फ्रांस में महंगाई, वेतन और पेंशन से जुड़े मुद्दों तथा सरकारी सेवाओं की बदहाली के खिलाफ शनिवार, 17 अक्टूबर को देशभर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। राजधानी पेरिस समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। कई जगह गाड़ियों और इमारतों में आग लगा दी गई, जबकि दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं भी सामने आईं। मध्य फ्रांस के लिमोज शहर में नकाबपोश प्रदर्शनकारियों के हमले के बाद ऐतिहासिक टाउन हॉल में आग लग गई। आग से 143 साल पुरानी इमारत को भारी नुकसान पहुंचा और उसका बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया।

रॉयटर्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शनिवार को फ्रांस के अलग-अलग शहरों में लाखों लोग सड़कों पर उतरे। शांतिपूर्ण मार्च के बीच कुछ स्थानों पर हिंसा भड़क गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और अन्य बल प्रयोग किया। रविवार सुबह तक आई रिपोर्टों में 1,200 से अधिक गिरफ्तारियों का जिक्र किया गया। गिरफ्तारियों और घायलों के आंकड़ों में अलग-अलग रिपोर्टों के बीच अंतर है।

स्कूली छात्रों के प्रदर्शन से शुरू हुआ आंदोलन

फ्रांस में मौजूदा आंदोलन की शुरुआत सितंबर में स्कूली छात्रों के विरोध प्रदर्शन से हुई थी। छात्र स्कूलों में शिक्षकों की कमी, कक्षाओं में बढ़ती भीड़, जर्जर इमारतों और जरूरी शैक्षणिक संसाधनों की कमी को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। छात्रों का कहना था कि पर्याप्त शिक्षक और सुविधाएं नहीं मिलने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

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शुरुआत में कुछ स्कूलों तक सीमित रहा विरोध धीरे-धीरे दूसरे शहरों में फैल गया। छात्रों ने स्कूलों के प्रवेश द्वार बंद किए और सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। आंदोलन के विस्तार के साथ शिक्षक, अभिभावक, छात्र संगठन और ट्रेड यूनियन भी इसमें शामिल हो गए। बाद में महंगाई, क्रय शक्ति, वेतन, पेंशन और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति जैसे मुद्दे भी आंदोलन का हिस्सा बन गए।

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410 स्कूलों तक पहुंचा विरोध, हजारों गिरफ्तार

अक्टूबर के पहले सप्ताह में फ्रांस के सैकड़ों स्कूलों में प्रदर्शन और बंदी की स्थिति बनी थी। यूरोन्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, एक समय 400 से 500 माध्यमिक स्कूलों के पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद रहने की आशंका जताई गई थी। अलग-अलग तारीखों पर स्कूलों की संख्या बदलती रही।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच कई जगह झड़पें हुईं। फ्रांस के न्याय मंत्रालय ने 5 अक्टूबर को जारी बयान में कहा था कि छात्र आंदोलन के दौरान कई शहरों में गंभीर हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं हुई हैं। सरकार ने हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज करने की बात कही थी।

17 अक्टूबर को हुए देशव्यापी प्रदर्शनों के बाद गिरफ्तारियों की संख्या और बढ़ गई। रॉयटर्स की रिपोर्ट में 1,200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई। हालांकि, यह आंकड़ा आंदोलन शुरू होने के बाद से कुल गिरफ्तारियों का है या शनिवार की कार्रवाई का, इसे रिपोर्टों के संदर्भ में अलग-अलग समझना जरूरी है।

लिमोज में नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने टाउन हॉल में लगाई आग

फ्रांस के लिमोज शहर में प्रदर्शन के दौरान ऐतिहासिक टाउन हॉल को निशाना बनाया गया। अधिकारियों के अनुसार, आग लगने के बाद इमारत की छत ढह गई और आग ने भवन के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। यह इमारत शहर की ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा थी।

यूरोन्यूज की 17 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, आग से इमारत की छत निचली मंजिलों पर गिर गई और बाहरी हिस्से का लगभग दो-तिहाई भाग नष्ट हो गया था। बाद की रिपोर्टों में इमारत को भारी नुकसान पहुंचने और उसके बड़े हिस्से के नष्ट होने की जानकारी सामने आई। आग लगने के कारणों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका को लेकर जांच की जा रही है।

पेरिस में राष्ट्रपति भवन के पास झड़पें, गाड़ियों में आग

राजधानी पेरिस में भी प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई। राष्ट्रपति भवन के आसपास और शहर के अन्य हिस्सों में पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबरें आईं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर वस्तुएं फेंकीं, जबकि कई जगह आगजनी, दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं हुईं।

पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। हिंसा के दौरान पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई। देश के अन्य शहरों में भी सरकारी इमारतों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। हालांकि, सभी प्रदर्शन हिंसक नहीं थे। बड़ी संख्या में लोगों ने शांतिपूर्ण मार्च के जरिए अपनी मांगें रखीं।

प्रदर्शनकारियों की चार प्रमुख मांगें

आंदोलन में शामिल छात्र संगठनों, मजदूर समूहों और अन्य प्रदर्शनकारियों की मांगें अलग-अलग स्थानों पर अलग हो सकती हैं, लेकिन मुख्य मुद्दे ये हैं:

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