्रियों के अधिकार सीमित: मंत्री अपने आधिकारिक दौरों को चुनाव प्रचार से नहीं जोड़ सकते।
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    नफरती भाषणों पर नजर: धर्म, जाति या भाषा के आधार पर भड़काऊ बयान देना प्रतिबंधित है।
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    रैली/जुलूस के लिए अनुमति अनिवार्य: किसी भी सभा के लिए पुलिस से पूर्व अनुमति जरूरी।
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    48 घंटे पहले प्रचार बंद: वोटिंग खत्म होने से 48 घंटे पहले हर तरह का प्रचार रुक जाएगा।
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    बूथ के पास प्रचार नहीं: मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में प्रचार सामग्री प्रतिबंधित।
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    वोट के लिए रिश्वत अपराध: वोटरों को नकद, शराब या कोई भी प्रलोभन देना दंडनीय अपराध है।
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    निजी संपत्ति पर सहमति जरूरी: किसी के घर या दीवार पर बिना सहमति के पोस्टर-बैनर नहीं लगाए जा सकते।
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कौन बनेगा किंगमेकर? 7.42 करोड़ वोटरों का पूरा हिसाब
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इस चुनाव में 7.42 करोड़ मतदाता बिहार का भविष्य तय करेंगे, जिनके समीकरण बेहद दिलचस्प हैं:
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    युवा वोटर: 14 लाख युवा पहली बार वोट डालेंगे। रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों पर केंद्रित यह वर्ग किसी भी पार्टी का खेल बना या बिगाड़ सकता है।
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    जातिगत समीकरण (सत्ता की चाबी):
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      बिहार की राजनीति में सबसे निर्णायक OBC (27.12%) और EBC (36.01%) आबादी है, जो मिलकर 63% का विशाल वोट बैंक बनाते हैं।
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      RJD का कोर M-Y (मुस्लिम-यादव) समीकरण 30% से अधिक वोटों पर प्रभाव रखता है।
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      JDU की नजर EBC और कुर्मी-कोईरी वोटों पर है, तो वहीं BJP सवर्णों के साथ गैर-यादव OBC और EBC वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश करेगी।
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चुनाव आयोग की रणनीति और 2020 का सबक
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छठ के बाद 2 चरणों में चुनाव क्यों? चुनाव आयोग ने बिहार के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने का सम्मान करते हुए छठ महापर्व के बाद चुनाव की तारीखें तय की हैं। इसके अलावा, दो चरणों में चुनाव कराने से सुरक्षा बलों की तैनाती प्रभावी ढंग से होती है और प्रशासनिक मशीनरी पर भी दबाव कम होता है।
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14 नवंबर: नतीजों का दिन और 2020 का अनुभव 2020 के चुनाव में मुकाबला इतना कड़ा था कि नतीजे देर रात तक साफ हुए थे। इस बार ऐसी स्थिति से बचने के लिए चुनाव आयोग ने मतगणना केंद्रों पर त्रि-स्तरीय सुरक्षा, हर बूथ की वेबकास्टिंग, और डाक मतपत्रों की गिनती पहले पूरी करने जैसे कड़े इंतजाम किए हैं। हर विधानसभा में तैनात 'जनरल ऑब्जर्वर' यह सुनिश्चित करेगा कि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो।
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